30 Jun 2019

Mehnat kabhi bekar nahin jati hai.

Shayari

मेहनत कभी बेकार नही जाती है।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


भले तुम मुझे करो पराजित
भले चारो खानों करो चित मुझे।
मेरी ताकत मेरी सोच में है
उसे कैसे तुम करोगे परिवर्तित।

मैंने कभी भी हार नही मानी
मन में रखी है एक अटल विश्वास।
आज के दिन तुम्हारी मेहनत रंग लाई है
कल के दिन चमकेगा मेरा अकाश।






bhale tum mujhe karo paraajit

bhale chaaro khaanon karo chit mujhe।

meri taakat meri soch men hai

use kaise tum karoge parivartit।


mainne kabhi bhi haar nahi maani

man men rakhi hai ek atal vishvaas।

aaj ke din tumhaari mehanat rang laai hai

kal ke din chamkegaa meraa akaash।



Written by sushil kumar

Shayari

29 Jun 2019

Mera din bhi aa hi gaya.

मेरा दिन भी आ ही गया।

Adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं बचपन से ही ऐसा ही हूँ,बिल्कुल शांत,खुद में ही सिमटा हुआ।भले पड़ोसी में रहने वाला संदीप पूरे इलाके में टॉप किया हो,पर मुझे उससे कुछ फर्क नहीं पड़ता था।अब आप बोलोगे,ऐसा कैसे और क्यों?अब मेरी सुनो,आज उसका दिन था,उसने टॉप किया,कल आने वाला दिन मेरा होगा, उस दिन मैं टॉप करूँगा।बी पॉजिटिव:-मेरी सोच में भी थी और मेरे खून में भी ।हुम्!
पर वो कल के इंतज़ार में काफी समय निकल गया,पर वो कल नहीं आया।पर आज भी मैं हिम्मत नहीं हारा हूँ।और आज मैं एक स्ट्रगलिंग एक्टर हूँ।जो छोटे मोटे एड करने को दूसरे स्त्रगलर्स से भिड़ता रहता है।आज ही सुबह सुबह मैं बेड पर सोया हुआ था,कि मेरी फोन की घण्टी बजी।
हेलो
हाँ अकरम बोल रहा हूँ,किंग से।
मै :-हाँ बोलो सर।
अकरम:-एक एड करना है,करेगा।
मैं:-हाँ ना सर करूँगा।
अकरम:- नहीं करेगा!
मैं:- करूँगा सर।
अकरम:- एक घण्टे में घाटकोपर के राजू स्टूडियो में पहुँच।
मैं:- आता हूँ ना सर।

में फटाफट तैयार हो पहुँच गया स्टूडियो,वो भी दस मिनट पहले।
यहाँ अकरम भाई कौन हैं।
रिसेप्शनिस्ट: क्या काम है।
मैं: में कार्तिक।आज उनका फोन आया था।कुछ एड करने को बुलाया था।
रिसेप्शनिस्ट: ओके!प्लीज सीट।
मैं:- वहाँ लगे सोफे सेट पर बैठ गया।
रिसेप्शनिस्ट:- कार्तिक सर,अंदर जाइए।
मैं अंदर पहुँचा।
अकरम:-कार्तिक प्लीज कम।
फिर अकरम ने मुझे सारा सीन समझाया।
सीन कुछ ऐसा था।मेरे मोबाइल का रिंगटोन बजता है।में फोन उठाता हूँ।

मेरा दिन आ ही गया।

Adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


।अनजान आदमी:- सर मेरा गधा गढ्ढे में गिर गया गया है।उसे बचा लीजिए।आप सारी दुनिया की मदद करते हैं।मेरे गधे की भी मदद कर दीजिए।
मैं पहुँच जाता हूँ,शक्तिमान की भाँति, चक्कर मारते मारते।और अपने शर्ट को खोल उसके एक बाँह से गधे को बाँधता हूँ और दूसरा बाँह पकड़कर गढ्ढे से बाहर आ जाता हूँ।फिर ज़ोर लगा गधे को बाहर खींच लेता हूँ।
वो अनजान आदमी मेरे पैर पर गिर जाता है,और मुझे बहुत बहुत शुक्रिया बोलने लगता है।पर मैं उसे उठता हूँ और अपने बैग से एक नया बनियान देता हूँ।और कहता हूँ,तुम भी किंग बनियान ही पहना करो और अपने अंदर की शक्ति और ऊर्जा को बढ़ाओ।
उस एड में मेरी एक्टिंग काफी पसंद की गई थी।और मुझे एक बच्चों के शो का ऑफर आया।में बहुत की खुश था,कि आखिरकार मेरा भी दिन आ ही गया।








main bachapan se hi aisaa hi hun,bilkul shaant,khud men hi simtaa huaa।bhale pdosi men rahne vaalaa sandip pure elaake men tap kiyaa ho,par mujhe usse kuchh phark nahin pdtaa thaa।ab aap bologe,aisaa kaise aur kyon?ab meri suno,aaj uskaa din thaa,usne tap kiyaa,kal aane vaalaa din meraa hogaa, us din main tap karungaa।bi pajitiv:-meri soch men bhi thi aur mere khun men bhi ।hum!

par vo kal ke entjaar men kaaphi samay nikal gayaa,par vo kal nahin aayaa।par aaj bhi main himmat nahin haaraa hun।aur aaj main ek stragaling ektar hun।jo chhote mote ed karne ko dusre stragalars se bhidtaa rahtaa hai।aaj hi subah subah main bed par soyaa huaa thaa,ki meri phon ki ghanti baji।

helo

haan akaram bol rahaa hun,king se।

mai :-haan bolo sar।

akaram:-ek ed karnaa hai,karegaa।

main:-haan naa sar karungaa।

akaram:- nahin karegaa!

main:- karungaa sar।

akaram:- ek ghante men ghaatkopar ke raaju studiyo men pahunch।

main:- aataa hun naa sar।


men phataaphat taiyaar ho pahunch gayaa studiyo,vo bhi das minat pahle।

yahaan akaram bhaai kaun hain।

risepshanist: kyaa kaam hai।

main: men kaartik।aaj unkaa phon aayaa thaa।kuchh ed karne ko bulaayaa thaa।

risepshanist: oke!plij sit।

main:- vahaan lage sophe set par baith gayaa।

risepshanist:- kaartik sar,andar jaaea।

main andar pahunchaa।

akaram:-kaartik plij kam।

phir akaram ne mujhe saaraa sin samjhaayaa।

sin kuchh aisaa thaa।mere mobaael kaa rington bajtaa hai।men phon uthaataa hun।

meraa din aa hi gayaa।

Adhmari khwahish dvaaraa aap sabhi paathkon ko samarpit hai।


।anjaan aadmi:- sar meraa gadhaa gadhdhe men gir gayaa gayaa hai।use bachaa lijia।aap saari duniyaa ki madad karte hain।mere gadhe ki bhi madad kar dijia।

main pahunch jaataa hun,shaktimaan ki bhaanti, chakkar maarte maarte।aur apne shart ko khol uske ek baanh se gadhe ko baandhtaa hun aur dusraa baanh pakdakar gadhdhe se baahar aa jaataa hun।phir jor lagaa gadhe ko baahar khinch letaa hun।

vo anjaan aadmi mere pair par gir jaataa hai,aur mujhe bahut bahut shukriyaa bolne lagtaa hai।par main use uthtaa hun aur apne baig se ek nayaa baniyaan detaa hun।aur kahtaa hun,tum bhi king baniyaan hi pahnaa karo aur apne andar ki shakti aur urjaa ko bdhaao।

us ed men meri ekting kaaphi pasand ki gayi thi।aur mujhe ek bachchon ke sho kaa auphar aayaa।men bahut ki khush thaa,ki aakhirkaar meraa bhi din aa hi gayaa।


Written by sushil kumar

28 Jun 2019

Jaanlewa ishq

Shayari

जानलेवा इश्क़।

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मैं चाहता हूँ
तेरे पास आना
तेरे करीब आकर
अपना प्यार जताना।
पर अक्सर गलत पाता हूँ खुद को
चाहकर भी प्यार ना जता पाता हूँ तुझको।

क्योंकि जब भी नजदीक तेरे आने की
कोशिश करता हूँ
लहू लुहान सा हो जाता हूँ।
तेरे वचन प्रचंड अंगारों की भाँति
मुझे जलाने को
आतुर सी दिखती है हमेशा।
चाहती है मुझे भस्म करने को
मेरे अस्तित्व को मिटता देखना
शायद मकसद है उसका।





main chaahtaa hun

tere paas aanaa

tere karib aakar

apnaa pyaar jataanaa।

par aksar galat paataa hun khud ko

chaahakar bhi pyaar naa jataa paataa hun tujhko।


kyonki jab bhi najdik tere aane ki

koshish kartaa hun

lahu luhaan saa ho jaataa hun।

tere vachan prachand angaaron ki bhaanti

mujhe jalaane ko

aatur si dikhti hai hameshaa।

chaahti hai mujhe bhasm karne ko

mere astitv ko mittaa dekhnaa

shaayad makasad hai uskaa।


Written by sushil kumar

Shayari


Parchhayi.

परछाई।

adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



बचपन से ही मुझे किसी की परछाई कभी कभी नज़र आती थी।मैंने यह बात अपने मम्मी पापा को भी बताई थी,पर उन्होंने इस बात पर मेरी हँसी उड़ाई थी।कहा मैं हूँ ही इतना प्यारा कि कोई भी मेरे पीछे लग जाए।
पर धीरे धीरे ये बातें बड़ी आम सी होने लगी थी।फिर मैंने एक बार जब उन पिछली घटनाओं को दोहराया,तब मुझे एहसास हुआ कि ये सारी घटनाओं में एक बात की समानता थी।जब भी मैंने उस परछाई की बात मानी थी,मेरे साथ अच्छा ही हुआ था,पर जब उसके विरुद्ध कुछ किया था तो मेरे साथ बुरा हुआ था।
फिर मुझे एहसास हुआ कि ये परछाई मेरा भला ही चाहती है,ये मेरी दोस्त है।
आज मेरी उम्र उन्नीस साल की हो गई है।मै और मेरी गर्लफ्रैंड आज मूवी देखने जाने वाले हैं,और वहीं मॉल में मेरी बर्थडे की पार्टी उसे देने वाला हूँ।पर परछाई आज मूवी जाने से मानो मना कर रही हो।मैं पर परछाई की बात माना नहीं और गर्लफ्रैंड के साथ चला गया मूवी देखने।खूब पार्टी शॉर्टी करने के बाद जब वापस आ रहे थे,तब हमारी ऑटो को एक शराबी कार चालक ने जोर से पीछे से धक्का मारा।और मैं ऑटो के सामने वाले शीशे पर फेंका गया।और मेरे सर फट गए।पर मेरी गर्लफ्रैंड बाल बाल बची,उसका सर ऑटो चालक के पीठ से टकरा वापस पीछे आ गया।
मैं भी अपनी छोड़ गर्लफ्रैंड से उसकी खैरियत के बारे में पूछने लगा।मेरा खुद चेहरे पर से खून टपक रहा था।जब उसने कहा कि वो ठीक है,फिर मैंने चैन की राहत ली और धीरे धीरे आँखों के सामने मेरे अंधेरा छाने लगा।
पर जब आँख खुली तो खुद को एक अस्पताल के बेड पर पाया।वहाँ सभी लोग मौजूद थे,पापा मम्मी और मेरी गर्लफ्रैंड।मुझे होश में आते देख सभी लोग बहुत ही हर्षित हुए।
आखिर धीरे धीरे मेरी हालत सुधरी और मैं नॉर्मल रूटीन वर्क में वापस आ पाया।
फिर मुझे उस बर्थडे वाले दिन की घटना याद आई,जब उस परछाई ने मुझे पार्टी करने जाने से रोका था।पर मैने उसकी एक भी ना सुनी थी।और क्या हुआ था मेरे साथ ये तो सब को पता था।
मेरा अपना एक गांव भी था।पर वहाँ किसी के नही रहने के चलते खण्डर सा हो गया था।हमारा परिवार गर्मियों की छुट्टी में वहाँ घूमने जाने की योजना बना रहा था।पर मैं वहाँ नहीं जाने के लिए बहाना बना रहा था।लेकिन माँ और पापा के जिद्द के आगे मेरी एक भी ना चली और मुझे भी गाँव जाना पड़ ही गया।हर वर्ष पापा अकेले ही गाँव जाते थे,पर पता नहीं इस बार क्या हुआ!सभी लोग गाँव जाने को उत्सुक दिख रहे हैं।
गाँव पहुँचने के बाद हम अपने चाचा जी के पास एक दिन के लिए रुके,जो हमारे घर की देख भाल करते थे।हमारे आने से पहले चाचा जी ने पूरे घर की साफ सफाई करवा दी थी।एक दिन उनके पास रुककर हम अपने घर में हम प्रवेश किए।मुझे याद है ,मेरे दादा जी के रहते एक बार मैं वहाँ आया था।तब मैं चार या पाँच साल का था।दादा जी मुझे देख बहुत प्रसन्न हुए थे।वो मुझे अपने कंधे पर बैठा सारा गाँव घुमाए थे।ताजा ताजा मटर और चने वहाँ हमने खूब खाए थे और दादा जी से ढेर सारी कहानियां भी सुने थे।क्या सुनहरी यादें हैं वो बचपन की।आज मानो मैं अपने दादा जी को बहुत याद कर रहा हूँ।
तभी माँ ने आवाज़ लगाया कि आकर खाना खा लो,खाना तैयार है।मैंने भी बिना कुछ देरी किए माँ के पास पहुँच गया।और खाते खाते माँ से पूछा कि दादा जी की डेथ कैसे हुई थी।
माँ ने बताया कि उनकी मृत्य के बारे में ज्यादा तो पता नहीं पर दादी जी के चले जाने के बाद तुम्हारे दादा जी बहुत अकेले पड़ गए थे।तुम्हें याद होगा पापा एक बार दो महीने तक गाँव मे थे।वो इसलिए गाँव में थे क्योंकि दादा जी अकेले हो गए थे।
तो दादा जी को साथ लेकर शहर क्यों नही आ गए?
तुम्हारे पापा ने दादा जी से कहा था साथ चलने को,पर उन्हें शहर एक रद्दी भी ना सुहाता था।वो कहते थे जो दस दिन में मरना लिखा है,अगर शहर जाऊँगा, तो दो दिन में ही निकल लूँगा।
वहाँ उनका ख्याल रखने के लिए दो दो नौकर थे।एक तो घर सम्भालता था,और एक गाय की देखभाल करता था।
फिर दो महीने के बाद,एक सुबह उनके नौकर को वे मृत अवस्था में अपने कमरे में मिलें।
मेरे आँखों से अश्रु बह निकले।
एक रात मैं सोया हुआ था,तभी ऐसा आभास हुआ कि मैं बचपन की अवस्था में पहुँच गया हूँ।मुझे ऐसा लगा कि मेरे दादा जी मुझे बुला रहे हैं।मैं उठकर खड़ा हो गया,और उनके पीछे पीछे चला गया।दादा जी अपने घर के आंगन में लगे आम के पेड़ के नीचे खड़े हो गए और कुछ इशारा कर कह रहे थे,कि यहीं गड़ा है तुम्हारा समान,उसे निकालकर ले लो।
चिड़ियों की चहचाहट से जब सुबह नींद खुली,तो पाया कि मैं आम के पेड़ के नीचे सोया हुआ हूँ।मैंने अपने सपने के बारे में पापा से बताया।पापा ने उसे मज़ाक में लिया।पर मुझे घनी विश्वास होने के चलते,मैं वहाँ रहने वाले नौकर को वो जगह खोदने को बोला।आधा फीट भी नहीं खोदना हुआ होगा कि कुछ छन छन सा आवाज़ आया।मैने जोर लगाकर माँ को आवाज़ दिया।माँ भी आश्चर्य थी,कि दादा जी ने मेरे लिए क्या छोड़ कर गए हैं।एक सन्दूक था।पर उसमे कोई ताला वाला नहीं लगा हुआ था।हमने नौकर को  सन्दूक ऊपर से साफ करके अंदर पहुँचाने को कहा।और जब सन्दूक को हमने खोला,उसमें एक कागज मिला,जिस पर कुछ लिखा हुआ था।ये एक पत्र था।

प्रिय मनोहर(मेरे पिता जी)
तुम्हारी परिस्थितियों से वाकिफ हो,मैंने ये खज़ाना छिपाने की योजना बनाई है।तुम्हारा धंधा हमेशा मंदा रहता है,पर मैं अपने पोते सोनू की जिंदगी बरबाद होते नहीं देख सकता।मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ।उसकी जिंदगी सँवारने के लिए,इस खजाने को छिपा रहा हूँ।अब मैं शायद कुछ दिनों का ही मेहमान रहा हूँ।तुम सभी अपना ख्याल रखना।सभी को स्नेह व सुभाशीष।

तुम्हारा पिता

संजय चौरसिया

आज मेरी आँखें आँसुओ से सराबोर थी,माँ भी अपने आँसुओ को रोक नहीं पाई थी।मेरे दिल में दादा जी के लिए प्रेम व सम्मान और भी बढ़ गया था।

