1 Jul 2019

मैं हारा नहीं,हराया गया था।

Shayari

मैं हारा नहीं,हराया गया था।

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मैं हारा नहीं
हराया गया था।
मैं जिंदा ही कब्र में
दफनाया गया था।
नही थी अब मुझे
जीने की इच्छा।
मृत सय्या से उठने की
अब नही थी मेरी ईप्सा।
बेगानो से नहीं
हमे अपनो से थी शिकवा।
जो बिच महफ़िल में
हमें पराया बनाए हुए थे।
मैं हारा नहीं
हराया गया था।

Written by sushil kumar

Shayari

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