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मैं तो हार चुका था।

मैं तो हार चुका था।

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मैं तो हार चुका था
ये आखिरी चाल औपचारिकता मात्र थी।
ये हार
केवल एक हार नहीं।
बल्कि कुछ सबक सिखाने वाली थी।
कुछ चाले समझी थी
पर अभी भी
बहुत कुछ समझना बाकि था।
और बहुत कुछ परखना भी बाकि था।

पर जीत की तलब मेरे दिल में
बहुत जोर पकड़ रखी थी।
मंजिल को पाने की ललक में
प्रयासों को मैने और भी तेज कर दी।
भूख प्यास
दिन रात का कुछ भी ख्याल ना रहा।
बस कुछ ध्यान था
तो वो बस मेरे लक्ष्य का।
ऐसी स्थिति जो हो जाए
तो समझ लेना कि
तुम्हारी मंजिल तुम्हें मिलनी वाली है।



Written by sushil kumar


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