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22 Jun 2019

Kabhi chale the sath sath

Shayari

कभी चले थे साथ साथ।

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कभी चले थे साथ साथ
आज राह बदल गए हैं।
मंजिल बदल गई है
अपना पड़ाव बदल गया है।

कुछ लम्हें वो मीठे पलों के
जो उनके साथ में बिताए थे।
कुछ गुदगुदाने वाले
तो कुछ रुलाने वाले
मैं अपने संग ले आया हूँ।
उन खट्टे मीठे एहसास के क्षणों को
अपने कांख में दबा लाया हूँ।

जो याद आएगी कभी उनकी
कभी अश्रु की धारा जो नहीं रुकेगी।
खोल लूँगा अपनी यादों के पटों को
कुछ देर तो उनकी आघोष में जी लूँगा।
कुछ देर ही सही
पर अपने जीवन के कुछ पल
तो जी लूँगा।

जी लूँगा!
जी लूँगा!
अकेला जी लूँगा!









kabhi chale the saath saath

aaj raah badal gaye hain।

manjil badal gayi hai

apnaa pdaav badal gayaa hai।


kuchh lamhen vo mithe palon ke

jo unke saath men bitaaa the।

kuchh gudagudaane vaale

to kuchh rulaane vaale

main apne sang le aayaa hun।

un khatte mithe ehsaas ke kshnon ko

apne kaankh men dabaa laayaa hun।


jo yaad aaagi kabhi unki

kabhi ashru ki dhaaraa jo nahin rukegi।

khol lungaa apni yaadon ke paton ko

kuchh der to unki aaghosh men ji lungaa।

kuchh der hi sahi

par apne jivan ke kuchh pal

to ji lungaa।


ji lungaa!

ji lungaa!

akelaa ji lungaa!


Written by sushil kumar

Shayari

21 Jun 2019

Rab ka banda.

Shayari

रब का बन्दा।


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जीवन के सफर में
लोग आते हैं।
कुछ देर साथ निभाते हैं
और निकल जाते हैं
अपनी अपनी सफर के
नए पड़ाव पर।

ये आना जाना तो लगा रहता है
जीवन के अंतिम छोर तक।
पर जो दूसरों के जीवन को
सतरंगी खुशियों से रंग दिया हो।
जिसकी अच्छाई ने दूसरों के दिलों में
घर कर गया हो।

जो जाते जाते भी दुनिया से
साथ वालो को गुदगुदा गया हो।
वही है रब का सच्चा बन्दा
जिसे लेने खुद मौला यहाँ आया हो।







jivan ke saphar men

log aate hain।

kuchh der saath nibhaate hain

aur nikal jaate hain

apni apni saphar ke

naye pdaav par।


ye aanaa jaanaa to lagaa rahtaa hai

jivan ke antim chhor tak।

par jo dusron ke jivan ko

satarangi khushiyon se rang diyaa ho।

jiski achchhaai ne dusron ke dilon men

ghar kar gayaa ho।


jo jaate jaate bhi duniyaa se

saath vaalo ko gudagudaa gayaa ho।

vahi hai rab kaa sachchaa bandaa

jise lene khud maulaa yahaan aayaa ho।


Written by sushil kumar

Shayari

Swarth

Shayari

स्वार्थ

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मेरे आवाज़ को दबाने वाले मिले बहुत
पर कोई ना मिला जो दे सके मेरा साथ यहाँ।
बहुत घुटन सी रहती है मेरे जेहन में
मैने बहुतों की मदद की थी उनके बुरे वक्त में।
जिनके साथ खड़ा रहता था हर मुसीबत में
नहीं कहीं दिख रहे हैं आज वो मेरे नज़र में।
आज हर कोई बस अपनी ही बनाने में लगा है
जिसे देखो उसे अपनो के मलबे से
अपने आशियाने को सजाने में लगा है।
नहीं है फिकर आज किसी को किसी की यहाँ पर
बेटा भी आज वसीयत देख
बाप को कन्धे पर अर्थी देने को
आगे बढ़ रहा है।





mere aavaaj ko dabaane vaale mile bahut

par koi naa milaa jo de sake meraa saath yahaan।

bahut ghutan si rahti hai mere jehan men

maine bahuton ki madad ki thi unke bure vakt men।

jinke saath khdaa rahtaa thaa har musibat men

nahin kahin dikh rahe hain aaj vo mere njar men।

aaj har koi bas apni hi banaane men lagaa hai

jise dekho use apno ke malbe se

apne aashiyaane ko sajaane men lagaa hai।

nahin hai phikar aaj kisi ko kisi ki yahaan par

betaa bhi aaj vasiyat dekh

baap ko kandhe par arthi dene ko

aage bdh rahaa hai।



Written by sushil kumar

Shayari

20 Jun 2019

Rishton ki mahfile kya saji.

Shayari

रिश्तों की महफिले क्या सजी

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रिश्तों की महफिले क्या सजी
हमारे मन में गुदगुदी सी हो उठी।
कुछ लफ्ज़ यूँही अपनी बेड़ियाँ तोड़
रिश्तों के बीच में और भी
गरमाहट पैदा करने को निकल पड़ी।
तो कुछ मस्त ठंडी पवन सा झोंका बन
हमारे दिल को ठंडक पहुँचा
एक सुकून पैदा करने लगी।
रिश्ते सदा ऐसे ही होते हैं
भले कितनी भी परेशानी हो
कितनी भी तकलीफ हो
पर वे सदा आपके मन से
आपके दिल से
सारी तकलीफ को छू मंतर कर
आपके अन्दर एक नई स्फूर्ति पैदा करने वाली
और एक नया जान डाल देने वाली होती है।

इसलिए रिश्तों को सदा संजोकर रखे आपलोग।








rishton ki mahaphile kyaa saji

hamaare man men gudagudi si ho uthi।

kuchh laphj yunhi apni bediyaan tod

rishton ke bich men aur bhi

garmaahat paidaa karne ko nikal pdi।

to kuchh mast thandi pavan saa jhonkaa ban

hamaare dil ko thandak pahunchaa

ek sukun paidaa karne lagi।

rishte sadaa aise hi hote hain

bhale kitni bhi pareshaani ho

kitni bhi takliph ho

par ve sadaa aapke man se

aapke dil se

saari takliph ko chhu mantar kar

aapke andar ek nayi sphurti paidaa karne vaali

aur ek nayaa jaan daal dene vaali hoti hai।


esalia rishton ko sadaa sanjokar rakhe aaplog।


Written by sushil kumar

Shayari

6 Jun 2019

Teri kismat tere hath mein hai.

