Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Showing posts with label inspirational and motivational poems. Show all posts
Showing posts with label inspirational and motivational poems. Show all posts

कभी चले थे साथ साथ

कभी चले थे साथ साथ।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




कभी चले थे साथ साथ
आज राह बदल गए हैं।
मंजिल बदल गई है
अपना पड़ाव बदल गया है।

कुछ लम्हें वो मीठे पलों के
जो उनके साथ में बिताए थे।
कुछ गुदगुदाने वाले
तो कुछ रुलाने वाले
मैं अपने संग ले आया हूँ।
उन खट्टे मीठे एहसास के क्षणों को
अपने कांख में दबा लाया हूँ।

जो याद आएगी कभी उनकी
कभी अश्रु की धारा जो नहीं रुकेगी।
खोल लूँगा अपनी यादों के पटों को
कुछ देर तो उनकी आघोष में जी लूँगा।
कुछ देर ही सही
पर अपने जीवन के कुछ पल
तो जी लूँगा।

जी लूँगा!
जी लूँगा!
अकेला जी लूँगा!

Written by sushil kumar

रब का बन्दा।

रब का बन्दा।


Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


जीवन के सफर में
लोग आते हैं।
कुछ देर साथ निभाते हैं
और निकल जाते हैं
अपनी अपनी सफर के
नए पड़ाव पर।

ये आना जाना तो लगा रहता है
जीवन के अंतिम छोर तक।
पर जो दूसरों के जीवन को
सतरंगी खुशियों से रंग दिया हो।
जिसकी अच्छाई ने दूसरों के दिलों में
घर कर गया हो।

जो जाते जाते भी दुनिया से
साथ वालो को गुदगुदा गया हो।
वही है रब का सच्चा बन्दा
जिसे लेने खुद मौला यहाँ आया हो।

Written by sushil kumar

स्वार्थ

स्वार्थ

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरे आवाज़ को दबाने वाले मिले बहुत
पर कोई ना मिला जो दे सके मेरा साथ यहाँ।
बहुत घुटन सी रहती है मेरे जेहन में
मैने बहुतों की मदद की थी उनके बुरे वक्त में।
जिनके साथ खड़ा रहता था हर मुसीबत में
नहीं कहीं दिख रहे हैं आज वो मेरे नज़र में।
आज हर कोई बस अपनी ही बनाने में लगा है
जिसे देखो उसे अपनो के मलबे से
अपने आशियाने को सजाने में लगा है।
नहीं है फिकर आज किसी को किसी की यहाँ पर
बेटा भी आज वसीयत देख
बाप को कन्धे पर अर्थी देने को
आगे बढ़ रहा है।

Written by sushil kumar

रिश्तों की महफिले क्या सजी

रिश्तों की महफिले क्या सजी

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठको को समर्पित है।


रिश्तों की महफिले क्या सजी
हमारे मन में गुदगुदी सी हो उठी।
कुछ लफ्ज़ यूँही अपनी बेड़ियाँ तोड़
रिश्तों के बीच में और भी
गरमाहट पैदा करने को निकल पड़ी।
तो कुछ मस्त ठंडी पवन सा झोंका बन
हमारे दिल को ठंडक पहुँचा
एक सुकून पैदा करने लगी।
रिश्ते सदा ऐसे ही होते हैं
भले कितनी भी परेशानी हो
कितनी भी तकलीफ हो
पर वे सदा आपके मन से
आपके दिल से
सारी तकलीफ को छू मंतर कर
आपके अन्दर एक नई स्फूर्ति पैदा करने वाली
और एक नया जान डाल देने वाली होती है।

इसलिए रिश्तों को सदा संजोकर रखे आपलोग।

Written by sushil kumar

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं चला जा रहा था अकेले,झुंझलाते हुए खुद से।
कभी खुद को समझाते हुए,तो कभी खुद को कोसते हुए।
कुछ कदम जो उठाए थे हमने
सटीक निशाने पर नहीं पड़े थे।
जिंदगी यही तो है
कभी उतार है तो
कभी चढ़ाव है।

