26 Sep 2019

Uth khada ho.

Shayari

उठ खड़ा हो।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरे तुम्हारे जेहन में
बहुत हैं ऐसे सवाल?
क्यों उपनाम अम्बानी का हुआ इतना विशाल??
क्यों टाटा परिवार को जानते हैं हम सभी आज??

ये कोई एक दो दिन की नहीं है छोटी बात।
बरसों की तपस्या से मिली है उन्हें प्रसाद।
बहुत फर्क पड़ता है
क्या है तुम्हारी सोच?
अम्बर स्पर्श करना हो
तो धरती से ऊपर तो उठ।

झुंड में जो चलने की आदत है
 तो नही है तेरी औकात।
किनारे खड़े रहकर केवल तू
अपने भाग्य पर कर सन्ताप।

बहुत रो लिया
कर लिया अपने किस्मत पर रोष।
उठ खड़ा हो।
जो पाना है
हिमालय की ऊँची चोटी को।

इतना डरा क्यों है?
तरंगों की वेग तेज देखकर।
मोती मिलेगी
तू गोता मार।
मन में दृढ़ विश्वास
रखकर।

असफलताओं से घबड़ा कर कहीं
मंजिल से भटक ना जाना तुम।
सभी को छोड़ते देख तुम
उनके संग ना निकल जाना तुम।
हर हार से एक नई ऊर्जा
तुम अपने अंदर जगा लो यूँ।
अगले कदम पर मंजिल खड़ी हो
तुम्हारी जीत की तुम्हें बधाई देने को।











mere tumhaare jehan men

bahut hain aise savaal?

kyon upnaam ambaani kaa huaa etnaa vishaal??

kyon taataa parivaar ko jaante hain ham sabhi aaj??


ye koi ek do din ki nahin hai chhoti baat।

barson ki tapasyaa se mili hai unhen prsaad।

bahut phark pdtaa hai

kyaa hai tumhaari soch?

ambar sparsh karnaa ho

to dharti se upar to uth।


jhund men jo chalne ki aadat hai

 to nahi hai teri aukaat।

kinaare khde rahakar keval tu

apne bhaagy par kar santaap।


bahut ro liyaa

kar liyaa apne kismat par rosh।

uth khdaa ho।

jo paanaa hai

himaalay ki unchi choti ko।


etnaa daraa kyon hai?

tarangon ki veg tej dekhakar।

moti milegi

tu gotaa maar।

man men dridh vishvaas

rakhakar।


asaphaltaaon se ghabdaa kar kahin

manjil se bhatak naa jaanaa tum।

sabhi ko chhodte dekh tum

unke sang naa nikal jaanaa tum।

har haar se ek nayi urjaa

tum apne andar jagaa lo yun।

agle kadam par manjil khdi ho

tumhaari jit ki tumhen badhaai dene ko।



Written by sushil kumar

Shayari

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