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कभी चले थे साथ साथ

कभी चले थे साथ साथ।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




कभी चले थे साथ साथ
आज राह बदल गए हैं।
मंजिल बदल गई है
अपना पड़ाव बदल गया है।

कुछ लम्हें वो मीठे पलों के
जो उनके साथ में बिताए थे।
कुछ गुदगुदाने वाले
तो कुछ रुलाने वाले
मैं अपने संग ले आया हूँ।
उन खट्टे मीठे एहसास के क्षणों को
अपने कांख में दबा लाया हूँ।

जो याद आएगी कभी उनकी
कभी अश्रु की धारा जो नहीं रुकेगी।
खोल लूँगा अपनी यादों के पटों को
कुछ देर तो उनकी आघोष में जी लूँगा।
कुछ देर ही सही
पर अपने जीवन के कुछ पल
तो जी लूँगा।

जी लूँगा!
जी लूँगा!
अकेला जी लूँगा!

Written by sushil kumar

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