और उस समय के बाद वो परछाई भी मुझे दिखना सदा सदा के लिए बंद हो गई।मानो उसे इस संसार से मुक्ति मिल गई हो।तब जाकर मुझे एहसास हुआ,कि वो कोई और नहीं अपने दादा जी ही थे,जो सदा मेरा ख्याल रखा करते थे।मेरा दिल और भी भाव भिभोर हो उठा था।








bachapan se hi mujhe kisi ki parchhaai kabhi kabhi njar aati thi।mainne yah baat apne mammi paapaa ko bhi bataai thi,par unhonne es baat par meri hnsi udaai thi।kahaa main hun hi etnaa pyaaraa ki koi bhi mere pichhe lag jaaa।

par dhire dhire ye baaten bdi aam si hone lagi thi।phir mainne ek baar jab un pichhli ghatnaaon ko dohraayaa,tab mujhe ehsaas huaa ki ye saari ghatnaaon men ek baat ki samaantaa thi।jab bhi mainne us parchhaai ki baat maani thi,mere saath achchhaa hi huaa thaa,par jab uske viruddh kuchh kiyaa thaa to mere saath buraa huaa thaa।

phir mujhe ehsaas huaa ki ye parchhaai meraa bhalaa hi chaahti hai,ye meri dost hai।

aaj meri umr unnis saal ki ho gayi hai।mai aur meri garlaphraind aaj muvi dekhne jaane vaale hain,aur vahin mal men meri barthde ki paarti use dene vaalaa hun।par parchhaai aaj muvi jaane se maano manaa kar rahi ho।main par parchhaai ki baat maanaa nahin aur garlaphraind ke saath chalaa gayaa muvi dekhne।khub paarti sharti karne ke baad jab vaapas aa rahe the,tab hamaari auto ko ek sharaabi kaar chaalak ne jor se pichhe se dhakkaa maaraa।aur main auto ke saamne vaale shishe par phenkaa gayaa।aur mere sar phat gaye।par meri garlaphraind baal baal bachi,uskaa sar auto chaalak ke pith se takraa vaapas pichhe aa gayaa।

main bhi apni chhod garlaphraind se uski khairiyat ke baare men puchhne lagaa।meraa khud chehre par se khun tapak rahaa thaa।jab usne kahaa ki vo thik hai,phir mainne chain ki raahat li aur dhire dhire aankhon ke saamne mere andheraa chhaane lagaa।

par jab aankh khuli to khud ko ek asptaal ke bed par paayaa।vahaan sabhi log maujud the,paapaa mammi aur meri garlaphraind।mujhe hosh men aate dekh sabhi log bahut hi harshit hua।

aakhir dhire dhire meri haalat sudhri aur main narmal rutin vark men vaapas aa paayaa।

phir mujhe us barthde vaale din ki ghatnaa yaad aai,jab us parchhaai ne mujhe paarti karne jaane se rokaa thaa।par maine uski ek bhi naa suni thi।aur kyaa huaa thaa mere saath ye to sab ko pataa thaa।

meraa apnaa ek gaanv bhi thaa।par vahaan kisi ke nahi rahne ke chalte khandar saa ho gayaa thaa।hamaaraa parivaar garmiyon ki chhutti men vahaan ghumne jaane ki yojnaa banaa rahaa thaa।par main vahaan nahin jaane ke lia bahaanaa banaa rahaa thaa।lekin maan aur paapaa ke jidd ke aage meri ek bhi naa chali aur mujhe bhi gaanv jaanaa pd hi gayaa।har varsh paapaa akele hi gaanv jaate the,par pataa nahin es baar kyaa huaa!sabhi log gaanv jaane ko utsuk dikh rahe hain।

gaanv pahunchne ke baad ham apne chaachaa ji ke paas ek din ke lia ruke,jo hamaare ghar ki dekh bhaal karte the।hamaare aane se pahle chaachaa ji ne pure ghar ki saaph saphaai karvaa di thi।ek din unke paas rukakar ham apne ghar men ham prvesh kia।mujhe yaad hai ,mere daadaa ji ke rahte ek baar main vahaan aayaa thaa।tab main chaar yaa paanch saal kaa thaa।daadaa ji mujhe dekh bahut prasann hua the।vo mujhe apne kandhe par baithaa saaraa gaanv ghumaaa the।taajaa taajaa matar aur chane vahaan hamne khub khaaa the aur daadaa ji se dher saari kahaaniyaan bhi sune the।kyaa sunahri yaaden hain vo bachapan ki।aaj maano main apne daadaa ji ko bahut yaad kar rahaa hun।

tabhi maan ne aavaaj lagaayaa ki aakar khaanaa khaa lo,khaanaa taiyaar hai।mainne bhi binaa kuchh deri kia maan ke paas pahunch gayaa।aur khaate khaate maan se puchhaa ki daadaa ji ki deth kaise hui thi।

maan ne bataayaa ki unki mriaty ke baare men jyaadaa to pataa nahin par daadi ji ke chale jaane ke baad tumhaare daadaa ji bahut akele pd gaye the।tumhen yaad hogaa paapaa ek baar do mahine tak gaanv me the।vo esalia gaanv men the kyonki daadaa ji akele ho gaye the।

to daadaa ji ko saath lekar shahar kyon nahi aa gaye?

tumhaare paapaa ne daadaa ji se kahaa thaa saath chalne ko,par unhen shahar ek raddi bhi naa suhaataa thaa।vo kahte the jo das din men marnaa likhaa hai,agar shahar jaaungaa, to do din men hi nikal lungaa।

vahaan unkaa khyaal rakhne ke lia do do naukar the।ek to ghar sambhaaltaa thaa,aur ek gaay ki dekhbhaal kartaa thaa।

phir do mahine ke baad,ek subah unke naukar ko ve mriat avasthaa men apne kamre men milen।

mere aankhon se ashru bah nikle।

ek raat main soyaa huaa thaa,tabhi aisaa aabhaas huaa ki main bachapan ki avasthaa men pahunch gayaa hun।mujhe aisaa lagaa ki mere daadaa ji mujhe bulaa rahe hain।main uthakar khdaa ho gayaa,aur unke pichhe pichhe chalaa gayaa।daadaa ji apne ghar ke aangan men lage aam ke ped ke niche khde ho gaye aur kuchh eshaaraa kar kah rahe the,ki yahin gdaa hai tumhaaraa samaan,use nikaalakar le lo।

chidiyon ki chahchaahat se jab subah nind khuli,to paayaa ki main aam ke ped ke niche soyaa huaa hun।mainne apne sapne ke baare men paapaa se bataayaa।paapaa ne use mjaak men liyaa।par mujhe ghani vishvaas hone ke chalte,main vahaan rahne vaale naukar ko vo jagah khodne ko bolaa।aadhaa phit bhi nahin khodnaa huaa hogaa ki kuchh chhan chhan saa aavaaj aayaa।maine jor lagaakar maan ko aavaaj diyaa।maan bhi aashchary thi,ki daadaa ji ne mere lia kyaa chhod kar gaye hain।ek sanduk thaa।par usme koi taalaa vaalaa nahin lagaa huaa thaa।hamne naukar ko  sanduk upar se saaph karke andar pahunchaane ko kahaa।aur jab sanduk ko hamne kholaa,usmen ek kaagaj milaa,jis par kuchh likhaa huaa thaa।ye ek patr thaa।


priy manohar(mere pitaa ji)

tumhaari paristhitiyon se vaakiph ho,mainne ye khjaanaa chhipaane ki yojnaa banaai hai।tumhaaraa dhandhaa hameshaa mandaa rahtaa hai,par main apne pote sonu ki jindgi barbaad hote nahin dekh saktaa।main usse bahut pyaar kartaa hun।uski jindgi snvaarne ke lia,es khajaane ko chhipaa rahaa hun।ab main shaayad kuchh dinon kaa hi mehmaan rahaa hun।tum sabhi apnaa khyaal rakhnaa।sabhi ko sneh v subhaashish।


tumhaaraa pitaa


sanjay chaurasiyaa


aaj meri aankhen aansuo se saraabor thi,maan bhi apne aansuo ko rok nahin paai thi।mere dil men daadaa ji ke lia prem v sammaan aur bhi bdh gayaa thaa।


aur us samay ke baad vo parchhaai bhi mujhe dikhnaa sadaa sadaa ke lia band ho gayi।maano use es sansaar se mukti mil gayi ho।tab jaakar mujhe ehsaas huaa,ki vo koi aur nahin apne daadaa ji hi the,jo sadaa meraa khyaal rakhaa karte the।meraa dil aur bhi bhaav bhibhor ho uthaa thaa।



Written by sushil kumar


26 Jun 2019

Maa baap ke sath mein hi khushi hai.

Shayari

माँ बाप के साथ में ही खुशी है।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं नहीं जानता
मेरे आने वाले पल में क्या लिखा है??
मैं नहीं जानता
कितने खुशी के पल हैं
और कितने दुख के हैं।
पर हाँ 
मैं आज में जीने वाला हूँ
मुझे आज की फिक्र है।
पर ये दिल कहाँ मानता है
मुझे लिए जाता है
मेरे मात पिता के पास।
जो अभी भी बैठे हैं
दो हज़ार की.मि.दूर 
अपने घर में।
क्या उनके बुढ़ापे में
मैं सहारा उनका बन पाऊँगा??

बड़ा सोचा करता था
माँ बाप को साथ रखूँगा।
जैसा भी जॉब करूँगा
पर उन्हें अपने पास रखूँगा।
पर देखो!
आज जॉब है,
पत्नी भी है
पर माँ बाप हमसे 
दो हज़ार की.मि. दूर बैठे हुए हैं।
आखिर क्या फायदा इतना सोच कर
जब वह पूरा ना हो पाएगा।
पर जो उनके बुढ़ापे में
उनका सहारा ना बन पाया।
तो मैं जिंदगी भर खुद के नज़र में
सदा के लिए गिर जाऊँगा।
मेरी जीने का क्या फ़ायदा
जब अपने जन्मदाता की 
सेवा नहीं कर पाऊँगा।
ऐसा जीवन श्राप सा लगेगा
जो मेरी मृत्यु से ही धुल पाएगा।

मैं आऊँगा
जरूर आऊँगा।
आपलोगों को साथ लेने को।
रखूँगा साथ मैं खुद के
मैं तभी खुश रह पाऊँगा
रूह से।
आपके प्यार और आपके संस्कार
सदा मुझे आपकी ओर खींच लाती है।
जो आप साथ हमारे रहोगे
तो जी भर के प्यार 
आप पर लुटाऊंगा।

बड़े शौक से आपने मेरी ब्याह रचाई थी
लाखों में एक लड़की को 
मेरे लिए चुन कर लाई थी।
बहु नहीं
बेटी से बढ़कर उससे
आपने प्यार दुलार किया था।
पर उसे शायद 
आपका प्यार ना सुहाया था
उसे खुश रखने को
आपने हमसे मामा के बीमार होने का 
ढोंग भी रचाया था।

मैं भी कितना पागल था
इतनई सी बात समझ ना पाया था।
जो आज मामा से बात ना होती
तो ये राज खुल ना पाया था।
मुझे अपनी स्त्री पर
बड़ा गुस्सा तब आया था।
पर माँ की कसम थी
जो मेरे गुस्से को रोक 
आज पाया था।

मैं आज बहुत ही ज्यादा 
खुद से नाराज़ हुआ जा रहा था।
क्यों नही मैं अपने माँ बाप के
व्यथा को समझ ना पाया था।
मैंने उन्हें फोन किया
अपनी तबीयत खराब होने की बात बताई उनसे।
चले आइए आप फ्लाइट से
मुझे आपकी बहुत याद आ रही
रह रह के।
फ्लाइट की टिकट भेजी उन्हें
गया लाने एयरपोर्ट से उन्हें।
जब देखा उन्होंने मुझे एयरपोर्ट पर
खुश होकर लग गए गले हमसे
सब कुछ भूलकर।
मेरी पत्नी को भी आशीर्वाद दिया
और फिर पूछा मेरा हाल मुझसे।
मैने भी बता दी उनसे
मामा से बात हो गई है हमसे।








main nahin jaantaa

mere aane vaale pal men kyaa likhaa hai??

main nahin jaantaa

kitne khushi ke pal hain

aur kitne dukh ke hain।

par haan

main aaj men jine vaalaa hun

mujhe aaj ki phikr hai।

par ye dil kahaan maantaa hai

mujhe lia jaataa hai

mere maat pitaa ke paas।

jo abhi bhi baithe hain

do hjaar ki.mi.dur

apne ghar men।

kyaa unke budhaape men

main sahaaraa unkaa ban paaungaa??


bdaa sochaa kartaa thaa

maan baap ko saath rakhungaa।

jaisaa bhi jab karungaa

par unhen apne paas rakhungaa।

par dekho!

aaj jab hai,

patni bhi hai

par maan baap hamse

do hjaar ki.mi. dur baithe hua hain।

aakhir kyaa phaaydaa etnaa soch kar

jab vah puraa naa ho paaagaa।

par jo unke budhaape men

unkaa sahaaraa naa ban paayaa।

to main jindgi bhar khud ke njar men

sadaa ke lia gir jaaungaa।

meri jine kaa kyaa faaydaa

jab apne janmdaataa ki

sevaa nahin kar paaungaa।

aisaa jivan shraap saa lagegaa

jo meri mriatyu se hi dhul paaagaa।


main aaungaa

jarur aaungaa।

aaplogon ko saath lene ko।

rakhungaa saath main khud ke

main tabhi khush rah paaungaa

ruh se।

aapke pyaar aur aapke sanskaar

sadaa mujhe aapki or khinch laati hai।

jo aap saath hamaare rahoge

to ji bhar ke pyaar

aap par lutaaungaa।


bde shauk se aapne meri byaah rachaai thi

laakhon men ek ldki ko

mere lia chun kar laai thi।

bahu nahin

beti se bdhakar usse

aapne pyaar dulaar kiyaa thaa।

par use shaayad

aapkaa pyaar naa suhaayaa thaa

use khush rakhne ko

aapne hamse maamaa ke bimaar hone kaa

dhong bhi rachaayaa thaa।


main bhi kitnaa paagal thaa

etnaayi si baat samajh naa paayaa thaa।

jo aaj maamaa se baat naa hoti

to ye raaj khul naa paayaa thaa।

mujhe apni stri par

bdaa gussaa tab aayaa thaa।

par maan ki kasam thi

jo mere gusse ko rok

aaj paayaa thaa।


main aaj bahut hi jyaadaa

khud se naaraaj huaa jaa rahaa thaa।

kyon nahi main apne maan baap ke

vythaa ko samajh naa paayaa thaa।

mainne unhen phon kiyaa

apni tabiyat kharaab hone ki baat bataai unse।

chale aaea aap phlaaet se

mujhe aapki bahut yaad aa rahi

rah rah ke।

phlaaet ki tikat bheji unhen

gayaa laane eyarport se unhen।

jab dekhaa unhonne mujhe eyarport par

khush hokar lag gaye gale hamse

sab kuchh bhulakar।

meri patni ko bhi aashirvaad diyaa

aur phir puchhaa meraa haal mujhse।

maine bhi bataa di unse

maamaa se baat ho gayi hai hamse।


Written by sushil kumar

Shayari


25 Jun 2019

Maa

माँ।

Adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



कुछ लोगों के लिए माँ केवल एक शब्द है।और कुछ लोगों को केवल उनकी माँ ही केवल पूज्य है और प्यार करने योग्य है।

पर मेरे लिए माँ शब्द हर भगवान और हर रिश्ते से बढ़कर कर है।माँ एक श्रद्धा है,माँ एक विश्वास है,माँ एक बुरे समय में एक उम्मीद की आस है।संसार की हर माँ पूज्यनीय है और सम्मानीय है।

और जब कहीं भी कूटनीति और छल की जाती है,एक माँ के साथ,तो वह हमारे लिए असहनीय हो जाता है।उनके आँसू,उनके दुख मेरे मन को छलनी छलनी कर जाती है।आखिरकार एक माँ के साथ ऐसा कोई कैसे कर सकता है।जिस माँ ने अपने कोख में नौ महीने रख कर तुम्हें पैदा किया,उसी माँ को बुढ़ापे में तुमने ईश्वर के मौज पर छोड़ दिया।छिह, घिन आती है ऐसे सन्तानों की सोच पर।छिह!






kuchh logon ke lia maan keval ek shabd hai।aur kuchh logon ko keval unki maan hi keval pujy hai aur pyaar karne yogy hai।


par mere lia maan shabd har bhagvaan aur har rishte se bdhakar kar hai।maan ek shraddhaa hai,maan ek vishvaas hai,maan ek bure samay men ek ummid ki aas hai।sansaar ki har maan pujyniy hai aur sammaaniy hai।


aur jab kahin bhi kutniti aur chhal ki jaati hai,ek maan ke saath,to vah hamaare lia asahniy ho jaataa hai।unke aansu,unke dukh mere man ko chhalni chhalni kar jaati hai।aakhirkaar ek maan ke saath aisaa koi kaise kar saktaa hai।jis maan ne apne kokh men nau mahine rakh kar tumhen paidaa kiyaa,usi maan ko budhaape men tumne ishvar ke mauj par chhod diyaa।chhih, ghin aati hai aise santaanon ki soch par।chhih!


