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14 Jun 2019

लत किसी भी चीज़ की हो,हमेशा जानलेवा ही होती है।

लत किसी भी चीज़ की हो,हमेशा जानलेवा ही होती है।

Adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


रमेश की मौत की खबर सुनकर उसका सारा परिवार दुख की भौसागर में डूबता ही चला जा रहा था।
आखिर उसकी सास ने अपनी ही बेटी के घर बार को क्यों उजाड़ दिया?ऐसा क्या हुआ था कि उन्हें अपने ही दामाद को मौत के घाट उतारना पड़ा?ऐसे ही बहुत सारे सवाल सभी के दिमाग में घूम रहे थे।

अब आते हैं रमेश पर।रमेश बचपन में बड़ा होनहार बच्चा हुआ करता था।पर गलत संगति में पड़कर,उसकी लत खराब हो गई थी।उसे पोर्न देखने का चस्का लग चुका था।हर स्त्री को बुरी नजर से देखता था।स्कूल बस में भीड़ का सहारा लेकर किसी लड़की की अंगों को छूना, और क्लास में टीचर को भी गलत नज़र से देखना,अपने पड़ोस में रहने वाली लड़कियों के बाथरूम में झांकना और ना जाने क्या क्या।
जब भी मौका मिलता तो पोर्न देखते रहना,कभी किताब के बीच में मोबाइल फ़ोन रखकर पोर्न देखना,और दिखाना अपने माँ बाप को कि वह पढ़ाई कर रहा है।कभी घण्टो गायब रहना और अपने बुरी लत से स्वयं को संतृप्ति पहुँचाने की कोशिश करते रहना।

अपने चचेरी बहनों के भी अंगों को मजाक मजाक में स्पर्श करना।और कुछ वैसे खेल खेलना कि जिससे उसे संतृप्ति मिल सके।वो क्या करता था कि कोई भी छोटा सा समान जैसे रब्बर इत्यादि लेता था और कहता था चलो छुपाओ और ढूंढो वाला खेल खेलते हैं।इस खेल में समान को कोई छुपाएगा और अगला ढूंढेगा।अगर मिल गया तब तो ठीक है,वरना जीतने वाला हारने वाले से कोई भी काम करवा सकता है।
इस खेल के बहाने वो अपने लत को संतृप्त किया करता था।वो उस छोटे से समान को अपने चड्डी में छिपाया करता था।पर जब उसकी चचेरी बहन ढूंढ ढूंढ कर परेशान हो जाया करती थी तब वह अपने चड्डी में हाथ डाल निकाल दिया करता था।और फिर उनके अंगों को देखने को उनसे वस्त्र उतारने को कहता था।और उनसे अपने अंगों को छुआया करता था।

चचेरी बहनो को इस खेल में मज़ा आ रहा था क्योंकि वे भी अभी छोटी थी।पर एक बार चाची ने उन्हें रंगो हाथ पकड़ लिया और फिर क्या सारा घर को सर पर उठा लिया।रमेश के माँ और पिता ने उनके ही बच्चों को दोषी ठहराया और रमेश बच गया।

रमेश बड़ा हुआ तो अपने पिता के धंधे में लग गया क्योंकि पढ़ाई उससे हुई ही नहीं।कभी कभी वह रात में देर से लौटा करता था।और रेड लाइट एरिया में जाया करता था।और घर पर दुकान में काम बहुत ज्यादा होने का बहाना बनाया करता था।
रमेश के माँ बाप को अपने बेटे पर शक हुआ।उन्होंने उसकी जासूसी करनी शुरू की।और जो पाया उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।उन्होंने अपने बेटे की शादी करवाने की ठानी।और फिर धूम धाम से उसकी शादी सेठ रमणिकलाल की बेटी सुगंधा से करवाई,ताकि उसकी आदत में सुधार आ सके।

रमेश अपनी पत्नी को केवल और केवल अपनी भूख मिटाने का समान समझता था।अक्सर उसे भी पोर्न दिखाकर उसी अवस्था मे सेक्स करने को कहता था।सुगंधा अपने पति के बर्ताव से परेशान ही चुकी थी।
तभी सुगंधा के घर पर उसकी छोटी बहन फूलो की सगाई थी,और इस अवसर पर रमेश को भी उसके ससुराल से सगाई पर आने का न्योता मिला था।

सगाई का कार्यक्रम खत्म होने के बाद सभी सो रहे थे।सुगंधा रमेश के साथ नीचे के ऐसी वाले कमरे में सोई हुई थी।उनके बगल में सुगंधा की माँ अकेले एक कमरे में सोई हुई थी।और फूलों अपने कमरे में विश्राम कर रही थी।रमणिकलाल जी छत पे अपने कमरे में आए हुए अतिथिगणों के संग विश्राम कर रहे थे।

तभी बीच रात में सुगंधा की छोटी बहन फूलो की चिल्लाने की आवाज़ आई।उसकी माँ जब कमरे में पहुँचती है,किसी  मर्द को उसे दबोचते हुए देख उसके होश हवास उड़ जाते हैं,और उसे कुछ भी ना समझ में आने के कारण,किनारे पड़े लोहे की रॉड से उसके सर पर वार कर देती है।
सर पर चोट खाकर वह फूलो पर ही गिर पड़ता है।और जब फूलो उसे अपने ऊपर से दूर धकेलती है,सुगंधा की माँ उसकी शक्ल देख सदमे में पड़ जाती है।ये और कोई नही उसका दमाद था।

Written by sushil Kumar

4 Jun 2019

फेसबुक फ्रेंड।।

फेसबुक फ्रेंड।।

Adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



(फेसबुक चैट)

हे नीना!
कहाँ थी?
बहुत दिनों के बाद दिख रही हो?