अब बीते हुए समय में
कुछ ना पा पाने की झुँझलाहट से
वर्तमान को बर्बाद कर देना
कहाँ तक सही है।
भले पिछली कोशिश नाकामयाब रही हो
पर प्रयास तो भरपूर करी थी हमने।
और आने वाले समय में भी
मैं पूरा दम खम लगाकर देखूँगा
कि कब तक मेरी किस्मत
मुझसे मुँह फेरकर रह सकेगी।

हर परिणाम को जो सहज स्वीकार करना सीख लेता है
वही जीवन में उच्चतम से उच्चतम स्थान पर पहुँच पाता है।
क्योंकि उसे पता है कि
अगली बार वो अपने लक्ष्य को पा ही लेगा।
और अपने समय को बदल लेगा।
और वैसे ही लोग हर परिस्थिति में खुश रह पाते हैं।

Written by sushil kumar


राम हमारे संस्कार में हैं।

राम हमारे संस्कार में हैं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Ram rajya
राम हमारे संस्कार में हैं।
राम हमारे विचार में हैं।
राम हमारे रग रग में हैं।
राम विश्व के कण कण में हैं।
फिर कैसे कोई राम का नाम लेने से
हमें कोई वंचित रख सकता है।
Ram rajya

आज जब सारा विश्व
राम के नाम का जाप कर रहा है।
राम के पथ पर चल रहा है।
कोई कैसे मात्र राजनीतिक फायदा के लिए
जय श्री राम उद्घोष करने पर
भारत में चमड़ी उधेड़ने की बात कर रहीं हैं।
मानो हम पाकिस्तान पहुँच गए हों।

Rajniti

लेकिन बहुत हो गया
बहुत सह लिया
राजनीति का
ये गंदा खेल।
अब करेंगे कलयुगी रावण का
फिरसे लंका दहन।
क्योंकि आ गया है
रामराज्य का नीव रखने का
उचित समय।
Ram rajya


स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।

स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।

kavitdilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।
अपने अंदर तू आत्मविश्वास रख।
तेरे पास अदम्य शक्ति का है भंडार।
योग कर अपने कुंडली को जगा।
अपने कर्मों से सबका दिल जीत।
कुछ ऐसा कर्म कर कि
सब हो तेरे मीत।

लोग आते हैं
चले जाते हैं।
पर उनमें से
कोई कोई ही याद आते हैं।
सब का हो जिसमे भला।
जिससे किसी का दिल ना हो दुखा।
और जब कोई याद करे
तेरे मरने के बाद।
चेहरे पर दे जाए उसे
छोटी सी मुस्कान।
क्यों ना ऐसा कर्म करें हम इस जहां।
लोगों के दिलों से ना मिटे कभी
इस संसार से हटने के बाद।


Written by sushil kabira



मैं अभी थका नहीं।

मैं अभी थका नहीं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Manzil

मैं अभी थका नहीं।
रूह भी हार माना नहीं।।
माना मंज़िल अभी कहीं बहुत दूर है।
पर हमारा हौसला भी भरपूर है।।
कदम भले लड़खड़ा रहे हो।
साथ वाले कहीं पीछे छूट रहे हों।।
पर मैं अपने लक्ष्य पर डटा रहा।
सदा अडिग रहा वहीं।।
Manzil

धूप क्या!
बारिश क्या!
तूफान ने भी कड़ी चुनौती दी।।
पर कहाँ हटा मैं अभिमन्यु।
मेरी मंज़िल जो मेरे करीब थी।।
लहू लुहान हो चुका था।
शरीर भी छलनी छलनी हो गएँ थे।।
हिम्मत भी साथ छोड़ रही थी।
पर जज़्बा वही सलामत थी।।
Manzil

आँखों में चमक उठी।
जो मंजिल समीप मुझे दिखी।
क्या दर्द?
क्या जख्म?
सारे दुख तकलीफ फिर कहीं खो गएँ।।
मंजिल को पाने के प्रयास में।
मैं अपने ईश्वर को कभी भूला नहीं।।
जिसकी मदद के बिना
कर पाते फतह ये किला नहीं।
Manzil

