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11 Mar 2018

मन बावरे।।

मन बावरे,किस बात की चिंता तूझे सता रही है।
अंत समय निकट आने को है,क्यों तूझे भटका रही है।
जरा संभल!जरा सोच!तू किस लिए इस जग में आया है ?
क्षणभंगूर वस्तु के लिए,क्या तू परम पिता मालिक का सौदा करना चाह रहा है?
नंगा आया था,नंगा ही जाएगा।
ना कोई साथ आया था,ना कोई साथ जाएगा।
फिर भी तू रमा है इस कृत्रिम जग में,भूल उस परम पिता मालिक को।
अब तो तू हो जा सचेत,जरा याद करले परम पिता को।
भजन भक्ति और विश्वास रख,उस परम पिता मालिक में।
आ रहे हैं परम पिता अपने नाव में,निकालने तुझे भौसागर से।

तेरे हक का है तो छीन लो।

Shayari तेरे हक का है तो छीन लो। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। अपने हक के लिए तुम्हें आवाज खुद उठाना होगा। आए...