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खुद को तू पहचान ले

खुद को तू पहचान ले

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।।

खुद को तू पहचान ले
अपनी अस्तित्व को तू जान ले।
उद्देश्य! तेरा है क्या?
मन मंथन कर
तू ठान ले।

लक्ष्य को रख सामने
कर्म तू आरम्भ कर।
उठा कदम तू दृढ़कर
मन में अटूट विश्वास रख।

भले मंजिल तुझे दिखे नहीं
राह लगे दुश्वार कभी।
पाँव तेरा थके कहीं
लड़खड़ा कर तू गिरे वहीं।

आत्मविश्वास दिल में रख
उठ खड़े हो अपने पैर पर।।
और चल पड़ हिमालय की ओर
अपने पड़ाव को पाने को।

थक कर कहीं ऊँघ मत
हौसला दिल में बांधे रख।
खुद पर तू विश्वास रख
अपने मन के संशय का तू विनाश कर।

अपने जुनून के चिंगारी को
तू उसे हवा दे।
स्वयं को तू इतना जला
कि सूर्य बनकर तू कल चमक।
तेरे तप के फल देने को
खुद ईश्वर आएं तेरे समक्ष।

Written by sushil kumar

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