Written by sushil kumar


जिस देश की धरती पर जन्म लिया।

जिस देश की धरती पर जन्म लिया।

Kavitadilse.top  द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

India
India


जिस देश की धरती पर जन्म लिया।
जिस देश की मिट्टी में लोट-पोट खेला।।
जहाँ पहला पग उठा चलना सीखा।
जहाँ दौड़ लगा जीतना सीखा।।
जहाँ की संस्कृति से संस्कार को जीना सीखा।
जहाँ की नदियों और गायों को भी माँ कहना सीखा।।
जहाँ प्रेम से रिश्तों को सींचा।
जहाँ यार की यारी पर मरना सीखा।।
जहाँ जाति धर्म की राजनीति को नकारना सीखा।
जहाँ भारतीय होने पर गर्वान्वित होना सीखा।।
जहाँ देश की गरिमा के खातिर मरना सीखा।
जहाँ देश के दुश्मनों को चुन चुन कर कूटना सीखा।।
ऐसी पावन धरती को
आज दिल से सलाम हम करते हैं।
जहाँ हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई
स्वयं को भारतीय कहलाने पर अभिमान करते हैं।।
India

जिस देश की गरिमा के खातिर
हमारे वीर जवानों ने अपने लहू से रंग खेला।
क्या हिन्दू
क्या मुस्लिम
क्या सिख
क्या ईसाई
जो खून गिरा था धरती पर
वो एक हिंदुस्तानी का था मेरे भाई।।
बड़ा जोश भर आता था दिल में उस वक़्त।
रग रग में दौड़ जाती थी आक्रोश की तरंग।।
जब कोई वीर हमारा शहीद हो आता था।
लिपट तिरंगे में अपना सदन।।
और स्वयं ही एक हुँकार उठ उठती थी
सभी की दिल से।
जय हिंद कहकर
एक आखिरी सलाम कर जाती थी
उस महावीर योद्धा को।।
जो आज भले ही नहीं हैं हमारे संग में।
पर उनकी सोच और उनका जज़्बा
आज भी हमें राष्ट्रवाद से ओतप्रोत कर जाता है।।
और हमें सही कदम उठाने को
प्रेरित कर जाता है।
और ऐसे ही फिर से मोदी सरकार को बहुमत देकर
हम लाए हैं।।
क्योंकि राष्ट्रप्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं है।
राष्ट्र है,तभी हम हैं!आप हैं!
India

जय हिंद।।
जय भारत।।


दिल से मोदी।

दिल से मोदी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Modi

दिल से मोदी।
मन से मोदी।
सोच से मोदी।
कर्म से मोदी।
विचार से मोदी।
स्वाभिमान से मोदी।
जहाँ देखा
वहाँ बस मोदी ही मोदी।

आज देश का हर कण कण
उसके गुणगान किए बिना
रुक नहीं पा रहा है।
भारत माँ भी
ऐसे वीर को जन्म देकर
खुद पर गौरवान्वित हो
हर्षा रही हैं।

बच्चे बूढ़े और जवान
मोदी की सोच के धारा में समाहित हो
देशहित में
राष्ट्रवाद के महासागर में
मिलती जा रही हैं।
आज हर एक की सोच
राष्ट्रवाद के पथ से हो गुज़रती है।
देश के लिए प्रेम
और देश के लिए कुछ कर गुज़रने का जज़्बा
आज हर दिल में धड़कती है।


भारत माता की जय।
वन्दे मातरम।
जय हिंद।।
जय भारत।।
Modi

Written by sushil kumar

आप जो कभी हमसे रूठ जाती हो

आप जो कभी हमसे रूठ जाती हो

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Angry birds


आप जो कभी हमसे रूठ जाती हो
दिल हमारा टूट सा जाता है
शीशे की भाँति चूर चूर सा हो जाता है।
Angry birds