ह्म्म्म सन्नी
कुछ नहीं,एग्जाम चल रहे थे।
आज ही पेपर खत्म हुए।

गुड!
कैसा रहा तुम्हारा पेपर?

अच्छा रहा।
तुम बताओ
क्या चल रहा है आजकल।

अरे यार
पक गया हूँ।
रोज का वही लेक्चर्स।
सुबह से शाम तक थक जाता हूँ।
सुनते सुनते।

तुम सन्नी अभी कौन से सेमेस्टर में हो?

अरे बताया था ना।
दूसरा सेमेस्टर।

हूँ हूँ

चलो तुम्हारा पेपर भी अच्छा गया।
क्यों ना कहीं वीकेंड पर मिल कर सेलिब्रेट करते हैं।
वैसे भी बहुत ही ज्यादा मेरे लाइफ में बोरियत भर गई है।

हाँ हाँ।
पर कहाँ?

क्यों ना गोआ चले हमलोग।

सही है।चलते हैं।बड़ा मजा आएगा।

ओके नीना!
तो इस वीकेंड गोआ में धमाल मचाएँगे।
हे हे।

यस ! यस !यस !

ये जो फेसबुक पर इनकी चैट देखी आपने।ऐसी चैट से भरी पड़ी है आज के सोशल नेटवर्किंग साइट्स।लोग फेसबुक जैसे साइट्स से दोस्ती करते हैं,और दोस्ती की सीमाएँ लाँघने को क्या से क्या कर बैठते हैं।

अब नीना जो मैट्रिक की एग्जाम दी है,और उसके दोस्तों के बॉय फ्रेंड हैं।पर उसके घर पर अच्छे संस्कार मिलने के चलते कभी उसे इन सब चीजों की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।पर जब उसके एग्जाम खत्म हो गएँ और सन्नी ने घूमने का आफर रखा,तब वह खुश हो गई।क्योंकि कड़ी मेहनत करके वह थक चुकी थी।और वो भी अपने जीवन में रिफ्रेशमेंट चाहती थी।पर जब उसने अपने पेरेंट्स से गोआ घूमने जाने की बात की,वो भी फेसबुक फ्रेंड के साथ,तो उसके पेरेंट्स गुस्सा हो गएँ।और गोआ घुमाने को वो खुद तैयार हो गएँ

नीना खुश थी, पर जरा अपसेट भी।

फेसबुक चैट।
सन्नी कहाँ हो??

हाँ बोलिए राजकुमारी साहिबा।

काहे का राजकुमारी यार।

क्या हुआ?कुछ अपसेट दिख रही हो।

अरे यार गोआ जाने का प्लान कैंसिल हो गया।

क्या नीना?ऐसा क्यों?
कुछ प्रॉब्लम है क्या?

नहीं मेरे पेरेंट्स मुझे घूमाने ले जाएँगे गोआ।पर तुम्हारे साथ नहीनहीं जाने देंगे।

अरे यार!
अभी भी तू बच्ची की बच्ची रह गई।

क्या बताऊँ यार?
मेरे मॉम डैड मुझे कभी बड़े होने देते ही नहीं हैं।

आज पता चल गया कि मेरी नीना एक बच्ची है।
हूँ हूँ हूँ।

नहीं नहीं नहीं सन्नी।
मैं अभी बच्ची नहीं हूँ।

क्या बताया था अपने मम्मी पापा से।

यही कि मैं तेरे साथ गोआ घूमने जा रही हूँ।

क्या यार।
एकदम बेवकूफ है तू।

क्यों?

चल एक चीज बता,आज तक कभी अपने पेरेंट्स से झूठ बोला है क्या?

नहीं!

फिर तो तू बच्ची की बच्ची ही रह गई ना।
तेरे को चाहिए था,कि कुछ अलग बहाना बना कर अपने घर से निकलती।

जैसे।

क्या यार!
तेरे को बोलना था कि तू तेरी सहेलियों के साथ घूमने जा रही  है गोआ।

नीना को ये बातें उसके दिल को खटकी।
और उसने सन्नी को अपने फ़्रेंडलिस्ट से अनलिस्ट कर ब्लॉक कर दिया।

क्या उसने सन्नी के साथ सही किया।
एक अनजान फेसबुक फ्रेंड जो बहुत ही ज्यादा केयरिंग था।जो हमेशा उसका सपोर्ट करता था।जो बिना किसी शर्त हमेशा उसके साथ खड़ा रहता था।आज जब उसने नीना से उसके माँ बाप के विरुद्ध जाने को कहा,तो क्या गलत कहा।
क्या नीना सही में गलत थी या बिल्कुल सही।

अब आप बताओ?
यहाँ गलत कौन है?
ये आप पर छोड़ा है।
कमेंट करके बताओ ।

Written by sushil kumar



जितनी बार मैं तेरे करीब आया

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