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सुबह की नींद।।

सुबह की नींद।।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


रात को भले जल्दी सो जाऊँ
पर सुबह की नींद गजब की प्रिय होती है।
चाह कर भी आँखे नही खोल पाता हूँ।
आलस मानो मुझे अपनी बाहों में जकड़
उठने का मौका ही नही देना चाहती है।
और मैं नींद के आगोश में
सारी दुनियादारी भूल
मीठे मीठे सपनो का आनन्द ले रहा हूँ।


Written by sushil kumar

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