अश्रु!
अश्रु तो मानो सैलाब बन
आँखों से बह पड़ते हैं।
ऐसा आभास होता है
मानो कि किसी ने मेरे दिल को ही
मेरे शरीर से अलग थलग कर दिया हो।
Angry birds

ऐसा आभास होता है
जीतेजी नरक के आग में
किसी ने धकेल दिया हो।
 ना कुछ होशोहवास रहता है
हमारा दिलोदिमाग शिथिल सा पड़ जाता है।
Angry birds

बस लगता है
आपकी यादों में
आपके ख्यालों में खोया रहूँ।
जो नींद जो आ जाती है
ख्वाबों में आपसे रूबरू हो जाता हूँ।
आपसे माफी माँगता हूँ।
और आप हमे माफ़ भी कर देती हो।
Angry birds


खुशी खुशी नींद जब खुलती है
हम टूट से जाते हैं
जब आपको अपने समीप नहीं पाते हैं।
आपको तलाशती हुई
हमारी बेचैन नज़रें
हमें आपके करीब पहुँचा देती है।
हम आपसे रोकर माफी माँगने लगते है।
और आप हमें गले लगा
हमे माफ भी कर देती हैं।
तब जाकर हमारे दिल को शुकुन आता है।
Angry birds

Written by sushil kumar

अपना किरदार निभाओ।

अपना किरदार निभाओ।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


जीवन नहीं
जीवन का किरदार बड़ा होना चाहिए।
जिससे सब का भला हो
वैसे कर्म का आगाज़ बड़ा होना चाहिए।

कीड़े मकौडों की भाँति सभी जी रहे हैं यहाँ।
खाने की पूर्ति को
ना जाने कहाँ कहाँ भटक रहे यहाँ।
जहाँ खाना सुविधापूर्वक मिल जाए।
सारा जीवन उनका
बस वहीं कट गया।

ऐसे कीड़ों जैसे जीना भी क्या है जीना।
मानव योनी पाकर
उसे व्यर्थ में क्यों है खोना।
जीवन छोटा है या बड़ा
ये उम्र की लंबाई से
नहीं नापा जा सकता।
पर जो छोटे जीवन में ही
कोई बड़ा काम कर जाए।
तो उसका जीवन स्वयं ही स्वयं
बड़ा हो जाया करता है।

याद तो होगा ११अगस्त १९०८ का वो दिन
जब हँसते हँसते चढ़ गया था
कोई बालक किसी शूली पर।
उसकी उम्र कुछ  ज्यादा नहीं
बस उन्नीस को छूने को थी।
पर उस नादान परिंदे ने जिद्द पकड़ रखी थी
खुले आसमान में पँख फैला उड़ने की।
भारत की आज़ादी के खातिर
जिसने इतनी बड़ी आहुति दे दी।
आज सारा देश उन्हें नमन कर रहा है
वो कोई और नहीं
हमारे बोस खुदीराम थे।

जाते जाते एक चिंगारी जो
इस क्रांतिकारी ने
दिल में सभी के
जगा गया।
आज़ादी की लौ प्रचंड रूप ले अग्नि का
ज्वाला बन
सभी के हृदय में भभक रहा।
बारूद बन विस्फोट हुआ जो देश में
काँप उठा था दुश्मनो का सीना।
दुम दबा भागे थे अंग्रेज गीदड़ सा
मानो जाग गया हो बब्बर शेर भारत का।

आओ हम सब मिलकर एक प्रण लें आज से
अपने जीवन को अब बड़ा बनाएँगे
उम्र भले
लम्बी रहे ना रहे
पर जब तक जीएँगे
मानवता का उत्थान कराएँगे
Role