Written by sushil kumar

Kyunki main maa hun naa,sab samajhti hun.

Shayari

क्योंकि मैं माँ हूँ ना।सब समझती हूँ।।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



तुम यूँ क्यूँ गुम होकर बैठी हो
हमसे अलग होकर।
कोई अगर गलती हुई है
कोई बात अगर बुरी लगी है
तो माफ करदो मुझे
अपनी माँ समझ करके।

माना!
माना मैं तुम्हारी अपनी माँ तो नहीं हूँ
पर तुम्हें अपनी बेटी से कम
कभी नहीं माना है
ये पता है रब को।
मैं नहीं चाहती हूँ
कभी तुम्हें मुझसे कोई तकलीफ हो
कोई दुख हो।
आखिर तुम्हारी खुशी में ही तो
मेरे बेटे की खुशी की परवान चढ़ती है।

मैं ही शायद बहुत बड़ी अभागन हूँ
जो चाह कर भी
सास और बहू के रिश्ते को समझ ना पाई।
चली थी बहु को बेटी बनाने
पर मेरी करनी ही तुम्हें सदा
दुख पहुँचाती रही।
मैं चाहती थी तुम्हें मदद करना
तुम्हारे साथ रहना।
तुम्हें प्यार करना और
कुछ तुमसे प्यार पाना।
पर तुम्हें शायद मेरा साथ ही
पसन्द नहीं आ पाया।

मैं अपने बेटे से कहूँगी
कोई बहाना बनाऊँगी
तेरे मामा की तबीयत ठीक नहीं है
मुझे गाँव छोड़ आने की हिदायत दूँगी।
और फिर कभी तुम्हारी खुशियों के बिच
मैं कभी नहीं आऊँगी।

क्योंकि मैं माँ हूँ ना।
सब समझती हूँ।।
Maa








tum yun kyun gum hokar baithi ho

hamse alag hokar।

koi agar galti hui hai

koi baat agar buri lagi hai

to maaph kardo mujhe

apni maan samajh karke।


maanaa!

maanaa main tumhaari apni maan to nahin hun

par tumhen apni beti se kam

kabhi nahin maanaa hai

ye pataa hai rab ko।

main nahin chaahti hun

kabhi tumhen mujhse koi takliph ho

koi dukh ho।

aakhir tumhaari khushi men hi to

mere bete ki khushi ki parvaan chdhti hai।


main hi shaayad bahut bdi abhaagan hun

jo chaah kar bhi

saas aur bahu ke rishte ko samajh naa paai।

chali thi bahu ko beti banaane

par meri karni hi tumhen sadaa

dukh pahunchaati rahi।

main chaahti thi tumhen madad karnaa

tumhaare saath rahnaa।

tumhen pyaar karnaa aur

kuchh tumse pyaar paanaa।

par tumhen shaayad meraa saath hi

pasand nahin aa paayaa।


main apne bete se kahungi

koi bahaanaa banaaungi

tere maamaa ki tabiyat thik nahin hai

mujhe gaanv chhod aane ki hidaayat dungi।

aur phir kabhi tumhaari khushiyon ke bich

main kabhi nahin aaungi।


kyonki main maan hun naa।

sab samajhti hun।।



Written by sushil kumar

Shayari

Rishto mein majbuti ke lie.

रिश्तों में मजबूती के लिए।

Adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




आजकल शादी के रिश्ते बड़े ही नाजुक से हो गए हैं।कभी भी कोई गलतफहमी के जाल में फंस सारे रिश्ते नाते तोड़ने पर आमादा हो जाता है,इसका कोई ठोर ठिकाना नहीं है।वो पहले वाली बात नहीं रही,जो हमारे माँ और पिता के बिच हुआ करता था।पता नहीं कितने नोक झोंक हुआ करती थी।फिर भी बाद में वो साथ साथ हो जाया करते थे।पत्नियां गृहिणी हुआ करती थी।उन्हें यही संस्कार दिया जाता था कि पति देव के समान पूज्य हैं,उन्हें हमेशा उनके चरणों में ही रहना पड़ेगा।
क्योंकि उन्हें वैसे ही संस्कार ही दिए गए थे,इसलिए कभी कभी उन्हें काफी कुछ सहना भी पड़ता था।जो कि बिल्कुल ही गलत था।
पर आज महिला सशक्तिकरण के बाद महिलाओं के अंदर की महिला जाग गई है।आज सभी महिलाएँ अपनी हक़ के लिए लड़ती हुई दिखाई देती है।जो सही भी है।
पर अक्सर दोनो के अहंकार के टकराव में और कभी एक हल्की सी गलतफहमी में भी रिश्ते टूटने के कगार पर आ जाते हैं।जो कि बिल्कुल ही गलत है।
आजकल शादी होती है,पर रिश्तों में वो पहले वाली मिठास कहीं लुप्त होते जा रही है।लोगों में धैर्य खोता जा रहा है।लड़की अगर बड़े परिवार से है और लड़का छोटे परिवार से,फिर लड़की वाले लड़के पर पूरा हक जताते हैं और चाहते हैं कि लड़का उनके मुट्ठी में रहे।
अब बात ये आती है कि उन्होंने ऐसे घर में शादी ही क्यों की?
इसका पहला जवाब ये है कि लड़के वाले की डिमांड नहीं के बराबर होगी और अगर होगी भी तो बहुत कम।अब दूसरा जवाब ये है कि उनकी बेटी का वहाँ दबदबा रहेगा,आखिर बड़े घर की लड़की है जो।खाना बनाना या कोई घर का काम उसे करने को नहीं कहा जाएगा।तीसरा जवाब दमाद जी को थोड़े मोड़े महंगे उपहार देकर अपने तरफ रखना आसान होगा।और धीरे धीरे करके उसके माँ बाप से उसे अलग कर देंगे।चौथा जवाब दमाद जी कलेक्टर हैं या फिर किसी अच्छी मल्टीनेशनल कंपनी में हैं,तो आज नहीं तो कल उनके पास अच्छे खासे पैसे होंगे,जिससे मेरी बेटी को सारे सुख सुविधा का लाभ मिलेगा और उसकी जिंदगी मजे से कट जाएगी।
अब शादी करने के लिए जब कोई लड़की या लड़का देखने जाते हैं तो किसी के चेहरे पर तो लिखा नहीं रहता है,कि उनके दिल में भविष्य के लिए क्या क्या योजनाएं बना कर के रखे हुए हैं।ऐसे घर में अगर किसी संस्कारी लड़के की शादी हो जाए,तो समझो कि लड़के को और उसके परिवार को क्या क्या झेलना पड़ जाएगा भविष्य में।लड़की भी अहंकार में रहेगी और बड़े ताव में सास ससुर से बात करेगी।और लड़के पर भी अपना पहला हक़ जताएगी।और जब लड़के को सहा नहीं जाएगा तो वह उसे सुनाएगा,फिर क्या!लड़की रोते रोते बाप को फोन करेगी।उसका बाप सारे परिवार खरा खोटी सुना कर रख देगा।बाद में लड़के को प्यार से समझाएगा कि देखो तुम्हारी पहली जिम्मेवारी तुम्हारी पत्नी है।तुम दोनों के बिच ना ही हम आ सकते हैं और ना ही तुम्हारे माँ बाप।उसका अच्छे से ख्याल रखो,क्योंकि वो ही तुम्हारे बुढ़ापे में तुम्हारा साथ निभाएगी और जिंदगी भर तुम्हारा साथ देगी।हम और तुम्हारे माँ बाप तब तुम्हारे साथ नहीं रहेंगे।इसलिए अपनी पत्नी का ख्याल रखो।जरा सी बड़बोली है पर दिल की साफ है।
पर अगर पिता समझदार है,और पैसे का घमंड नहीं है।तो वो अपनी बेटी को ही डाँटेगा,पर पूरा व्याख्या सभी घरवालों से सुनने और समझने के बाद।क्योंकि हर पिता अपनी औलाद की खामियां और अच्छाई दोनो को समझता है और जानता है।
ऐसे ही रिश्तों की खींचा खाँची में सम्बन्ध टूट जाते हैं।रिश्तों में लचीलापन होना आजकल बहुत ही ज़रूरी हो गया है।एकतरफा रिश्ता वहीं चलता है जहाँ मन में खोट और लालच भरा पड़ा है।








aajakal shaadi ke rishte bde hi naajuk se ho gaye hain।kabhi bhi koi galataphahmi ke jaal men phans saare rishte naate todne par aamaadaa ho jaataa hai,eskaa koi thor thikaanaa nahin hai।vo pahle vaali baat nahin rahi,jo hamaare maan aur pitaa ke bich huaa kartaa thaa।pataa nahin kitne nok jhonk huaa karti thi।phir bhi baad men vo saath saath ho jaayaa karte the।patniyaan griahini huaa karti thi।unhen yahi sanskaar diyaa jaataa thaa ki pati dev ke samaan pujy hain,unhen hameshaa unke charnon men hi rahnaa pdegaa।

kyonki unhen vaise hi sanskaar hi dia gaye the,esalia kabhi kabhi unhen kaaphi kuchh sahnaa bhi pdtaa thaa।jo ki bilkul hi galat thaa।

par aaj mahilaa sashaktikaran ke baad mahilaaon ke andar ki mahilaa jaag gayi hai।aaj sabhi mahilaaan apni hk ke lia ldti hui dikhaai deti hai।jo sahi bhi hai।

par aksar dono ke ahankaar ke takraav men aur kabhi ek halki si galataphahmi men bhi rishte tutne ke kagaar par aa jaate hain।jo ki bilkul hi galat hai।

aajakal shaadi hoti hai,par rishton men vo pahle vaali mithaas kahin lupt hote jaa rahi hai।logon men dhairy khotaa jaa rahaa hai।ldki agar bde parivaar se hai aur ldkaa chhote parivaar se,phir ldki vaale ldke par puraa hak jataate hain aur chaahte hain ki ldkaa unke mutthi men rahe।

ab baat ye aati hai ki unhonne aise ghar men shaadi hi kyon ki?

eskaa pahlaa javaab ye hai ki ldke vaale ki dimaand nahin ke baraabar hogi aur agar hogi bhi to bahut kam।ab dusraa javaab ye hai ki unki beti kaa vahaan dabadbaa rahegaa,aakhir bde ghar ki ldki hai jo।khaanaa banaanaa yaa koi ghar kaa kaam use karne ko nahin kahaa jaaagaa।tisraa javaab damaad ji ko thode mode mahange uphaar dekar apne taraph rakhnaa aasaan hogaa।aur dhire dhire karke uske maan baap se use alag kar denge।chauthaa javaab damaad ji kalektar hain yaa phir kisi achchhi maltineshanal kampni men hain,to aaj nahin to kal unke paas achchhe khaase paise honge,jisse meri beti ko saare sukh suvidhaa kaa laabh milegaa aur uski jindgi maje se kat jaaagi।

ab shaadi karne ke lia jab koi ldki yaa ldkaa dekhne jaate hain to kisi ke chehre par to likhaa nahin rahtaa hai,ki unke dil men bhavishy ke lia kyaa kyaa yojnaaan banaa kar ke rakhe hua hain।aise ghar men agar kisi sanskaari ldke ki shaadi ho jaaa,to samjho ki ldke ko aur uske parivaar ko kyaa kyaa jhelnaa pd jaaagaa bhavishy men।ldki bhi ahankaar men rahegi aur bde taav men saas sasur se baat karegi।aur ldke par bhi apnaa pahlaa hk jataaagi।aur jab ldke ko sahaa nahin jaaagaa to vah use sunaaagaa,phir kyaa!ldki rote rote baap ko phon karegi।uskaa baap saare parivaar kharaa khoti sunaa kar rakh degaa।baad men ldke ko pyaar se samjhaaagaa ki dekho tumhaari pahli jimmevaari tumhaari patni hai।tum donon ke bich naa hi ham aa sakte hain aur naa hi tumhaare maan baap।uskaa achchhe se khyaal rakho,kyonki vo hi tumhaare budhaape men tumhaaraa saath nibhaaagi aur jindgi bhar tumhaaraa saath degi।ham aur tumhaare maan baap tab tumhaare saath nahin rahenge।esalia apni patni kaa khyaal rakho।jaraa si bdboli hai par dil ki saaph hai।

par agar pitaa samajhdaar hai,aur paise kaa ghamand nahin hai।to vo apni beti ko hi daantegaa,par puraa vyaakhyaa sabhi gharvaalon se sunne aur samajhne ke baad।kyonki har pitaa apni aulaad ki khaamiyaan aur achchhaai dono ko samajhtaa hai aur jaantaa hai।

aise hi rishton ki khinchaa khaanchi men sambandh tut jaate hain।rishton men lachilaapan honaa aajakal bahut hi jruri ho gayaa hai।ekatarphaa rishtaa vahin chaltaa hai jahaan man men khot aur laalach bharaa pdaa hai।



Written by sushil kumar

24 Jun 2019

Dhan hi sabkuchh nahin hota hai.

धन ही सब कुछ नही होता।

Adhmari Khwahish  द्वारा आपसभी पाठको को समर्पित है।

अगर कोई गरीब है पैसे से,तो क्या उसके सपने सपने नहीं होते?क्योंकि वो अपने सपने को खरीद नहीं सकता।
ऐसी बात नहीं है।जो गरीब होते हैं,उनके सपने अमीरों के शौक को हासिल करना होता है।इसके लिए वो पढ़ाई करता है,डिग्री लेता है,कम्पटीशन एग्जाम में बैठता है,ताकि वो अमीरों के शौक को खरीद सके।
पर जो अमीर होते हैं,उनका सपना खुद के लिए नहीं बल्कि देश के लिए और देश मे रहने वालों के लिए कुछ करने का होता है।
आज के समय पैसा ही सब कुछ है।अगर आपके पास पैसा है,तो आपके पास सुकून है।पर जिस दिन पैसा आपको छोड़ किसी और के पास गया।आपका सुकून भी आपको छोड़ उसके पास चला जाता है।
पर पैसा ही सबकुछ नहीं होता है।अगर कोई गरीब है,पर सन्तुष्ट है,तो उससे बड़ा धनी भी इस संसार मे नही हो सकता है।
अब आपको सोचना है,आपको कौन वाला धनी बनना है।।









agar koi garib hai paise se,to kyaa uske sapne sapne nahin hote?kyonki vo apne sapne ko kharid nahin saktaa।

aisi baat nahin hai।jo garib hote hain,unke sapne amiron ke shauk ko haasil karnaa hotaa hai।eske lia vo pdhaai kartaa hai,digri letaa hai,kamptishan egjaam men baithtaa hai,taaki vo amiron ke shauk ko kharid sake।

par jo amir hote hain,unkaa sapnaa khud ke lia nahin balki desh ke lia aur desh me rahne vaalon ke lia kuchh karne kaa hotaa hai।

aaj ke samay paisaa hi sab kuchh hai।agar aapke paas paisaa hai,to aapke paas sukun hai।par jis din paisaa aapko chhod kisi aur ke paas gayaa।aapkaa sukun bhi aapko chhod uske paas chalaa jaataa hai।

par paisaa hi sabakuchh nahin hotaa hai।agar koi garib hai,par santusht hai,to usse bdaa dhani bhi es sansaar me nahi ho saktaa hai।

ab aapko sochnaa hai,aapko kaun vaalaa dhani bannaa hai।।

Written by sushil kumar

23 Jun 2019

Maa meri.

Shayari

माँ मेरी।

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Maa meri


मैं रहूँ कहीं भी इस जहाँ में
रहूँगा तो तेरा ही अक्स बनकर।
मेरे खुद का क्या वजूद था
इस जहाँ में?
मेरे को सँवारा था तुमने ही
सुसंस्कारों से।
तेरे दिए संस्कार के वर्चस्व पर
अगर कुछ पाऊँगा भी तो
तेरे ही चरणों में वो अर्पित होगा।
भले कामयाबी की बुलन्दी को भी छू लूँगा
इस जहाँ में।
भले महफ़िल में मेरे नाम की चर्चा रहेगी
हर जुबान पे।
पर आखिर में जीत किसी की हुई
तो वो तेरी है
माँ मेरी।






main rahun kahin bhi es jahaan men

rahungaa to teraa hi aks banakar।

mere khud kaa kyaa vajud thaa

es jahaan men?

mere ko snvaaraa thaa tumne hi

susanskaaron se।

tere dia sanskaar ke varchasv par

agar kuchh paaungaa bhi to

tere hi charnon men vo arpit hogaa।

bhale kaamyaabi ki bulandi ko bhi chhu lungaa

es jahaan men।

bhale mahfil men mere naam ki charchaa rahegi

har jubaan pe।

par aakhir men jit kisi ki hui

to vo teri hai

maan meri।


Written by sushil kumar

Shayari

22 Jun 2019

Kabhi chale the sath sath

Shayari

कभी चले थे साथ साथ।

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कभी चले थे साथ साथ
आज राह बदल गए हैं।
मंजिल बदल गई है
अपना पड़ाव बदल गया है।

कुछ लम्हें वो मीठे पलों के
जो उनके साथ में बिताए थे।
कुछ गुदगुदाने वाले
तो कुछ रुलाने वाले
मैं अपने संग ले आया हूँ।
उन खट्टे मीठे एहसास के क्षणों को
अपने कांख में दबा लाया हूँ।

जो याद आएगी कभी उनकी
कभी अश्रु की धारा जो नहीं रुकेगी।
खोल लूँगा अपनी यादों के पटों को
कुछ देर तो उनकी आघोष में जी लूँगा।
कुछ देर ही सही
पर अपने जीवन के कुछ पल
तो जी लूँगा।

जी लूँगा!
जी लूँगा!
अकेला जी लूँगा!









kabhi chale the saath saath

aaj raah badal gaye hain।

manjil badal gayi hai

apnaa pdaav badal gayaa hai।


kuchh lamhen vo mithe palon ke

jo unke saath men bitaaa the।

kuchh gudagudaane vaale

to kuchh rulaane vaale

main apne sang le aayaa hun।

un khatte mithe ehsaas ke kshnon ko

apne kaankh men dabaa laayaa hun।


jo yaad aaagi kabhi unki

kabhi ashru ki dhaaraa jo nahin rukegi।

khol lungaa apni yaadon ke paton ko

kuchh der to unki aaghosh men ji lungaa।

kuchh der hi sahi

par apne jivan ke kuchh pal

to ji lungaa।


ji lungaa!

ji lungaa!

akelaa ji lungaa!


