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17 Mar 2017

अँधियारी रात।।Andhiyari raat..

Kahani

Andhiyari raat



अँधियारी रात थी।मैं अकेला सुनसान सड़क पर रोज की भांति अपनी जोब से वापस लौट रहा था।कान में इअर फोन ठुसा हुआ था।और हनी सिंह के गाने सुनता हुआ,और उस गाने का कुछ स्टेप करता हुआ घर की ओर चला जा रहा था।
       पर  जब मैं अपनी कोलोनी में जाने के लिए सड़क पर मुड़ा,तो मुझे एक जानी पहचानी सी अवाज मेरे पीछे से सुनाई दी।मानो जैसे,किसी ने पुकारा हो,सोनू रूक ना जरा।
      मैं जब पीछे मुड़ कर देखता हूँ,तो पाता हूँ कि,बल्लू मेरा जिगरी दोस्त खड़ा है।
     मैने पूछा,क्या हुआ दोस्त,यहाँ क्यों खड़े हो?और तुम पर ये सफेद पोशाक बहुत ही जंच रहा है।बिल्कुल हीरो की तरह लग रहे हो।
      बल्लू ने कहा,कि हम अपने गाँव जा रहें हैं,तो सोचा कि तुमसे मिलते हुए चलें।
       मैने पूछा,तुम तो हमेशा गाँव अपने माँ बाबूजी के साथ जाते हो।तो आज तुम अकेले ही कैसे जा रहे हो?            बल्लू ने कहा,माँ बाबू जी जरा सा पहले निकल गये हैं,मैं तुमसे मिलने के लिए,तुम्हारा यहाँ इंतजार कर रहा था।
बल्लू की बातें सुन सुन कर पता नहीं क्यों दिल बैठा जा रहा था।मानो अगले ही पल आँसू की धारा आँखो से सैलाब बन कर निकल पड़े।
     फिर मैं बल्लू से जाकर लिपट गया,और बोला,अपना ख्याल रखना दोस्त।
फिर बल्लू ने कहा,चल यार चलता हूँ,तू भी अपना ख्याल रखना।अलविदा।


         मेरे घर से  लगभग दौ सो कदम पर बल्लू का घर आता था।
          मैं अपने घर का बेल बजाया,और तभी एक बात मेरे दिमाग में ठनका,बल्लू ने मुझे अलविदा क्यों कहा?
          मेरी बीबी शर्मिला ने गेट खोला,और मैं उसके गालों पर चुंबन देकर,हाथ पैर धोने के लिए बाथरूम में गया।
          फिर मैं डायनींग टेबल पर खाने के लिए बैठा।शर्मिला भी साथ में आकर बैठ गई।
           मैने बोला,शर्मिला तुम सो जाओ,मैं आता हूँ ,खाकर।
     शर्मिला ने कहा,मैं भी आपके साथ आज खाऊँगी।
        मैं जरा सा गुश्शा हो गया,और बोला,मेरे लिए इतनी रात तक क्यों इंतजार कर रही थी।तुम्हें खाना समय पर खा लेना चाहिए।
      शर्मिला ने हामी भर कर खाना पड़ोसा,और हमने साथ मिलकर खाना खाया।
     अगली सुबह सात बजे,मेरे मोबाईल फोन पर घंटी बजती है।मैने अधखुली आँखो से फोन के स्कृण को देखा,ये तन्मय अभी फोन क्यों कर रहा है?
      मैने फोन काट दिया।फिर से दुबारा फोन आने पर,मैं जरा सा चिड़चिड़ा कर बोला,क्या हो गया?इतनी सुबह सुबह क्यों फोन कर रहा है।
      उसने बोला,जरा सा बल्लू के घर आना,कुछ बात करनी है।
    मैं बोला,हाँ मैं आता हूँ।