Written by sushil kumar

बहुत हो गया भाई

बहुत हो गया भाई

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठको को समर्पित है।

बहुत हो गया भाई!
जिसे देखो दबाने को लगा है।
हर किसी को बस
अपना गुस्सा हमपर निकालने को लगा है।
कमज़ोर हूँ,
इसका मतलब ये तो नहीं
जिसे देखो अपना तैश हम पर थोपे जा रहा है।
मैं भी इंसान हूँ
मुझे भी गुस्सा होने का हक़ है
मैं किस पर गुस्सा होऊं।
पर क्या कोई है नहीं इस दुनिया में
मेरे गुस्से को झेलने को।
ऐसे में तो
मै अंदर के तनाव से टूटता सा चला जा रहा हूँ।
शीशे सा चकनाचूर अंदर ही अंदर होता सा जा रहा हूँ।
कोई बचाले मुझे इस तनाव से
वरना मैं कहीं डूबता सा जा रहा हूँ।
और कितनी देर झेल पाऊँगा
मुझे नहीं है पता।
अगर ऐसे ही चलता रहा तो
अस्तित्व अपना
खोता सा जा रहा हूँ।


Written by sushil kumar

हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है।

हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है।

kavitadilse. top द्वारा आप सभी दोस्तों को समर्पित है।


मैं बवंडर रोक खड़ा था मन में
भावों के सैलाब लिए।
जिसे मैंने चाहा था
छोड़ गई थी मुझे
किसी ओर के लिए।
दिल टूटा
सब छूटा।
चाहा जग छोड़ दूँ उसके लिए।
अब जी के भी क्या फायदा
जब वो ही नहीं है
जिसके संग सोचा था
जीने के लिए।

तभी किसी ने रखा हाथ मेरे कन्धे पर
लगा कोई अपना
उसके स्पर्श से।
जो मुड़ा तो पाया अपने दोस्त को
जिसने साथ दिया था
मेरे हर मंजिल
हर मोड़ पर।
मैं रोक ना पाया अपने भावों के बवंडर को
और रखा अपना सर उसके कन्धे पर।
बह निकले थे
मेरे अश्रु बांध तोड़कर
ठहराव मिली थी
मेरे मन को तब जाकर।

Written by sushil kumar


संस्कार-दुनिया का सबसे अनमोल रतन है।

संस्कार-दुनिया का सबसे अनमोल रतन है।

kavitadilse.top द्वारा मेरे व आपके,हम सभी के माँ पापा को समर्पित है।

Maa baap

पैसे की किल्लत भले ही थी
पर माँ बाबू जी आपने कभी भी
मेरे सपनों के पतंग को
आसमान की ऊंचाइयों को छूने से
कभी नहीं रोका।

गिरा मैं
चोट आपको लगी।
आँसू मेरे बहे
दिल आपका रोया।
माँ आपका मेरे सर पर
तेल से चम्पी करना।
नहीं भूला हूँ मैं।
और पापा आपका वो ठंड के मौसम में
मेरे छाती पर तेल से मालिश करना
ताकि मुझे सर्दी ना लगे।
नहीं भुला हूँ मैं।
आज भी सर मेरा भारी भारी रहता है
पर कोई तेल से चम्पी करने वाला नही है माँ।
आज मुझे ठंड में सर्दी लग ही जाती है
क्योंकि कोई तेल से छाती मालिश करने वाला नही है पापा।
मुझे आप पापा मम्मी बहुत याद आते हैं।
आप क्यों नही हमारे साथ आकर रहते हैं।
क्या आपको मैं याद नही आता हूँ??


Maa baap

माना!
माना मैंने की
महंगे खिलौने मुझे नहीं मिले
ना ही आपलोगों ने मुझे भारत दर्शन कराया।
पर फिर भी मुझे आज तक कभी अफसोस नही हुआ।
और मैं आपका सदा सदा के लिए आभारी रहूँगा
क्योंकि संस्कार के जो अनमोल रत्न आपने मुझे दिए
वो अत्यधिक अनमोल थे।
जो जीवन भर मेरा साथ निभाएँगे।
इनके सामने सारे खिलौने और भारत दर्शन व्यर्थ से थे।