Shayari

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

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मैं चला जा रहा था अकेले,झुंझलाते हुए खुद से।
कभी खुद को समझाते हुए,तो कभी खुद को कोसते हुए।
कुछ कदम जो उठाए थे हमने
सटीक निशाने पर नहीं पड़े थे।
जिंदगी यही तो है
कभी उतार है तो
कभी चढ़ाव है।

अब बीते हुए समय में
कुछ ना पा पाने की झुँझलाहट से
वर्तमान को बर्बाद कर देना
कहाँ तक सही है।
भले पिछली कोशिश नाकामयाब रही हो
पर प्रयास तो भरपूर करी थी हमने।
और आने वाले समय में भी
मैं पूरा दम खम लगाकर देखूँगा
कि कब तक मेरी किस्मत
मुझसे मुँह फेरकर रह सकेगी।

हर परिणाम को जो सहज स्वीकार करना सीख लेता है
वही जीवन में उच्चतम से उच्चतम स्थान पर पहुँच पाता है।
क्योंकि उसे पता है कि
अगली बार वो अपने लक्ष्य को पा ही लेगा।
और अपने समय को बदल लेगा।
और वैसे ही लोग हर परिस्थिति में खुश रह पाते हैं।










main chalaa jaa rahaa thaa akele,jhunjhlaate hua khud se।

kabhi khud ko samjhaate hua,to kabhi khud ko koste hua।

kuchh kadam jo uthaaa the hamne

satik nishaane par nahin pde the।

jindgi yahi to hai

kabhi utaar hai to

kabhi chdhaav hai।


ab bite hua samay men

kuchh naa paa paane ki jhunjhlaahat se

vartmaan ko barbaad kar denaa

kahaan tak sahi hai।

bhale pichhli koshish naakaamyaab rahi ho

par pryaas to bharpur kari thi hamne।

aur aane vaale samay men bhi

main puraa dam kham lagaakar dekhungaa

ki kab tak meri kismat

mujhse munh pherakar rah sakegi।


har parinaam ko jo sahaj svikaar karnaa sikh letaa hai

vahi jivan men uchchatam se uchchatam sthaan par pahunch paataa hai।

kyonki use pataa hai ki

agli baar vo apne lakshy ko paa hi legaa।

aur apne samay ko badal legaa।

aur vaise hi log har paristhiti men khush rah paate hain।



Written by sushil kumar

Shayari

2 Jun 2019

Raam humare sanskar mein hain.

Shayari

राम हमारे संस्कार में हैं।

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Ram rajya
राम हमारे संस्कार में हैं।
राम हमारे विचार में हैं।
राम हमारे रग रग में हैं।
राम विश्व के कण कण में हैं।
फिर कैसे कोई राम का नाम लेने से
हमें कोई वंचित रख सकता है।
Ram rajya

आज जब सारा विश्व
राम के नाम का जाप कर रहा है।
राम के पथ पर चल रहा है।
कोई कैसे मात्र राजनीतिक फायदा के लिए
जय श्री राम उद्घोष करने पर
भारत में चमड़ी उधेड़ने की बात कर रहीं हैं।
मानो हम पाकिस्तान पहुँच गए हों।

Rajniti

लेकिन बहुत हो गया
बहुत सह लिया
राजनीति का
ये गंदा खेल।
अब करेंगे कलयुगी रावण का
फिरसे लंका दहन।
क्योंकि आ गया है
रामराज्य का नीव रखने का
उचित समय।
Ram rajya













raam hamaare sanskaar men hain।

raam hamaare vichaar men hain।

raam hamaare rag rag men hain।

raam vishv ke kan kan men hain।

phir kaise koi raam kaa naam lene se

hamen koi vanchit rakh saktaa hai।



aaj jab saaraa vishv

raam ke naam kaa jaap kar rahaa hai।

raam ke path par chal rahaa hai।

koi kaise maatr raajnitik phaaydaa ke lia

jay shri raam udghosh karne par

bhaarat men chamdi udhedne ki baat kar rahin hain।

maano ham paakistaan pahunch gaye hon।




lekin bahut ho gayaa

bahut sah liyaa

raajniti kaa

ye gandaa khel।

ab karenge kalayugi raavan kaa

phirse lankaa dahan।

kyonki aa gayaa hai

raamraajy kaa niv rakhne kaa

uchit samay।



Written by sushil kumar

Shayari

Swyam ko yun naa halka samajh.

Shayari

स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।

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स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।
अपने अंदर तू आत्मविश्वास रख।
तेरे पास अदम्य शक्ति का है भंडार।
योग कर अपने कुंडली को जगा।
अपने कर्मों से सबका दिल जीत।
कुछ ऐसा कर्म कर कि
सब हो तेरे मीत।

लोग आते हैं
चले जाते हैं।
पर उनमें से
कोई कोई ही याद आते हैं।
सब का हो जिसमे भला।
जिससे किसी का दिल ना हो दुखा।
और जब कोई याद करे
तेरे मरने के बाद।
चेहरे पर दे जाए उसे
छोटी सी मुस्कान।
क्यों ना ऐसा कर्म करें हम इस जहां।
लोगों के दिलों से ना मिटे कभी
इस संसार से हटने के बाद।







svayan ko yun naa halkaa samajh।

apne andar tu aatmavishvaas rakh।

tere paas adamy shakti kaa hai bhandaar।

yog kar apne kundli ko jagaa।

apne karmon se sabkaa dil jit।

kuchh aisaa karm kar ki

sab ho tere mit।


log aate hain

chale jaate hain।

par unmen se

koi koi hi yaad aate hain।

sab kaa ho jisme bhalaa।

jisse kisi kaa dil naa ho dukhaa।

aur jab koi yaad kare

tere marne ke baad।

chehre par de jaaa use

chhoti si muskaan।

kyon naa aisaa karm karen ham es jahaan।

logon ke dilon se naa mite kabhi

es sansaar se hatne ke baad।



Written by sushil kabira

Shayari


29 May 2019

Main abhi thaka nahin.

