1 Dec 2019

Meri shahadat vyarth nahi jaegi

Shayari

मेरी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है


मेरे बहते लहू को देखकर
मेरे हिम्मत ने हुँकार आज भरा है।
नहीं छोड़ूँगा अपने वतन के दुश्मनो को
जिसने मेरी माँ पर बुरी नज़र डाला है।

भले मेरे बदन को तू छलनी कर दे
पर मेरे हिम्मत को तू छलनी ना कर पाएगा।
मेरे रहते मेरी माँ का तू
एक बाल भी ना बांका कर पाएगा।

हर रक्त के कतरे कतरे से मेरे
एक वीर नया खड़ा हो जाएगा।
जो तुम जैसों के
धूल चटाने को
सीमा पर खड़ा हो
हर्षाएगा।

जितनी बार तुम कोशिश कर लो कायरों
उतनी बार तुम मुंह की खाओगे।
अपने भारत माँ की गरिमा के वास्ते
हम सर कटाकर भी शीश ना झुकाएँगे।



mere bahte lahu ko dekhakar

mere himmat ne hunkaar aaj bharaa hai।

nahin chhodungaa apne vatan ke dushmno ko

jisne meri maan par buri njar daalaa hai।


bhale mere badan ko tu chhalni kar de

par mere himmat ko tu chhalni naa kar paaagaa।

mere rahte meri maan kaa tu

ek baal bhi naa baankaa kar paaagaa।


har rakt ke katre katre se mere

ek vir nayaa khdaa ho jaaagaa।

jo tum jaison ke

dhul chataane ko

simaa par khdaa ho

harshaaagaa।


jitni baar tum koshish kar lo kaayron

utni baar tum munh ki khaaoge।

apne bhaarat maan ki garimaa ke vaaste

ham sar kataakar bhi shish naa jhukaaange।





Shayari
Written by sushil kumar





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