Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

वतना मेरे वतना वे।

वतना मेरे वतना वे

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


वतना मेरे वतना वे
तेरा इश्क़ मेरे सर चढ़ चढ़कर बोल रहा है।
एक जन्म क्या है
मेरे वतना
मैं लाखो जन्म तेरे उल्फ़त में कुर्बान कर दूँ।
ये कैसा पागलपन है?
ये कैसा दीवानापन है?
मुझे नहीं पता।
अपने लहू से तिलक करने को
तेरे तिरंगे में लिपट जाने को
तेरी मिट्टी में समा जाने को
तेरे हवाओं में घुल जाने को
पुनः तेरे मिट्टी रूपी गोद में जन्म लेकर
तेरे चरणों में पुनः बलिदान होने को
मैं आतुर हूँ माँ।
मैं आतुर हूँ।

जब एक माँ को छोड़
दूसरे माँ के पास गाँव जाता हूँ।
दिल तड़प उठता है
उस बिछड़न के सोच मात्र से।
मैं काँप उठता हूँ।
कि माँ तेरी रक्षा में
तेरा ये सपूत नहीं रहेगा
सरहद पर।
कहीं मेरा सपना व्यर्थ ना चला जाए।
कहीं मैं वो अवसर खो ना दूँ।
कहीं मेरे अरमान धूल में ना मिल जाए।
मैं तेरी रक्षा करते करते
अपने खून के कतरे कतरे से
तेरा स्नान कराना चाहता हूँ माँ।
दुश्मनो के दिलो में अपनी वीरता का
खौफ पैदा कर जाना चाहता हूँ माँ।
कि उनके कदम थर थर्रा जाए
जो उनके नापाक कदम
कभी हमारी धरती पर पड़े
जो माँ।
वन्दे मातरम।।
जय हिंद।।
जय भारत।।

Written by sushil kumar


३७० धारा से आज़ादी।सम्पूर्ण भारत की पूर्ण आज़ादी।

३७० धारा से आज़ादी।सम्पूर्ण भारत की पूर्ण आज़ादी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

370


क्या बताएँ !
आज एक बार फिर से
देश की जय जयकार करने को
दिल कर रहा है।

क्या बताएँ !
आज एक बार फिर से
देश के लिए अभिमान करने को
दिल कर रहा है।

जय हिंद तो बस एक अभिव्यक्ति है
पर अनगिनत सलामी
और अनगिनत नमन
एक सैलाब बन
आज भारत माँ के चरण को अनगिनत बार स्पर्श करने
दिल मचल रहा है।

ऐसा लग रहा है
कि आज इस मिट्टी के गुलाल में रंग कर
एक हो जाऊँ।
उस मिट्टी में समा जाऊँ।

आज लाखों शहीदों की कुर्बानी की
जीत का दिन है।
उनकी फतह के जश्न का दिन है।
आज भारत माँ का
अपने सपूतो पर गर्व करने का दिन है।

भले देश आजाद हो गया था हमारा
उन्नीस सौ सैंतालीस में।
पर भारत माँ के शीश पर पर ३७० धारा लगा
एक घिनौनी राजनीति रचाई थी
कुछ गद्दारों ने।

कितने सपूतो की कुर्बानियों की वजह से
आज ये दिन हम देख पाए हैं।
हमारे वीर मोदी और शाह ने
ये करिश्माई कारनामा कर दिखाए हैं।
यही अच्छे दिन देखने को इन्हें हम
सत्ता में लेकर आए हैं।

बहुत जगह कुछ गद्दारो ने
अपने फन भी उठाए हैं।
पर कोई बात नहीं
आज भोंक लो
जितना भोंकना है।
आने वाले दिनो में
तुम्हारी तेरहवी की तैयारी है।


Written by sushil kumar

आप क्या हो????

आप क्या हो???

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


तुम मुझे मारते रहो
मुझे कुछ परवाह नहीं।
मुझे तबाह करते रहो
मेरे अस्तित्व को नेस्तनाबूद कर दो
पर मैं उफ़ तक नहीं करूँगा।
मैं सहता रहूँगा।
मैं देखना चाहूँगा तुम्हारी हद
कि किस हद तक तुम मुझे बर्बाद कर सकते हो।
जब तुम थक जाओगे
तब तुम खुद ही रुक जाओगे।
पर मैं तुमपर पलटवार कभी नहीं करने वाला।
क्योंकि मैं गांधी हूँ।😡

तुम्हारे हर हमले का जवाब दूँगा
मेरा अगर लहू का एक बूंद गिरा
मैं तुम्हें लहू लुहान कर दूँगा।
तुम्हें बर्बाद करके रख दूँगा।
कि अगली बार
कोई हमपर हमले करने की सोच से भी डर जाए।
क्योंकि मैं सुभाषचंद्र बोस हुँ।😳

मैं तो सुभाष हूँ।
मैं गांधी नहीं
जिसकी अहिंसा वाली सोच के चलते
हम इतने कायर ना हो जाएँ
कि हम अपने अस्तित्व को खंगालने को मजबूर हो जाएँ।
ईंट का जवाब पत्थर से देना हमें पसन्द है।
और हम चुप रहकर सहने वालो में से नहीं।
बल्कि अपनी गर्जना से संसार को हिलाने वालो में से हैं।
मैं सुभाष हूँ, मैं चन्द्रशेखर आज़ाद हूँ, मैं बिस्मिल हूँ।
पर गांधी कभी नहीं।

आप क्या हो???

Written by sushil kumar

राष्ट्रपिता या ?????

राष्ट्रपिता या ?????


kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



वो क्रांति की ज्वाला जगा गया था
पर कुछ देशद्रोहियों ने उसे बुझा डाला।
अपनी राजगद्दी बचाने के खातिर
फिर कुछ मीर जाफर ने खेल रचा डाला।

बना डाला उसे राष्ट्रपिता
जो मुसलमानों के खैरियत की सदा सोचता रहा।
बना डाला पाकिस्तान
और हमारे मातृभूमि के विभाजन का एक मात्र कारण बना।
गणेश विद्यार्थी को मारने वाले मुसलमानों को
कभी अहिंसा का पाठ पढ़ाया था नहीं उसने।
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत को
रोकने के लिए हाथ कभी बढ़ाया नहीं था उसने।
स्वयं को निष्पक्ष, अहिंसावादी मानने वाला
क्या उसने कभी हिंदुओ के दर्द को समझा था कभी।
लाखों हिंदुओं का कत्लेआम हुआ था पाकिस्तान में
माँ बहिनों की इज़्ज़त सरेआम नीलाम हुआ था कभी।
पर शिकन उसके चेहरे पर एक तनिक भी नहीं दिखी थी ।
क्योंकि शायद ये अहिंसा का खुलेआम प्रचार जो हुआ था।
अहिंसा का पाठ केवल हिंदुओ के लिए था
मुसलमान तो सदा अहिंसावादी ही रहे थे।
राष्ट्रपिता शब्द का अपमान हुआ था उसदिन
जिसदिन ये उपनाम उसके नाम के आगे लगा था।


Written by sushil kumar

वतना मेरे वतना वे।

वतना मेरे वतना वे kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। वतना मेरे वतना वे तेरा इश्क़ मेरे सर चढ़ चढ़कर बोल रहा है। एक जन्...