कहकर फोन काट दिया।
फिर मुझे,कल रात की जोब से लौटते समय वाली घटना याद आ गई।
बल्लू तो गाँव गया है,फिर तन्मय उसके घर पर मुझे क्यों बुला रहा है?
क्या कल रात में बल्लू वापस आ गया?बहुत सारे सवाल मन में गूंज रहे थें।सारे सवालों को मन में लिए,मैं पहुँच गया,बल्लू के घर।वहाँ जाकर देखता हूँ,कि तन्मय बल्लू के घर के बाहर खड़ा है।
    तन्मय ने कहा कि हर रोज जब मैं जोगिंग कर के लौटता था,तब संतोष अंकल रोज सुबह  यहाँ पेपर पढ़ते दिखते थे,और अक्सर हम दोनो में गुप्तगू हो जाया करती थी।और इसी बहाने बल्लू से भी मुलाकात हो जाया करता था।

       पर आज जब मैं उन्हें यहाँ नहीं पाया,तो उन्हें फोन किया,तो फोन की घंटी की आवाज अंदर से आती हुई सुनाई दी,पर किसी ने उठाई नहीं।फिर मैने बल्लू को फोन किया,पर उसने भी फोन नहीं उठाई,और फोन की घंटी की आवाज फिर से घर के अंदर से आती हुई सुनाई दी।
    तन्मय की बाते सुन मैं जरा सा घड़बड़ा गया।और बोला कि कल रात को मैं बल्लू से कोलोनी के बाहर मिला था।वह...वह तो अपना गाँव जा रहा था।फिर मैने सोचा कि उसने जाते जाते मुझसे अलविदा क्यों कहा था?
       यह सोचते सोचते मेरी आँखें भर आई थी।मैने बोला,तन्मय,बल्लू हो सकता है,सोया हुआ हो।मैं फोन करके देखता हूँ।
      फिर अपने मन में,मैं ईश्वर से प्रर्थना करने लगा कि बल्लू जहाँ भी हो,सुरक्षित हो।
      पर बल्लू ने मेरे फोन को भी नहीं उठाया।और फोन की घंटी की आवाज घर के अंदर से आती हुई सुनाई दे रही थी।फिर मुझे उसकी चिंता होने लगी।और हमने पुलिस को फोन करके सारा हाल बयान किया।
       पुलिस आधे घंटे में वहाँ पहुँच जाती है।फोन ट्रेकर से पुलिस ने पता लगा लिया था,कि दोनो फोन अंदर में ही है।फिर ताबड़तोड़ दरवाजा तोड़ कर जब हम अंदर पहुँचे,तो पुलिस ने हम सभी को आदेश दिया,कि हम कोई भी समान नहीं छुएँ।

     फिर पुलिस ने एक एक करके सारे  कमरे की तलाशी ली।पर जब हम बल्लू के कमरे के अंदर गयें,तो वहाँ का दृश्य देखकर हम सभी के होश उड़ गयें,और मेरे आँखों से आँसू निकल पड़े।
     मेरा दोस्त पंखे पर बेजान सा लटका हुआ था।उसकी दोनो आँख बाहर निकली हुई थी।बगल में अंटी के मुंह से झाक सा कुछ निकला पड़ा था,और वह भी अचेत सी पड़ी हुइ थी।।और कोने में अंकल अपना एक हाथ छाती पर रखे,बल्लू को देख रहें थे।और वह भी बिल्कुल अचेत थे।
     पुलिस ने सभी की नसें चेक की और सभी को मरा हुआ घोषित किया।अंकल को शायद हर्ट अटैक आया था,और अंटी ज़हर खा कर मरी थी।