Shayari

मैं अभी थका नहीं।

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Manzil

मैं अभी थका नहीं।
रूह भी हार माना नहीं।।
माना मंज़िल अभी कहीं बहुत दूर है।
पर हमारा हौसला भी भरपूर है।।
कदम भले लड़खड़ा रहे हो।
साथ वाले कहीं पीछे छूट रहे हों।।
पर मैं अपने लक्ष्य पर डटा रहा।
सदा अडिग रहा वहीं।।
Manzil

धूप क्या!
बारिश क्या!
तूफान ने भी कड़ी चुनौती दी।।
पर कहाँ हटा मैं अभिमन्यु।
मेरी मंज़िल जो मेरे करीब थी।।
लहू लुहान हो चुका था।
शरीर भी छलनी छलनी हो गएँ थे।।
हिम्मत भी साथ छोड़ रही थी।
पर जज़्बा वही सलामत थी।।
Manzil

आँखों में चमक उठी।
जो मंजिल समीप मुझे दिखी।
क्या दर्द?
क्या जख्म?
सारे दुख तकलीफ फिर कहीं खो गएँ।।
मंजिल को पाने के प्रयास में।
मैं अपने ईश्वर को कभी भूला नहीं।।
जिसकी मदद के बिना
कर पाते फतह ये किला नहीं।
Manzil











main abhi thakaa nahin।

ruh bhi haar maanaa nahin।।

maanaa manjil abhi kahin bahut dur hai।

par hamaaraa hauslaa bhi bharpur hai।।

kadam bhale ldakhdaa rahe ho।

saath vaale kahin pichhe chhut rahe hon।।

par main apne lakshy par dataa rahaa।

sadaa adig rahaa vahin।।



dhup kyaa!

baarish kyaa!

tuphaan ne bhi kdi chunauti di।।

par kahaan hataa main abhimanyu।

meri manjil jo mere karib thi।।

lahu luhaan ho chukaa thaa।

sharir bhi chhalni chhalni ho gan the।।

himmat bhi saath chhod rahi thi।

par jjbaa vahi salaamat thi।।



aankhon men chamak uthi।

jo manjil samip mujhe dikhi।

kyaa dard?

kyaa jakhm?

saare dukh takliph phir kahin kho gan।।

manjil ko paane ke pryaas men।

main apne ishvar ko kabhi bhulaa nahin।।

jiski madad ke binaa

kar paate phatah ye kilaa nahin।



Written by sushil kumar

Shayari

28 May 2019

Jis desh ki dharti par janm liya.

Shayari

जिस देश की धरती पर जन्म लिया।

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India
India


जिस देश की धरती पर जन्म लिया।
जिस देश की मिट्टी में लोट-पोट खेला।।
जहाँ पहला पग उठा चलना सीखा।
जहाँ दौड़ लगा जीतना सीखा।।
जहाँ की संस्कृति से संस्कार को जीना सीखा।
जहाँ की नदियों और गायों को भी माँ कहना सीखा।।
जहाँ प्रेम से रिश्तों को सींचा।
जहाँ यार की यारी पर मरना सीखा।।
जहाँ जाति धर्म की राजनीति को नकारना सीखा।
जहाँ भारतीय होने पर गर्वान्वित होना सीखा।।
जहाँ देश की गरिमा के खातिर मरना सीखा।
जहाँ देश के दुश्मनों को चुन चुन कर कूटना सीखा।।
ऐसी पावन धरती को
आज दिल से सलाम हम करते हैं।
जहाँ हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई
स्वयं को भारतीय कहलाने पर अभिमान करते हैं।।
India

जिस देश की गरिमा के खातिर
हमारे वीर जवानों ने अपने लहू से रंग खेला।
क्या हिन्दू
क्या मुस्लिम
क्या सिख
क्या ईसाई
जो खून गिरा था धरती पर
वो एक हिंदुस्तानी का था मेरे भाई।।
बड़ा जोश भर आता था दिल में उस वक़्त।
रग रग में दौड़ जाती थी आक्रोश की तरंग।।
जब कोई वीर हमारा शहीद हो आता था।
लिपट तिरंगे में अपना सदन।।
और स्वयं ही एक हुँकार उठ उठती थी
सभी की दिल से।
जय हिंद कहकर
एक आखिरी सलाम कर जाती थी
उस महावीर योद्धा को।।
जो आज भले ही नहीं हैं हमारे संग में।
पर उनकी सोच और उनका जज़्बा
आज भी हमें राष्ट्रवाद से ओतप्रोत कर जाता है।।
और हमें सही कदम उठाने को
प्रेरित कर जाता है।
और ऐसे ही फिर से मोदी सरकार को बहुमत देकर
हम लाए हैं।।
क्योंकि राष्ट्रप्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं है।
राष्ट्र है,तभी हम हैं!आप हैं!
India

जय हिंद।।
जय भारत।।








jis desh ki dharti par janm liyaa।

jis desh ki mitti men lot-pot khelaa।।

jahaan pahlaa pag uthaa chalnaa sikhaa।

jahaan daud lagaa jitnaa sikhaa।।

jahaan ki sanskriati se sanskaar ko jinaa sikhaa।

jahaan ki nadiyon aur gaayon ko bhi maan kahnaa sikhaa।।

jahaan prem se rishton ko sinchaa।

jahaan yaar ki yaari par marnaa sikhaa।।

jahaan jaati dharm ki raajniti ko nakaarnaa sikhaa।

jahaan bhaartiy hone par garvaanvit honaa sikhaa।।

jahaan desh ki garimaa ke khaatir marnaa sikhaa।

jahaan desh ke dushmnon ko chun chun kar kutnaa sikhaa।।

aisi paavan dharti ko

aaj dil se salaam ham karte hain।

jahaan hindu,muslim,sikh,isaai

svayan ko bhaartiy kahlaane par abhimaan karte hain।।






jis desh ki garimaa ke khaatir

hamaare vir javaanon ne apne lahu se rang khelaa।

kyaa hindu

kyaa muslim

kyaa sikh

kyaa isaai

jo khun giraa thaa dharti par

vo ek hindustaani kaa thaa mere bhaai।।

bdaa josh bhar aataa thaa dil men us vkt।

rag rag men daud jaati thi aakrosh ki tarang।।

jab koi vir hamaaraa shahid ho aataa thaa।

lipat tirange men apnaa sadan।।

aur svayan hi ek hunkaar uth uthti thi

sabhi ki dil se।

jay hind kahakar

ek aakhiri salaam kar jaati thi

us mahaavir yoddhaa ko।।

jo aaj bhale hi nahin hain hamaare sang men।

par unki soch aur unkaa jjbaa

aaj bhi hamen raashtrvaad se otaprot kar jaataa hai।।

aur hamen sahi kadam uthaane ko

prerit kar jaataa hai।

aur aise hi phir se modi sarkaar ko bahumat dekar

ham laaa hain।।

kyonki raashtraprem se bdhakar koi prem nahin hai।

raashtr hai,tabhi ham hain!aap hain!




jay hind।।

jay bhaarat।।

Shayari


26 May 2019

Dil se modi.

