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धोनी :-एक आखिरी उम्मीद।।

धोनी :-एक आखिरी उम्मीद।।

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मैं ही एक आखिरी उम्मीद था
मैं ही उन सबका पीर था।
मैने भी कसम खाई थी उसदिन
नहीं झुकने दूँगा सर अपने वतन का।
कोशिश तो मैने पुरजोर किया था
दुश्मनो के खेमे को झकझोर दिया था।
जीत अपने झोली में गिरने ही वाली थी
पर तब जो घटा वो सब हमारे हाथ में नहीं था।
अनहोनी को होनी करने फिर चल पड़ा था मैं धोनी
पर ऐसा लगा किसी ने मुँह से मेरे निवाला छीन लिया था।
मैं हैरान था,परेशान था।
था मैं खुद पर गुस्सा।
शीशे की भाँति टूट चुका था
बिखरा पड़ा था मेरा हिस्सा।
एक एक पग बढ़ाना भारी पड़ रहा था
आँखों से अश्रुओं को थामना मुश्किल पड़ रहा था।
ऐसा आभास मुझे हो रहा था
क्यों नहीं निगल जाती है
मुझे ये वसुंधरा।

Written by sushil kumar

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