2 Nov 2019

इश्क़ को सजदा।

Shayari

इश्क़ को सजदा।

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क्या सही है?
क्या गलत है?
हमें कुछ भी फर्क नहीं पड़ता।
हम तो चले थे कल
इश्क के अम्बर में घर बनाने।
एक छोटा सा प्यार का घोसला बना
अपने जिंदगानी को संवारने।

हमें क्या पता था?
इतने घनघोर अंधेरे
हमारे आस पास फैले हुए हैं।
राक्षस हमारे आशियाने को
तोड़ने को आतुर खड़े हैं।
पर हम नहीं मानते इन भटके हुओं को
अपना कोई दुश्मन।
ये अभागे बेचारे
अछूते रह गए हैं
मोहब्बत के साये से।

आज इनकी नफरत के आग को
हम अपनी मोहब्बत के बरसात से शांत कर देंगे।
हम इन्हें भी अपनी तरह
इश्क़ को सजदा करना सिखा देंगे।


Written by sushil kumar

Shayari

1 Nov 2019

बेपनाह मोहब्बत।

Shayari।

बेपनाह मोहब्बत।

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तुझसे बेपनाह मोहब्बत जो करता हूँ
तू रहे कहीं भी
तेरे मौजूदगी को सुनता हूँ।

मैं साँस ले रहा हूँ
आज जो यहाँ पर।
तेरा दिल जो धड़क रहा है
आज इस जहाँ में।

मेरे जीवन की पतंग
तेरे साँसों से जुड़ी है।
तू जो वहाँ हँसी है
मेरा हृदय खिल उठा है।

कभी भी तू नैनो से अपने
अश्रु ना बहाना।
मेरा दिल कहीं बैठ ना जाए
तेरे सिसकियों के आहट से।


Written by sushil kumar
Shayari

30 Oct 2019

मेरा साथ निभाना साथिया।

Shayari

मेरा साथ निभाना

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मेरी शायरी समझ में नहीं आए
तो भी उसे पढ़ लेना।
अगर जो पसन्द ना आए
तो भी जरा वाह वाह कर देना।

मालूम है मुझे
कोई बकवास फ़िल्म देखने के बाद
ताली तो नहीं बजती
पर हाँ!
गाली जरूर निकल जाती है।

तुम गाली दोगे
तो भी चलेगा।
पर आगे एक मौका ज़रूर देना।
और मेरा साथ निभाते रहना।

मैं जो हूँ
शायरी के संसार में
एक छोटा सा अंकुरित हुआ बिज हूँ।
जो अपनी अस्तित्व के लिए
दुनिया से लड़ रहा है।
मैं संघर्ष करूँगा।
जरूर करूँगा।
और आपके लिए
एक शानदार शायरी लेकर
आपके सामने
जरूर प्रस्तुत हूँगा।

क्योंकि मुझे विश्वास है
आप मेरा साथ नहीं छोड़ेंगे।
मेरे शब्दों के भाव को समझेंगे
और मुझसे सदा जुड़े रहेंगे।

क्योंकि मैं और कोई नहीं।
आप ही में से एक हूँ।
मुझसे प्यार भी आप ही करेंगे
और मेरे आलोचक भी आप ही बनेंगे।
पर मेरा साथ नहीं छोड़ेंगे।
मेरा साथ नहीं छोड़ेंगे।

Written by sushil kumar
Shayari

28 Oct 2019

माँ बाप कभी नहीं बदलते हैं।

Shayari

माँ बाप कभी नहीं बदलते हैं।

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रिश्तों में दरारें आ जाती हैं
रिश्तों को संवारने में।
माँ बाप बेटे से दूर हो जाते हैं
बहु को बेटे से करीब लाने में।

पतंग जिसे बुलन्दी की ऊँचाइयों को छुआया है
आज किसी और को
उसकी बागडोर थमा
माँ बाप आगे चले जाते हैं।

पर आज भी वो
अपने लाडले के लिए
रब से उसकी खुशियों के लिए
गुहार लगाते ही रहते हैं।

भले दुनिया इधर से उधर हो जाए
पर माँ बाप
अपने बच्चे के लिए
अपना दिल का द्वार
सदा खुला रखते हैं।

Written by sushil kumar
Shayari

25 Oct 2019

बेवफा:-मन से भले निकाल दिया है तुझे कब से।

Shayari

बेवफा:-मन से भले निकाल दिया है

तुझे कब से।

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मन से भले निकाल दिया है
तुझे कब से।
पर दिल को अभी भी कुछ उम्मीद बाकी है।
एक छोटी सी खुफिया जगह छुपाकर दुनिया से
ना जाने से कब से बचाकर रखी है।

मुसाफिर बहुत आए
और चले गएँ।
कुछ तो किराए पर चाहे
लेने को मेरा आशियाना।
पर कहाँ मान रहा था
मेरा दिल ये दीवाना।

बेवफा से वफ़ा की जो
लौ जगाकर रखी है।
दिल तो बड़ा ही पागल है
कहाँ किसी की सुनता है।
अभी भी एक आस
दिल ने जगाकर रखी है।
मेरा बेवफा मेहबूब
भूले भटके
कहीं वापस
मेरे घोसले पर ना आ जाए।


Written by sushil kumar
Shayari

इश्क करने का समय नहीं होता है।

Shayari

इश्क करने का समय नहीं होता है।

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बचपन की दहलीज पार कर
जो जवानी में कदम थी रखी।
हर सुंदर स्त्री को देख
मेरे दिल में मची थी खलबली।

कभी कभी तो मेरे नैन भी
कुछ ज्यादा ही हो जाते थे अश्लील।
अपने से अधेड़ उम्र की औरत को देख
हृदय भी दे जाती थी दलील।

मोहब्बत उम्र देख कर कहाँ होती है?
मोहब्बत तो बस हो जाती है।

भले वो सभी को बदसूरत दिखती हो
पर अगर वो मेरे दिलोदिमाग पर छा जाए।
और मेरा इश्क सर चढ़कर बोले
तो फिर कौन सा गुनाह मैने किया।

पूरा माहौल ही उस वक़्त
इश्क नुमा सा प्रतीत होने लगता था।
वो नदी का सागर में विलय होने में भी
एक शायरी लफ्ज बनकर मुँह से निकल पड़ता है।

सच में वो समय लाजवाब होता है।

Written by sushil kumar

Shayari

इश्क़ में हम सदा देते हैं,लेते नहीं हैं।

Shayari

इश्क़ में हम सदा देते हैं,लेते नहीं हैं।

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आप जो पसन्द करते हो किसी को
तो आप उनके पसन्द का भी सम्मान करो।
वो किसी की जागीर नहीं
जो आज पसन्द आया तो खरीद लिया
और कल जो नापसन्द आई तो
किसी ओर के नाम किया।

Written by Sushil Kumar

Shayari


तेरे हक का है तो छीन लो।

Shayari तेरे हक का है तो छीन लो। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। अपने हक के लिए तुम्हें आवाज खुद उठाना होगा। आए...