      बल्लू की उमर भी,मेरी जितनी ही थी,लगभग तीस साल।मैं और बल्लू बचपन से ही साथ साथ बड़े हुए थे।साथ में पढ़े,साथ में खेलें,साथ में ही हमने जोब भी हासिल की।पर बल्लू ने अपना जोब,कुछ महीनें में ही छोड़ दिया था।वो कंपनी,जहाँ बल्लू जोब कर रहा था,उसमें बहुत बड़ा घोटाला हुआ था।कंपनी दिवालिया होने की स्थिति में आ गई थी।सारे स्टाफ की निकासी की जा रही थी।मेरे दोस्त बल्लू को भी निकाल दिया गया था।मैं जिस कंपनी में काम कर रहा था,वहाँ नया होने की वजह से,मेरी पहचान उतनी तगड़ी नहीं हुई थी।फिर भी मैं एच आर में जाकर पूछताछ की थी।तो उन्होंने साफ साफ मना कर दिया था,कि अभी कोई वेकेन्सी नहीं है।बल्लू ने तो मानो जोब नहीं करने की जिद्ध ठान के रखी थी।वह बोलता था,जोब ओब मुझसे नहीं होगा,मैं तो बिझनेस करूँगा।
       जब बल्लू ने अपने पिता  से मदद माँगा,तो उसके पिता ने मना कर दिया था, कहा , जोब धूंढो,और मुझसे एक पैसे की उम्मीद मत रखना, कि तुम्हारे बिझनेस में एक पैसा भी मैं लगाऊँगा।बल्लू ने कभी भी मुझसे आकर मदद नहीं माँगा था।पता नहीं क्यों?और मैं भी,अपनी स्थिति को देखते हुए,आगे नहीं बढ़ा था।शायद बल्लू ने सोचा होगा,कि मेरी भी नई नई जोब है,और नई नई शादी हुई है।जिम्मेदारी बढ़ गई है।
        फिर कुछ दिनों के बाद बल्लू और उसके पापा में बहुत ज्यादा ताना तानी रहने लगा।बात यहाँ तक पहुँच गई थी,कि बल्लू ने बँटवारा करने को कह दिया था।
        बल्लू मुझसे सारी बातें शेयर किया करता था।किसी भी दिन जो हमारी मुलाकात नहीं हो पाती,तो वह सारी बातें व्हाट्स एप पर शेयर किया करता था।

        घटना वाले दिन  बल्लू बहुत ज्यादा ही तिलमिलाया हुआ था।और सुबह से ही बँटवारा करने के लिए झगड़ा कर रहा था।उसके पिता ने भी गुश्शे में आकर बोल दिया,कि वह सारा जमीन जायदाद,और धन दौलत किसी अनाथ आश्रम में दान कर देंगे,पर उसे एक पैसा भी नहीं देंगे।
       मैं बल्लू से मिलने हर दिन की तरह दोपहर एक बजे गया था।बल्लू बहुत गुश्शे में था,और अपनी जिन्दगी से तंग आ गया था।
        मैं उसे हर दिन की तरह आज भी उसे ढांढस बँधवा रहा था।और बोल रहा था,हिम्मत मत हार दोस्त,तेरे बाबू जी एक दिन ज़रूर मान जाएँगे।

       और तीन बजे जैसे की मुझे अपने जोब पर जाने के लिए घर से निकलना पड़ता है,मैं दो बजे बल्लू के घर से चला आया।
    उस दिन भी उसने आत्महत्या करने से पहले,सारी आपबीती मुझे व्हाट्स एप करके बताया था।पर उस दिन काम का इतना प्रेशर था,कि व्हाट्स एप खोल ही ना सका।
     अगले दिन पुलिस जब पोस्टमोर्टम के लिए अपने साथ सारी बडी ले गई,और मैने घर आकर जब मोबाईल पर नेट ओन किया,तो बल्लू का व्हाट्स एप मुझे मिला।जिसे पढ़कर मैं अवाक् सा रह गया।
     समय कुछ शाम के चार बज कर पाँच मिनट का था।बल्लू ने बोला,पापा आप बँटवारा कर रहें है या नहीं,मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ।

