8 Nov 2019

ऐ जिंदगी!

Shayari

ऐ जिंदगी!

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ऐ जिंदगी!
बस भी करना।
अब और कितना सताओगी।
मैं आशिक हो गया हूँ
तेरे त्रास का
तेरे जुल्मो सितम को
लगातार सहते हुए।

अब तो कांटो भरे जीवनपथ पर
चलने की आदत सी हो गई है।
और मुझे अब तुझसे
कोई हमदर्दी की उम्मीद भी नहीं जगी है।
उल्टा मुझे तेरी वेदनाओं से इश्क सा हो गया है।
और मैं तेरे
अगले पग पर आने वाली सरप्राइज को
सोच सोच कर हर्षित हो रहा हूँ।

ऐ जिंदगी!
बस भी करना।
अब और कितना सताओगी।
मैं आशिक हो गया हूँ
तेरे त्रास का
तेरे जुल्मो सितम को
लगातार सहते हुए।

जब कभी सुबह से शाम
बिना किसी तकलीफ के
निकल जाती है।
सर चढ़कर इश्क़ मेरा
याद उसे बेपनाह करने लगता है।
बिना कोई तकलीफ के आए
नींद कहाँ मुझे आती है।

ऐ जिंदगी!
बस भी करना।
अब और कितना सताओगी।
मैं आशिक हो गया हूँ
तेरे त्रास का
तेरे जुल्मो सितम को
लगातार सहते हुए।


Written by sushil kumar
Shayari

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