Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

।।माँ।।

।।माँ।।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Maa


माँ!
माँ शब्द से ही सारे रोम रोम
और रग रग में एक तरंग सी दौड़ जाती है
उनकी वन्दना करने को।
उनकी पूजा करने को।

माँ केवल एक शब्द नहीं
पूजा है,अर्चना है,श्रद्धा है।
भगवान से एक पल के लिए श्रद्धा उठ भी सकती है।
पर माँ से!
मरने के पश्चात ही श्रद्धा उठती है।

आज माँ ना होती
तो जिन बड़े बड़े योद्धाओं का नाम लिया जाता है।
वह भी नहीं होते।
माँ के दिए हुए संस्कार ही
हर व्यक्ति को
उसके कर्मभूमि में
उसे विजयी तिरंगा फहराने में
उसकी मदद करते हैं।

माँ से बड़ा योद्धा और गुरु 
ना इस धरती पर कभी पैदा हुआ है
ना कभी होगा।
माँ है!
तभी हम हैं।
माँ है!
तभी ये जग है।
Maa

Written by sushil kumar

No comments:

तुम लिखो कुछ ऐसा

तुम लिखो कुछ ऐसा kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। तुम लिखो कुछ ऐसा जिससे शांत सरोवर की शिथिल लहरों में एक उफान ...