10 Mar 2019

Main ek soch hun

Shayari

मैं एक सोच हूँ

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं एक सोच हूँ
तुम्हें शायद पसन्द आऊँ
या ना भी आऊँ।
पर दिल में मेरे कोई दोष नहीं है।
मन में भी कोई आक्रोश नहीं है।
हृदय में है मेरे 
बहती है गंगा।
सभी को साथ लेकर
चलने की है दृढ़ इच्छा।
दोस्त क्या?
दुश्मन क्या?
सभी मेरे हैं भाई बन्धु।
बिन इनके 
हमारा कोई जहाँ भी 
है क्या संभव??

भले तुमने कल 
मुझपे चोट किया हो।
मेरे बदन को तुमने 
लहू लुहान किया हो।
पर समय ने मेरा 
पूरा साथ दिया है।
और जख्म मेरे भरकर
 आज पुनर्जीवित किया है।
और आज मैं पुनः
सब कुछ पुराना भूलकर।
नए मिलन की संगीत के 
तराने को 
प्यार से बुनकर।
लाया हूँ ख़ास तुम्हारे खातिर
ताकि तू उसे अनुभव कर।
तुम्हें साथ लेकर 
चलने को 
मैं आगे बढ़ा हूँ।
अपने मन में नहीं रखा है
तुम्हारे लिए कोई घृणा।
क्योंकि प्यार से बढ़कर इस जग में
और कोई धर्म नहीं है।















main ek soch hun

tumhen shaayad pasand aaun

yaa naa bhi aaun।

par dil men mere koi dosh nahin hai।

man men bhi koi aakrosh nahin hai।

hriaday men hai mere 

bahti hai gangaa।

sabhi ko saath lekar

chalne ki hai dridh echchhaa।

dost kyaa?

dushman kyaa?

sabhi mere hain bhaai bandhu।

bin enke 

hamaaraa koi jahaan bhi 

hai kyaa sambhav??



bhale tumne kal 

mujhpe chot kiyaa ho।

mere badan ko tumne 

lahu luhaan kiyaa ho।

par samay ne meraa 

puraa saath diyaa hai।

aur jakhm mere bharakar

 aaj punarjivit kiyaa hai।

aur aaj main punah

sab kuchh puraanaa bhulakar।

naye milan ki sangit ke 

taraane ko 

pyaar se bunakar।

laayaa hun khaas tumhaare khaatir

taaki tu use anubhav kar।

tumhen saath lekar 

chalne ko 

main aage bdhaa hun।

apne man men nahin rakhaa hai

tumhaare lia koi ghrinaa।

kyonki pyaar se bdhakar es jag men

aur koi dharm nahin hai।


Written by sushil kumar@ kavitadilse.top

Shayari

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