Written by sushil kumar

Shayari

21 Jun 2019

Rab ka banda.

Shayari

रब का बन्दा।


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जीवन के सफर में
लोग आते हैं।
कुछ देर साथ निभाते हैं
और निकल जाते हैं
अपनी अपनी सफर के
नए पड़ाव पर।

ये आना जाना तो लगा रहता है
जीवन के अंतिम छोर तक।
पर जो दूसरों के जीवन को
सतरंगी खुशियों से रंग दिया हो।
जिसकी अच्छाई ने दूसरों के दिलों में
घर कर गया हो।

जो जाते जाते भी दुनिया से
साथ वालो को गुदगुदा गया हो।
वही है रब का सच्चा बन्दा
जिसे लेने खुद मौला यहाँ आया हो।







jivan ke saphar men

log aate hain।

kuchh der saath nibhaate hain

aur nikal jaate hain

apni apni saphar ke

naye pdaav par।


ye aanaa jaanaa to lagaa rahtaa hai

jivan ke antim chhor tak।

par jo dusron ke jivan ko

satarangi khushiyon se rang diyaa ho।

jiski achchhaai ne dusron ke dilon men

ghar kar gayaa ho।


jo jaate jaate bhi duniyaa se

saath vaalo ko gudagudaa gayaa ho।

vahi hai rab kaa sachchaa bandaa

jise lene khud maulaa yahaan aayaa ho।


Written by sushil kumar

Shayari

Swarth

Shayari

स्वार्थ

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरे आवाज़ को दबाने वाले मिले बहुत
पर कोई ना मिला जो दे सके मेरा साथ यहाँ।
बहुत घुटन सी रहती है मेरे जेहन में
मैने बहुतों की मदद की थी उनके बुरे वक्त में।
जिनके साथ खड़ा रहता था हर मुसीबत में
नहीं कहीं दिख रहे हैं आज वो मेरे नज़र में।
आज हर कोई बस अपनी ही बनाने में लगा है
जिसे देखो उसे अपनो के मलबे से
अपने आशियाने को सजाने में लगा है।
नहीं है फिकर आज किसी को किसी की यहाँ पर
बेटा भी आज वसीयत देख
बाप को कन्धे पर अर्थी देने को
आगे बढ़ रहा है।





mere aavaaj ko dabaane vaale mile bahut

par koi naa milaa jo de sake meraa saath yahaan।

bahut ghutan si rahti hai mere jehan men

maine bahuton ki madad ki thi unke bure vakt men।

jinke saath khdaa rahtaa thaa har musibat men

nahin kahin dikh rahe hain aaj vo mere njar men।

aaj har koi bas apni hi banaane men lagaa hai

jise dekho use apno ke malbe se

apne aashiyaane ko sajaane men lagaa hai।

nahin hai phikar aaj kisi ko kisi ki yahaan par

betaa bhi aaj vasiyat dekh

baap ko kandhe par arthi dene ko

aage bdh rahaa hai।



Written by sushil kumar

Shayari

20 Jun 2019

Rishton ki mahfile kya saji.

Shayari

रिश्तों की महफिले क्या सजी

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठको को समर्पित है।


रिश्तों की महफिले क्या सजी
हमारे मन में गुदगुदी सी हो उठी।
कुछ लफ्ज़ यूँही अपनी बेड़ियाँ तोड़
रिश्तों के बीच में और भी
गरमाहट पैदा करने को निकल पड़ी।
तो कुछ मस्त ठंडी पवन सा झोंका बन
हमारे दिल को ठंडक पहुँचा
एक सुकून पैदा करने लगी।
रिश्ते सदा ऐसे ही होते हैं
भले कितनी भी परेशानी हो
कितनी भी तकलीफ हो
पर वे सदा आपके मन से
आपके दिल से
सारी तकलीफ को छू मंतर कर
आपके अन्दर एक नई स्फूर्ति पैदा करने वाली
और एक नया जान डाल देने वाली होती है।

इसलिए रिश्तों को सदा संजोकर रखे आपलोग।








rishton ki mahaphile kyaa saji

hamaare man men gudagudi si ho uthi।

kuchh laphj yunhi apni bediyaan tod

rishton ke bich men aur bhi

garmaahat paidaa karne ko nikal pdi।

to kuchh mast thandi pavan saa jhonkaa ban

hamaare dil ko thandak pahunchaa

ek sukun paidaa karne lagi।

rishte sadaa aise hi hote hain

bhale kitni bhi pareshaani ho

kitni bhi takliph ho

par ve sadaa aapke man se

aapke dil se

saari takliph ko chhu mantar kar

aapke andar ek nayi sphurti paidaa karne vaali

aur ek nayaa jaan daal dene vaali hoti hai।


esalia rishton ko sadaa sanjokar rakhe aaplog।


Written by sushil kumar

Shayari

19 Jun 2019

Janm janmantar ka sath

जन्म जन्मांतर का साथ

Adhikari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




हेय स्वाति,यहाँ कैसे??

अरे यार सन्नी कुछ शॉपिंग करना था,इसलिए चली आई।

वैसे सन्नी तुम अकेले!
बड़ा ताज्जुब हुआ,तुम्हारी पलटन कहाँ गई।

आज अभ्यास मैच खेल कर आने के बाद,सभी थक गए थे,तो सोचा मैं अकेला ही चल लेता हूँ।

और सन्नी आज यहाँ बड़े अच्छे अच्छे ऑफर निकले हैं।कुछ खरीदा क्या?

अरे नहीं यार, अभी पैसे जो भेजे थे मेरे पापा ने,उससे एक साइंस की किताब खरीदी।

सुन कुछ अच्छा लग रहा हो तो खरीद ले,धीरे धीरे कर के लौटा देना।

अरे स्वाति नहीं यार।मुझे यहाँ कुछ खास लगा नहीं।बस यही किताब लेने के लिए ही यहाँ आया था।

चल कोई बात नहीं।(कहते हुए स्वाति ने सन्नी का हाथ पकड़ लिया)
यहाँ का वड़ा पाव बड़ा ही स्वादिष्ट है,चल खाते हैं।

अरे स्वाति मैं चलता हूँ यार,लेट हो रहा हूँ।

बस भी कर ना।इतना शर्माता क्यों है।चल मेरे तरफ से पार्टी दे रही हूँ।

किस बात का पार्टी वैसे दे रही है तू।

मेरे भैया का आई.ए.एस में सिलेक्शन हो गया है,इसलिये दे रही हूँ।

सही में।

हाँ बाबा।

मुझे तेरे भैया से मिलना है,कब मिला रही है?

चल अभी चल घर पर मिलवा देती हूँ।

वड़ा पाव खाने के बाद सन्नी स्वाति के साथ स्कूटी पर बैठ कर उसके घर गया।

रितेश भैया ये सन्नी है।मेरा क्लासमेट।आपसे मिलने को बड़ा ज़िद्द कर रहा था,इसलिए ले आई।

जी प्रणाम भैया और काँग्रेचुलेसन्स आपकी सक्सेस के लिए।

अरे सन्नी थैंक यू।बोलो किस लिए मिलना चाहते थे?

भैया जब स्वाति ने बताया कि आपका सेलेक्शन्स यू पी एस सी में हो गया है,तो सोचा कि आपसे कुछ मार्गदर्शन ले लूँ।

अरे सन्नी कुछ नहीं,तुम्हें जो विषय पसन्द है,उसे और मजबूत करो।बस तुम्हारा सिलेक्शन पक्का है।

पर भैया मुझे तो केवल और केवल साइंस ही पढ़ना अच्छा लगता है।

ठीक है ना सन्नी तो उसे और मजबूत कर लो।और बाकि बचे विषयों को भी थोड़ा थोड़ा देख लेना, तुम्हारा सिलेक्शन आराम से हो जाएगा।

जी भैया।

स्वाति सन्नी से

ओय सन्नी सारा ज्ञान आज ही ले लेगा क्या?चल तुझे तेरे हिस्टेल पर छोड़ आती हूँ।

मैं चला जाऊँगा ना स्वाति,तू रहने दे।

स्वाति ने आँख को बड़ा कर लिया।

सन्नी चुप चाप स्वाति के साथ निकल पड़ा।

स्वाति ने सन्नी को अपनी स्कूटी से होस्टल पर ड्रॉप किया,और गुड नाईट बोलकर वापस घर को आ गई।

सन्नी के दोस्त सन्नी का होस्टल के गेट पर इंतज़ार कर रहे थे।जब स्वाति सन्नी को छोड़ वापस गई,तो सारे दोस्तों ने सन्नी का मिलकर खूब मजा लिया।

सन्नी को भी स्वाति धीरे धीरे पसन्द आने लगी थी।पर कभी उसे उतनी हिम्मत ना जुटा पाई कि उससे वह बोल सके।

पता नही कितने रोज डे और कितने वैलेंटाइन डे निकल गए,पर सन्नी हिम्मत ना जुटा पाया।

फिर से रोज डे आने वाला था।सभी युवकों के दिल में उनके जज़्बात जोर जोर से उफान मार रहे थे।

रोज डे वाले दिन,स्वाति बहुत ही खूबसूरत ड्रेश डालकर आई थी।बिल्कुल डॉल जैसी दिख रही थी।सभी लोगों की नज़र उससे हट ही नहीं रही थी।

स्वाति सन्नी से
अरे सन्नी क्या हुआ?

कुछ नहीं।

लगातार घूरे जा रहे हो।कुछ कहना है क्या?

नहीं!नहीं!
बस तुम आज बहुत ही सुंदर लग रही हो।

आओ सन्नी जरा टहलते हैं।

(सन्नी मन ही मन अपनी हिम्मत बढ़ाते हुए।हे ईश्वर मुझे शक्ति दे,कि मैं अपने प्यार का इज़हार आज कर पाऊँ।)

स्वाति उसे फूलों की बाग की तरफ लेकर जाती है।

स्वाति उधर लेकर क्यों जा रही हो।

दिख नही रहा है तुम्हे,फूल के बगीचे हैं।

हम्म

रुको भी ना यार।चुप चाप चल नही सकते हो साथ में।

हम्म

तभी स्वाति ने एक लाल गुलाब एक टहनी से तोड़ ली।

अरे अरे कोई देख लेगा तो!

हैप्पी रोज डे सन्नी।

थैंक यू एंड विश यू द सेम।

बस!

(सन्नी में हिम्मत जाग उठी थी)

क्या तुम मेरी गर्लफ्रैंड बनना पसन्द करोगी?
(सन्नी एक पाँव पर झुकते हुए स्वाति को प्रोपोज़ करता है)

स्वाति खुश होकर
यस यस यस
और सन्नी के गले से लिपट जाती है।

ये जो घटना हुई थी,उस वक़्त दोनो क्लास 10 में थे।

दोनो ने जमकर मेहनत की,और दोनों अच्छे नम्बर से मैट्रिक  को पास किया।

सन्नी को स्वाति पसन्द थी,पर उसकी पहली प्राथमिकता यू पी एस सी का एग्जाम था।उसका ध्यान हमेशा अच्छी तैयारी करने के पीछे लगा रहता था।

सन्नी चल ना!नई मूवी आई है,देखकर आते हैं।
स्वाति तेरे को मैं पसन्द करता हूँ, और शायद बहुत ही ज्यादा पसन्द करता हूँ।पर मेरी प्राथमिकता अभी यू पी एस सी है।

स्वाति को उसका वचन पहले पहले बहुत ही कठोर सा प्रतीत हुआ।पर बाद में वो उसके निर्णय को समर्थन करने लगी।

सन्नी मुझे भी तैयारी करनी है,चल ना साथ में करते हैं।फिर क्या दोनो मिलकर साथ में तैयारी करने लगे।सन्नी अच्छे अच्छे बुक्स का लिस्ट लाकर देता,और स्वाति उसे खरीद कर ले आती, और दोनों साथ मिलकर तैयारी करते।कभी कभी तो समय का पता भी नही चलता था कि कब अंधियारी रात सुबह के उजाले के गोद में जाकर बैठ गई है।

दोनो ने साथ में ही ग्रेजुएट किया और किस्मत देखिए दोनो का साथ में ही यू पी एस सी भी क्लियर हो गया।ये होता है साथ का फर्क।अगर जन्म जन्मांतर के साथ रहने वाले का साथ मिल जाए,फिर क्या बात है?कोई भी काम मुश्किल नहीं रहता है।










hey svaati,yahaan kaise??


are yaar sanni kuchh shaping karnaa thaa,esalia chali aai।


vaise sanni tum akele!

bdaa taajjub huaa,tumhaari palatan kahaan gayi।


aaj abhyaas maich khel kar aane ke baad,sabhi thak gaye the,to sochaa main akelaa hi chal letaa hun।


aur sanni aaj yahaan bde achchhe achchhe auphar nikle hain।kuchh kharidaa kyaa?


are nahin yaar, abhi paise jo bheje the mere paapaa ne,usse ek saaens ki kitaab kharidi।


sun kuchh achchhaa lag rahaa ho to kharid le,dhire dhire kar ke lautaa denaa।


are svaati nahin yaar।mujhe yahaan kuchh khaas lagaa nahin।bas yahi kitaab lene ke lia hi yahaan aayaa thaa।


chal koi baat nahin।(kahte hua svaati ne sanni kaa haath pakd liyaa)

yahaan kaa vdaa paav bdaa hi svaadisht hai,chal khaate hain।


are svaati main chaltaa hun yaar,let ho rahaa hun।


bas bhi kar naa।etnaa sharmaataa kyon hai।chal mere taraph se paarti de rahi hun।


kis baat kaa paarti vaise de rahi hai tu।


mere bhaiyaa kaa aai.aye.es men silekshan ho gayaa hai,esaliye de rahi hun।


sahi men।


haan baabaa।


mujhe tere bhaiyaa se milnaa hai,kab milaa rahi hai?


chal abhi chal ghar par milvaa deti hun।


vdaa paav khaane ke baad sanni svaati ke saath skuti par baith kar uske ghar gayaa।


ritesh bhaiyaa ye sanni hai।meraa klaasmet।aapse milne ko bdaa jidd kar rahaa thaa,esalia le aai।


ji prnaam bhaiyaa aur kaangrechulesans aapki sakses ke lia।


are sanni thaink yu।bolo kis lia milnaa chaahte the?


bhaiyaa jab svaati ne bataayaa ki aapkaa selekshans yu pi es si men ho gayaa hai,to sochaa ki aapse kuchh maargadarshan le lun।


are sanni kuchh nahin,tumhen jo vishay pasand hai,use aur majbut karo।bas tumhaaraa silekshan pakkaa hai।


par bhaiyaa mujhe to keval aur keval saaens hi pdhnaa achchhaa lagtaa hai।


thik hai naa sanni to use aur majbut kar lo।aur baaki bache vishyon ko bhi thodaa thodaa dekh lenaa, tumhaaraa silekshan aaraam se ho jaaagaa।


ji bhaiyaa।


svaati sanni se


oy sanni saaraa jyaan aaj hi le legaa kyaa?chal tujhe tere histel par chhod aati hun।


main chalaa jaaungaa naa svaati,tu rahne de।


svaati ne aankh ko bdaa kar liyaa।


sanni chup chaap svaati ke saath nikal pdaa।


svaati ne sanni ko apni skuti se hostal par drap kiyaa,aur gud naait bolakar vaapas ghar ko aa gayi।


sanni ke dost sanni kaa hostal ke get par entjaar kar rahe the।jab svaati sanni ko chhod vaapas gayi,to saare doston ne sanni kaa milakar khub majaa liyaa।


sanni ko bhi svaati dhire dhire pasand aane lagi thi।par kabhi use utni himmat naa jutaa paai ki usse vah bol sake।


pataa nahi kitne roj de aur kitne vailentaaen de nikal gaye,par sanni himmat naa jutaa paayaa।


phir se roj de aane vaalaa thaa।sabhi yuvkon ke dil men unke jjbaat jor jor se uphaan maar rahe the।


roj de vaale din,svaati bahut hi khubsurat dresh daalakar aai thi।bilkul dal jaisi dikh rahi thi।sabhi logon ki njar usse hat hi nahin rahi thi।


svaati sanni se

are sanni kyaa huaa?


kuchh nahin।


lagaataar ghure jaa rahe ho।kuchh kahnaa hai kyaa?


nahin!nahin!

bas tum aaj bahut hi sundar lag rahi ho।


aao sanni jaraa tahalte hain।


(sanni man hi man apni himmat bdhaate hua।he ishvar mujhe shakti de,ki main apne pyaar kaa ejhaar aaj kar paaun।)


svaati use phulon ki baag ki taraph lekar jaati hai।


svaati udhar lekar kyon jaa rahi ho।


dikh nahi rahaa hai tumhe,phul ke bagiche hain।


hamm


ruko bhi naa yaar।chup chaap chal nahi sakte ho saath men।


hamm


tabhi svaati ne ek laal gulaab ek tahni se tod li।


are are koi dekh legaa to!


haippi roj de sanni।


thaink yu end vish yu d sem।


bas!


