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15 Nov 2017

आत्महत्या से बड़ा पाप नहीं हो सकता है!

पाप क्या है।अगर आप कोई कर्म करते हो,और उस कर्म के चलते,अगर किसी को कष्ट और तकलीफ पहुँचता है,तो वह पाप होता है।अब आप ही सोचिए, कि अगर कोई आत्महत्या करता है,तो उससे जुड़े लोगों को कितना तकलीफ होता है।अगर आप किसी कंपनी में काम करते हो,और काम के प्रेशर के चलते,अगर आप आत्महत्या करते हो,तो समझिए जो लोग आपसे जुड़े हुए हैं,उन्हे कितना तकलीफ होगा।वे लोग तो जीते जी मर जाते हैं।
       आज जो कहानी लेकर मैं आया हूँ,वह एक बैंक के ब्राँच मेनेजर की है।उनका नाम मोहन भैया था।वे अपने पिता भालदेव के इकलौते पुत्र थे।फिर मोहन भैया का शादी हुआ,और भाभी को लेकर मोहन भैया रायपुर चले गए, जहाँ उनकी पोस्टींग थी।अब वे ब्राँच मेनेजर बन गए थे।
      कभी कभी वे घर पर भी पैसा भेज दिया करते थे,क्योंकि उनके बाबूजी कलर्क से रिटायर्ड हुए थे,जिससे कि उनकी पेंशन घर चलाने के लिए, कभी कभी कम पड़ जाया करते थे।
      शादी के दो साल हो गए थे,भैया भाभी को मायके छोड़ने के लिए आए हुए थे।दरअसल भैया का ससुराल और घर एक ही शहर में था।भाभी प्रेग्नेंट थी।भैया भाभी को छोड़कर, घर चले आए।घर पर एक दिन  रुक कर,ड्यूटी करने के लिए वापस रायपुर चले गए।
      दो सप्ताह भी नहीं हुआ था,कि उनके आत्महत्या की खबर घर पर मिली।पूरा घर अश्रुओं की धारा में बह गया। सारा परिवार जीते जी मारे गएँ।माँ-पिता,पत्नी और बच्चे को अनाथ करके वह चल दिए।अब माँ बाबूजी का घर कैसे चलेगा।अब उनका परिवार किसके भरोसे  जिंदगी बसर करेंगे।उनकी पत्नी और उनके बच्चे का भविष्य कैसा होगा।उनकी बहन की शादी की शादी कैसे होगी।कितना तकलीफ भविष्य में झेलना पड़ेगा।कितने बड़े पाप के भागी हो गएँ मोहन भाई।
     जाते जाते उन्होंने एक सुसाईड नोट लिख के रख छोड़ा था।जिसे पत्रकारों ने अपने अपने समाचार पत्रिकाओं में छाप दिएँ।
    जिसमें भैया ने लिखा था,इश्वर मुझे अगले जन्म में रोबोट बनाना,ताकि जो भी इंस्ट्रक्शंस मुझे मिले,उसे फटाफट कर सकूँ।और मेनेज्मेंट के दिए गए सारे टारगेट को पूरा कर सकूँ।वरणा इस जन्म में तो हमारा जीना हराम कर दिया है।अगर दस मापदंडों के टारगेट में अगर आपने नौ भी पा लियो हो,फिर भी आपकी खैर नहीं।नौ के लिए आपको शाबाशी नहीं मिलेगी,पर जो एक नहीं हुआ है,उसके लिए इतनी अभद्र टिप्पणी मिलेगी,कि मानो आपने कोई मापदंडों पर खड़े ही नहीं उतरे हो।मैं लगातार हो रहे टोर्चर से तंग आकर,आज सुसाइड कर रहा हूँ।मैं अपने पापा,मम्मी, बहन,पत्नी सुजाता और होनेवाले बच्चे से बहुत प्यार करता हूँ।,I love you all.Bye and take care.
Mohan
अब मोहन भाई ने यहाँ हिम्मत हारकर जान दे दिया।जहाँ उन्हें चाहिए था कि सिस्टम से जुझे,और अगर सिस्टम नहीं बदलता है,तो खुद को बदल लें।और ज्यादा तकलीफ हो तो कोई नया काम देखकर चेंज करलें।आज पैसे कमाने के ओप्संस बहुत हैं।तकलीफों से भागना आसान है,पर उससे सामना करने वालों की ही जीत तय होती है।

      

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