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सामना करना सीखो।


सामना करना सीखो।

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मैं स्वयं के सवालों में कुछ ऐसा जा घिरा।
मानो अभिमन्यु कौरवों के चक्रव्यूह में जा फँसा।
हर सवाल मेरे अस्तित्व को था झकझोर रहा।
मेरी परछाई भी मेरा साथ मानो था छोड़ रहा।
पर मैं भी अपने जिद्द पर अडिग खड़ा रहा।
हर चुनौती को मैने सहज स्वीकार किया।
आज जो मैं डरकर कहीं छुप भी गया।
कल मैं स्वयं से नज़र कैसे मिला पाऊँगा??


Written by sushil kumar




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