27 Nov 2019

Apna ghar,apna ghar hi hota hai.

Shayari

अपना घर,अपना घर ही होता है।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


बहुत दिन हुआ रहते हुए
अपने इस कमरे में ।
क्यों ना अपने इस कमरे से
बाहर निकल कर देखें हम।

लोग जो कहते थकते नहीं हैं
उनके दुनिया के बारे में।
क्यों ना उनकी दुनिया में एक बार
कदम जमा कर देखे हम।

कुछ तो सच्चाई होगी
उनके संसार की।
क्यों ना उनके संसार में
अपना दिल रमा कर देखे हम।

अगर जो मन लग गया
तो कुछ देर वहाँ ठहर जाएँगे।
वरना कुछ भी हो
बाद में अपने घर को ही वापस आएँगे।
Apna ghar







bahut din huaa rahte hua

apne es kamre men ।

kyon naa apne es kamre se

baahar nikal kar dekhen ham।


log jo kahte thakte nahin hain

unke duniyaa ke baare men।

kyon naa unki duniyaa men ek baar

kadam jamaa kar dekhe ham।


kuchh to sachchaai hogi

unke sansaar ki।

kyon naa unke sansaar men

apnaa dil ramaa kar dekhe ham।


agar jo man lag gayaa

to kuchh der vahaan thahar jaaange।

varnaa kuchh bhi ho

baad men apne ghar ko hi vaapas aaange।


Shayari
Written by sushil kumar






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