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हमारे प्रिय मोदी की ही सरकार आ रही है।

हमारे प्रिय मोदी की ही सरकार आ रही है।

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Bharat

हम भारत देश में जन्म लिए।
हम भारत के हित की सोचेंगे।
हम स्वयं अपना कदम बढ़ाएंगे।
भारत को भी खींच उठाएँगे।
हम शांति दूत हैं इस विश्व के
पर हम कायर नहीं
जो विरोधियों के दबाव में,
अपने कदम पीछे हटाएँगे।
वो दौर कोई और था
ये दौर कोई और है।
पहले स्वयं के हित की सोच थी
आज देश के हित की सोच है।
पहले कायरता की खाई में गिरे थे हम सभी
पर आज हिमालय की वीरता के गोद में बैठे हैं हम।
Bharat,narendra modi

आज हमारी सोच में ललकार है
दुश्मनों के लिए।
तो बहुत सारा प्यार है वहीं
अपनो के लिए।
आज सारे देश में विकास की लहर है
गाँव - गाँव और शहर- शहर में
बिजली और सड़क है।
आज अपने सुनहरे देश की भविष्य
हमें उसकी छवि में नजर आ रही है।
आज हर दिल एक स्वर में
बस यही राग पुकार रही है।
इस बार फिर से
हमारे प्रिय मोदी की ही सरकार
आ रही है।
Bharat,narendra modi

जय हिंद।।
जय भारत।।

Written by sushil kumar.

मात - पिता दिवस।।

मात - पिता दिवस।।

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बेरोजगार थे।
तो रोजगार के तनाव में
घर नहीं जाया करते थे।

माँ बाबू जी के ताने से
बचने के लिए
बाहर ही कहीं
समय बिताया करते थे।
कभी दोस्तों के साथ
तो कभी एकांत में
सरकारी नौकरी की
तैयारी किया करते थे।

घर पहुँचने पर
माँ चिड़चिड़ा कर
हमसे पूछ लिया करती थी।
क्या हवा खाके पेट भर गया है तो ठीक है
वरना आ बैठ
खाना खा ले संग में।

मैं भी गुस्से में
उनसे ये बोल दिया करता था।
भूख नहीं लगी है
मुझे माँ।
बाहर से आया हूँ खाकर।


माँ से अच्छा उसके बच्चे को
दुनिया में कोई नहीं समझ सकता है।
भूख बच्चे को लगती है
माँ बेचैन सी हो जाती है।
चोट बच्चे को लगती है
माँ बिलख सी जाती है।

पता नहीं
उस दिन क्या हुआ था?
माँ के आँखों से
अश्रु बह निकले थे।
मेरे करीब आ कर कहने लगी।
कल से तेरे को
कोई कुछ नहीं बोलेगा।
तू समय पर खाना खा लिया कर।
पढ़ाई करना है
तो कर
वरना अपना कोई धंधा शुरु कर ले।
पापा से कह कर तुझे
कुछ पैसे दिलवा दूँगी कल।
पर तू कभी भी ऐसे
तकलीफ मत दिया कर खुद को।

चल मैं भी सुबह से भूखी हूँ
आ खाना खा ले मेरे संग में।
वरना मैं भी नही खाऊँगी कभी
फिर सारे जिंदगी भर।

उनके ये शब्द
किसी धनुष से निकले
बाण की भाँती
मेरे हृदय को छलनी कर गए थे।
दिल मेरा भर आया था उस वक्त
जब मैं अपनी खुदगर्जी को
महसूस कर पाया था।

और अगले महीने बेरोज़गारी की लेबल
मेरे सर से हट जाती है।
ये और कुछ नहीं
माँ बाबूजी के आशीर्वाद के रूप में
दिए हुए उनके तानो के बदौलत थे।
और हमारी मेहनत थी।
और कुछ ईश्वर की मर्जी थी।

हम अपने माँ बाबू जी को हमेशा
बचपन से तकलीफ देते आते हैं।
जो हरपल एक पैर पर खड़े हो सदा
हमारी खुशी के लिए
रब से प्रार्थना किए जाते हैं।
आज हम जिस मुकाम पर हैं
ये सब
उनके ही दिए संस्कार के बदौलत है।
पर वे कभी भी अपना हक
हमपे नहीं जताते हैं।
भले कभी तकलीफ में हो वे खुद
पर हमारी खुशी देख वो हर्षाते हैं।
सही में
माँ और पिता सदा हमारे लिए
भगवान के दिए हुए
सबसे अनमोल उपहार हैं।
इन्हें सदा सहेज कर रखने में ही
हमारे जीवन का उद्धार है।
चाहे जितना इनकी सेवा करलो।
इनके द्वारा
हमारे लिए किए त्याग का
कर्ज़ हम कभी नहीं चुका पाते हैं।
इसलिए आज से हर दिन हम
अपने दिन की शुरुवात
उनके अच्छे सेहत की प्रार्थना से करते हैं।
ताकि उनका हाथ हमारे सर पर सदा बना रहे
और उनके मार्गदर्शन में
सदा उन्नति की ओर कदम बढ़ाते जाएँ हम।
Parents day