(sanni men himmat jaag uthi thi)


kyaa tum meri garlaphraind bannaa pasand karogi?

(sanni ek paanv par jhukte hua svaati ko propoj kartaa hai)


svaati khush hokar

yas yas yas

aur sanni ke gale se lipat jaati hai।


ye jo ghatnaa hui thi,us vkt dono klaas 10 men the।


dono ne jamakar mehanat ki,aur donon achchhe nambar se maitrik  ko paas kiyaa।


sanni ko svaati pasand thi,par uski pahli praathamiktaa yu pi es si kaa egjaam thaa।uskaa dhyaan hameshaa achchhi taiyaari karne ke pichhe lagaa rahtaa thaa।


sanni chal naa!nayi muvi aai hai,dekhakar aate hain।

svaati tere ko main pasand kartaa hun, aur shaayad bahut hi jyaadaa pasand kartaa hun।par meri praathamiktaa abhi yu pi es si hai।


svaati ko uskaa vachan pahle pahle bahut hi kathor saa prtit huaa।par baad men vo uske nirnay ko samarthan karne lagi।


sanni mujhe bhi taiyaari karni hai,chal naa saath men karte hain।phir kyaa dono milakar saath men taiyaari karne lage।sanni achchhe achchhe buks kaa list laakar detaa,aur svaati use kharid kar le aati, aur donon saath milakar taiyaari karte।kabhi kabhi to samay kaa pataa bhi nahi chaltaa thaa ki kab andhiyaari raat subah ke ujaale ke god men jaakar baith gayi hai।


dono ne saath men hi grejuat kiyaa aur kismat dekhia dono kaa saath men hi yu pi es si bhi kliyar ho gayaa।ye hotaa hai saath kaa phark।agar janm janmaantar ke saath rahne vaale kaa saath mil jaaa,phir kyaa baat hai?koi bhi kaam mushkil nahin rahtaa hai।


Written by sushil kumar

17 Jun 2019

Bachche ka bhavishya

बच्चे का भविष्य।।

Adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



कहा जाता है: माँ की ममता और पिता की सख्ती दोनो ही ज़रूरी होती है,अगर किसी बच्चे का भविष्य बनाना है तो।वो कैसे?ऐसा ही कहानी मैं आपके लिए लेकर आया हूँ।आइए अब कहानी में प्रवेश करते हैं।पर एक बात बता दूँ, ये कहानी १०१% मेरे दिमाग की उपज है,इसका किसी भी भाई बन्धु,माँ बहिन से रिश्ता या नाता नहीं है।इसका मज़ा लीजिए,पर दिल पर कोई भी ना लीजिए।अब चलिए,बहुत बोल लिया।अंदर चलते हैं।
नारायण जी एक खेतिहर किसान हैं,जिनके पास १००बीघा खेत है।बड़े ऐय्याश क़िस्म के जमींदार थे नारायण जी।उनकी बीबी रानी देवी जी बड़ी ही खूबसूरत स्त्री थी।रानी जो मायके जाती तो घर पर कोठे का मज़ा लेते थे।कभी गुलाब बाई तो कभी चमेली बाई को घर पर बुला लेते थे।लेकिन चुपके चुपके।पर ऐसा क्यों?अपनी मेहरारू से जो डरते थे।

वैसे उनके किस्से भी बड़े ही रँगीले हैं।शादी से पहले बहुत सारी भाभियों और लड़कियों के संग सो चुके थे।शायद ही उनके गाँव या उसके आस पास की कोई छौड़ी उनके चंगुल से बची होगी।
पर अब जरा सभ्य हो गए हैं,शादी जो हो गई है।चार चार बच्चे के बाप जो हो गए हैं।वो तो उनकी अम्मा ने कह दिया था बस,वरना पूरा क्रिकेट टीम बना कर ही दम लेते।पर उनकी अम्मा के एक ही होनहार पुत्र थे, वो खुद।अब आप बोलेंगे,ये मुमकिन कैसे हुआ?उनके पिता जी बड़े समझदार थे,उनके होने के एक साल बाद साधु वस्त्र धारण कर हिमालय की ओर प्रस्थान कर गए,फिर लौट कर कभी नही आएँ।शायद उन्हें एहसास हो गया था कि ये नालायक अकेला ही काफी है,सारी जमा पूँजी अय्यासी  में उड़ाने को।
वो ऐसा था नारायण जी के पिता विष्णु जी को बंटवारे के बाद कुल  ५००बीघा खेत मिले थे।पर नारायण जी ने अपनी ऐय्यासी में सारे खेत बेचवा दिए,आज गिना चुना १०० बीघा खेत बचा है।
रानी के आते ही सारा दिन उसके आगे पीछे घूमते रहते।और मौका मिलते ही उन्हें दबोच लेते।पर रानी ने जो जरा डाँटा,तो पीछे हट जाते,और कहते अगर तुम्हारे पास नहीं आऊँगा,तो किसके पास जाऊँगा।रानी भी कभी कभी गुस्से में बोल दिया करती थी,जाओ गुलाब बाई के कोठे पर चले जाओ।पर नारायण अपने को बड़ा ही पत्नीव्रता दिखाता था,और उसकी बातों पर उसे खूब सुनाता था।
चारो बच्चे जिनका नाम विभूति,आहुति,पारंगत और जरासन्ध था,बड़े हो रहे थे।रानी ने अपने बच्चों को बड़ा लाड़ प्यार से पाला था,ऐसा नही की नारायण उन्हें प्यार नहीं करता था।पर वह जरा सख्त बाप बनने की कोशिश में रहता था।क्योंकि उसे लगता था कि अगर पिता की सख्ती उसे मिलती,तो वह बिगड़ता नहीं।
नारायण अपनी सख्ती के कारण बच्चों से दूर होता चला गया और रानी अपनी ममता के कारण बच्चों के नजदीक होती चली गई।पर बच्चे जो आज अपने पैरों पर खड़े हैं और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं,वो केवल और केवल नारायण के चलते ही।
आज विभूति की शादी है।विभूति अपने साथ ही काम करने वाली स्वाति के साथ विवाह के बंधन में बंधने जा रहा है।नारायण,रानी और बाकी सारे परिवार के लोग बड़े खुश हैं।अभी हल्दी कलश की विधि के लिए सभी लोग बड़े उत्साहित थे।विभूति के साथ मण्डप पर नारायण ,रानी और पंडित जी बैठे हुए थे।तभी नारायण को बहुत जोरों से उसके छाती में दर्द उठा और वह वहीं गिर गया।सभी जन विधि को छोड़कर नारायण को अस्पताल ले गएँ।डॉक्टर उन्हें अंदर आई सी यू में भर्ती कर,उनकी जाँच में लग गए।
बाहर विभूति गुस्से में लाल पीला होने लगा।
विभूति: बाबूजी को मन नहीं था शादी करवाने का,तो पहले बता दिए होते।ये नौटंकी क्यों कर दिया इन्होंने।हम कोर्ट मैरिज कर लेते।
रानी अपनी कुर्सी से उठी और विभूति को एक थप्पड़ जड़ दिया।
रानी: (रोते हुए) तेरा बाप तेरे से कम खुश नही था।उन्होंने तो तेरी हनीमून ट्रिप की पैकेज के लिए भी एडवांस दे रखा था।तुमलोगों को उनकी सख्ती नज़र आती है।पर तुम्हें ये पता नहीं,उनकी सख्ती के वजह से ही आज तुम अपने अपने कदम पर खड़े हो,और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हो।भले वो जितना बाहर से कठोर दिखते हैं,पर उससे डीज़ गुणा ज्यादा तुम पर जान भी छिड़कते हैं।आज तुमलोगों की पढ़ाई पूरी कराने के लिए ९० बीघा जमीन तक बेच डाली,आज क्या बचा है उनके पास?कुछ नहीं।फिर भी उन्होंने तुम्हारी हनीमून ट्रिप के लिए अपने बुढ़ापे के लिए बचा कर रखे फिक्स्ड डिपाजिट को भी तोड़ दिया,ताकि तुम्हें उनसे कोई शिकवा ना रहे।अरे वो बाप नहीं,देवता है,देवता!

सभी के आँखों में आंसू छलक पड़े।
तभी डॉक्टर साहब बाहर निकलते दिखे।सभी लोग उन्हें घेर लिए।कैसे हैं?कैसे हैं बाबूजी?कैसे हैं?
डॉक्टर: माइनर अटैक था।अब खतरे से बाहर हैं।पर पता नहीं जब दर्द से राहत मिला तो एकदम हमें परेशान करके रख दिए कि उनके बेटे का हल्दी कलश है,शुभ मुहूर्त निकला जा रहा है।चलिए जाँच पूरी कर ली गई है,अब कोई खतरे की बात नहीं है,उन्हें आप ले जाइए।बस ध्यान रखिए कि ज्यादा उन्हें टेंस होने ना दे।
नारायण को लेकर सारे बेटे घर पहुँचे।हल्दी कलश हुआ और फिर शादी हुई।नारायण से अब सभी बेटे बड़े ही प्यार और अदब से बर्ताव करने लगे।नारायण की बाकी जिंदगी बड़े ही शांति और शुकुन से बीती।









kahaa jaataa hai: maan ki mamtaa aur pitaa ki sakhti dono hi jruri hoti hai,agar kisi bachche kaa bhavishy banaanaa hai to।vo kaise?aisaa hi kahaani main aapke lia lekar aayaa hun।aaea ab kahaani men prvesh karte hain।par ek baat bataa dun, ye kahaani 101% mere dimaag ki upaj hai,eskaa kisi bhi bhaai bandhu,maan bahin se rishtaa yaa naataa nahin hai।eskaa mjaa lijia,par dil par koi bhi naa lijia।ab chalia,bahut bol liyaa।andar chalte hain।

naaraayan ji ek khetihar kisaan hain,jinke paas 100bighaa khet hai।bde aiyyaash kism ke jamindaar the naaraayan ji।unki bibi raani devi ji bdi hi khubsurat stri thi।raani jo maayke jaati to ghar par kothe kaa mjaa lete the।kabhi gulaab baai to kabhi chameli baai ko ghar par bulaa lete the।lekin chupke chupke।par aisaa kyon?apni mehraaru se jo darte the।


vaise unke kisse bhi bde hi rngile hain।shaadi se pahle bahut saari bhaabhiyon aur ldakiyon ke sang so chuke the।shaayad hi unke gaanv yaa uske aas paas ki koi chhaudi unke changul se bachi hogi।

par ab jaraa sabhy ho gaye hain,shaadi jo ho gayi hai।chaar chaar bachche ke baap jo ho gaye hain।vo to unki ammaa ne kah diyaa thaa bas,varnaa puraa kriket tim banaa kar hi dam lete।par unki ammaa ke ek hi honhaar putr the, vo khud।ab aap bolenge,ye mumakin kaise huaa?unke pitaa ji bde samajhdaar the,unke hone ke ek saal baad saadhu vastr dhaaran kar himaalay ki or prasthaan kar gaye,phir laut kar kabhi nahi aaan।shaayad unhen ehsaas ho gayaa thaa ki ye naalaayak akelaa hi kaaphi hai,saari jamaa punji ayyaasi  men udaane ko।

vo aisaa thaa naaraayan ji ke pitaa vishnu ji ko bantvaare ke baad kul  500bighaa khet mile the।par naaraayan ji ne apni aiyyaasi men saare khet bechvaa dia,aaj ginaa chunaa 100 bighaa khet bachaa hai।

raani ke aate hi saaraa din uske aage pichhe ghumte rahte।aur maukaa milte hi unhen daboch lete।par raani ne jo jaraa daantaa,to pichhe hat jaate,aur kahte agar tumhaare paas nahin aaungaa,to kiske paas jaaungaa।raani bhi kabhi kabhi gusse men bol diyaa karti thi,jaao gulaab baai ke kothe par chale jaao।par naaraayan apne ko bdaa hi patnivrtaa dikhaataa thaa,aur uski baaton par use khub sunaataa thaa।

chaaro bachche jinkaa naam vibhuti,aahuti,paarangat aur jaraasandh thaa,bde ho rahe the।raani ne apne bachchon ko bdaa laad pyaar se paalaa thaa,aisaa nahi ki naaraayan unhen pyaar nahin kartaa thaa।par vah jaraa sakht baap banne ki koshish men rahtaa thaa।kyonki use lagtaa thaa ki agar pitaa ki sakhti use milti,to vah bigdtaa nahin।

naaraayan apni sakhti ke kaaran bachchon se dur hotaa chalaa gayaa aur raani apni mamtaa ke kaaran bachchon ke najdik hoti chali gayi।par bachche jo aaj apne pairon par khde hain aur duniyaa ke saath kadam se kadam milaakar chal rahe hain,vo keval aur keval naaraayan ke chalte hi।

aaj vibhuti ki shaadi hai।vibhuti apne saath hi kaam karne vaali svaati ke saath vivaah ke bandhan men bandhne jaa rahaa hai।naaraayan,raani aur baaki saare parivaar ke log bde khush hain।abhi haldi kalash ki vidhi ke lia sabhi log bde utsaahit the।vibhuti ke saath mandap par naaraayan ,raani aur pandit ji baithe hua the।tabhi naaraayan ko bahut joron se uske chhaati men dard uthaa aur vah vahin gir gayaa।sabhi jan vidhi ko chhodkar naaraayan ko asptaal le gan।daktar unhen andar aai si yu men bharti kar,unki jaanch men lag gaye।

baahar vibhuti gusse men laal pilaa hone lagaa।

vibhuti: baabuji ko man nahin thaa shaadi karvaane kaa,to pahle bataa dia hote।ye nautanki kyon kar diyaa enhonne।ham kort mairij kar lete।

raani apni kursi se uthi aur vibhuti ko ek thappd jd diyaa।

raani: (rote hua) teraa baap tere se kam khush nahi thaa।unhonne to teri hanimun trip ki paikej ke lia bhi edvaans de rakhaa thaa।tumlogon ko unki sakhti njar aati hai।par tumhen ye pataa nahin,unki sakhti ke vajah se hi aaj tum apne apne kadam par khde ho,aur duniyaa ke saath kadam se kadam milaakar chal rahe ho।bhale vo jitnaa baahar se kathor dikhte hain,par usse dij gunaa jyaadaa tum par jaan bhi chhidkte hain।aaj tumlogon ki pdhaai puri karaane ke lia 90 bighaa jamin tak bech daali,aaj kyaa bachaa hai unke paas?kuchh nahin।phir bhi unhonne tumhaari hanimun trip ke lia apne budhaape ke lia bachaa kar rakhe phiksd dipaajit ko bhi tod diyaa,taaki tumhen unse koi shikvaa naa rahe।are vo baap nahin,devtaa hai,devtaa!


sabhi ke aankhon men aansu chhalak pde।

tabhi daktar saahab baahar nikalte dikhe।sabhi log unhen gher lia।kaise hain?kaise hain baabuji?kaise hain?

daktar: maaenar ataik thaa।ab khatre se baahar hain।par pataa nahin jab dard se raahat milaa to ekadam hamen pareshaan karke rakh dia ki unke bete kaa haldi kalash hai,shubh muhurt niklaa jaa rahaa hai।chalia jaanch puri kar li gayi hai,ab koi khatre ki baat nahin hai,unhen aap le jaaea।bas dhyaan rakhia ki jyaadaa unhen tens hone naa de।

naaraayan ko lekar saare bete ghar pahunche।haldi kalash huaa aur phir shaadi hui।naaraayan se ab sabhi bete bde hi pyaar aur adab se bartaav karne lage।naaraayan ki baaki jindgi bde hi shaanti aur shukun se biti।


Written by sushil kumar


16 Jun 2019

Sapne ko sath rakho,bahut jaldi paoge.