आज मैं जो भी हूँ
जैसा भी हूँ
ये आपके संस्कार के कारण ही हूँ।
और मुझे आप दोनों पर सदा सदा के लिए अभिमान है
और सदा अभिमान रहेगा।
मैं कहीं भी रहूँ
कोई भी दिन ऐसा नहीं
जिस दिन आपके सेहत के लिए
मालिक से दुआ और प्रार्थना नहीं की होगी।

मुझे ऐसे जीवन के बारे मे सोच कर भी डर लगता है
जहाँ आपका साथ ना हो।
मैं जब भी जन्म लूँ
मेरा बस एक ही प्रार्थना है मालिक जी आपसे
मुझे मेरे पापा मम्मी ही मुझे मिले
मेरे माँ बाप के रूप में सदा।

Written by sushil kumar

आज आप नाराज़ हो हमसे🙄

आज आप नाराज़ हो हमसे

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Dil

आज आप नाराज़ हो हमसे
ये हक है आपका।
मैं मानता हूँ
कि कोई गलती हुई होगी हमसे।
शायद आपके दिल को
बड़ी ठेस लगी होगी।

पर एक बात हम भी कह देते हैं आपसे
आपके बर्ताव से दिल हमारा
टूट सा गया है।
इसलिए आगे कभी मेरे करीब
मत आना।
क्योंकि मैं रहूँ ना रहूँ
तुम्हारे आँसू पोंछने को उस लम्हा।

Written by sushil kumar

मैं डरा सहमा सा

मैं डरा सहमा सा

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Love

Love


मैं डरा सहमा सा
आया था तेरे पास में।
मन में लेकर बवंडर भावों का
कर रहा था मेरे दिल को विचलित।
किसी जिगरी दोस्त को खोने का सदमा था
जो मेरे दिल का बहुत बड़ा रहनुमा था।
पहली बार किसी करीबी को
मृत्यु के गोद में सोते देखा था।
तेरे बिन जीवन की सोच में
दिल मेरा व्यथा में रोया था।
चाहता था मन हल्का करने को
तेरे कन्धे पर सर रख कर
फूटफूटकर रोने को।
मैं अंदर ही अंदर टूटता सा चला जा रहा था।
शीशे की भाँती चकनाचूर होता सा जा रहा था।
वो पल को महसूस कर ही
मैं काँप सा जा रहा था।
मेरे अंदर एक डर बैठा सा जा रहा था ।
क्या बयान करूँ
मेरी हालत कैसी थी नाजुक।
पर जो तूने मुझे
अपने गले से लगाया था
मैं रो पड़ा भाव भिवोर हो
भभक भभक कर।
मेरी हालत देख
जो तूने मुझसे रोने का कारण पूछा था।
मैं सिसक सिसक कर बोल पड़ा
मैं तेरे बिन जीने के बारे में कभी नहीं सोचा था।




I love you.

Written by sushil kumar

मुझे खेद है

मुझे खेद है

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Rastrawad

मुझे खेद है
आज भी कुछ भारतीय
जातिवाद और धर्मवाद पर वोट देते हैं।
उस मन्दबुद्धि और उसके पूर्वजों के द्वारा
रचाए सारी ढकोसले हैं।
हिंदुस्तान के टुकड़े नहीं होते
अगर राज करने की चाह
इनके दिल में ना होती।
साले अंग्रेजों ने धर्मवाद का जहर घोल
हिन्दुस्तानियो को हिन्दुस्तानियो से लड़वाया था।
और इन जैसे ठेकेदारों की मदद ले
देश का बंटवारा करवाया था।

हम गुलामों को फिर से
इन गद्दारों ने
धर्मवाद और जातिवाद के जंजीरो में
कैद करवाया है।
अंग्रेज चले गए
पर  अपनी सोच छोड़ गए।
हमारे देश को अभिशापित सदा के लिए कर गए।

अगर देश को आगे ले जाना है
इन जंजीरो को तोड़
हमारी सोच को आज़ाद कराना होगा।
जातिवाद और धर्मवाद के ढकोसलों को
अपने जेहन से मिटाना होगा।
राष्ट्रवाद के ज्वाले को फिर से
सारे देशवासियों के दिल में जगाना होगा।
फिर हम सभी सही मायने में
पूर्ण स्वतंत्र कहलाएँगे।
अपने भारत को फिर सही मायने में
उसे बुलन्दियों तक पहुँचाएँगे।

