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रोम रोम और रग रग मेरा

रोम रोम और  रग रग मेरा

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Shayari,kavita

रोम रोम और  रग रग मेरा
हर लम्हा
बस यही करे पुकार।
भारत माँ की गरिमा हेतु
आहुति में देदूँ अपना प्राण।

बाहरी दुश्मनों को सबक सीखाने को
सीमा पर खड़े हैं हमारे वीर जवान।
उनके पराक्रम पर हमें संदेह नहीं
वे काफी हैं दुश्मनों के
खट्टे करने को दाँत।
पर रोज के छिटपुट घटनाओं में
शहीद होते रहते हैं
अपने वीर चौकीदार।
कुछ नमकहराम हैं
छिपे देश के भीतर
जो करवाते रहते हैं
देश में नरसंहार।
सो डरना ही है तो डरो उन गद्दारों से
जो मौकापरस्त बन चलते हैं अपनी चाल।
आ गया है उचित समय प्रहार करने का
चुन चुन कर देश द्रोहियों को
उतारने को मौत का घाट।
अब जो कदम ना उठाया हमने तो
देश को खोखला कर बेच देंगे ये हैवान।
Shayari,kavita

Written by Sushil Kumar

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