Shayari

दिल से मोदी।

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Modi

दिल से मोदी।
मन से मोदी।
सोच से मोदी।
कर्म से मोदी।
विचार से मोदी।
स्वाभिमान से मोदी।
जहाँ देखा
वहाँ बस मोदी ही मोदी।

आज देश का हर कण कण
उसके गुणगान किए बिना
रुक नहीं पा रहा है।
भारत माँ भी
ऐसे वीर को जन्म देकर
खुद पर गौरवान्वित हो
हर्षा रही हैं।

बच्चे बूढ़े और जवान
मोदी की सोच के धारा में समाहित हो
देशहित में
राष्ट्रवाद के महासागर में
मिलती जा रही हैं।
आज हर एक की सोच
राष्ट्रवाद के पथ से हो गुज़रती है।
देश के लिए प्रेम
और देश के लिए कुछ कर गुज़रने का जज़्बा
आज हर दिल में धड़कती है।


भारत माता की जय।
वन्दे मातरम।
जय हिंद।।
जय भारत।।
Modi








dil se modi।

man se modi।

soch se modi।

karm se modi।

vichaar se modi।

svaabhimaan se modi।

jahaan dekhaa

vahaan bas modi hi modi।


aaj desh kaa har kan kan

uske gungaan kia binaa

ruk nahin paa rahaa hai।

bhaarat maan bhi

aise vir ko janm dekar

khud par gaurvaanvit ho

harshaa rahi hain।


bachche budhe aur javaan

modi ki soch ke dhaaraa men samaahit ho

deshahit men

raashtrvaad ke mahaasaagar men

milti jaa rahi hain।

aaj har ek ki soch

raashtrvaad ke path se ho gujrti hai।

desh ke lia prem

aur desh ke lia kuchh kar gujrne kaa jjbaa

aaj har dil men dhdakti hai।



bhaarat maataa ki jay।

vande maataram।

jay hind।।

jay bhaarat।।




Written by sushil kumar

Shayari

24 May 2019

Aap jo kabhi hamse ruth jati ho.

Shayari

आप जो कभी हमसे रूठ जाती हो

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Angry birds


आप जो कभी हमसे रूठ जाती हो
दिल हमारा टूट सा जाता है
शीशे की भाँति चूर चूर सा हो जाता है।
Angry birds

अश्रु!
अश्रु तो मानो सैलाब बन
आँखों से बह पड़ते हैं।
ऐसा आभास होता है
मानो कि किसी ने मेरे दिल को ही
मेरे शरीर से अलग थलग कर दिया हो।
Angry birds

ऐसा आभास होता है
जीतेजी नरक के आग में
किसी ने धकेल दिया हो।
 ना कुछ होशोहवास रहता है
हमारा दिलोदिमाग शिथिल सा पड़ जाता है।
Angry birds

बस लगता है
आपकी यादों में
आपके ख्यालों में खोया रहूँ।
जो नींद जो आ जाती है
ख्वाबों में आपसे रूबरू हो जाता हूँ।
आपसे माफी माँगता हूँ।
और आप हमे माफ़ भी कर देती हो।
Angry birds


खुशी खुशी नींद जब खुलती है
हम टूट से जाते हैं
जब आपको अपने समीप नहीं पाते हैं।
आपको तलाशती हुई
हमारी बेचैन नज़रें
हमें आपके करीब पहुँचा देती है।
हम आपसे रोकर माफी माँगने लगते है।
और आप हमें गले लगा
हमे माफ भी कर देती हैं।
तब जाकर हमारे दिल को शुकुन आता है।
Angry birds











aap jo kabhi hamse ruth jaati ho

dil hamaaraa tut saa jaataa hai

shishe ki bhaanti chur chur saa ho jaataa hai।



ashru!

ashru to maano sailaab ban

aankhon se bah pdte hain।

aisaa aabhaas hotaa hai

maano ki kisi ne mere dil ko hi

mere sharir se alag thalag kar diyaa ho।



aisaa aabhaas hotaa hai

jiteji narak ke aag men

kisi ne dhakel diyaa ho।

 naa kuchh hoshohvaas rahtaa hai

hamaaraa dilodimaag shithil saa pd jaataa hai।



bas lagtaa hai

aapki yaadon men

aapke khyaalon men khoyaa rahun।

jo nind jo aa jaati hai

khvaabon men aapse rubru ho jaataa hun।

aapse maaphi maangtaa hun।

aur aap hame maaf bhi kar deti ho।




khushi khushi nind jab khulti hai

ham tut se jaate hain

jab aapko apne samip nahin paate hain।

aapko talaashti hui

hamaari bechain njren

hamen aapke karib pahunchaa deti hai।

ham aapse rokar maaphi maangne lagte hai।

aur aap hamen gale lagaa

hame maaph bhi kar deti hain।

tab jaakar hamaare dil ko shukun aataa hai।



Written by sushil kumar

Shayari


22 May 2019

Apna kirdaar nibhao.

Shayari

अपना किरदार निभाओ।

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जीवन नहीं
जीवन का किरदार बड़ा होना चाहिए।
जिससे सब का भला हो
वैसे कर्म का आगाज़ बड़ा होना चाहिए।

कीड़े मकौडों की भाँति सभी जी रहे हैं यहाँ।
खाने की पूर्ति को
ना जाने कहाँ कहाँ भटक रहे यहाँ।
जहाँ खाना सुविधापूर्वक मिल जाए।
सारा जीवन उनका
बस वहीं कट गया।

ऐसे कीड़ों जैसे जीना भी क्या है जीना।
मानव योनी पाकर
उसे व्यर्थ में क्यों है खोना।
जीवन छोटा है या बड़ा
ये उम्र की लंबाई से
नहीं नापा जा सकता।
पर जो छोटे जीवन में ही
कोई बड़ा काम कर जाए।
तो उसका जीवन स्वयं ही स्वयं
बड़ा हो जाया करता है।

याद तो होगा ११अगस्त १९०८ का वो दिन
जब हँसते हँसते चढ़ गया था
कोई बालक किसी शूली पर।
उसकी उम्र कुछ  ज्यादा नहीं
बस उन्नीस को छूने को थी।
पर उस नादान परिंदे ने जिद्द पकड़ रखी थी
खुले आसमान में पँख फैला उड़ने की।
भारत की आज़ादी के खातिर
जिसने इतनी बड़ी आहुति दे दी।
आज सारा देश उन्हें नमन कर रहा है
वो कोई और नहीं
हमारे बोस खुदीराम थे।

