8 Nov 2019

अजब प्रेम की गजब शायरी।

Shayari

अजब प्रेम की गजब शायरी।

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जब तलक था जिंदा
तेरे चक्कर में ना जाने कहाँ कहाँ
भटकता रह गया।
आज मिट्टी में मिल जाने के बाद भी
एक खुशबू बन
तेरे जुल्फों में कैद होकर रह गया।

मुझे नहीं था पता
मेरी रूह कब की
तेरे रूह से जुड़ चुकी थी।
आज चोट तुझे लगती है
दर्द असहनीय मेरा हो जाता है यहाँ।

इसलिए कहता हूँ
जरा संभल कर चला कर
जीवन के पथ पर।
रस्ते में पड़े हुए हैं
छोटे बड़े कंकर।
वरना मेरे मरने की सिलसिलों में
नहीं आएगी कभी कमी।
जितनी बार चोट तुझे लगेगी
उतनी बार मौत आएगी मेरी।

Written by sushil kumar
Shayari

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