11 Jan 2020

आजमा कर देख लो तुम भी : Aajma kar dekh lo tum bhi

Shayari


आजमा कर देख लो तुम भी

Aajma le

मैंने झपकी क्या मारी
तुमने तो मुझे प्रतियोगिता से ही बाहर समझ लिया।
अरे भाई ये मेरा अंत नहीं
मेरा आरम्भ है
मेरे जंग की
मेरी खुद से।

तुम भले मुझे आज हरा दो
पर मैं अजय हूँ
अजय ही रहूँगा
उस लम्हें तक
जब तक कि मैं खुद ही
अपनी हार स्वीकार ना कर लूँ।

ऐसी कोई शिकस्त की वजूद
इस दुनिया में है ही नहीं
जो मेरे हौसले को चकनाचूर कर सके।
और मेरे और मेरी जीत के बीच
दीवार बन सके।
मेरी साँसे
मेरे शरीर में बहते लहू
मुझे कभी हारने देंगे ही नहीं।
चाहे तो आजमा कर देख लो
तुम भी।






mainne jhapki kyaa maari

tumne to mujhe pratiyogitaa se hi baahar samajh liyaa।

are bhaai ye meraa ant nahin

meraa aarambh hai

mere jang ki

meri khud se।


tum bhale mujhe aaj haraa do

par main ajay hun

ajay hi rahungaa

us lamhen tak

jab tak ki main khud hi

apni haar svikaar naa kar lun।


aisi koi shikast ki vajud

es duniyaa men hai hi nahin

jo mere hausle ko chaknaachur kar sake।

aur mere aur meri jit ke bich

divaar ban sake।

meri saanse

mere sharir men bahte lahu

mujhe kabhi haarne nahin de sakte।


Written by sushil kumar

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