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मेहनत कभी बेकार नही जाती है।

मेहनत कभी बेकार नही जाती है।

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भले तुम मुझे करो पराजित
भले चारो खानों करो चित मुझे।
मेरी ताकत मेरी सोच में है
उसे कैसे तुम करोगे परिवर्तित।

मैंने कभी भी हार नही मानी
मन में रखी है एक अटल विश्वास।
आज के दिन तुम्हारी मेहनत रंग लाई है
कल के दिन चमकेगा मेरा अकाश।

Written by sushil kumar

जानलेवा इश्क़।

जानलेवा इश्क़।

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मैं चाहता हूँ
तेरे पास आना
तेरे करीब आकर
अपना प्यार जताना।
पर अक्सर गलत पाता हूँ खुद को
चाहकर भी प्यार ना जता पाता हूँ तुझको।

क्योंकि जब भी नजदीक तेरे आने की
कोशिश करता हूँ
लहू लुहान सा हो जाता हूँ।
तेरे वचन प्रचंड अंगारों की भाँति
मुझे जलाने को
आतुर सी दिखती है हमेशा।
चाहती है मुझे भस्म करने को
मेरे अस्तित्व को मिटता देखना
शायद मकसद है उसका।

Written by sushil kumar


माँ बाप के साथ में ही खुशी है।

माँ बाप के साथ में ही खुशी है।

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मैं नहीं जानता
मेरे आने वाले पल में क्या लिखा है??
मैं नहीं जानता
कितने खुशी के पल हैं
और कितने दुख के हैं।
पर हाँ 
मैं आज में जीने वाला हूँ
मुझे आज की फिक्र है।
पर ये दिल कहाँ मानता है
मुझे लिए जाता है
मेरे मात पिता के पास।
जो अभी भी बैठे हैं
दो हज़ार की.मि.दूर 
अपने घर में।
क्या उनके बुढ़ापे में
मैं सहारा उनका बन पाऊँगा??

बड़ा सोचा करता था
माँ बाप को साथ रखूँगा।
जैसा भी जॉब करूँगा
पर उन्हें अपने पास रखूँगा।
पर देखो!
आज जॉब है,
पत्नी भी है
पर माँ बाप हमसे 
दो हज़ार की.मि. दूर बैठे हुए हैं।
आखिर क्या फायदा इतना सोच कर
जब वह पूरा ना हो पाएगा।
पर जो उनके बुढ़ापे में
उनका सहारा ना बन पाया।
तो मैं जिंदगी भर खुद के नज़र में
सदा के लिए गिर जाऊँगा।
मेरी जीने का क्या फ़ायदा
जब अपने जन्मदाता की 
सेवा नहीं कर पाऊँगा।
ऐसा जीवन श्राप सा लगेगा
जो मेरी मृत्यु से ही धुल पाएगा।

मैं आऊँगा
जरूर आऊँगा।
आपलोगों को साथ लेने को।
रखूँगा साथ मैं खुद के
मैं तभी खुश रह पाऊँगा
रूह से।
आपके प्यार और आपके संस्कार
सदा मुझे आपकी ओर खींच लाती है।
जो आप साथ हमारे रहोगे
तो जी भर के प्यार 
आप पर लुटाऊंगा।

बड़े शौक से आपने मेरी ब्याह रचाई थी
लाखों में एक लड़की को 
मेरे लिए चुन कर लाई थी।
बहु नहीं
बेटी से बढ़कर उससे
आपने प्यार दुलार किया था।
पर उसे शायद 
आपका प्यार ना सुहाया था
उसे खुश रखने को
आपने हमसे मामा के बीमार होने का 
ढोंग भी रचाया था।

मैं भी कितना पागल था
इतनई सी बात समझ ना पाया था।
जो आज मामा से बात ना होती
तो ये राज खुल ना पाया था।
मुझे अपनी स्त्री पर
बड़ा गुस्सा तब आया था।
पर माँ की कसम थी
जो मेरे गुस्से को रोक 
आज पाया था।

मैं आज बहुत ही ज्यादा 
खुद से नाराज़ हुआ जा रहा था।
क्यों नही मैं अपने माँ बाप के
व्यथा को समझ ना पाया था।
मैंने उन्हें फोन किया
अपनी तबीयत खराब होने की बात बताई उनसे।
चले आइए आप फ्लाइट से
मुझे आपकी बहुत याद आ रही
रह रह के।
फ्लाइट की टिकट भेजी उन्हें
गया लाने एयरपोर्ट से उन्हें।
जब देखा उन्होंने मुझे एयरपोर्ट पर
खुश होकर लग गए गले हमसे
सब कुछ भूलकर।
मेरी पत्नी को भी आशीर्वाद दिया
और फिर पूछा मेरा हाल मुझसे।
मैने भी बता दी उनसे
मामा से बात हो गई है हमसे।

