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लोग आज बदल गए हैं।

लोग आज बदल गए हैं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


लोग आज बदल गए हैं।
अपनी सफलता को भूल
दूसरे की असफलता पर जश्न मनाने से
कहाँ चूक रहे हैं लोग।
दुसरो के दुख को देख
आनन्द से गद गद हुए जा रहे हैं ये लोग।

वाकई में
लोग आज बदल गए हैं।

अपनी स्त्री की सुंदरता पर
कभी मोहित हो जाने वाला पति।
उसकी सुंदरता का बखान करते
ना थकने वाला पति।
आज चुप है।
क्यों?
क्योंकि उसे आज दुसरो की स्त्री
ज्यादा आकर्षित करने लगी हैं।
वो सात जन्मों का साथ निभाने का
कभी वादा किया था।
एक जन्म में ही ऊबते दिख रहे हैं लोग।

लोग आज बदल गए हैं।

दूसरों की छोटी सी कुटिया को भी देखकर
उसे उसके महल को टक्कर दे रहे हों
ऐसा सोचकर जल भून जाते हैं।
उसे उस कुटिया में रहने वाले लोग
ज्यादा खुश और सन्तुष्ट नज़र आते हैं।
और उसे ये बर्दास्त से बाहर हो जाता है
और उस कुटिया को बर्बाद करने को
आतुर से दिखते हैं लोग।

सच में।
लोग आज बदल गए हैं।

अपने बच्चे की भूल को छिपाने को
लोग आज कत्ल करने में भी
कहाँ हिचकिचा रहे हैं?
खून तो लोग ऐसे बहा रहे हैं।
मानो पानी से भी सस्ती हो चुकी हो आज।

लोग आज बदल गए हैं।

अपना हिस्सा पाने को
बेटा बाप का
भाई भाई का
रक्त से नहाने में संकोच नहीं कर रहा है।
मानवता का निशान
दुनिया से आज मिटता हुआ
आभास हो रहा है।

सही में।
लोग आज सही में बदल गए हैं।


Written by sushil kumar

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