6 Nov 2019

मेरे हौसले से कभी भीड़ जाना नहीं

Shayari

मेरे हौसले से कभी भीड़ जाना नहीं

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मेरे हौसले से कभी भीड़ जाना नहीं
मैं हार कभी मानने वालों में से नहीं।
तुम चाह रहे हो मुझे तोड़ने के लिए आज
कहीं चकनाचूर ना हो जाना
मुझे तोड़ते तोड़ते।

विरोधियों ने
कोशिश कर कर हारे
चाह रहे थे
मैं भटक जाऊँ 
अपने मंजिल से।
मुझे भरमाने के चक्कर में
मेरे विरोधी भटक गए
भरी दोपहरी में।

जान भले ही चले जाए मेरी
मैं नहीं थमने वाला।
अपने अटूट लक्ष्य को भेदे बिना
मैं नहीं कहीं ठहरने वाला।


Written by sushil kumar
Shayari


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