जाते जाते एक चिंगारी जो
इस क्रांतिकारी ने
दिल में सभी के
जगा गया।
आज़ादी की लौ प्रचंड रूप ले अग्नि का
ज्वाला बन
सभी के हृदय में भभक रहा।
बारूद बन विस्फोट हुआ जो देश में
काँप उठा था दुश्मनो का सीना।
दुम दबा भागे थे अंग्रेज गीदड़ सा
मानो जाग गया हो बब्बर शेर भारत का।

आओ हम सब मिलकर एक प्रण लें आज से
अपने जीवन को अब बड़ा बनाएँगे
उम्र भले
लम्बी रहे ना रहे
पर जब तक जीएँगे
मानवता का उत्थान कराएँगे
Role








jivan nahin

jivan kaa kirdaar bdaa honaa chaahia।

jisse sab kaa bhalaa ho

vaise karm kaa aagaaj bdaa honaa chaahia।


kide makaudon ki bhaanti sabhi ji rahe hain yahaan।

khaane ki purti ko

naa jaane kahaan kahaan bhatak rahe yahaan।

jahaan khaanaa suvidhaapurvak mil jaaa।

saaraa jivan unkaa

bas vahin kat gayaa।


aise kidon jaise jinaa bhi kyaa hai jinaa।

maanav yoni paakar

use vyarth men kyon hai khonaa।

jivan chhotaa hai yaa bdaa

ye umr ki lambaai se

nahin naapaa jaa saktaa।

par jo chhote jivan men hi

koi bdaa kaam kar jaaa।

to uskaa jivan svayan hi svayan

bdaa ho jaayaa kartaa hai।


yaad to hogaa 11agast 1908 kaa vo din

jab hnaste hnaste chdh gayaa thaa

koi baalak kisi shuli par।

uski umr kuchh  jyaadaa nahin

bas unnis ko chhune ko thi।

par us naadaan parinde ne jidd pakd rakhi thi

khule aasmaan men pnakh phailaa udne ki।

bhaarat ki aajaadi ke khaatir

jisne etni bdi aahuti de di।

aaj saaraa desh unhen naman kar rahaa hai

vo koi aur nahin

hamaare bos khudiraam the।


jaate jaate ek chingaari jo

es kraantikaari ne

dil men sabhi ke

jagaa gayaa।

aajaadi ki lau prachand rup le agni kaa

jvaalaa ban

sabhi ke hriaday men bhabhak rahaa।

baarud ban visphot huaa jo desh men

kaanp uthaa thaa dushmno kaa sinaa।

dum dabaa bhaage the angrej gidd saa

maano jaag gayaa ho babbar sher bhaarat kaa।


aao ham sab milakar ek pran len aaj se

apne jivan ko ab bdaa banaaange

umr bhale

lambi rahe naa rahe

par jab tak jiange

maanavtaa kaa utthaan karaaange




Written by sushil kumar

Shayari

13 May 2019

Bahut ho gaya bhai

Shayari

बहुत हो गया भाई

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बहुत हो गया भाई!
जिसे देखो दबाने को लगा है।
हर किसी को बस
अपना गुस्सा हमपर निकालने को लगा है।
कमज़ोर हूँ,
इसका मतलब ये तो नहीं
जिसे देखो अपना तैश हम पर थोपे जा रहा है।
मैं भी इंसान हूँ
मुझे भी गुस्सा होने का हक़ है
मैं किस पर गुस्सा होऊं।
पर क्या कोई है नहीं इस दुनिया में
मेरे गुस्से को झेलने को।
ऐसे में तो
मै अंदर के तनाव से टूटता सा चला जा रहा हूँ।
शीशे सा चकनाचूर अंदर ही अंदर होता सा जा रहा हूँ।
कोई बचाले मुझे इस तनाव से
वरना मैं कहीं डूबता सा जा रहा हूँ।
और कितनी देर झेल पाऊँगा
मुझे नहीं है पता।
अगर ऐसे ही चलता रहा तो
अस्तित्व अपना
खोता सा जा रहा हूँ।







bahut ho gayaa bhaai!

jise dekho dabaane ko lagaa hai।

har kisi ko bas

apnaa gussaa hamapar nikaalne ko lagaa hai।

kamjor hun,

eskaa matalab ye to nahin

jise dekho apnaa taish ham par thope jaa rahaa hai।

main bhi ensaan hun

mujhe bhi gussaa hone kaa hk hai

main kis par gussaa houn।

par kyaa koi hai nahin es duniyaa men

mere gusse ko jhelne ko।

aise men to

mai andar ke tanaav se tuttaa saa chalaa jaa rahaa hun।

shishe saa chaknaachur andar hi andar hotaa saa jaa rahaa hun।

koi bachaale mujhe es tanaav se

varnaa main kahin dubtaa saa jaa rahaa hun।

aur kitni der jhel paaungaa

mujhe nahin hai pataa।

agar aise hi chaltaa rahaa to

astitv apnaa

khotaa saa jaa rahaa hun।



Written by sushil kumar

Shayari

9 May 2019

Har ek friend jaruri hota hai.

Shayari

हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है।

kavitadilse. top द्वारा आप सभी दोस्तों को समर्पित है।


मैं बवंडर रोक खड़ा था मन में
भावों के सैलाब लिए।
जिसे मैंने चाहा था
छोड़ गई थी मुझे
किसी ओर के लिए।
दिल टूटा
सब छूटा।
चाहा जग छोड़ दूँ उसके लिए।
अब जी के भी क्या फायदा
जब वो ही नहीं है
जिसके संग सोचा था
जीने के लिए।

तभी किसी ने रखा हाथ मेरे कन्धे पर
लगा कोई अपना
उसके स्पर्श से।
जो मुड़ा तो पाया अपने दोस्त को
जिसने साथ दिया था
मेरे हर मंजिल
हर मोड़ पर।
मैं रोक ना पाया अपने भावों के बवंडर को
और रखा अपना सर उसके कन्धे पर।
बह निकले थे
मेरे अश्रु बांध तोड़कर
ठहराव मिली थी
मेरे मन को तब जाकर।






main bavandar rok khdaa thaa man men

bhaavon ke sailaab lia।

jise mainne chaahaa thaa

chhod gayi thi mujhe

kisi or ke lia।

dil tutaa

sab chhutaa।

chaahaa jag chhod dun uske lia।

ab ji ke bhi kyaa phaaydaa

jab vo hi nahin hai

jiske sang sochaa thaa

jine ke lia।


tabhi kisi ne rakhaa haath mere kandhe par

lagaa koi apnaa

uske sparsh se।

jo mudaa to paayaa apne dost ko

jisne saath diyaa thaa

mere har manjil

har mod par।

main rok naa paayaa apne bhaavon ke bavandar ko

aur rakhaa apnaa sar uske kandhe par।

bah nikle the

mere ashru baandh todkar

thahraav mili thi

mere man ko tab jaakar।



Written by sushil kumar

Shayari


5 May 2019

Sanskar duniya ka sabse anmol ratan hai.

