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14 Feb 2018

बकवास नं 2।।

अब आप की फरमाइश पर बकवास नं 2 लेकर आया हूँ।।
पहले एक पंक्ति हो जाए।।
सत्य हमेशा कड़वा लगता है।।
और झूठ हमेशा अपना लगता है।।(2)
और इसलिए दोस्तों,अपनी पत्नी से ज्यादा हमें,
दूसरों की लुगाई से ज्यादा प्यार होता है।।(2)

अब हम अपने टोपिक पर आते हैं।
प्यार करना अच्छी बात है,पर इतना भी नहीं,कि सामने वाला आपके इस अपनेपन से परेशान हो जाए या सामने वाले की आदत ही बिगड़ जाए।हर कोई अपने बेटे से भहुत प्यार करता है।अगर आपके पास पैसे की कमी नहीं है,तो फिर आप कभी नहीं चाहेंगे कि आपके बेटे को कभी भी कोई तकलीफ हो।
उसे हर तरह की सुख सुविधा मिले।
आप उसके प्यार में इतने अँधे हो जाते हैं,कि आपका बच्चा आपसे जो कुछ भी माँगता,उसकी माँगें पूरी किए जाते हैं।इससे बच्चे की आदत बिगड़ती चली जाती है।बच्चा और भी बिगड़ेल होता चला जाता है।

तो दोस्तों मेरा कहने का साफ साफ बस यही मतलब है,कि हर चीज में संतुलन होना ही चाहिए, वरना परिणाम सदा नकारात्मक ही होते हैं।।

13 Feb 2018

बकवास।।

अपनी बकवास लिखने से पहले एक दो लाईन आपसे कहना चाहता हूँ।जरा गौर फरमाईएगा...

ज्यादा प्यार या ज्यादा लताड़।
दोनो घातक होते हैं।
ज्यादा प्यार या ज्यादा लताड़।
दोनो घातक होते हैं।
संतुलन बनाकर चलने में ही,
हम डायबिटीज से बच पाते हैं।
संतुलन बनाकर चलने में ही,
हम डायबिटीज से बच पाते हैं।

इसलिए दोस्तों जीवन में संतुलन होना ही चाहिए।

ज्यादा गुश्शेल नहीं होना चाहिए, कि जरा सा कोई मजा ले,तो उसकी माँ बहन एक करके रख दें।या जरा सा कुछ भी मन के मुताबिक नहीं हुआ, तो सामने वाले की बैंड बजा दें।
ऐसे लोगों से किसी से मजाक करने का हक छीन लेना चाहिए।

ज्यादा भावुक भी नहीं होना चाहिए, कि किसी दोस्त की शादी में गएँ हैं,और दुल्हन विदाई के समय,दुल्हन को छोड़,सारे परिवार के आँखों से अक्ष्रुओं की धारा बह रही है।और उन परिवारो में एक नया सदस्य भी जुड़ गया है,मैं दुल्हे का दोस्त।और मैं सोच रहा हूँ,कि पता नहीं किस जन्म का नाता है,मेरा और मेरे अक्ष्रुओं का।और लड़की वाले मुझे आकर शाँत कर रहे हैं।
ना-ना नहीं बेटा,नहीं।अभी तो तुम्हें,अपनी भाभी माँ का ख्याल रखना है।
दोस्त भ्रमित हो रहा है,कि ये हमारे साईड से है भी या नहीं।

ज्यादा नम्र होने में भी नुकसान है दोस्तों।अब आप मान लो कि आप किसी कंपनी के संचालक हो।आप चाहते हो,कि आप सारे कर्मचारियों को साथ लेकर चले।सभी का ख्याल अपने परिवार जैसा करें।सभी को सही समय पर सैलरी और बोनस प्रदान करें।
ऐसी स्थिति में आप तभी अपनी कंपनी चला पाएँगे, अगर आपके भावनाओं का कदर करते हुए, आपके कर्मचारी जी जान से काम करें।और अगर सुपरवाइजर आपका कामचोर निकला,फिर आपकी कंपनी धीरे धीरे नीचे आ जाएगी,और आप रोड पर आ जाएँगे।क्योंकि आप उस कामचोर को भी अपना परिवार मानते हो।और आप इतने विनम्र हो कि आप उसे नौकरी से निकाल भी नहीं सकते हो।




जितनी बार मैं तेरे करीब आया

Shayari जितनी बार मैं तेरे करीब आया kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। जितनी बार मैं तेरे करीब आया उतनी बार दिल म...