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मात - पिता दिवस।।

मात - पिता दिवस।।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


बेरोजगार थे।
तो रोजगार के तनाव में
घर नहीं जाया करते थे।

माँ बाबू जी के ताने से
बचने के लिए
बाहर ही कहीं
समय बिताया करते थे।
कभी दोस्तों के साथ
तो कभी एकांत में
सरकारी नौकरी की
तैयारी किया करते थे।

घर पहुँचने पर
माँ चिड़चिड़ा कर
हमसे पूछ लिया करती थी।
क्या हवा खाके पेट भर गया है तो ठीक है
वरना आ बैठ
खाना खा ले संग में।

मैं भी गुस्से में
उनसे ये बोल दिया करता था।
भूख नहीं लगी है
मुझे माँ।
बाहर से आया हूँ खाकर।


माँ से अच्छा उसके बच्चे को
दुनिया में कोई नहीं समझ सकता है।
भूख बच्चे को लगती है
माँ बेचैन सी हो जाती है।
चोट बच्चे को लगती है
माँ बिलख सी जाती है।

पता नहीं
उस दिन क्या हुआ था?
माँ के आँखों से
अश्रु बह निकले थे।
मेरे करीब आ कर कहने लगी।
कल से तेरे को
कोई कुछ नहीं बोलेगा।
तू समय पर खाना खा लिया कर।
पढ़ाई करना है
तो कर
वरना अपना कोई धंधा शुरु कर ले।
पापा से कह कर तुझे
कुछ पैसे दिलवा दूँगी कल।
पर तू कभी भी ऐसे
तकलीफ मत दिया कर खुद को।

चल मैं भी सुबह से भूखी हूँ
आ खाना खा ले मेरे संग में।
वरना मैं भी नही खाऊँगी कभी
फिर सारे जिंदगी भर।

उनके ये शब्द
किसी धनुष से निकले
बाण की भाँती
मेरे हृदय को छलनी कर गए थे।
दिल मेरा भर आया था उस वक्त
जब मैं अपनी खुदगर्जी को
महसूस कर पाया था।

और अगले महीने बेरोज़गारी की लेबल
मेरे सर से हट जाती है।
ये और कुछ नहीं
माँ बाबूजी के आशीर्वाद के रूप में
दिए हुए उनके तानो के बदौलत थे।
और हमारी मेहनत थी।
और कुछ ईश्वर की मर्जी थी।

हम अपने माँ बाबू जी को हमेशा
बचपन से तकलीफ देते आते हैं।
जो हरपल एक पैर पर खड़े हो सदा
हमारी खुशी के लिए
रब से प्रार्थना किए जाते हैं।
आज हम जिस मुकाम पर हैं
ये सब
उनके ही दिए संस्कार के बदौलत है।
पर वे कभी भी अपना हक
हमपे नहीं जताते हैं।
भले कभी तकलीफ में हो वे खुद
पर हमारी खुशी देख वो हर्षाते हैं।
सही में
माँ और पिता सदा हमारे लिए
भगवान के दिए हुए
सबसे अनमोल उपहार हैं।
इन्हें सदा सहेज कर रखने में ही
हमारे जीवन का उद्धार है।
चाहे जितना इनकी सेवा करलो।
इनके द्वारा
हमारे लिए किए त्याग का
कर्ज़ हम कभी नहीं चुका पाते हैं।
इसलिए आज से हर दिन हम
अपने दिन की शुरुवात
उनके अच्छे सेहत की प्रार्थना से करते हैं।
ताकि उनका हाथ हमारे सर पर सदा बना रहे
और उनके मार्गदर्शन में
सदा उन्नति की ओर कदम बढ़ाते जाएँ हम।
Parents day


Everyday is a Happy parents day.

written by sushil kumar @kavitadilse.top

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