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17 Mar 2017

अहंकार

कोई भी मनुष्य का सबसे बड़ा काल,उसका अहंकार होता है।जिस दिन मनुष्य ने अहंकार पर विजय पा लिया,उस दिन समझो उसने ईश्वर को प्राप्त कर लिया।

आज मैं जो कहानी लेकर आया हूँ,इसमें आप देखेंगे कि मनुष्य कैसे ईश्वर को भी ढुंढ रहा है,और खुद को भी ईश्वर से कम नहीं आंक रहा है।

ये कहानी है,मनोहर की।मनोहर एक आम आदमी था।वह भगवान का बहुत बड़ा श्रद्धालु था।उसका बस दो ही काम था।सुबह से शाम तक कपड़े का धंधा करता था,और बाकी बचे समय में ईश्वर की भजन भक्ति में डूबा रहता था।

       फिर धीरे धीरे समय बदला।और समय के साथ साथ मनोहर का दिन भी बदला।मनोहर अब कपड़े का बहुत बड़ा व्यापारी हो गया था।

       जैसे जैसे उसका समय बदला वैसे वैसे ही वह ईश्वर से दूर होता चला गया।अहंकार ने उसे पूरी तरीके से जकड़ लिया था।अब वह किसी को नहीं बुझता था।

        मनुष्य जब तक तकलीफ में होता है,तब तक वह ईश्वर की भजन भक्ति में लगा रहता है।और ईश्वर को नहीं भूलता है।पर जैसे ही उसका समय बदलता है,और वह सुखी सम्पन्न हो जाता है,तब वह ईश्वर को भूल कर ऐश और आराम की जिन्दगी में व्यस्त हो जाता है।

जितनी बार मैं तेरे करीब आया

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