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कटु सत्य।

कटु सत्य।

Kavitadilse.top द्वारा आलस भी पाठको को समर्पित है।


मैं जन्म लिया जब
अपनी माँ के कोख से।
कोई नाम लिखवाकर ना आया था संग में।
कह दिया जो प्यार से मेरी माँ ने
वही नाम पड़ गया मेरा जीवन भर।
असल में देखा जाए तो 
हम सब हैं मानव।
नाम से कुछ फर्क नहीं पड़ता है।
अपनी आयु साथ लेकर आए हैं हम सभी।
बस अपना किरदार निभाना बाकी है।
कोई हमारा मित्र बनेगा
कोई शत्रु बनेगा यहाँ हमारा।
सभी अपने किरदार में रहेंगे
मालिक ही हमारा भाग्यविधाता है।
उसके आदर्शों पर जो हम चलेंगे।
ज्यादा सुकून से कट जाएगी जिंदगी।
वरना रोना धोना लगा ही रहेगा।
चाहे जितने जन्म लेलो मानव की।

Written by sushil kumar

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