        बात बिगड़ता देख,माँ भी बिच में आ गई,और संतोष अंकल को समझाने लगी,कि जो बेटा बोलता है,कर दो ना।हमारे बुढ़ापे में,अगर इसने कुछ ऐसा वैसा कर लिया,तो हम कहीं के नहीं रहेंगे।
      संतोष अंकल ने भी चिल्ला कर कह दिया,कि ऐसा नालायक बेटा होने से अच्छा होता,कि हम निःसंतान होते।
     यह सुनकर बल्लू अपने कमरे में चला गया।पीछे पीछे माँ भी गई।बल्लू को उसकी माँ ने बहुत समझाया,कि बेटा,हम बनिये नहीं हैं,हम ठाकुर हैं।हमसे धंधा नहीं संभलेगा।देखो तुम्हारे मामा,धंधे में,घर जायदाद सबकुछ बेचकर रोड पर आ गयें हैं।
      बल्लू का मन पसंद खाना था,आलू का परांठा और टमाटर की चटनी।उसने कहा,माँ आज मुझे,आलू का परांठा खाने की बहुत इच्छा हो रही है।
       बल्लू की माँ खुशी खुशी किचन में आलू का परांठा और चटनी बनाने चली गई।बहुत दिनों के बाद बल्लू ने कुछ फरमाईश की थी,इसलिए माँ भी बहुत खुश थी।
      शाम के पाँच बज गयें थे।माँ आलू का परांठा और चटनी लिए बल्लू के कमरे में पहुँचती है।बल्लू खूब स्वाद लेकर खाता है।

       माँ पूछती है,कि रात में क्या खाएगा।तो बल्लू ने कहा,जो भी आप प्यार से बनाएँगे, वही खाएँगे।
      माँ किचन में जाकर रात के खाने की तैयारी करने लगी।
      बल्लू ने आगे लिखा,कि मैं अपनी  जिन्दगी से तंग आ गया हूँ,दोस्त।और अब जीने की आस भी नहीं रही है।मैं किसी के भी दबाव में आकर आत्महत्या नहीं कर रहा हूँ,इसके लिए  मैं खुद जिम्मेदार हूँ।मेरे माँ बाबू जी पर कोई एक्शन ना हो,इसलिए मैं ये सारी बातें, अपनी डायरी में लिखकर जा रहा हूँ।
अलविदा,मेरे दोस्त।

यह पढ़कर,मेरा दिल बैठ गया।और कल रात की मेरे दोस्त के द्वारा की गई अलविदा का मतलब अब समझ में आया।




andhiyaari raat thi।main akelaa sunsaan sdak par roj ki bhaanti apni job se vaapas laut rahaa thaa।kaan men ear phon thusaa huaa thaa।aur hani sinh ke gaane suntaa huaa,aur us gaane kaa kuchh step kartaa huaa ghar ki or chalaa jaa rahaa thaa।

       par  jab main apni koloni men jaane ke lia sdak par mudaa,to mujhe ek jaani pahchaani si avaaj mere pichhe se sunaai di।maano jaise,kisi ne pukaaraa ho,sonu ruk naa jaraa।

      main jab pichhe mud kar dekhtaa hun,to paataa hun ki,ballu meraa jigri dost khdaa hai।

     maine puchhaa,kyaa huaa dost,yahaan kyon khde ho?aur tum par ye saphed poshaak bahut hi janch rahaa hai।bilkul hiro ki tarah lag rahe ho।

      ballu ne kahaa,ki ham apne gaanv jaa rahen hain,to sochaa ki tumse milte hua chalen।

       maine puchhaa,tum to hameshaa gaanv apne maan baabuji ke saath jaate ho।to aaj tum akele hi kaise jaa rahe ho?            ballu ne kahaa,maan baabu ji jaraa saa pahle nikal gaye hain,main tumse milne ke lia,tumhaaraa yahaan entjaar kar rahaa thaa।

ballu ki baaten sun sun kar pataa nahin kyon dil baithaa jaa rahaa thaa।maano agle hi pal aansu ki dhaaraa aankho se sailaab ban kar nikal pde।

     phir main ballu se jaakar lipat gayaa,aur bolaa,apnaa khyaal rakhnaa dost।

phir ballu ne kahaa,chal yaar chaltaa hun,tu bhi apnaa khyaal rakhnaa।alavidaa।



         mere ghar se  lagabhag dau so kadam par ballu kaa ghar aataa thaa।

          main apne ghar kaa bel bajaayaa,aur tabhi ek baat mere dimaag men thankaa,ballu ne mujhe alavidaa kyon kahaa?