Shayari

संस्कार-दुनिया का सबसे अनमोल रतन है।

kavitadilse.top द्वारा मेरे व आपके,हम सभी के माँ पापा को समर्पित है।

Maa baap

पैसे की किल्लत भले ही थी
पर माँ बाबू जी आपने कभी भी
मेरे सपनों के पतंग को
आसमान की ऊंचाइयों को छूने से
कभी नहीं रोका।

गिरा मैं
चोट आपको लगी।
आँसू मेरे बहे
दिल आपका रोया।
माँ आपका मेरे सर पर
तेल से चम्पी करना।
नहीं भूला हूँ मैं।
और पापा आपका वो ठंड के मौसम में
मेरे छाती पर तेल से मालिश करना
ताकि मुझे सर्दी ना लगे।
नहीं भुला हूँ मैं।
आज भी सर मेरा भारी भारी रहता है
पर कोई तेल से चम्पी करने वाला नही है माँ।
आज मुझे ठंड में सर्दी लग ही जाती है
क्योंकि कोई तेल से छाती मालिश करने वाला नही है पापा।
मुझे आप पापा मम्मी बहुत याद आते हैं।
आप क्यों नही हमारे साथ आकर रहते हैं।
क्या आपको मैं याद नही आता हूँ??


Maa baap

माना!
माना मैंने की
महंगे खिलौने मुझे नहीं मिले
ना ही आपलोगों ने मुझे भारत दर्शन कराया।
पर फिर भी मुझे आज तक कभी अफसोस नही हुआ।
और मैं आपका सदा सदा के लिए आभारी रहूँगा
क्योंकि संस्कार के जो अनमोल रत्न आपने मुझे दिए
वो अत्यधिक अनमोल थे।
जो जीवन भर मेरा साथ निभाएँगे।
इनके सामने सारे खिलौने और भारत दर्शन व्यर्थ से थे।

आज मैं जो भी हूँ
जैसा भी हूँ
ये आपके संस्कार के कारण ही हूँ।
और मुझे आप दोनों पर सदा सदा के लिए अभिमान है
और सदा अभिमान रहेगा।
मैं कहीं भी रहूँ
कोई भी दिन ऐसा नहीं
जिस दिन आपके सेहत के लिए
मालिक से दुआ और प्रार्थना नहीं की होगी।

मुझे ऐसे जीवन के बारे मे सोच कर भी डर लगता है
जहाँ आपका साथ ना हो।
मैं जब भी जन्म लूँ
मेरा बस एक ही प्रार्थना है मालिक जी आपसे
मुझे मेरे पापा मम्मी ही मुझे मिले
मेरे माँ बाप के रूप में सदा।












paise ki killat bhale hi thi

par maan baabu ji aapne kabhi bhi

mere sapnon ke patang ko

aasmaan ki unchaaeyon ko chhune se

kabhi nahin rokaa।


giraa main

chot aapko lagi।

aansu mere bahe

dil aapkaa royaa।

maan aapkaa mere sar par

tel se champi karnaa।

nahin bhulaa hun main।

aur paapaa aapkaa vo thand ke mausam men

mere chhaati par tel se maalish karnaa

taaki mujhe sardi naa lage।

nahin bhulaa hun main।

aaj bhi sar meraa bhaari bhaari rahtaa hai

par koi tel se champi karne vaalaa nahi hai maan।

aaj mujhe thand men sardi lag hi jaati hai

kyonki koi tel se chhaati maalish karne vaalaa nahi hai paapaa।

mujhe aap paapaa mammi bahut yaad aate hain।

aap kyon nahi hamaare saath aakar rahte hain।

kyaa aapko main yaad nahi aataa hun??






maanaa!

maanaa mainne ki

mahange khilaune mujhe nahin mile

naa hi aaplogon ne mujhe bhaarat darshan karaayaa।

par phir bhi mujhe aaj tak kabhi aphsos nahi huaa।

aur main aapkaa sadaa sadaa ke lia aabhaari rahungaa

kyonki sanskaar ke jo anmol ratn aapne mujhe dia

vo atyadhik anmol the।

jo jivan bhar meraa saath nibhaaange।

enke saamne saare khilaune aur bhaarat darshan vyarth se the।


aaj main jo bhi hun

jaisaa bhi hun

ye aapke sanskaar ke kaaran hi hun।

aur mujhe aap donon par sadaa sadaa ke lia abhimaan hai

aur sadaa abhimaan rahegaa।

main kahin bhi rahun

koi bhi din aisaa nahin

jis din aapke sehat ke lia

maalik se duaa aur praarthnaa nahin ki hogi।


mujhe aise jivan ke baare me soch kar bhi dar lagtaa hai

jahaan aapkaa saath naa ho।

main jab bhi janm lun

meraa bas ek hi praarthnaa hai maalik ji aapse

mujhe mere paapaa mammi hi mujhe mile

mere maan baap ke rup men sadaa।





Written by sushil kumar

Shayari

3 May 2019

Aaj aap naraz ho humse🙄

Shayari

आज आप नाराज़ हो हमसे

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Dil

आज आप नाराज़ हो हमसे
ये हक है आपका।
मैं मानता हूँ
कि कोई गलती हुई होगी हमसे।
शायद आपके दिल को
बड़ी ठेस लगी होगी।