सपने को साथ रखो,बहुत जल्दी पाओगे।


Adhikari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं और मेरे सपने सदा साथ रहते थे।मैं यानी बिक्रम,एक अनाथ युवक हूँ।इग्यारह साल के उम्र में मेरे पिता दिनेश सिंह  मुम्बई बम ब्लास्ट में मारे गएँ।मेरी माँ भी सदमा बर्दाश्त ना कर पाई,और मुझे अकेला छोड़ पापा के पास चली गई।
हम बिहार से रहने वाले थे।पापा यहाँ मुम्बई में एक कारखाने में काम किया करते थे।उसी कारखाने के पास के झोपड़पट्टी में हमें रहने को कंपनी ने दिया हुआ था।वहाँ रहने वाले अधिकतर मजदूर बिहार के ही थे।हमारा बिहार में कुछ नहीं था।
पापा और माँ के गुजर जाने के बाद मैं आसरे और खाने को दर दर भटक रहा था।कंपनी ने मुझसे मेरा झोपड़ा छीन लिया था।संजय चाचा जो पापा के घनिष्ठ दोस्त हुआ करते थे,उन्होंने भी सहारा देने से मना कर दिया था।मैं बहुत ही डर गया था।कहाँ जाऊँगा, क्या खाऊँगा,किधर रहूँगा,किधर सोऊँगा।इसी तरह के विभिन्न सवालों ने मेरे मन को घेर रखे थे।
मैं निकल पड़ा रोड पर अपनी माँ बाप के यादों की बारात लेकर।माँ पापा ने हमेशा मुझे सिखाया था, कि जिसका कोई नहीं,उसका भगवान होता है।इसलिए उसपर भरोसा सदा बनाकर रखना।मैं भी भगवान के भरोसे ही मंदिर के द्वार के तरफ निकल पड़ा।और वहीं द्वार पर लेट गया।सुबह से कुछ नहीं खाने पीने के चलते और धूप में लेट जाने के चलते,मुझे बुखार हो गया।मेरा शरीर बहुत जोरों से कांपने लगा और मैं वहीं बेहोश हो गया।
जब आँखे खुली तो खुद को सरकारी अस्पताल में पाया।नर्स ने मुझसे मेरे माँ बाप का नाम व मेरे घर का पता पूछा।ऐसे हमदर्दी से पूछने पर मेरा बच्चा वाला दिल भावुक हो उठा।मेरा कोई नहीं है इस दुनिया में कहते कहते मैं सिसक सिसक कर रो पड़ा।नर्स को मुझ पर दया आ गई।और उसने कैंटीन से खाना मँगवाकर, मुझे भरपेट खाना खिलाया।और फिर मुझे बेड पर रेस्ट लेने को कहकर वह अपना फोन उठा,किसी को फोन लगाने लगी।
मेरी आँखें कब झपक गई मुझे पता ही नहीं चला।पर जब उठा तो कुछ अपने अंदर ताकत महसूस की।मैं खड़ा होकर नर्स को ढूंढने निकल पड़ा।नर्स ने मुझे अपने कमरे से बाहर आते देख,मुझे अपने बेड पर ही रहने को कहा।मैं अपने बेड पर लौट गया।
कुछ देर बाद नर्स मेरे पास आकर मेरा हाल चाल पूछा।और कहा कि मुझे कोई लेने आने वाला है।मैं डर गया,और पूछा कौन?
नर्स ने बताया कि उन्होंने किसी अनाथाश्रम को फोन कर दिया है।वो लोग मुझे लेने के लिए आते ही होंगे।
मैं:  अनाथाश्रम मतलब?
नर्स: जिन बच्चों के माँ बाप नहीं होते हैं,उनके लिए अनाथाश्रम होते है।वहाँ ढेर सारे बच्चे एक साथ रहते हैं।वहाँ खाना पीना,पढ़ाई लिखाई,खेल कूद सबकुछ होता है।तुम्हें वहाँ आनन्द आएगा।
मैं:  पर आप मुझसे मिलने वहाँ आओगे ना।
नर्स:  हाँ हाँ बच्चे,बिल्कुल आऊँगी।
अनाथाश्रम से कुछ लोग आएँ, और उन्होंने एक फॉर्म और पेन निकाला।और फिर मेरा नाम पूछा,मेरे पिता और माता का नाम और मेरे पुराने घर का पता पूछा।फिर मुझसे चलने को कहा।
मैं डरा सहमा सा उनके साथ चला गया।
अनाथाश्रम का नाम पंडित दीन दयाल अनाथाश्रम था।वहाँ बहुत सारे बच्चे पहले से मौजूद थे।सारे बच्चों ने मेरा उत्साह से स्वागत किया। मैं बहुत खुश था।वहाँ पहुँचने के बाद मुझे कुछ नए कपड़े मिले।
वहाँ का रूटीन मुझे बहुत ही अच्छा लगा।सुबह नाश्ते में अंडा और ब्रेड जैम।दोपहर के लंच के लिए पुलाओ टिफ़िन में मिलता था।शाम में सब्जी रोटी,सलाद।सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक स्कूल।स्कूल से लौटकर एक घण्टा खेल कूद,फिर होम वर्क और पढ़ाई लिखाई।
मुझे मानो मेरे भगवान ने सुन ली हो।मुझे ईश्वर पर और भी श्रद्धा गहरा होता चला गया,और माँ बाबू जी के बातों पर भी।
मैं जब माँ बाबू जी के साथ में रहता था,तो उनसे बोलता था कि मैं बड़ा होकर पुलिस बनूँगा।
आज फिर से मेरे सपने ने मेेरे हृदय में दस्तक दिया है,जिसे मैं अब कभी दूर जाने नहीं दूँगा।स्कूलिंग करने के बाद मैंने ट्यूशन लेना शुरू किया।पहले पहले तो काफी मुश्किलात हुए ट्यूशन ढूंढने में,पर आखिर एक ट्यूशन मुझे मिल ही गया।और फिर क्या मेरा ट्यूशन चल पड़ा।साथ ही साथ में पढ़ाई भी जारी रखी,और ग्रेजुएट भी मैने कम्पलीट कर ली।पी.एस.सी. का फॉर्म भरा और एग्जाम दिया।मेरे माँ बाबू जी के दिए गए संस्कार और भगवान की असीम कृपा के चलते,मैंने पहली प्रयास में ही पी.एस.सी. निकाल लिया।आज मैं बहुत खुश था,कि मेरे सपने को पूर्ण होते मैं देख पा रहा था।पर एक दुख भी दिल में लेकर बैठा था कि माँ बाबू जी साथ में नहीं हैं।
मैंने कसम खाई की मैं अपनी सैलरी की बिस्वा भाग पंडित दीन दयाल अनाथाश्रम को दान करूँगा।और सारे बच्चों में उस दिन मिठाई बंटवाई,और उन्हें स्वादिष्ट व्यंजन खिलवाए।मैं नर्स माँ से मिलने गया।पता नहीं क्यों उस नर्स में मुझे मेरी माँ नज़र आती थी।उनके लिए एक सुंदर सी साड़ी और एक सोने का चैन लेकर गया था।वो मेरी पुलिस में भर्ती की खबर सुन बहुत खुश हुई थी।











main aur mere sapne sadaa saath rahte the।main yaani bikram,ek anaath yuvak hun।egyaarah saal ke umr men mere pitaa dinesh sinh  mumbaayi bam blaast men maare gan।meri maan bhi sadmaa bardaasht naa kar paai,aur mujhe akelaa chhod paapaa ke paas chali gayi।

ham bihaar se rahne vaale the।paapaa yahaan mumbaayi men ek kaarkhaane men kaam kiyaa karte the।usi kaarkhaane ke paas ke jhopdapatti men hamen rahne ko kampni ne diyaa huaa thaa।vahaan rahne vaale adhikatar majdur bihaar ke hi the।hamaaraa bihaar men kuchh nahin thaa।

paapaa aur maan ke gujar jaane ke baad main aasre aur khaane ko dar dar bhatak rahaa thaa।kampni ne mujhse meraa jhopdaa chhin liyaa thaa।sanjay chaachaa jo paapaa ke ghanishth dost huaa karte the,unhonne bhi sahaaraa dene se manaa kar diyaa thaa।main bahut hi dar gayaa thaa।kahaan jaaungaa, kyaa khaaungaa,kidhar rahungaa,kidhar soungaa।esi tarah ke vibhinn savaalon ne mere man ko gher rakhe the।

main nikal pdaa rod par apni maan baap ke yaadon ki baaraat lekar।maan paapaa ne hameshaa mujhe sikhaayaa thaa, ki jiskaa koi nahin,uskaa bhagvaan hotaa hai।esalia usapar bharosaa sadaa banaakar rakhnaa।main bhi bhagvaan ke bharose hi mandir ke dvaar ke taraph nikal pdaa।aur vahin dvaar par let gayaa।subah se kuchh nahin khaane pine ke chalte aur dhup men let jaane ke chalte,mujhe bukhaar ho gayaa।meraa sharir bahut joron se kaampne lagaa aur main vahin behosh ho gayaa।

jab aankhe khuli to khud ko sarkaari asptaal men paayaa।nars ne mujhse mere maan baap kaa naam v mere ghar kaa pataa puchhaa।aise hamadardi se puchhne par meraa bachchaa vaalaa dil bhaavuk ho uthaa।meraa koi nahin hai es duniyaa men kahte kahte main sisak sisak kar ro pdaa।nars ko mujh par dayaa aa gayi।aur usne kaintin se khaanaa mnagvaakar, mujhe bharpet khaanaa khilaayaa।aur phir mujhe bed par rest lene ko kahakar vah apnaa phon uthaa,kisi ko phon lagaane lagi।

meri aankhen kab jhapak gayi mujhe pataa hi nahin chalaa।par jab uthaa to kuchh apne andar taakat mahsus ki।main khdaa hokar nars ko dhundhne nikal pdaa।nars ne mujhe apne kamre se baahar aate dekh,mujhe apne bed par hi rahne ko kahaa।main apne bed par laut gayaa।

kuchh der baad nars mere paas aakar meraa haal chaal puchhaa।aur kahaa ki mujhe koi lene aane vaalaa hai।main dar gayaa,aur puchhaa kaun?

nars ne bataayaa ki unhonne kisi anaathaashram ko phon kar diyaa hai।vo log mujhe lene ke lia aate hi honge।

main:  anaathaashram matalab?

nars: jin bachchon ke maan baap nahin hote hain,unke lia anaathaashram hote hai।vahaan dher saare bachche ek saath rahte hain।vahaan khaanaa pinaa,pdhaai likhaai,khel kud sabakuchh hotaa hai।tumhen vahaan aanand aaagaa।

main:  par aap mujhse milne vahaan aaoge naa।

nars:  haan haan bachche,bilkul aaungi।

anaathaashram se kuchh log aaan, aur unhonne ek pharm aur pen nikaalaa।aur phir meraa naam puchhaa,mere pitaa aur maataa kaa naam aur mere puraane ghar kaa pataa puchhaa।phir mujhse chalne ko kahaa।

main daraa sahmaa saa unke saath chalaa gayaa।

anaathaashram kaa naam pandit din dayaal anaathaashram thaa।vahaan bahut saare bachche pahle se maujud the।saare bachchon ne meraa utsaah se svaagat kiyaa। main bahut khush thaa।vahaan pahunchne ke baad mujhe kuchh naye kapde mile।

vahaan kaa rutin mujhe bahut hi achchhaa lagaa।subah naashte men andaa aur bred jaim।dopahar ke lanch ke lia pulaao tifin men miltaa thaa।shaam men sabji roti,salaad।subah nau baje se shaam chaar baje tak skul।skul se lautakar ek ghantaa khel kud,phir hom vark aur pdhaai likhaai।

mujhe maano mere bhagvaan ne sun li ho।mujhe ishvar par aur bhi shraddhaa gahraa hotaa chalaa gayaa,aur maan baabu ji ke baaton par bhi।

main jab maan baabu ji ke saath men rahtaa thaa,to unse boltaa thaa ki main bdaa hokar pulis banungaa।

aaj phir se mere sapne ne meere hriaday men dastak diyaa hai,jise main ab kabhi dur jaane nahin dungaa।skuling karne ke baad mainne tyushan lenaa shuru kiyaa।pahle pahle to kaaphi mushkilaat hua tyushan dhundhne men,par aakhir ek tyushan mujhe mil hi gayaa।aur phir kyaa meraa tyushan chal pdaa।saath hi saath men pdhaai bhi jaari rakhi,aur grejuat bhi maine kamplit kar li।pi.es.si. kaa pharm bharaa aur egjaam diyaa।mere maan baabu ji ke dia gaye sanskaar aur bhagvaan ki asim kripaa ke chalte,mainne pahli pryaas men hi pi.es.si. nikaal liyaa।aaj main bahut khush thaa,ki mere sapne ko purn hote main dekh paa rahaa thaa।par ek dukh bhi dil men lekar baithaa thaa ki maan baabu ji saath men nahin hain।

mainne kasam khaai ki main apni sailri ki bisvaa bhaag pandit din dayaal anaathaashram ko daan karungaa।aur saare bachchon men us din mithaai bantvaai,aur unhen svaadisht vyanjan khilvaaa।main nars maan se milne gayaa।pataa nahin kyon us nars men mujhe meri maan njar aati thi।unke lia ek sundar si saadi aur ek sone kaa chain lekar gayaa thaa।vo meri pulis men bharti ki khabar sun bahut khush hui thi।



Written by sushil kumar

Pyar ek aisa ehsas hai,jo kabhi marta nahin.

प्यार एक ऐसा एहसास है , जो कभी मरता नहीं।वो हमेशा ज़िंदा रहता है,हमारे और आपके जेहन में।

Adhmari khwahish द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




मैं सन्नी एक मिडिल क्लास फैमिली का बिगड़ैल औलाद।अभी मैंने आई.सी.एस.ई. बोर्ड से दसवीं का एग्जाम पास किया है।वो भी पैंसठ प्रतिसत से।अब तो आप समझ ही गए होंगे,मैं कितना होनहार छात्र हूँ।

अब कुछ पाँच साल पहले की मेरी जिंदगी में लौट चलते हैं।सन्त फ्रांसिस स्कूल का नाम हमारे शहर के हर गली गली में लिया जा रहा था।वहाँ जो चला गया,किस्मत उसकी बदल गई।या तो वो इंजीनियर,या तो वो आई.ए. एस. वहाँ से बनकर ही निकलता है।
हर माँ बाप का सपना हुआ करता था,कि उनके बच्चे की दाखिला वहाँ मिल जाए।ठीक वैसे ही मेरे माँ बाबू जी का भी सपना था कि मेरी भी दाखिला वहाँ हो जाए,ताकि मेरा भविष्य सुधर जाए।
मैंने उस वक़्त पांचवी कक्षा पास की थी।और पूरी कक्षा में टॉप किया था।मेरे पापा मम्मी मुझे और मेरे मार्कशीट लेकर सन्त फ्रांसिस स्कूल पहुँच गए।
मैं बहुत ही ज्यादा नर्वस था।घर से निकलते वक्त मैंने ईश्वर से बस यही प्रार्थना की थी कि हे ईश्वर मेरे माँ बाबू जी को कभी दुख का सामना ना करना पड़े,वो सदा खुश रहें।जहाँ उनकी खुशी,वहीं मेरी खुशी।पर अभी पुराने दोस्तों के छूटने का भी गम दिल में घेरे जा रहा था।
एंट्रेंस एग्जाम दिया,फैल हो गया।माँ बाबूजी ने प्रिंसिपल मैडम से निवेदन किया कि आप इसके पुराने रिकॉर्ड देखिए,ये हमेशा अपने क्लास में अव्वल ही आया है।इसे एक मौका देकर देखिए।
पता नहीं कैसे? प्रिंसिपल को भी मेरे माँ बाप के विश्वास पर विश्वास हो गया,और मेरा दाखिला वहाँ हो गया।

मेरा पहला दिन स्कूल का।
मैं डरा सहमा सा स्कूल जा पहुँचा।नए चेहरे,नए लोग।कुछ तो ऐसे घूरे जा रहे थे,मानो हमारी पहचान बहुत ही पुरानी हो।कुछ देख कर भी ना देखने का बर्ताव कर रहे थे।उन लोगो में मैं ही एक अजनबी सा महसूस कर रहा था।पता नहीं,रह रह कर वही पुराने दोस्त मुझे याद आ रहे थे।
क्लास पहुँचा और आगे के एक डेस्क पर जाकर बैठ गया।तभी एक लंबा सा घुँघरेले बाल वाला लड़का आया,और बोला
पीछे बैठ भाई, ये सीट मेरी है।
मैं उठकर पीछे चला गया।
अब मैं जिस सीट पर बैठता,वहाँ बैठा छात्र मुझे ये कहकर उठा देता कि वहाँ कोई और बैठा है।आखिरकार सबसे पीछे वाली सीट,जहाँ कोई नहीं बैठा था,वहाँ जाकर बैठ गया।
पहले सब्जेक्ट की क्लास की घण्टी बजी।एक शिक्षक मोटा सा,काला चेहरे लिए अंदर घुसा।उसकी शक्ल देखकर ही दिख रहा था,कि वह कितना खतरनाक और क्रूर होगा।जो कोई होमवर्क बनाकर नहीं आता होगा,उसका तो गाल और चूतड़ दोनो लाल कर देता होगा।
तभी किसी लड़की की आवाज़ दरवाज़े से आई:-मे आई कम इन सर।
शिक्षक :   कम इन।
लड़की  :   सॉरी सर, एक्चुअली देयर वेअर टू मच ट्रैफिक इन माई रूट।
शिक्षक :  व्हाट डू यू मीन टू से,डीज़ पीपल कम बाई फ्लाइट ओर व्हाट?टेक केअर ऑफ योर टाइमिंग नेक्स्ट टाइम , अदरवाइज यु विल नॉट बी अलाउड टू सीट इन डी क्लास।
लड़की : यस सर।

