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एक राष्ट्रवादी की आखिरी ख्वाहिश।

एक राष्ट्रवादी की आखिरी ख्वाहिश।

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Rastrawad

माँ आज मैं बहुत खुश हूँ।
जिस मिट्टी से मैने जन्म लिया
उस राष्ट्र की एक आखिरी सेवा करने का समय
जो आज निकट आ गया है।

मेरे भस्म को गंगा में प्रवाहित नहीं होना है।
ना ही उसे मिट्टी में मिलना है।
जिस क्षण मैं भस्म बनूँ
आँधी और तूफान मेरे भस्म को उड़ा ले जाएँ।
और सारे भारत के हवा के कण कण में उसे समाहित कर दें।
और मैं हर भारतीय के साँस में
हवा बन प्रवाहित हो जाऊँ।
उनके खून में मिल
राष्ट्रवाद की अखण्ड ज्वाला बन उनके हृदय में
सदा सदा के लिए ज्वलित हो जाऊँ।
और अपने भारत को पूर्ण राष्ट्रवादी देश बना
अपनी प्रिय माता से अलविदा ले
संसार से मुक्ति पाऊँ।
और हिंदुस्तान की सोच में
मैं सदा जीवित रहूँ
एक राष्ट्रवाद की अखण्ड क्रान्ति बनकर।

जय हिंद।।
जय भारत।।

Written by sushil kumar

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