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मानवता एक अनमोल रत्न है।इसे खोना यानी ईश्वर को खोना है।

मानवता एक अनमोल रत्न है।इसे खोना यानी ईश्वर को खोना है।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठको को समर्पित है।

मेरी औकात से मुझे कोई वाकिफ करवा सकता नहीं।
मेरे जीने की हाल से मेरी हैसियत का पता कोई लगा सकता नही।
भले आज मेरे पास खाने को अच्छे खाने नहीं
और पहनने को महंगे कपड़े नहीं है।
पर कोई भी मेरे जज्बे और सोच पर
ताला लगा सकता नहीं।
मैने आज शुरू की है चलना अपने ज़मीन से
तो किसी को मेरी तवज्जो नहीं।
कल जब मैं छू लूँगा आसमान की बुलंदियों को
तो अनजानों को भी मेरी अच्छे सेहत को लेकर होगी फिक्र मेरी।
ऐसा नहीं कि आज मैं अपने फ़टे चिते हालात देख बहुत खुश नहीं हूँ।
पर चोट तब लगती है जब किसी जरूरतमंद को नहीं मिलती है कोई अहमियत कहीं।
इंसान ने यहाँ इंसान को तौला है उसकी हैसियत देखकर।
क्या मौला तुम्हें कभी बख्शेगा जन्नत
तुम्हारी ये हरकत देखकर।
इंसानियत की चोला से बड़ा आज कोई चोला नहीं
सभी की भलाई हो जिससे, वैसे ही कदम बढ़ाने को है हमें।

Written by sushil kumar

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