पर एक बात हम भी कह देते हैं आपसे
आपके बर्ताव से दिल हमारा
टूट सा गया है।
इसलिए आगे कभी मेरे करीब
मत आना।
क्योंकि मैं रहूँ ना रहूँ
तुम्हारे आँसू पोंछने को उस लम्हा।






aaj aap naaraaj ho hamse

ye hak hai aapkaa।

main maantaa hun

ki koi galti hui hogi hamse।

shaayad aapke dil ko

bdi thes lagi hogi।


par ek baat ham bhi kah dete hain aapse

aapke bartaav se dil hamaaraa

tut saa gayaa hai।

esalia aage kabhi mere karib

mat aanaa।

kyonki main rahun naa rahun

tumhaare aansu ponchhne ko us lamhaa।



Written by sushil kumar

Shayari

1 May 2019

Main dara sahma sa

Shayari

मैं डरा सहमा सा

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Love

Love


मैं डरा सहमा सा
आया था तेरे पास में।
मन में लेकर बवंडर भावों का
कर रहा था मेरे दिल को विचलित।
किसी जिगरी दोस्त को खोने का सदमा था
जो मेरे दिल का बहुत बड़ा रहनुमा था।
पहली बार किसी करीबी को
मृत्यु के गोद में सोते देखा था।
तेरे बिन जीवन की सोच में
दिल मेरा व्यथा में रोया था।
चाहता था मन हल्का करने को
तेरे कन्धे पर सर रख कर
फूटफूटकर रोने को।
मैं अंदर ही अंदर टूटता सा चला जा रहा था।
शीशे की भाँती चकनाचूर होता सा जा रहा था।
वो पल को महसूस कर ही
मैं काँप सा जा रहा था।
मेरे अंदर एक डर बैठा सा जा रहा था ।
क्या बयान करूँ
मेरी हालत कैसी थी नाजुक।
पर जो तूने मुझे
अपने गले से लगाया था
मैं रो पड़ा भाव भिवोर हो
भभक भभक कर।
मेरी हालत देख
जो तूने मुझसे रोने का कारण पूछा था।
मैं सिसक सिसक कर बोल पड़ा
मैं तेरे बिन जीने के बारे में कभी नहीं सोचा था।




I love you.











main daraa sahmaa saa

aayaa thaa tere paas men।

man men lekar bavandar bhaavon kaa

kar rahaa thaa mere dil ko vichalit।

kisi jigri dost ko khone kaa sadmaa thaa

jo mere dil kaa bahut bdaa rahanumaa thaa।

pahli baar kisi karibi ko

mriatyu ke god men sote dekhaa thaa।

tere bin jivan ki soch men

dil meraa vythaa men royaa thaa।

chaahtaa thaa man halkaa karne ko

tere kandhe par sar rakh kar

phutphutakar rone ko।

main andar hi andar tuttaa saa chalaa jaa rahaa thaa।

shishe ki bhaanti chaknaachur hotaa saa jaa rahaa thaa।

vo pal ko mahsus kar hi

main kaanp saa jaa rahaa thaa।

mere andar ek dar baithaa saa jaa rahaa thaa ।

kyaa bayaan karun

meri haalat kaisi thi naajuk।

par jo tune mujhe

apne gale se lagaayaa thaa

main ro pdaa bhaav bhivor ho

bhabhak bhabhak kar।

meri haalat dekh

jo tune mujhse rone kaa kaaran puchhaa thaa।

main sisak sisak kar bol pdaa

main tere bin jine ke baare men kabhi nahin sochaa thaa।

I love you.

Written by sushil kumar

Shayari

30 Apr 2019

Mujhe khed hai.

Shayari

मुझे खेद है

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Rastrawad

मुझे खेद है
आज भी कुछ भारतीय
जातिवाद और धर्मवाद पर वोट देते हैं।
उस मन्दबुद्धि और उसके पूर्वजों के द्वारा
रचाए सारी ढकोसले हैं।
हिंदुस्तान के टुकड़े नहीं होते
अगर राज करने की चाह
इनके दिल में ना होती।
साले अंग्रेजों ने धर्मवाद का जहर घोल
हिन्दुस्तानियो को हिन्दुस्तानियो से लड़वाया था।
और इन जैसे ठेकेदारों की मदद ले
देश का बंटवारा करवाया था।

हम गुलामों को फिर से
इन गद्दारों ने
धर्मवाद और जातिवाद के जंजीरो में
कैद करवाया है।
अंग्रेज चले गए
पर  अपनी सोच छोड़ गए।
हमारे देश को अभिशापित सदा के लिए कर गए।

अगर देश को आगे ले जाना है
इन जंजीरो को तोड़
हमारी सोच को आज़ाद कराना होगा।
जातिवाद और धर्मवाद के ढकोसलों को
अपने जेहन से मिटाना होगा।
राष्ट्रवाद के ज्वाले को फिर से
सारे देशवासियों के दिल में जगाना होगा।
फिर हम सभी सही मायने में
पूर्ण स्वतंत्र कहलाएँगे।
अपने भारत को फिर सही मायने में
उसे बुलन्दियों तक पहुँचाएँगे।

अगर कोई आपसे धर्म और जाति पूछो
गर्व से हुँकारो
हम भारतीय हैं।
Indian

जय हिंद।
जय भारत।








mujhe khed hai

aaj bhi kuchh bhaartiy

jaativaad aur dharmvaad par vot dete hain।

us mandabuddhi aur uske purvjon ke dvaaraa

rachaaa saari dhakosle hain।

hindustaan ke tukde nahin hote

agar raaj karne ki chaah

enke dil men naa hoti।

saale angrejon ne dharmvaad kaa jahar ghol

hindustaaniyo ko hindustaaniyo se ldvaayaa thaa।

aur en jaise thekedaaron ki madad le

desh kaa bantvaaraa karvaayaa thaa।


ham gulaamon ko phir se

en gaddaaron ne

dharmvaad aur jaativaad ke janjiro men

kaid karvaayaa hai।

angrej chale gaye

par  apni soch chhod gaye।

hamaare desh ko abhishaapit sadaa ke lia kar gaye।


agar desh ko aage le jaanaa hai

en janjiro ko tod

hamaari soch ko aajaad karaanaa hogaa।

jaativaad aur dharmvaad ke dhakoslon ko

apne jehan se mitaanaa hogaa।

raashtrvaad ke jvaale ko phir se

saare deshvaasiyon ke dil men jagaanaa hogaa।

phir ham sabhi sahi maayne men

purn svatantr kahlaaange।

apne bhaarat ko phir sahi maayne men

use bulandiyon tak pahunchaaange।


agar koi aapse dharm aur jaati puchho

garv se hunkaaro

ham bhaartiy hain।

Jay hind
Jay bharat.