वह सीधे चलते चलते मेरे बगल में आकर बैठ गई।

मैं:  हेय!तुम लेट कैसे हो गई।
लड़की: अरे यार रास्ते में मेरे कार से एक कुत्ता टकरा गया।
मैं:  तो(मुस्कुराते हुए)
लड़की: वो कुत्ता किसी का पालतू कुत्ता था।
मैं:  ओ(सीरियस मूड)
लड़की: उसका मालिक दस हज़ार से नीचे लेने को तैयार ही नही हो रहा था।और अंत में मेरे डैड को दस हज़ार उसे देना ही पड़ा।
मैं: ओके
लड़की: वैसे मेरा नाम सुहाना है।तुम्हारा नाम क्या है?
मैं: मेरा नाम सन्नी।
सुहाना: मेरा आज पहला दिन है,और देखो आज ही मैं लेट भी हो गई।
मैं: मेरा भी आज पहला ही दिन है।
सुहाना: ओ!वाओ:लेटस बी ए फ्रेंड।
मैं: यस,यस।
तभी शिक्षक
रोल न● 39
सुहाना
सुहाना:-यस सर।
शिक्षक
रोल न● 40
सन्नी
मैं: यस सर।

फिर क्या?
हमारी दोस्ती कुछ अलग ही आयाम पर पहुँच चुकी थी।
हम जितना एक दूसरे संग खुले हुए थे,उतना ही दूसरों से बन्द बन्द थे।हमारे दोस्त भी बहुत ही गिने चुने थे।हमें एक दूसरे की कंपनी पसन्द थी।

अक्सर मैं और  सुहाना शाम में एक दूसरे के घर जाया करते थे।उसके घर पर मम्मी डैडी और एक आया रहती थी।मम्मी एक हाउस वाइफ थी,जबकि उसके डैडी एक कंपनी में अच्छे पोस्ट पर पदस्थ थे।हम दोनों को एक दूसरे की माँ के हाथ का खाना पसंद था।

हम दोनों ही अपनी दोस्ती की सीमा लाँघ कर एक नए रिश्ते में बंधना चाहते थे।क्योंकि हम दोनों ही एक दूसरे को बहुत ज्यादा पसंद करने लगे थे।
ये बात कुछ नवमी कक्षा के मिड टर्म शुरू होने से एक महीना पहले की बात है।एक सुबह सुहाना बहुत खुश दिख रही थी।और कुछ गुनगुना रही थी।प्यार किया तो डरना क्या
 मैं:  क्या बात है?बहुत खुश दिख रही हो सुहाना।
सुहाना:  हाँ!आज शाम में घर आना,पता चल जाएगा।
मैं: क्या है बताओ ना।प्लीज बताओ ना।
सुहाना: नहीं नहीं!जब शाम में आओगे ,उसी वक़्त बताऊँगी।
मैं: ठीक है,मत बताओ।मैं भी नही आऊँगा।
सुहाना: अरे माँ आज कुछ स्पेशल बना रही है।
मैं: क्या?
सुहाना: पता नहीं।पर कुछ स्पेशल है।

शाम हुआ,मैं सुहाना के यहाँ पहुँचा।

सुहाना: हाई
मैं: हाई
सुहाना: बहुत लेट करदी आने में।
मैं: हूँ
सुहाना: आओ! अंदर आओ।
मैं: आज बहुत ही सुंदर लग रही हो।क्या मस्त ड्रेस पहन रखी हो।
सुहाना: सही में।
मैं: हाँ।
सुहाना अपने कमरे में मुझे ले गई।
मैं: अंटी नहीं दिख रही है।
सुहाना: माँ मामा की शादी अटेंड करने को लखनऊ गई हुई हैं।
मैं: फिर तुमने ऐसा क्यों बोला कि
सुहाना बिच में रोकते हुए
सुहाना: कि माँ ने आज कुछ स्पेशल बनाया है।
सुहाना (शरारती हँसी हँसते हुए): बस ऐसे ही।
अगले ही क्षण उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया।और मुझसे गले से लिपट गई।
मैं: अरे तुम्हारी आया आ जाएगी।
सुहाना: वो इस वक़्त घर पर नहीं है,घर का सौदा लेने बाजार गई हुई है।
मैं: (गहरी साँस लेते हुए)मैं भी सुहाना को अपनी बाँहो में और भी कसकर जकड़ लिया।
सुहाना: बस!अब आगे कुछ करोगे या यूँही.....
मैं: क्या?
सुहाना: अरे इतनी सुंदर लड़की तुम्हारे साथ में है,उसे किस लो,उसे प्यार करो।सब कुछ तुम्हे समझाना होगा।
मैं: (जरा सा मज़ा लेते हए)मुझे कुछ भी नही आता है।तुम शुरू करो ना।
सुहाना ने मेरा सर पकड़ अपने लिप्स को मेरे लिप्स पर रख दी,और धीरे धीरे से किस लेने लगी।मैं भी गुलाब की पंखुड़ियों सा नरम ओंठ को महसूस कर पूरे जोश में आ गया,और अपने जिह्वा को उसके जिह्वा संग मिला कर चरम सुख का आनंद लेने लगा।मैं उसके कपड़ो को हटाने की कोशिश करने लगा,पर उसने रोक दिया।
सुहाना: उँ...हूं....।प्रोटेक्शन है।
मैं: नहीं।
सुहाना:  पहले मेडिकल शॉप से कंडोम लेकर आओ।
और मैं निकल पड़ा उसके घर से अपना मोटर साईकल लेकर।मैं काफी दूर आने के बाद,एक अनजान मेडिकल शॉप के आगे अपनी मोटर साईकल रोकी।और वहाँ जाकर कंडोम माँगा।
मैं: कंडोम है।
दुकानदार: कौन सा फ्लेवर चाहिए।चॉकलेट,स्ट्रॉबेरी,डॉटेड,या विदआउट डॉट।
मैं: चॉकलेट फ्लेवर दे दीजिए।
और फिर क्या,मोटरसायकिल लिया और पाँच मिनट में सुहाना के सामने।
उस दिन हमने दो बार सेक्स किया।और उसके बाद तो पता नहीं,शायद ढाई हजार बार तो किया ही होगा,दसवीं के मिड टर्म तक।
अब आप पूछेंगे दसवीं के मिड टर्म तक ही क्यों?
वो इसलिए क्योंकि सुहाना के पिता को लगता था कि मेरे संगति में आकर,उसके अच्छे नम्बर नही आ रहे हैं।और इसलिए उन्होंने सुहाना को धमकी दी थी कि अब सन्नी के साथ दोस्ती खत्म करो और पढ़ाई करो।अगर अच्छे नम्बर नहीं आएँगे तो बोर्ड के बाद घर पर बैठना होगा।
सुहाना घर पर बैठने की बात से ज्यादा मुझसे बोर्ड के बाद ना मिल पाने की स्थिति से डर गई थी।
स्कूल में जब सुहाना की बाते सुनी तो मैं भी सन्न रह गया।और उसको पूरा सहयोग देने का वादा किया।
और सुहाना स्कूल में टॉप कर गई,और मैं केवल पास होकर ही रह गया।

और आज सुबह सुहाना की दोस्त,मेरी क्लासमेट सूची एक इंवेलोप ले कर मेरे पास आई।
सूची:  सुहाना ने बोला है,अकेले में पढ़ना।

मैं इंवेलोप लेकर फटाफट अपने कमरे में चला गया और अंदर से सिटकिनी लगा दी।
इंवेलोप खोलते खोलते मेरा दिल बहुत जोरों से धड़कने लगा।मन अनेक बुरे ख्यालातों से भर गया था।

प्रिय सन्नी
जब तक तुम्हें यह खत मिलेगा,तब तक मैं लंदन के लिए फ्लाइट पर बैठ चुकी होंगी।मुझे हार्ट कैंसर निकला है।शायद तुम्हे याद होगा,पिछली बार जब हम मिले थे,तब तुमने पूछा था कि मैं बहुत कमजोर दिख रही हूँ।वो उसी का प्रभाव था।डॉक्टर के पास जब जाँच हुआ तो पता चला।शायद मैं कुछ ही दिनों की मेहमान हूँ।मैं तुम्हें टूटते हुए नहीं देख सकती हूँ,और चाहती हूँ कि तुम अपने जीवन में आगे बढ़ो।तुम्हारे साथ बिताए गए प्यारे व अनमोल समय की लड़ियों को साथ लिए जा रही हूँ, जिसके सहारे अपने बचे खुचे समय को बिता लूँगी।अपने आखिरी समय में मैं अपने दादा दादी के साथ रहना चाहती हूँ इसलिए उनके पास लन्दन जा रही हूँ।

तुम सदा खुश रहना और जीवन में सदा आगे की ओर बढ़ते रहना।

तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी सुहाना।
एक एक शब्द मुझपर भारी पड़ रहे थे।मेरे तो पैरों तले जमीन खिसक रही थी।दिल मे भी थोड़ा थोड़ा दर्द सा होने लग रहा था।और अपने आंसुओ की धार को ना रोक सका था।
और फिर क्या,अकेले अकेले रहना।खुद से बाते करना।कभी रोना,कभी हँसना, कभी घण्टो घण्टो तक कमरे में बंद रहना।
फिर एक बार मेरे मामा जो साइकोलोजिस्ट हैं,घर पर आए हुए थे।कदाचित ये कहना सही होगा कि माँ ने उन्हें बुलाया थे,ताकि मेरा इलाज कर सके।(माँ ने वह पत्र पढ़ लिया था।पर वो केवल मामा को ही उस पत्र के बारे मे बताई थी।)
मामा: देख भांजे दुनिया में आना जाना तो लगा रहता है,पर जो गया, उसकी ख्वाहिश को पूरा करने की जिम्मेवारी,यहाँ रह गए उसके प्रेमी जनों की है।ताकि वो जहाँ भी रहे,खुश रहे।हमें और तुम्हे देखकर।

सन्नी को कुछ दिमाग में ठनका।
सन्नी: (मन ही मन सोचते हुए)अरे सुहाना की ख्वाहिश थी कि वो सारे गरीब बच्चों को पढ़ाए और दुनिया को सभी के लिए रहने के लिए उत्तम जगह बनाए।

सन्नी ने एक एन.जी.ओ जॉइन किया और वहाँ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।खुद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी।
धीरे धीरे समय बिता,और उसने हिंदी में पी.एच. डी. पूरी कर ली। वो सुहाना के सपने को पूरा करने को जी जान से लग गया।उसने एन जी ओ में काम करने के तरीके में कुछ कमियां पाईं।उसने खुद एक एन जी ओ खोलने का निर्णय लिया।और अपने एन जी ओ का नाम सुहाना जिद्द के नाम से रजिस्टर्ड करवाया।वो बहुत ही खुश था।
वो खुद ही झोपड़पट्टी में अपने टीम के साथ जाता था,और बच्चों को बाहर की दुनिया से अवगत करवाता था,साथ ही साथ उन्हें पढ़ाता भी था।झोपड़पट्टी के बच्चे भी इंग्लिश में जवाब देने लगे थे।और उनके सपनों को साकार करने के लिए सुहाना जिद्द की संस्था ने भरपूर मदद और कोशिश की थी।जिसके फल स्वरूप उनके इस प्रयास को सम्मानित करने के लिए लंदन में इनका नाम नॉमिनेट हुआ था।
सन्नी अपनी टीम के साथ लंदन रवाना हुआ।
वो दिन आ चुका था जब उनके इस प्रयास के लिए उन्हें सम्मानित होना था।आज सारा विश्व की नज़र उनपे थी।मंच सज चुके थे।दर्शकगण बैठ चुके थे।हर क्षेत्र में किए गए प्रयास को सम्मानित किया जा रहा था।हमारे क्षेत्र से दो संस्था और भी थी।एक लंदन की ही संसु नाम की एन जी ओ थी,और एक जापान की समसू नाम की एन जी ओ थी।दोनो ऐसे लग रहे थे मानो उनके संस्थापक जापान या चीन से हैं।
मैं बहुत ज्यादा ही उत्साहित था,कि सुहाना के सपने को पहला उड़ान मिल चुका था।
हमारी संस्था का नाम लिया गया।मैं अपनी टीम की ओर से स्टेज पर पहुँचा।हमारी संस्था के किए गए प्रयास की एक छोटी सी झलक की वीडियो सारे विश्व के सामने रखी गई।पन्द्रह मिनट के वीडियो के बाद सारा ऑडिटोरियम दस मिनट तक लगातार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।हर चेहरे पर खुशी झलक रही थी,कहीं आंसुओ की धारा के द्वारा तो कहीं वाह वाही के द्वारा।हमारी टीम की छाती गर्व से फूल गई।और मुझे मंच पर एक दो शब्द अपनी उपलब्धता पर कहने को कहा गया।
सन्नी:  मैं इस सम्मान का श्रेय केवल और केवल अपनी टीम को देना चाहता हूँ।अगर इनका साथ नहीं मिलता,तो शायद ही कभी इस मंच पर पाँव रख पाता।
पर एक शख्स और भी है,जिसके चलते मैं इस राह पर चल सका।अगर वो ना होता,तो शायद ही इस राह पर मैं कभी आता ही नहीं।वो शायद इस दुनिया में अब नहीं है।वो और कोई नहीं,वो मेरी दोस्त,मेरी सबकुछ,मेरी सुहाना है।ये सुहाना जिद्द उसी के नाम पर रखी गई है।उसका सपना था कि सारे गरीब बच्चों को पढ़ाए और उनका भविष्य सँवारे,साथ ही साथ दुनिया को रहने के लिए उत्तम स्थान बनाए।आज उसका सपना ,मेरा जिद्द बन गई है,और उसे मैं पूरा करके ही दम लूँगा।

तभी एक लड़की आगे की कतार से उठकर मेरी तरफ आने लगती है।उसका चेहरा जैसे जैसे निकट आ रहा था,कोई अपने की तस्वीर दिमाग में उभर कर आ रही थी।
ये ये सुहाना है क्या?
हाँ हाँ(दिल कहे जा रहा था)
नहीं नहीं(दिमाग कह रहा था)
लड़की सन्नी के बाँहो में जाकर लिपट गई।
लड़की: सन्नी!
सन्नी: सुहाना!तुम !तुम! जिंदा हो।
सुहाना: हाँ।आखिरकार तुमने मुझे ढूंढ ही निकाला।
सन्नी और भी कसकर सुहाना को अपनी बाँहो में जकड़ लेता है।
ऑडिटोरियम पूरा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है।
सन्नी: तुम यहाँ कैसे?
सुहाना: संसु की संस्थापक मैं ही हूँ।
सन्नी: वहाँ भी तुमने मुझे अपने संग जोड़ रखा है।
सुहाना: मुझे लगा तुम जीवन में काफी आगे बढ़ गए होगे, इसलिए मैं तुम्हें ढूंढने की प्रयास नहीं की।
सन्नी: चलो ठीक है।तुम कैसी हो अभी?
सुहाना: फर्स्ट क्लास।कैंसर के प्रभाव से मैं कोमा में चली गई थी।माता रानी की कृपा से सात साल के बाद मैं होश में आई।
सन्नी: थैंक गॉड!तुम मुझे मिल गई।
सुहाना: क्या मतलब!तुमने शादी नही की है।
सन्नी: हाँ शादी तो मैंने कर ही ली थी।
सुहाना: किसके साथ?
सन्नी: अपने प्रोफेशन के साथ।
सुहाना जोर जोर से हँस पड़ी और सन्नी से लिपट गई,सदा सदा के लिए।








main sanni ek midil klaas phaimili kaa bigdail aulaad।abhi mainne aai.si.es.ayi. bord se dasvin kaa egjaam paas kiyaa hai।vo bhi painsath pratisat se।ab to aap samajh hi gaye honge,main kitnaa honhaar chhaatr hun।


ab kuchh paanch saal pahle ki meri jindgi men laut chalte hain।sant phraansis skul kaa naam hamaare shahar ke har gali gali men liyaa jaa rahaa thaa।vahaan jo chalaa gayaa,kismat uski badal gayi।yaa to vo enjiniyar,yaa to vo aai.aye. es. vahaan se banakar hi nikaltaa hai।

har maan baap kaa sapnaa huaa kartaa thaa,ki unke bachche ki daakhilaa vahaan mil jaaa।thik vaise hi mere maan baabu ji kaa bhi sapnaa thaa ki meri bhi daakhilaa vahaan ho jaaa,taaki meraa bhavishy sudhar jaaa।

mainne us vkt paanchvi kakshaa paas ki thi।aur puri kakshaa men tap kiyaa thaa।mere paapaa mammi mujhe aur mere maarkshit lekar sant phraansis skul pahunch gaye।

