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हार जीत तो लगी रहती है।

हार जीत तो लगी रहती है।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


लोगों ने मुझे लताड़ा
बात बात पर फटकारा।
पर मैं चुप रहा।

कभी किसी ने गाली दी
तो कभी किसी ने हाथ उठाया।
पर मैं चुप रहा।

सहने की आदत
बचपन से जो लगी थी।
शराब पीकर बाप
मुझे रोज पीटता था।
माँ अक्सर मुझे समझाया करती थी
जो तू सह लिया
तो समझ तू ये जीवन का जंग जीत लिया।

जीवन है दुख और क्लेशो की छाया
अगर बड़ा कुछ पाना है तो
कर्म पर ध्यान दो मेरे भ्राता।

हार जीत तो लगी रहती है।

Written by sushil kumar

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