Written by sushil kumar

Shayari

29 Apr 2019

Kuchh yad hai bhaio aur behno

Shayari

कुछ याद है भाइयो और बहनों

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Modi

कुछ याद है भाइयो और बहनों
वो पुराने दिन कांग्रेस के।
देश में घुसपैठ जारी था।
पत्थरबाजी सेना पर कायम थी।
आतंकवादी हमला भी चालू था।
पर सरकार मौन बन बैठी थी
बस उनकी निंदा क्रिया जारी थी।
Modi



हम भी थक गए थे
उनकी निंदा सुनते सुनते।
पर वे कहाँ थके थे
निंदा करते करते।

सरकार बदली
समय बदला।
चूड़ियां निकाल
भारत ने अपना चरित्र बदला।
अब ईंट का जवाब पत्थर से देते
अपने शहीद भाइयों का बदला
हम उनके घर घुस कर लेते।

बहुत हो गया निंदा क्रिया
अब जवाब देने का वक़्त आ गया है।
हमारे जवान का लहू बहा जो
खून की नदियां बहा देंगे हम।

आज हमारे देश का सम्मान बढ़ा है
रूस,इजराइल,जापान व अन्य
साथ खड़ा है।
आज घर घर बिजली पहुँची है
अंधकार का राक्षस भाग खड़ा हुआ है।
आज गाँव को शहर से जोड़ने को
रोड और हाईवे पर काम हुआ है।
माँ बहनों को कोयले और लकड़ी के धुएं से
आज उन्हें निजात मिला है।
काले धन और बिचौलियों पर
आज जबरदस्त नकेल कसी है।
किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना दे
उनमे एक नई उम्मीद की किरण जगाई है।
आयकर के स्लैब में बदलाव कर
मध्यम वर्गो की रीढ़ की हड्डी मजबूत की है।
आज हर भारतीय संतुष्ट है
क्योंकि अपने देश की बागडोर सही कर में है।

फिर भी कुछ सज्जन बोलते हैं
हम मोदी को फिर से क्यों लाए भारत में।
शायद उन्हें घोटालो का दौर याद नहीं है।
या फिर इनकी कमीशन खोरी पर रोक लग गई है।
वरना सच्चा देशभक्त आज परेशान नहीं
बल्कि खुशहाल है।
और मोदी को दुबारा लाने का प्रण
आज हर देशभक्त ने दिल से लिया है।
Modi

जय हिंद।।
जय भारत।।








kuchh yaad hai bhaaeyo aur bahnon

vo puraane din kaangres ke।

desh men ghuspaith jaari thaa।

pattharbaaji senaa par kaayam thi।

aatankvaadi hamlaa bhi chaalu thaa।

par sarkaar maun ban baithi thi

bas unki nindaa kriyaa jaari thi।






ham bhi thak gaye the

unki nindaa sunte sunte।

par ve kahaan thake the

nindaa karte karte।


sarkaar badli

samay badlaa।

chudiyaan nikaal

bhaarat ne apnaa charitr badlaa।

ab int kaa javaab patthar se dete

apne shahid bhaaeyon kaa badlaa

ham unke ghar ghus kar lete।


bahut ho gayaa nindaa kriyaa

ab javaab dene kaa vkt aa gayaa hai।

hamaare javaan kaa lahu bahaa jo

khun ki nadiyaan bahaa denge ham।


aaj hamaare desh kaa sammaan bdhaa hai

rus,ejraael,jaapaan v any

saath khdaa hai।

aaj ghar ghar bijli pahunchi hai

andhkaar kaa raakshas bhaag khdaa huaa hai।

aaj gaanv ko shahar se jodne ko

rod aur haaive par kaam huaa hai।

maan bahnon ko koyle aur lakdi ke dhuan se

aaj unhen nijaat milaa hai।

kaale dhan aur bichauliyon par

aaj jabaradast nakel kasi hai।

kisaanon ko prdhaanamantri kisaan yojnaa de

unme ek nayi ummid ki kiran jagaai hai।

aayakar ke slaib men badlaav kar

madhyam vargo ki ridh ki haddi majbut ki hai।

aaj har bhaartiy santusht hai

kyonki apne desh ki baagdor sahi kar men hai।


phir bhi kuchh sajjan bolte hain

ham modi ko phir se kyon laaa bhaarat men।

shaayad unhen ghotaalo kaa daur yaad nahin hai।

yaa phir enki kamishan khori par rok lag gayi hai।

varnaa sachchaa deshabhakt aaj pareshaan nahin

balki khushhaal hai।

aur modi ko dubaaraa laane kaa pran

aaj har deshabhakt ne dil se liyaa hai।




jay hind।।

jay bhaarat।।


Shayari


Written by sushil kumar



Kuchh to sharm karo.

Shayari

कुछ तो शर्म करो

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Vote

Vote

कुछ तो शर्म करो
अपने कर्मों पर जेहन करो।
बहुत सुन लिया बाहरी लोगों की बातों को
अब अपनी आत्मा की सुन
फिर तय करो।

लोग तो लालच देंगे तुम्हें
अपनी ओर खीचेंगे तुम्हें।
अपने ज़मीर को पक्का कर
उनके इरादों पर थप्पड़ जड़।

जिस देश में तुम रहते हो
उससे गद्दारी तू मत निभा।
कुछ भ्रस्टाचारी नेताओं की गलती की सज़ा
अपने देश की आज़ादी की कीमत से ना चुका।

स्वयंहित से बड़ा राष्ट्रहित है
राष्ट्रवाद से बड़ा कोई धर्म नही।
लोकतंत्र का त्योहार मनाने को
आओ हम तुम चले
मतदान करने को।








kuchh to sharm karo

apne karmon par jehan karo।

bahut sun liyaa baahri logon ki baaton ko

ab apni aatmaa ki sun

phir tay karo।


log to laalach denge tumhen

apni or khichenge tumhen।

apne jmir ko pakkaa kar

unke eraadon par thappd jd।


jis desh men tum rahte ho

usse gaddaari tu mat nibhaa।

kuchh bhrastaachaari netaaon ki galti ki sjaa

apne desh ki aajaadi ki kimat se naa chukaa।


svayanhit se bdaa raashtrahit hai

raashtrvaad se bdaa koi dharm nahi।

lokatantr kaa tyohaar manaane ko

aao ham tum chale

matdaan karne ko।


Written by sushil kumar

Shayari

कोई जीते जी निर्वाणा कैसे पा सकता है???Koi jite ji nirvana kaise paa sakta hai??

मैं चलता हूँ बैठता हूँ बोलता हूँ सुनता हूँ सोता हूँ जागता हूँ पर माँ तुझे कभी नहीं भूलता हूँ। कुछ यादें आती जाती रहती हैं। कुछ ब...