Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

मैं रहूँ !ना रहूँ !

मैं रहूँ !ना रहूँ !

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Hindi shayari,patriotic poems

मैं रहूँ !ना रहूँ !
मुझे इसकी कोई परवाह नहीं।
देश मेरा रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।
Hindi shayari,patriotic poems
चिड़ियों की चहचहाट से 
हर सुबह
गूंज उठता है मेरा देश सारा।
मानो धरती माँ की कर रहे हो वन्दना
मिलकर एक स्वर में हम सारे।
किसान उठ चल पड़ते हैं खलिहान
लेकर अपने कन्धे पर हल।
धरती की सुन्दरता को सींचने को
हरित करने को सारा थल।
Hindi shayari,patriotic poems
वही सीमा पर सीने तान खड़े हैं
हमारे वीर भारतीय पराक्रमी बल।
भारत माँ की रक्षा करने को
लेकर सारे मन में दृढ़ प्रण।
हर दिन यहाँ होली होती है
मनती है दीवाली हर दिन।
अपने रक्त के हर कतरे कतरे से
भारत माँ को तिलक लगाने को 
है सभी में होड़।
मेंरे देश की मिट्टी की 
इस संसार में कोई दाम नहीं।
सोंधी सोंधी सुगंध में रहती है
मेरी भारत माँ 
सदा साथ हमारे।
अन्नपूर्णा कहलाती है
भरती है पेट हर हाल में ये।
कोई भूखा नहीं सोता है इस जहाँ
देश मेरा महान है ये।
ऐसे देश के लिए मर मिटने को
हम सदा रहते हैं तैयार यहाँ।
भारतीय सेना कहलाते हैं हम
दुश्मनों के नींद उड़ाने को 
तैयार हैं यहाँ।
हम रहें !ना रहें !
हमें इसकी कोई परवाह नहीं।
देश मेरा रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।

जय हिंद।
जय भारत।
Hindi shayari,patriotic poems

Written by Sushil kumar





No comments:

मेरी आँखे भर आई है मेरे देश की हालत देखकर। काम क्रोध लोभ मोह अहंकार वश नैतिकता कहीं धूमिल हो चली है कलियुगी बादल में। जिसे देखो बस लग...