main bahut hi jyaadaa narvas thaa।ghar se nikalte vakt mainne ishvar se bas yahi praarthnaa ki thi ki he ishvar mere maan baabu ji ko kabhi dukh kaa saamnaa naa karnaa pde,vo sadaa khush rahen।jahaan unki khushi,vahin meri khushi।par abhi puraane doston ke chhutne kaa bhi gam dil men ghere jaa rahaa thaa।

entrens egjaam diyaa,phail ho gayaa।maan baabuji ne prinsipal maidam se nivedan kiyaa ki aap eske puraane rikard dekhia,ye hameshaa apne klaas men avval hi aayaa hai।ese ek maukaa dekar dekhia।

pataa nahin kaise? prinsipal ko bhi mere maan baap ke vishvaas par vishvaas ho gayaa,aur meraa daakhilaa vahaan ho gayaa।


meraa pahlaa din skul kaa।

main daraa sahmaa saa skul jaa pahunchaa।naye chehre,naye log।kuchh to aise ghure jaa rahe the,maano hamaari pahchaan bahut hi puraani ho।kuchh dekh kar bhi naa dekhne kaa bartaav kar rahe the।un logo men main hi ek ajanbi saa mahsus kar rahaa thaa।pataa nahin,rah rah kar vahi puraane dost mujhe yaad aa rahe the।

klaas pahunchaa aur aage ke ek desk par jaakar baith gayaa।tabhi ek lambaa saa ghunghrele baal vaalaa ldkaa aayaa,aur bolaa

pichhe baith bhaai, ye sit meri hai।

main uthakar pichhe chalaa gayaa।

ab main jis sit par baithtaa,vahaan baithaa chhaatr mujhe ye kahakar uthaa detaa ki vahaan koi aur baithaa hai।aakhirkaar sabse pichhe vaali sit,jahaan koi nahin baithaa thaa,vahaan jaakar baith gayaa।

pahle sabjekt ki klaas ki ghanti baji।ek shikshak motaa saa,kaalaa chehre lia andar ghusaa।uski shakl dekhakar hi dikh rahaa thaa,ki vah kitnaa khatarnaak aur krur hogaa।jo koi homavark banaakar nahin aataa hogaa,uskaa to gaal aur chutd dono laal kar detaa hogaa।

tabhi kisi ldki ki aavaaj darvaaje se aai:-me aai kam en sar।

shikshak :   kam en।

ldki  :   sari sar, ekchuali deyar vear tu mach traiphik en maai rut।

shikshak :  vhaat du yu min tu se,dij pipal kam baai phlaaet or vhaat?tek kear auph yor taaeming nekst taaem , adarvaaej yu vil nat bi alaaud tu sit en di klaas।

ldki : yas sar।


vah sidhe chalte chalte mere bagal men aakar baith gayi।


main:  hey!tum let kaise ho gayi।

ldki: are yaar raaste men mere kaar se ek kuttaa takraa gayaa।

main:  to(muskuraate hua)

ldki: vo kuttaa kisi kaa paaltu kuttaa thaa।

main:  o(siriyas mud)

ldki: uskaa maalik das hjaar se niche lene ko taiyaar hi nahi ho rahaa thaa।aur ant men mere daid ko das hjaar use denaa hi pdaa।

main: oke

ldki: vaise meraa naam suhaanaa hai।tumhaaraa naam kyaa hai?

main: meraa naam sanni।

suhaanaa: meraa aaj pahlaa din hai,aur dekho aaj hi main let bhi ho gayi।

main: meraa bhi aaj pahlaa hi din hai।

suhaanaa: o!vaao:letas bi aye phrend।

main: yas,yas।

tabhi shikshak

rol n● 39

suhaanaa

suhaanaa:-yas sar।

shikshak

rol n● 40

sanni

main: yas sar।


phir kyaa?

hamaari dosti kuchh alag hi aayaam par pahunch chuki thi।

ham jitnaa ek dusre sang khule hua the,utnaa hi dusron se band band the।hamaare dost bhi bahut hi gine chune the।hamen ek dusre ki kampni pasand thi।


aksar main aur  suhaanaa shaam men ek dusre ke ghar jaayaa karte the।uske ghar par mammi daidi aur ek aayaa rahti thi।mammi ek haaus vaaeph thi,jabaki uske daidi ek kampni men achchhe post par padasth the।ham donon ko ek dusre ki maan ke haath kaa khaanaa pasand thaa।


ham donon hi apni dosti ki simaa laangh kar ek naye rishte men bandhnaa chaahte the।kyonki ham donon hi ek dusre ko bahut jyaadaa pasand karne lage the।

ye baat kuchh navmi kakshaa ke mid tarm shuru hone se ek mahinaa pahle ki baat hai।ek subah suhaanaa bahut khush dikh rahi thi।aur kuchh gunagunaa rahi thi।pyaar kiyaa to darnaa kyaa

 main:  kyaa baat hai?bahut khush dikh rahi ho suhaanaa।

suhaanaa:  haan!aaj shaam men ghar aanaa,pataa chal jaaagaa।

main: kyaa hai bataao naa।plij bataao naa।

suhaanaa: nahin nahin!jab shaam men aaoge ,usi vkt bataaungi।

main: thik hai,mat bataao।main bhi nahi aaungaa।

suhaanaa: are maan aaj kuchh speshal banaa rahi hai।

main: kyaa?

suhaanaa: pataa nahin।par kuchh speshal hai।


shaam huaa,main suhaanaa ke yahaan pahunchaa।


suhaanaa: haai

main: haai

suhaanaa: bahut let kardi aane men।

main: hun

suhaanaa: aao! andar aao।

main: aaj bahut hi sundar lag rahi ho।kyaa mast dres pahan rakhi ho।

suhaanaa: sahi men।

main: haan।

suhaanaa apne kamre men mujhe le gayi।

main: anti nahin dikh rahi hai।

suhaanaa: maan maamaa ki shaadi atend karne ko lakhnau gayi hui hain।

main: phir tumne aisaa kyon bolaa ki

suhaanaa bich men rokte hua

suhaanaa: ki maan ne aaj kuchh speshal banaayaa hai।

suhaanaa (sharaarti hnsi hnaste hua): bas aise hi।

agle hi kshan usne mujhe apni or khinch liyaa।aur mujhse gale se lipat gayi।

main: are tumhaari aayaa aa jaaagi।

suhaanaa: vo es vkt ghar par nahin hai,ghar kaa saudaa lene baajaar gayi hui hai।

main: (gahri saans lete hua)main bhi suhaanaa ko apni baanho men aur bhi kasakar jakd liyaa।

suhaanaa: bas!ab aage kuchh karoge yaa yunhi.....

main: kyaa?

suhaanaa: are etni sundar ldki tumhaare saath men hai,use kis lo,use pyaar karo।sab kuchh tumhe samjhaanaa hogaa।

main: (jaraa saa mjaa lete haye)mujhe kuchh bhi nahi aataa hai।tum shuru karo naa।

suhaanaa ne meraa sar pakd apne lips ko mere lips par rakh di,aur dhire dhire se kis lene lagi।main bhi gulaab ki pankhudiyon saa naram onth ko mahsus kar pure josh men aa gayaa,aur apne jihvaa ko uske jihvaa sang milaa kar charam sukh kaa aanand lene lagaa।main uske kapdo ko hataane ki koshish karne lagaa,par usne rok diyaa।

suhaanaa: un...hun....।protekshan hai।

main: nahin।

suhaanaa:  pahle medikal shap se kandom lekar aao।

aur main nikal pdaa uske ghar se apnaa motar saaikal lekar।main kaaphi dur aane ke baad,ek anjaan medikal shap ke aage apni motar saaikal roki।aur vahaan jaakar kandom maangaa।

main: kandom hai।

dukaandaar: kaun saa phlevar chaahia।chaklet,straberi,dated,yaa vidaaut dat।

main: chaklet phlevar de dijia।

aur phir kyaa,motarsaayakil liyaa aur paanch minat men suhaanaa ke saamne।

us din hamne do baar seks kiyaa।aur uske baad to pataa nahin,shaayad dhaai hajaar baar to kiyaa hi hogaa,dasvin ke mid tarm tak।

ab aap puchhenge dasvin ke mid tarm tak hi kyon?

vo esalia kyonki suhaanaa ke pitaa ko lagtaa thaa ki mere sangati men aakar,uske achchhe nambar nahi aa rahe hain।aur esalia unhonne suhaanaa ko dhamki di thi ki ab sanni ke saath dosti khatm karo aur pdhaai karo।agar achchhe nambar nahin aaange to bord ke baad ghar par baithnaa hogaa।

suhaanaa ghar par baithne ki baat se jyaadaa mujhse bord ke baad naa mil paane ki sthiti se dar gayi thi।

skul men jab suhaanaa ki baate suni to main bhi sann rah gayaa।aur usko puraa sahyog dene kaa vaadaa kiyaa।

aur suhaanaa skul men tap kar gayi,aur main keval paas hokar hi rah gayaa।


aur aaj subah suhaanaa ki dost,meri klaasmet suchi ek envelop le kar mere paas aai।

suchi:  suhaanaa ne bolaa hai,akele men pdhnaa।


main envelop lekar phataaphat apne kamre men chalaa gayaa aur andar se sitakini lagaa di।

envelop kholte kholte meraa dil bahut joron se dhdakne lagaa।man anek bure khyaalaaton se bhar gayaa thaa।


priy sanni

jab tak tumhen yah khat milegaa,tab tak main landan ke lia phlaaet par baith chuki hongi।mujhe haart kainsar niklaa hai।shaayad tumhe yaad hogaa,pichhli baar jab ham mile the,tab tumne puchhaa thaa ki main bahut kamjor dikh rahi hun।vo usi kaa prbhaav thaa।daktar ke paas jab jaanch huaa to pataa chalaa।shaayad main kuchh hi dinon ki mehmaan hun।main tumhen tutte hua nahin dekh sakti hun,aur chaahti hun ki tum apne jivan men aage bdho।tumhaare saath bitaaa gaye pyaare v anmol samay ki ldiyon ko saath lia jaa rahi hun, jiske sahaare apne bache khuche samay ko bitaa lungi।apne aakhiri samay men main apne daadaa daadi ke saath rahnaa chaahti hun esalia unke paas landan jaa rahi hun।


tum sadaa khush rahnaa aur jivan men sadaa aage ki or bdhte rahnaa।


tumhaari aur sirph tumhaari suhaanaa।

ek ek shabd mujhapar bhaari pd rahe the।mere to pairon tale jamin khisak rahi thi।dil me bhi thodaa thodaa dard saa hone lag rahaa thaa।aur apne aansuo ki dhaar ko naa rok sakaa thaa।

aur phir kyaa,akele akele rahnaa।khud se baate karnaa।kabhi ronaa,kabhi hnasnaa, kabhi ghanto ghanto tak kamre men band rahnaa।

phir ek baar mere maamaa jo saaekolojist hain,ghar par aaa hua the।kadaachit ye kahnaa sahi hogaa ki maan ne unhen bulaayaa the,taaki meraa elaaj kar sake।(maan ne vah patr pdh liyaa thaa।par vo keval maamaa ko hi us patr ke baare me bataai thi।)

maamaa: dekh bhaanje duniyaa men aanaa jaanaa to lagaa rahtaa hai,par jo gayaa, uski khvaahish ko puraa karne ki jimmevaari,yahaan rah gaye uske premi janon ki hai।taaki vo jahaan bhi rahe,khush rahe।hamen aur tumhe dekhakar।


sanni ko kuchh dimaag men thankaa।

sanni: (man hi man sochte hua)are suhaanaa ki khvaahish thi ki vo saare garib bachchon ko pdhaaa aur duniyaa ko sabhi ke lia rahne ke lia uttam jagah banaaa।


sanni ne ek en.ji.o jaen kiyaa aur vahaan bachchon ko pdhaanaa shuru kiyaa।khud bhi apni pdhaai jaari rakhi।

dhire dhire samay bitaa,aur usne hindi men pi.ech. di. puri kar li। vo suhaanaa ke sapne ko puraa karne ko ji jaan se lag gayaa।usne en ji o men kaam karne ke tarike men kuchh kamiyaan paain।usne khud ek en ji o kholne kaa nirnay liyaa।aur apne en ji o kaa naam suhaanaa jidd ke naam se rajistard karvaayaa।vo bahut hi khush thaa।

vo khud hi jhopdapatti men apne tim ke saath jaataa thaa,aur bachchon ko baahar ki duniyaa se avagat karvaataa thaa,saath hi saath unhen pdhaataa bhi thaa।jhopdapatti ke bachche bhi english men javaab dene lage the।aur unke sapnon ko saakaar karne ke lia suhaanaa jidd ki sansthaa ne bharpur madad aur koshish ki thi।jiske phal svrup unke es pryaas ko sammaanit karne ke lia landan men enkaa naam naminet huaa thaa।

sanni apni tim ke saath landan ravaanaa huaa।

vo din aa chukaa thaa jab unke es pryaas ke lia unhen sammaanit honaa thaa।aaj saaraa vishv ki njar unpe thi।manch saj chuke the।darshakagan baith chuke the।har kshetr men kia gaye pryaas ko sammaanit kiyaa jaa rahaa thaa।hamaare kshetr se do sansthaa aur bhi thi।ek landan ki hi sansu naam ki en ji o thi,aur ek jaapaan ki samsu naam ki en ji o thi।dono aise lag rahe the maano unke sansthaapak jaapaan yaa chin se hain।

main bahut jyaadaa hi utsaahit thaa,ki suhaanaa ke sapne ko pahlaa udaan mil chukaa thaa।

hamaari sansthaa kaa naam liyaa gayaa।main apni tim ki or se stej par pahunchaa।hamaari sansthaa ke kia gaye pryaas ki ek chhoti si jhalak ki vidiyo saare vishv ke saamne rakhi gayi।pandrah minat ke vidiyo ke baad saaraa auditoriyam das minat tak lagaataar taaliyon ki gdagdaahat se gunjtaa rahaa।har chehre par khushi jhalak rahi thi,kahin aansuo ki dhaaraa ke dvaaraa to kahin vaah vaahi ke dvaaraa।hamaari tim ki chhaati garv se phul gayi।aur mujhe manch par ek do shabd apni upalabdhtaa par kahne ko kahaa gayaa।

sanni:  main es sammaan kaa shrey keval aur keval apni tim ko denaa chaahtaa hun।agar enkaa saath nahin miltaa,to shaayad hi kabhi es manch par paanv rakh paataa।

par ek shakhs aur bhi hai,jiske chalte main es raah par chal sakaa।agar vo naa hotaa,to shaayad hi es raah par main kabhi aataa hi nahin।vo shaayad es duniyaa men ab nahin hai।vo aur koi nahin,vo meri dost,meri sabakuchh,meri suhaanaa hai।ye suhaanaa jidd usi ke naam par rakhi gayi hai।uskaa sapnaa thaa ki saare garib bachchon ko pdhaaa aur unkaa bhavishy snvaare,saath hi saath duniyaa ko rahne ke lia uttam sthaan banaaa।aaj uskaa sapnaa ,meraa jidd ban gayi hai,aur use main puraa karke hi dam lungaa।


tabhi ek ldki aage ki kataar se uthakar meri taraph aane lagti hai।uskaa chehraa jaise jaise nikat aa rahaa thaa,koi apne ki tasvir dimaag men ubhar kar aa rahi thi।

ye ye suhaanaa hai kyaa?

haan haan(dil kahe jaa rahaa thaa)

nahin nahin(dimaag kah rahaa thaa)

ldki sanni ke baanho men jaakar lipat gayi।

ldki: sanni!

sanni: suhaanaa!tum !tum! jindaa ho।

suhaanaa: haan।aakhirkaar tumne mujhe dhundh hi nikaalaa।

sanni aur bhi kasakar suhaanaa ko apni baanho men jakd letaa hai।

auditoriyam puraa taaliyon ki gdagdaahat se gunj uthtaa hai।

sanni: tum yahaan kaise?

suhaanaa: sansu ki sansthaapak main hi hun।

sanni: vahaan bhi tumne mujhe apne sang jod rakhaa hai।

suhaanaa: mujhe lagaa tum jivan men kaaphi aage bdh gaye hoge, esalia main tumhen dhundhne ki pryaas nahin ki।

sanni: chalo thik hai।tum kaisi ho abhi?

suhaanaa: pharst klaas।kainsar ke prbhaav se main komaa men chali gayi thi।maataa raani ki kripaa se saat saal ke baad main hosh men aai।

sanni: thaink gad!tum mujhe mil gayi।

suhaanaa: kyaa matalab!tumne shaadi nahi ki hai।

sanni: haan shaadi to mainne kar hi li thi।

suhaanaa: kiske saath?

sanni: apne propheshan ke saath।

suhaanaa jor jor se hnas pdi aur sanni se lipat gayi,sadaa sadaa ke lia।


Written by sushil kumar

तू ही मेरी दुनिया है। tu hi meri duniya hai.

Tu hi meri duniya hai. Shayari तकलीफ मेरे हिस्से की तू मुझे ही सहने दे। आँसू मेरे बादल के तू मुझ पर ही बरसने दे। सारे मुसीबतों क...