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माँ का विश्वास।।

माँ का विश्वास।


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सारी दुनिया चाहे इधर से उधर हो जाए
चाँद दिन में निकल आए
और सूरज सुबह में डूब जाए।
पर एक इंसान है इस जग में
जो अभी भी एक दृढ़ उम्मीद की लौ  है
मन में जगाए।
कि मेरा लाल!
मेरा बेटा!
एक दिन सफलता की ऊँचाइयों को जरूर छूएगा।
वो कोई और नहीं।
तुम्हारी माँ है।

चाहे लाख जग वाले
उसे ये विश्वास है दिलाए।
तेरा बेटा नालायक है।
किसी काम का नहीं है माँए।
पर उसके आस्था को
कहाँ से कोई हिला पाए।
क्योंकि उसे पता है।
उसका छोरा लाखों में एक है।
वो कोई और नहीं
तुम्हारी माँ है।

तू कोशिश कर कर के
परेशान हुए जाए।
सफलता के किनारे को छूते छूते
छूट जाए।
और तू डगमगाते हुए जो
घर पहुँच जाए।
पर तेरी माँ का
तेरे पर यकीन देख
तेरा हौसला के पंख
फिर से फड़फड़ाए।
और फिर क्या?
तेरे लगन और मेहनत के संग
तेरी माँ के दुआ का मेल हो जाए।
कामयाबी तेरे कदम चूमने को
अधीर हो छटपटाए।

ये कुछ और नहीं।
तेरी माँ का ही जादू है।



Written by sushil kumar

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