Everyday is a Happy parents day.

written by sushil kumar @kavitadilse.top

आज़ाद धरा के

आज़ाद धरा के

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Azadi
आज़ाद धरा के
आज़ाद अम्बर का
मैं वो आज़ाद पंक्षी हूँ।
जिसकी कोई सीमा नहीं
जिसे कोई बंधन नहीं।
जिसे कोई रोक टोक नहीं।
सारा अम्बर
सारी धरा
जिसका है अपना घर।
Azadi

जब मन किया
पँख फैला
उड़ चले अपने फलक की ओर।
भ्रमण किया खूब इधर उधर
चहचहा कर किया
सारे वातावरण को मधुरमय।
फिर जब भूख लगी तो
उतर आएँ
अपनी धरा पर
चुगने को अन्न।
ये होती है
आज़ादी।
जो मन किया
वो किया।
Azadi

पर मनुष्यों ने तो आज़ादी की
परिभाषा ही बदल डाली है।
सारे धरती को विभाजित कर
अपनी आज़ादी की सीमा बांध डाली है।
रंग रूप,जाति धर्म के आधार पर
ईश्वर तक को नहीं बख्शा है।
ये कैसी आज़ादी पाने को
मानव ने
अपने भाइयों का खून तक बहा डाला है।
Azadi

सोचो !!
जरा सोचो तुम।
क्या तुमने आज़ादी पा ली है।
रंग रूप,जाति धर्म के नाम पर
ये क्या कोहराम तुमने
दिमाग में मचाली है।
अपनी संकीर्ण सोच को
आज दिल से
तजने का समय आ चुका है।
हम सारे मानव एक हैं
और सारी विविधताओं को नष्ट कर
आज़ादी पाने का समय आ चुका है।

Written by sushil kumar

खुद को तू पहचान ले

खुद को तू पहचान ले

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खुद को तू पहचान ले
अपनी अस्तित्व को तू जान ले।
उद्देश्य! तेरा है क्या?
मन मंथन कर
तू ठान ले।

लक्ष्य को रख सामने
कर्म तू आरम्भ कर।
उठा कदम तू दृढ़कर
मन में अटूट विश्वास रख।

भले मंजिल तुझे दिखे नहीं
राह लगे दुश्वार कभी।
पाँव तेरा थके कहीं
लड़खड़ा कर तू गिरे वहीं।

आत्मविश्वास दिल में रख
उठ खड़े हो अपने पैर पर।।
और चल पड़ हिमालय की ओर
अपने पड़ाव को पाने को।

थक कर कहीं ऊँघ मत
हौसला दिल में बांधे रख।
खुद पर तू विश्वास रख
अपने मन के संशय का तू विनाश कर।

अपने जुनून के चिंगारी को
तू उसे हवा दे।
स्वयं को तू इतना जला
कि सूर्य बनकर तू कल चमक।
तेरे तप के फल देने को
खुद ईश्वर आएं तेरे समक्ष।

Written by sushil kumar

अस्तित्व की खोज।।

अस्तित्व की खोज।।

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हर कोई
अस्तित्व अपनी खंगाल रहा है।
अपने होने का वजूद
वह स्वयं में
या किसी अन्य में
तलाश कर रहा है।

कल बड़े बेगाने से बैठे हुए थे
किसी कोने में
एक महफ़िल में।
आज सभी बेगाने घेरे हुए हैं
मेरे सफलता के राज़ को पहचानने में।
मेरी सोच जो कल कहीं
अटकी खड़ी रह गई थी
किसी सवाल पर।
आज भी वहीं खड़ी हुई है
इस उम्मीद में
कि कोई सही जवाब देकर
उसे संतुष्ट करे।

ये लोग क्यों किसी को घेर कर
खड़े रहते हैं किसी महफ़िल में।
कल किसी और को घेरे हुए थे जो लोग
आज मैं उनके बीच में घिरा हुआ हूँ
एक प्रेरणास्रोत बनकर।
फिर मुझे एहसास हुआ कि
मैं नहीं
मेरे ओहदे ने
इन्हें मेरी तरफ आकर्षित किया है।
और
ये अपने अस्तित्व को
मेरे अस्तित्व में तलाशने की कोशिश में लग गए हैं।
शायद इसीलिए
मेरी सफलता का राज़
बार बार ये मुझसे पूछ रहे हैं।

