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मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो

मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।।

Jai hind

मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो
मुझे कोई परवाह नहीं।
भारत देश अपना रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।
Jai hind
कोई भी दुश्मन आजमा कर देख ले
भारत के फौलाद हैं हम।
हिमालय सा जज्बा है हमारा
टकराकर हमसे
सभी हो जाएँगे ध्वस्त।
Jai hind

1971 या 1999 का हो युद्ध
मुँह की खाई थी किसने!
सभी को है खबर।
आज भी हम सीमा पर
सीने तान खड़े हैं
खुद पर गर्व कर।
Jai hind

अभिमान है हमें उस देश पर
जिसकी मिट्टी पर हमने जन्म लिया।
संस्कारो की माला जो हमने
अपने पूर्वजों से ग्रहण किया।
Jai hind
आज भी अपने दुश्मनों को
सुधरने का
हर मौका हम देते हैं।
पर जो ना बदली उनकी चाल
तो बिजली बन
हम उनपर बरसते हैं।
जीते हैं अपनी माँ के लिए
मरते हैं अपनी माँ के लिए।
हमारे साँस के हर कश कश पर लिखा है
वन्दे मातरम! वन्दे मातरम!
वन्दे मातरम!वन्दे मातरम!
जय हिंद।।
Jai hind

Written by Sushil Kumar@kavitadilse.top

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