          meri bibi sharmilaa ne get kholaa,aur main uske gaalon par chumban dekar,haath pair dhone ke lia baathrum men gayaa।

          phir main daayning tebal par khaane ke lia baithaa।sharmilaa bhi saath men aakar baith gayi।

           maine bolaa,sharmilaa tum so jaao,main aataa hun ,khaakar।

     sharmilaa ne kahaa,main bhi aapke saath aaj khaaungi।

        main jaraa saa gushshaa ho gayaa,aur bolaa,mere lia etni raat tak kyon entjaar kar rahi thi।tumhen khaanaa samay par khaa lenaa chaahia।

      sharmilaa ne haami bhar kar khaanaa pdosaa,aur hamne saath milakar khaanaa khaayaa।

     agli subah saat baje,mere mobaail phon par ghanti bajti hai।maine adhakhuli aankho se phon ke skrian ko dekhaa,ye tanmay abhi phon kyon kar rahaa hai?

      maine phon kaat diyaa।phir se dubaaraa phon aane par,main jaraa saa chidchidaa kar bolaa,kyaa ho gayaa?etni subah subah kyon phon kar rahaa hai।

      usne bolaa,jaraa saa ballu ke ghar aanaa,kuchh baat karni hai।

    main bolaa,haan main aataa hun।


kahakar phon kaat diyaa।

phir mujhe,kal raat ki job se lautte samay vaali ghatnaa yaad aa gayi।

ballu to gaanv gayaa hai,phir tanmay uske ghar par mujhe kyon bulaa rahaa hai?

kyaa kal raat men ballu vaapas aa gayaa?bahut saare savaal man men gunj rahe then।saare savaalon ko man men lia,main pahunch gayaa,ballu ke ghar।vahaan jaakar dekhtaa hun,ki tanmay ballu ke ghar ke baahar khdaa hai।

    tanmay ne kahaa ki har roj jab main joging kar ke lauttaa thaa,tab santosh ankal roj subah  yhaan pepar pdhte dikhte the,aur aksar ham dono men guptgu ho jaayaa karti thi।aur esi bahaane ballu se bhi mulaakaat ho jaayaa kartaa thaa।


       par aaj jab main unhen yahaan nahin paayaa,to unhen phon kiyaa,to phon ki ghanti ki aavaaj andar se aati hui sunaai di,par kisi ne uthaai nahin।phir maine ballu ko phon kiyaa,par usne bhi phon nahin uthaai,aur phon ki ghanti ki aavaaj phir se ghar ke andar se aati hui sunaai di।

    tanmay ki baate sun main jaraa saa ghdabdaa gayaa।aur bolaa ki kal raat ko main ballu se koloni ke baahar milaa thaa।vah...vah to apnaa gaanv jaa rahaa thaa।phir maine sochaa ki usne jaate jaate mujhse alavidaa kyon kahaa thaa?

