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मैं डरा सहमा सा

मैं डरा सहमा सा

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Love

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मैं डरा सहमा सा
आया था तेरे पास में।
मन में लेकर बवंडर भावों का
कर रहा था मेरे दिल को विचलित।
किसी जिगरी दोस्त को खोने का सदमा था
जो मेरे दिल का बहुत बड़ा रहनुमा था।
पहली बार किसी करीबी को
मृत्यु के गोद में सोते देखा था।
तेरे बिन जीवन की सोच में
दिल मेरा व्यथा में रोया था।
चाहता था मन हल्का करने को
तेरे कन्धे पर सर रख कर
फूटफूटकर रोने को।
मैं अंदर ही अंदर टूटता सा चला जा रहा था।
शीशे की भाँती चकनाचूर होता सा जा रहा था।
वो पल को महसूस कर ही
मैं काँप सा जा रहा था।
मेरे अंदर एक डर बैठा सा जा रहा था ।
क्या बयान करूँ
मेरी हालत कैसी थी नाजुक।
पर जो तूने मुझे
अपने गले से लगाया था
मैं रो पड़ा भाव भिवोर हो
भभक भभक कर।
मेरी हालत देख
जो तूने मुझसे रोने का कारण पूछा था।
मैं सिसक सिसक कर बोल पड़ा
मैं तेरे बिन जीने के बारे में कभी नहीं सोचा था।




I love you.

Written by sushil kumar

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