अगर कोई आपसे धर्म और जाति पूछो
गर्व से हुँकारो
हम भारतीय हैं।
Indian

जय हिंद।
जय भारत।

Written by sushil kumar

कुछ याद है भाइयो और बहनों

कुछ याद है भाइयो और बहनों

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Modi

कुछ याद है भाइयो और बहनों
वो पुराने दिन कांग्रेस के।
देश में घुसपैठ जारी था।
पत्थरबाजी सेना पर कायम थी।
आतंकवादी हमला भी चालू था।
पर सरकार मौन बन बैठी थी
बस उनकी निंदा क्रिया जारी थी।
Modi



हम भी थक गए थे
उनकी निंदा सुनते सुनते।
पर वे कहाँ थके थे
निंदा करते करते।

सरकार बदली
समय बदला।
चूड़ियां निकाल
भारत ने अपना चरित्र बदला।
अब ईंट का जवाब पत्थर से देते
अपने शहीद भाइयों का बदला
हम उनके घर घुस कर लेते।

बहुत हो गया निंदा क्रिया
अब जवाब देने का वक़्त आ गया है।
हमारे जवान का लहू बहा जो
खून की नदियां बहा देंगे हम।

आज हमारे देश का सम्मान बढ़ा है
रूस,इजराइल,जापान व अन्य
साथ खड़ा है।
आज घर घर बिजली पहुँची है
अंधकार का राक्षस भाग खड़ा हुआ है।
आज गाँव को शहर से जोड़ने को
रोड और हाईवे पर काम हुआ है।
माँ बहनों को कोयले और लकड़ी के धुएं से
आज उन्हें निजात मिला है।
काले धन और बिचौलियों पर
आज जबरदस्त नकेल कसी है।
किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना दे
उनमे एक नई उम्मीद की किरण जगाई है।
आयकर के स्लैब में बदलाव कर
मध्यम वर्गो की रीढ़ की हड्डी मजबूत की है।
आज हर भारतीय संतुष्ट है
क्योंकि अपने देश की बागडोर सही कर में है।

फिर भी कुछ सज्जन बोलते हैं
हम मोदी को फिर से क्यों लाए भारत में।
शायद उन्हें घोटालो का दौर याद नहीं है।
या फिर इनकी कमीशन खोरी पर रोक लग गई है।
वरना सच्चा देशभक्त आज परेशान नहीं
बल्कि खुशहाल है।
और मोदी को दुबारा लाने का प्रण
आज हर देशभक्त ने दिल से लिया है।
Modi

जय हिंद।।
जय भारत।।


Written by sushil kumar



कुछ तो शर्म करो

कुछ तो शर्म करो

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Vote

Vote

कुछ तो शर्म करो
अपने कर्मों पर जेहन करो।
बहुत सुन लिया बाहरी लोगों की बातों को
अब अपनी आत्मा की सुन
फिर तय करो।

लोग तो लालच देंगे तुम्हें
अपनी ओर खीचेंगे तुम्हें।
अपने ज़मीर को पक्का कर
उनके इरादों पर थप्पड़ जड़।

जिस देश में तुम रहते हो
उससे गद्दारी तू मत निभा।
कुछ भ्रस्टाचारी नेताओं की गलती की सज़ा
अपने देश की आज़ादी की कीमत से ना चुका।

स्वयंहित से बड़ा राष्ट्रहित है
राष्ट्रवाद से बड़ा कोई धर्म नही।
लोकतंत्र का त्योहार मनाने को
आओ हम तुम चले
मतदान करने को।

Written by sushil kumar

मैं हिन्दू नहीं।

मैं हिन्दू नहीं। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। मैं हिन्दू नहीं ना मैं मुसलमान हूँ। मैं सिख नहीं ना मैं क...