3 Mar 2019

Rom rom aur rag rag mera

Shayari

रोम रोम और  रग रग मेरा

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Shayari,kavita

रोम रोम और  रग रग मेरा
हर लम्हा
बस यही करे पुकार।
भारत माँ की गरिमा हेतु
आहुति में देदूँ अपना प्राण।

बाहरी दुश्मनों को सबक सीखाने को
सीमा पर खड़े हैं हमारे वीर जवान।
उनके पराक्रम पर हमें संदेह नहीं
वे काफी हैं दुश्मनों के
खट्टे करने को दाँत।
पर रोज के छिटपुट घटनाओं में
शहीद होते रहते हैं
अपने वीर चौकीदार।
कुछ नमकहराम हैं
छिपे देश के भीतर
जो करवाते रहते हैं
देश में नरसंहार।
सो डरना ही है तो डरो उन गद्दारों से
जो मौकापरस्त बन चलते हैं अपनी चाल।
आ गया है उचित समय प्रहार करने का
चुन चुन कर देश द्रोहियों को
उतारने को मौत का घाट।
अब जो कदम ना उठाया हमने तो
देश को खोखला कर बेच देंगे ये हैवान।
Shayari,kavita








rom rom aur  rag rag meraa

har lamhaa

bas yahi kare pukaar।

bhaarat maan ki garimaa hetu

aahuti men dedun apnaa praan।


baahri dushmnon ko sabak sikhaane ko

simaa par khde hain hamaare vir javaan।

unke paraakram par hamen sandeh nahin

ve kaaphi hain dushmnon ke

khatte karne ko daant।

par roj ke chhitaput ghatnaaon men

shahid hote rahte hain

apne vir chaukidaar।

kuchh namakahraam hain

chhipe desh ke bhitar

jo karvaate rahte hain

desh men narasanhaar।

so darnaa hi hai to daro un gaddaaron se

jo maukaaparast ban chalte hain apni chaal।

aa gayaa hai uchit samay prhaar karne kaa

chun chun kar desh drohiyon ko

utaarne ko maut kaa ghaat।

ab jo kadam naa uthaayaa hamne to

desh ko khokhlaa kar bech denge ye haivaan।



Written by Sushil Kumar

Shayari

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