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19 Feb 2018

अँख लग गई,और मैं सो गया।।

खेल के आया मैं लोंडा
              और बिस्तर पर बैठा जो पढ़ने को।
ध्यान भटक गया मेरा,
                जब नजर में आया मोबाइल फोन।
दोस्त ने बोला था कि।।(2)
उसने पार किया दसवा लेवल ।।
पर मैं तो साला अभी भी था दूसरे लेवल पर
फाईनल फैन्टेसी का।
उठाया फोन लगा खेलने, अपना लेवल बढ़ाने को।।
 माँ ने देख लिया,उठाया बैलना।।
                        लगा कूटने मोहे को।।
अरे माँ,ओ माँ,मोरे मईया,अब ना खेलूँगा कोई गेम।।
माँ ने छीन लिया मोबाइल,और बोला
                          पढ़ने के वक्त नहीं मिलेगा फोन।
फिर मैने उठाया पेन,
                          पूरा करने होमवर्क को।।
वरना फिर से कूटेगा वो मुच्छड़।।
                            काला सांड मैथ्स का गोड।।
छड़ी खाने का डर नहीं है मुझको।।
                         और ना ही डर है सहपाठियों की हँसी का।
डर तो केवल प्रीति का है
                          कहीं वह ना हंसदे,देख मेरे पनिस्मेंट को।।
मैं उससे प्यार बहुत करता हूँ,
                            दिलो जान से मरता हूँ।।
उसके प्यार के ख्याल लिए
                             पता नहीं अँख कब लग गई।।
हाथ से पैन छूट गया
                            और पता नहीं किधर घिसक गई।।
उसके प्यार के सपनो में खोया हुआ था जब मैं तल्लीन।।
   बड़ी ही प्यारी थी,उसकी हँसी,और दिल हो चला था मशगूल।
तभी जोर से चोट लगी मुझे और
                              उठकर बैठ गया चुक्कु मुक्कु।
पापा डाँट रहें थे मुझको।
                              पढ़ाई छोड़,तू सो रहा है।।
चल उठ खाने का वक्त हो चला है
                           कल स्कूल नहीं जाने का है।।
             

तेरे हक का है तो छीन लो।

Shayari तेरे हक का है तो छीन लो। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। अपने हक के लिए तुम्हें आवाज खुद उठाना होगा। आए...