Written by sushil kumar



क्योंकि मैं माँ हूँ ना।सब समझती हूँ।।

क्योंकि मैं माँ हूँ ना।सब समझती हूँ।।

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तुम यूँ क्यूँ गुम होकर बैठी हो
हमसे अलग होकर।
कोई अगर गलती हुई है
कोई बात अगर बुरी लगी है
तो माफ करदो मुझे
अपनी माँ समझ करके।

माना!
माना मैं तुम्हारी अपनी माँ तो नहीं हूँ
पर तुम्हें अपनी बेटी से कम
कभी नहीं माना है
ये पता है रब को।
मैं नहीं चाहती हूँ
कभी तुम्हें मुझसे कोई तकलीफ हो
कोई दुख हो।
आखिर तुम्हारी खुशी में ही तो
मेरे बेटे की खुशी की परवान चढ़ती है।

मैं ही शायद बहुत बड़ी अभागन हूँ
जो चाह कर भी
सास और बहू के रिश्ते को समझ ना पाई।
चली थी बहु को बेटी बनाने
पर मेरी करनी ही तुम्हें सदा
दुख पहुँचाती रही।
मैं चाहती थी तुम्हें मदद करना
तुम्हारे साथ रहना।
तुम्हें प्यार करना और
कुछ तुमसे प्यार पाना।
पर तुम्हें शायद मेरा साथ ही
पसन्द नहीं आ पाया।

मैं अपने बेटे से कहूँगी
कोई बहाना बनाऊँगी
तेरे मामा की तबीयत ठीक नहीं है
मुझे गाँव छोड़ आने की हिदायत दूँगी।
और फिर कभी तुम्हारी खुशियों के बिच
मैं कभी नहीं आऊँगी।

क्योंकि मैं माँ हूँ ना।
सब समझती हूँ।।
Maa

Written by sushil kumar

माँ मेरी।।

माँ मेरी।

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Maa meri


मैं रहूँ कहीं भी इस जहाँ में
रहूँगा तो तेरा ही अक्स बनकर।
मेरे खुद का क्या वजूद था
इस जहाँ में?
मेरे को सँवारा था तुमने ही
सुसंस्कारों से।
तेरे दिए संस्कार के वर्चस्व पर
अगर कुछ पाऊँगा भी तो
तेरे ही चरणों में वो अर्पित होगा।
भले कामयाबी की बुलन्दी को भी छू लूँगा
इस जहाँ में।
भले महफ़िल में मेरे नाम की चर्चा रहेगी
हर जुबान पे।
पर आखिर में जीत किसी की हुई
तो वो तेरी है
माँ मेरी।

Written by sushil kumar

कभी चले थे साथ साथ

कभी चले थे साथ साथ।

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कभी चले थे साथ साथ
आज राह बदल गए हैं।
मंजिल बदल गई है
अपना पड़ाव बदल गया है।

कुछ लम्हें वो मीठे पलों के
जो उनके साथ में बिताए थे।
कुछ गुदगुदाने वाले
तो कुछ रुलाने वाले
मैं अपने संग ले आया हूँ।
उन खट्टे मीठे एहसास के क्षणों को
अपने कांख में दबा लाया हूँ।

जो याद आएगी कभी उनकी
कभी अश्रु की धारा जो नहीं रुकेगी।
खोल लूँगा अपनी यादों के पटों को
कुछ देर तो उनकी आघोष में जी लूँगा।
कुछ देर ही सही
पर अपने जीवन के कुछ पल
तो जी लूँगा।

जी लूँगा!
जी लूँगा!
अकेला जी लूँगा!

Written by sushil kumar

रब का बन्दा।

रब का बन्दा।


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जीवन के सफर में
लोग आते हैं।
कुछ देर साथ निभाते हैं
और निकल जाते हैं
अपनी अपनी सफर के
नए पड़ाव पर।

ये आना जाना तो लगा रहता है
जीवन के अंतिम छोर तक।
पर जो दूसरों के जीवन को
सतरंगी खुशियों से रंग दिया हो।
जिसकी अच्छाई ने दूसरों के दिलों में
घर कर गया हो।

जो जाते जाते भी दुनिया से
साथ वालो को गुदगुदा गया हो।
वही है रब का सच्चा बन्दा
जिसे लेने खुद मौला यहाँ आया हो।

Written by sushil kumar

स्वार्थ

स्वार्थ

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मेरे आवाज़ को दबाने वाले मिले बहुत
पर कोई ना मिला जो दे सके मेरा साथ यहाँ।
बहुत घुटन सी रहती है मेरे जेहन में
मैने बहुतों की मदद की थी उनके बुरे वक्त में।
जिनके साथ खड़ा रहता था हर मुसीबत में
नहीं कहीं दिख रहे हैं आज वो मेरे नज़र में।
आज हर कोई बस अपनी ही बनाने में लगा है
जिसे देखो उसे अपनो के मलबे से
अपने आशियाने को सजाने में लगा है।
नहीं है फिकर आज किसी को किसी की यहाँ पर
बेटा भी आज वसीयत देख
बाप को कन्धे पर अर्थी देने को
आगे बढ़ रहा है।

