1 Dec 2019

Waah ri kismat!

Shayari

वाह री किस्मत!

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं खुद को बदलते बदलते
दोस्तों को बदल दिया।
कुछ दुश्मन दोस्त हुए
तो कुछ बैरी नए बने।

कुछ रिश्तेदार जो पहले
अपने गलियारे से
गुजरने से हिचकिचाते थे।
आज वो अपने घोसले को भूल
हमारे नीड़ में बसेरा डाल रखे हैं।

क्या री किस्मत!
ये कैसा यू टर्न
तूने मेरे ज़िंदगी में दिखाई है।
कल जब मेरे आँखों से बहते थे सैलाब
किसी को नही आता था मेरा ख्याल।
आज छोटी से छोटी ठोकर भी जो लग जाती है
लोग आ पहुँचते है मेरे घर पर
पूछने को मेरे हालचाल।



main khud ko badalte badalte

doston ko badal diyaa।

kuchh dushman dost hua

to kuchh bairi naye bane।


kuchh rishtedaar jo pahle

apne galiyaare se

gujarne se hichakichaate the।

aaj vo apne ghosle ko bhul

hamaare nid men baseraa daal rakhe hain।


kyaa ri kismat!

ye kaisaa yu tarn

tune mere jindgi men dikhaai hai।

kal jab mere aankhon se bahte the sailaab

kisi ko nahi aataa thaa meraa khyaal।

aaj chhoti se chhoti thokar bhi jo lag jaati hai

log aa pahunchte hai mere ghar par

puchhne ko mere haalchaal।



shaayri

Written by sushil kumar








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