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ए दोस्त।

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ए दोस्त
कभी भी किसी से
दिलोजान से प्यार ना करना।
जो प्यार जो करना
तो रब से ये फरियाद जरूर करना।

कि जो ऐसा प्यार
तूने मेरे झोली में जो डाली है।
लख लख शुक्र है तेरा
जो तेरी छवि
मेरे महबूब में नज़र आई है।

बस एक आखिरी दुआ
मेरा कबूल करले मेरे मौला तू।
कभी भी मुझे उससे
जुदा करने की ना सोचना तुम।
वरना वो पल
आखिरी क्षण होगी मेरे जीवन की।
जिस दिन रुख्सत होगी
मेरे दिल से जान मेरी।


Written by sushil kumar

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