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माँ मेरी।।

माँ मेरी।

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Maa meri


मैं रहूँ कहीं भी इस जहाँ में
रहूँगा तो तेरा ही अक्स बनकर।
मेरे खुद का क्या वजूद था
इस जहाँ में?
मेरे को सँवारा था तुमने ही
सुसंस्कारों से।
तेरे दिए संस्कार के वर्चस्व पर
अगर कुछ पाऊँगा भी तो
तेरे ही चरणों में वो अर्पित होगा।
भले कामयाबी की बुलन्दी को भी छू लूँगा
इस जहाँ में।
भले महफ़िल में मेरे नाम की चर्चा रहेगी
हर जुबान पे।
पर आखिर में जीत किसी की हुई
तो वो तेरी है
माँ मेरी।

Written by sushil kumar

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