Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है।

हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है।

kavitadilse. top द्वारा आप सभी दोस्तों को समर्पित है।


मैं बवंडर रोक खड़ा था मन में
भावों के सैलाब लिए।
जिसे मैंने चाहा था
छोड़ गई थी मुझे
किसी ओर के लिए।
दिल टूटा
सब छूटा।
चाहा जग छोड़ दूँ उसके लिए।
अब जी के भी क्या फायदा
जब वो ही नहीं है
जिसके संग सोचा था
जीने के लिए।

तभी किसी ने रखा हाथ मेरे कन्धे पर
लगा कोई अपना
उसके स्पर्श से।
जो मुड़ा तो पाया अपने दोस्त को
जिसने साथ दिया था
मेरे हर मंजिल
हर मोड़ पर।
मैं रोक ना पाया अपने भावों के बवंडर को
और रखा अपना सर उसके कन्धे पर।
बह निकले थे
मेरे अश्रु बांध तोड़कर
ठहराव मिली थी
मेरे मन को तब जाकर।

Written by sushil kumar


No comments:

मैं हिन्दू नहीं।

मैं हिन्दू नहीं। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। मैं हिन्दू नहीं ना मैं मुसलमान हूँ। मैं सिख नहीं ना मैं क...