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हर पल अनमोल है।

हर पल अनमोल है।

Kavitadilse.topद्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।
Time

काम के दबाव में
तेल डाल के भाव में
हम कैद हो चले हैं आज
पैसे बनाने के जुगाड़ में।

ना हँसने की फुरसत
ना रोने का समय।
मानव कम
ज्यादा मशीन बन गए हैं हम।

सुबह से शाम ऑफिस
और रात में भी
घर पर वही दफ्तर का काम।
आखिर पाना है प्रोमोशन
और नया कुछ ईनाम।

किसी अपने के गुज़र जाने की
खबर जो कभी पाई।
टारगेट पूरा करने की धुन में
हमने अपने बीवी की टिकट कटवाई।

जो मानो अपने परिवार में
एक नए सदस्य ने जन्म लिया।
पर हम व्यस्त हैं
कोई मीटिंग अटेंड करने में।

जरा थामो अपने रफ्तार को
और पीछे मुड़कर देखो।
कितने लोग छूट गए हैं
और कितने जुड़ आए हैं तेरे संग में।

जिनने तुम्हारी खुशियां बाँटी
जिनने दुख में तेरा साथ निभाया।
जो सदा रहे तेरे संग में
पर तू उन्हें अलविदा कहने को ना पाया।

पैसे बनाने के चक्कर में
तू पता नहीं कब मशीन बन गया।
आज उन्हें तू याद कर रहा है
जो छोड़ गएँ कब का तेरा साया।

हर पल में तू सदिया जीना सीख लो।
अपनों को जरा वक़्त देना सीख लो।
उनकी खुशियों में छिपी है तुम्हारी खुशी।
कभी अपनी खुशियों को भी उनके संग बाँट कर देख लो।


Written by sushil kumar







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