       yah sochte sochte meri aankhen bhar aai thi।maine bolaa,tanmay,ballu ho saktaa hai,soyaa huaa ho।main phon karke dekhtaa hun।

      phir apne man men,main ishvar se prarthnaa karne lagaa ki ballu jahaan bhi ho,surakshit ho।

      par ballu ne mere phon ko bhi nahin uthaayaa।aur phon ki ghanti ki aavaaj ghar ke andar se aati hui sunaai de rahi thi।phir mujhe uski chintaa hone lagi।aur hamne pulis ko phon karke saaraa haal bayaan kiyaa।

       pulis aadhe ghante men vahaan pahunch jaati hai।phon trekar se pulis ne pataa lagaa liyaa thaa,ki dono phon andar men hi hai।phir taabdtod darvaajaa tod kar jab ham andar pahunche,to pulis ne ham sabhi ko aadesh diyaa,ki ham koi bhi samaan nahin chhuan।


     phir pulis ne ek ek karke saare  kamre ki talaashi li।par jab ham ballu ke kamre ke andar gayen,to vahaan kaa driashy dekhakar ham sabhi ke hosh ud gayen,aur mere aankhon se aansu nikal pde।

     meraa dost pankhe par bejaan saa latkaa huaa thaa।uski dono aankh baahar nikli hui thi।bagal men anti ke munh se jhaak saa kuchh niklaa pdaa thaa,aur vah bhi achet si pdi hue thi।।aur kone men ankal apnaa ek haath chhaati par rakhe,ballu ko dekh rahen the।aur vah bhi bilkul achet the।

     pulis ne sabhi ki nasen chek ki aur sabhi ko maraa huaa ghoshit kiyaa।ankal ko shaayad hart ataik aayaa thaa,aur anti jhar khaa kar mari thi।


      ballu ki umar bhi,meri jitni hi thi,lagabhag tis saal।main aur ballu bachapan se hi saath saath bde hua the।saath men pdhe,saath men khelen,saath men hi hamne job bhi haasil ki।par ballu ne apnaa job,kuchh mahinen men hi chhod diyaa thaa।vo kampni,jahaan ballu job kar rahaa thaa,usmen bahut bdaa ghotaalaa huaa thaa।kampni divaaliyaa hone ki sthiti men aa gayi thi।saare staaph ki nikaasi ki jaa rahi thi।mere dost ballu ko bhi nikaal diyaa gayaa thaa।main jis kampni men kaam kar rahaa thaa,vahaan nayaa hone ki vajah se,meri pahchaan utni tagdi nahin hui thi।phir bhi main ech aar men jaakar puchhtaachh ki thi।to unhonne saaph saaph manaa kar diyaa thaa,ki abhi koi vekensi nahin hai।ballu ne to maano job nahin karne ki jiddh thaan ke rakhi thi।vah boltaa thaa,job ob mujhse nahin hogaa,main to bijhnes karungaa।

       jab ballu ne apne pitaa  se madad maangaa,to uske pitaa ne manaa kar diyaa thaa, kahaa , job dhundho,aur mujhse ek paise ki ummid mat rakhnaa, ki tumhaare bijhnes men ek paisaa bhi main lagaaungaa।ballu ne kabhi bhi mujhse aakar madad nahin maangaa thaa।pataa nahin kyon?aur main bhi,apni sthiti ko dekhte hua,aage nahin bdhaa thaa।shaayad ballu ne sochaa hogaa,ki meri bhi nayi nayi job hai,aur nayi nayi shaadi hui hai।jimmedaari bdh gayi hai।

        phir kuchh dinon ke baad ballu aur uske paapaa men bahut jyaadaa taanaa taani rahne lagaa।baat yahaan tak pahunch gayi thi,ki ballu ne bnatvaaraa karne ko kah diyaa thaa।

        ballu mujhse saari baaten sheyar kiyaa kartaa thaa।kisi bhi din jo hamaari mulaakaat nahin ho paati,to vah saari baaten vhaats ep par sheyar kiyaa kartaa thaa।


        ghatnaa vaale din  ballu bahut jyaadaa hi tilamilaayaa huaa thaa।aur subah se hi bnatvaaraa karne ke lia jhagdaa kar rahaa thaa।uske pitaa ne bhi gushshe men aakar bol diyaa,ki vah saaraa jamin jaaydaad,aur dhan daulat kisi anaath aashram men daan kar denge,par use ek paisaa bhi nahin denge।