Written by sushil kumar

रिश्तों की महफिले क्या सजी

रिश्तों की महफिले क्या सजी

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रिश्तों की महफिले क्या सजी
हमारे मन में गुदगुदी सी हो उठी।
कुछ लफ्ज़ यूँही अपनी बेड़ियाँ तोड़
रिश्तों के बीच में और भी
गरमाहट पैदा करने को निकल पड़ी।
तो कुछ मस्त ठंडी पवन सा झोंका बन
हमारे दिल को ठंडक पहुँचा
एक सुकून पैदा करने लगी।
रिश्ते सदा ऐसे ही होते हैं
भले कितनी भी परेशानी हो
कितनी भी तकलीफ हो
पर वे सदा आपके मन से
आपके दिल से
सारी तकलीफ को छू मंतर कर
आपके अन्दर एक नई स्फूर्ति पैदा करने वाली
और एक नया जान डाल देने वाली होती है।

इसलिए रिश्तों को सदा संजोकर रखे आपलोग।

Written by sushil kumar

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

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मैं चला जा रहा था अकेले,झुंझलाते हुए खुद से।
कभी खुद को समझाते हुए,तो कभी खुद को कोसते हुए।
कुछ कदम जो उठाए थे हमने
सटीक निशाने पर नहीं पड़े थे।
जिंदगी यही तो है
कभी उतार है तो
कभी चढ़ाव है।

अब बीते हुए समय में
कुछ ना पा पाने की झुँझलाहट से
वर्तमान को बर्बाद कर देना
कहाँ तक सही है।
भले पिछली कोशिश नाकामयाब रही हो
पर प्रयास तो भरपूर करी थी हमने।
और आने वाले समय में भी
मैं पूरा दम खम लगाकर देखूँगा
कि कब तक मेरी किस्मत
मुझसे मुँह फेरकर रह सकेगी।

हर परिणाम को जो सहज स्वीकार करना सीख लेता है
वही जीवन में उच्चतम से उच्चतम स्थान पर पहुँच पाता है।
क्योंकि उसे पता है कि
अगली बार वो अपने लक्ष्य को पा ही लेगा।
और अपने समय को बदल लेगा।
और वैसे ही लोग हर परिस्थिति में खुश रह पाते हैं।

Written by sushil kumar


राम हमारे संस्कार में हैं।

राम हमारे संस्कार में हैं।

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Ram rajya
राम हमारे संस्कार में हैं।
राम हमारे विचार में हैं।
राम हमारे रग रग में हैं।
राम विश्व के कण कण में हैं।
फिर कैसे कोई राम का नाम लेने से
हमें कोई वंचित रख सकता है।
Ram rajya

आज जब सारा विश्व
राम के नाम का जाप कर रहा है।
राम के पथ पर चल रहा है।
कोई कैसे मात्र राजनीतिक फायदा के लिए
जय श्री राम उद्घोष करने पर
भारत में चमड़ी उधेड़ने की बात कर रहीं हैं।
मानो हम पाकिस्तान पहुँच गए हों।

Rajniti

लेकिन बहुत हो गया
बहुत सह लिया
राजनीति का
ये गंदा खेल।
अब करेंगे कलयुगी रावण का
फिरसे लंका दहन।
क्योंकि आ गया है
रामराज्य का नीव रखने का
उचित समय।
Ram rajya


स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।

स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।

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स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।
अपने अंदर तू आत्मविश्वास रख।
तेरे पास अदम्य शक्ति का है भंडार।
योग कर अपने कुंडली को जगा।
अपने कर्मों से सबका दिल जीत।
कुछ ऐसा कर्म कर कि
सब हो तेरे मीत।

लोग आते हैं
चले जाते हैं।
पर उनमें से
कोई कोई ही याद आते हैं।
सब का हो जिसमे भला।
जिससे किसी का दिल ना हो दुखा।
और जब कोई याद करे
तेरे मरने के बाद।
चेहरे पर दे जाए उसे
छोटी सी मुस्कान।
क्यों ना ऐसा कर्म करें हम इस जहां।
लोगों के दिलों से ना मिटे कभी
इस संसार से हटने के बाद।


Written by sushil kabira



वतना मेरे वतना वे।

वतना मेरे वतना वे kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। वतना मेरे वतना वे तेरा इश्क़ मेरे सर चढ़ चढ़कर बोल रहा है। एक जन्...