Showing posts with label मेरी टोपी उसके सर।।. Show all posts
Showing posts with label मेरी टोपी उसके सर।।. Show all posts

24 Feb 2018

मेरी टोपी उसके सर।।

 मैं एक बार रैल में यात्रा कर रहा था।वहाँ एक ऐसा हास्यास्पद घटना घटी,जिसके बारे में,बताए बगैर मैं नहीं रह पाऊँगा।मैं और मेरा दोस्त मोहन साथ में सफर कर रहे थें और मुंबई से पटना जा रहे थे।उसी कोच में सफर कर रहे दीपक से हमारी अच्छी खासी दोस्ती हो गई।लंच का समय नजदीक आ रहा था,और जबलपुर आने वाला था।मैं और मोहन दोनो ने नेट से ओनलाइन नौनवैज खाने का ओर्डर कर दिया।और दीपक भाई साहब के पास एक मेनू कार्ड  था,जिससे उन्होंने एक वैज खाने का ओर्डर किया।दीपक भाई साहब नौन वैज खाना नहीं खाते थे।                         जबलपुर आया,हमारा खाना आ गया,पर दीपक भाईसाहब के खाने का कुछ पता नहीं चल पा रहा था।तभी एक वेंडर आया,और एक सीट नं चिल्ला उठे।भाई साहब इधर इधर।वेंडर ने समान दिया, और जाने लगा।दीपक ने बोला,भाईसाहब एक मिनट।और उसने सौ रूपये निकालकर दें दिएँ।वेंडर ने थैंक्यू बोला और निकल गया।हम सब ने अपने पैकेट खोला,खाने के लिए।ये क्या दीपक का पैकेट में नौन वैज खाना था।दीपक को गुश्शा आया, उसने तूरंत फोन लगाया।तभी एक और वेंडर दीपक के सामने आ गया।सर आपका खाना।दीपक ने गुश्शा कर बोला, जो तुम लोगों ने मजाक बनाकर मेरा रख दिया है।ये नौन वेज खाना मुझे क्यों देकर चले गए थे।वेंडर ने बोला,ये खाना हमने नहीं दिया है,ये हमारे यहाँ का खाना नहीं है।फिर हमने बिल चेक किया,उसपर लिखा था,बी1 29,और दीपक जी का था बी2 29।दीपक ने वेंडर को सोरी बोला,और वेंडर चला गया।फिर दीपक ने पहले वाला पैकेट लिया,और बी1 कोच चला गया।और पैकेट देकर चला आया।दीपक जब लौटा,तो बहुत खुश था।और हमने साथ में खाना खाया।फिर दीपक ने बताया कि बी1 29 पर एक सुंदर स्त्री बैठी हुई थी।और हमारे इस कार्य से वह बहुत खुश हुई।और आगे जाकर दोनो ने शादी भी करली।

तेरे हक का है तो छीन लो।

Shayari तेरे हक का है तो छीन लो। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। अपने हक के लिए तुम्हें आवाज खुद उठाना होगा। आए...