       main ballu se milne har din ki tarah dopahar ek baje gayaa thaa।ballu bahut gushshe men thaa,aur apni jindgi se tang aa gayaa thaa।

        main use har din ki tarah aaj bhi use dhaandhas bnadhvaa rahaa thaa।aur bol rahaa thaa,himmat mat haar dost,tere baabu ji ek din jrur maan jaaange।


       aur tin baje jaise ki mujhe apne job par jaane ke lia ghar se nikalnaa pdtaa hai,main do baje ballu ke ghar se chalaa aayaa।

    us din bhi usne aatmahatyaa karne se pahle,saari aapbiti mujhe vhaats ep karke bataayaa thaa।par us din kaam kaa etnaa preshar thaa,ki vhaats ep khol hi naa sakaa।

     agle din pulis jab postmortam ke lia apne saath saari badi le gayi,aur maine ghar aakar jab mobaail par net on kiyaa,to ballu kaa vhaats ep mujhe milaa।jise pdhakar main avaak saa rah gayaa।

     samay kuchh shaam ke chaar baj kar paanch minat kaa thaa।ballu ne bolaa,paapaa aap bnatvaaraa kar rahen hai yaa nahin,main aakhiri baar puchh rahaa hun।


        baat bigdtaa dekh,maan bhi bich men aa gayi,aur santosh ankal ko samjhaane lagi,ki jo betaa boltaa hai,kar do naa।hamaare budhaape men,agar esne kuchh aisaa vaisaa kar liyaa,to ham kahin ke nahin rahenge।

      santosh ankal ne bhi chillaa kar kah diyaa,ki aisaa naalaayak betaa hone se achchhaa hotaa,ki ham niahsantaan hote।

     yah sunakar ballu apne kamre men chalaa gayaa।pichhe pichhe maan bhi gayi।ballu ko uski maan ne bahut samjhaayaa,ki betaa,ham baniye nahin hain,ham thaakur hain।hamse dhandhaa nahin sambhlegaa।dekho tumhaare maamaa,dhandhe men,ghar jaaydaad sabakuchh bechakar rod par aa gayen hain।

      ballu kaa man pasand khaanaa thaa,aalu kaa paraanthaa aur tamaatar ki chatni।usne kahaa,maan aaj mujhe,aalu kaa paraanthaa khaane ki bahut echchhaa ho rahi hai।

       ballu ki maan khushi khushi kichan men aalu kaa paraanthaa aur chatni banaane chali gayi।bahut dinon ke baad ballu ne kuchh pharmaaish ki thi,esalia maan bhi bahut khush thi।

      shaam ke paanch baj gayen the।maan aalu kaa paraanthaa aur chatni lia ballu ke kamre men pahunchti hai।ballu khub svaad lekar khaataa hai।


       maan puchhti hai,ki raat men kyaa khaaagaa।to ballu ne kahaa,jo bhi aap pyaar se banaaange, vahi khaaange।

      maan kichan men jaakar raat ke khaane ki taiyaari karne lagi।

      ballu ne aage likhaa,ki main apni  jindgi se tang aa gayaa hun,dost।aur ab jine ki aas bhi nahin rahi hai।main kisi ke bhi dabaav men aakar aatmahatyaa nahin kar rahaa hun,eske lia  main khud jimmedaar hun।mere maan baabu ji par koi ekshan naa ho,esalia main ye saari baaten, apni daayri men likhakar jaa rahaa hun।

alavidaa,mere dost।


yah pdhakar,meraa dil baith gayaa।aur kal raat ki mere dost ke dvaaraa ki gayi alavidaa kaa matalab ab samajh men aayaa।

Written by sushil kumar

तू ही मेरी दुनिया है। tu hi meri duniya hai.

Tu hi meri duniya hai. Shayari तकलीफ मेरे हिस्से की तू मुझे ही सहने दे। आँसू मेरे बादल के तू मुझ पर ही बरसने दे। सारे मुसीबतों क...