पर सही बताऊँ तो
सफलता पाने को
केवल एक मार्ग की ज़रूरत नहीं होती है।
जुनून और धैर्य की ज्यादा अहमियत होती है
किसी भी बड़ी उपलब्धि को हासिल करने में।
Entity


Written by sushil kumar





हमारे सेना हमारी शान है

हमारे सेना हमारी शान है।

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हमारे सेना हमारी शान है।
वो शरहद पर हैं
इसलिए तो हमारी जान है।
वो कभी भी मरते नहीं
और सदा अमर होकर
हमारे सीमा की रक्षा करते हैं।
उनके हर मनोकामना पूर्ण हो
ऐसी मनोकामना
हम होली की शुभ अवसर पर
ईश्वर से करते हैं।
जय हिंद।
जय भारत।



Written by sushil kumar

होली का त्योहार है

होली का त्योहार है

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होली का त्योहार है
रंग और गुलाल भरी खुशियोंं की बौ-छार है।

हर दिल में
आज वो बचपन का उमंग
पुनः जाग उठा है।

सारे मन के मैल
मानो आज इस पावन त्योहार पर धूल चुके हैं।

और हम सभी
जातिवाद, धर्मवाद और सभी विकारों से ऊपर उठ
पूरे जोश खरोश और उमंग के साथ
होली के रंग में
एक साथ
सतरंगी खुशियों के झरने में
भींगे जा रहे हैं।

और तो और
हमारे साथ सारी प्रकृति भी
इस त्योहार के प्रभाव से बच नहीं पाई हैं।
दिन ढलने को है और
सारे अम्बर की लालिमा
हमें ऐसा आभास करा रही है।
मानो धरती ने अम्बर को
लाल गुलाल से रंग दिया हो।
और ठीक वैसे ही
धरती की हरियाली देख
ऐसा आभास हो रहा है
जैसे अम्बर ने भी हरे रंग के गुलाल से
धरती को रंगने का मौका नहीं गंवाया है।

कितना मनोहर दृश्य है
मानो सारी प्रकृति आज खुशी में
झूम रही हो।


आज के इस शुभ पल के अवसर पर
मैं फिर से सारे दोस्त,सारे रिश्तेदार व सबसे महत्वपूर्ण मेरे फौजी भाइयों व बहनों को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं दिल से देता हूँ।ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि आप सभी लोगों की सारे मनोकामनाएं पूर्ण हो।।ईश्वर सदा आपका सही मार्गदर्शन करें।

धन्यवाद

।।जय हिंद।।

।।जय भारत।

और फिर से
होली की दिल से सभी भारतीयों को ढेर सारी शुभकामनाएं।

सुशील कुमार

।।एक नई क्रांति की ज़रूरत है भारत को।।
।।राष्ट्रवाद की क्रांति।।

सुशील कुमार
Holi

Holi

हैप्पी होली।।

Written by sushil kumar

वो अकेला ही चला था

वो अकेला ही चला था

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वो अकेला ही चला था
बदलने सारे हिंदुस्तान को।
एक नई सोच,एक नया विश्वास
सारे भारतीयों के
हृदय में बोकर।
वो निकल पड़ा था एक मिशन पर
सारे प्रणाली से भ्रष्टाचार मिटाने को।

सारी मानवता चल पड़ी थी
उसके पीछे
उसके नेक कदम पर
उसके कदम से कदम मिलाकर।
विकास की मंज़िल पाने को
अपने अधूरे सपनों को पूर्ण कर सँवारने को।

आज जब काले धन पर रोक लग चुका है
अपने प्रणाली में भी कुछ सुधार आ चुका है।
तो खाने वालों के पेट मे
एक चुभन सा लग रहा है।
और बौखलाहट में
वे कुछ भी बड़बड़ाने से लगे हैं।
और हमारे चौकीदार को चोर
वे बनाने में लगे हैं।

अगर चोर ही होते
फिर इनसे डरता कोई क्यों?
यहाँ अपने देश के भ्रष्ट लोगों को छोड़ो
अपने विरोधी देशों की नींद तक
इन्होंने उड़ा कर रखी है।
उनकी चैन और सुकून को भी चुरा कर रखी है।
पता नहीं ?
फिर भी क्यों कुछ मनचले हैं हमारे
जो चौकीदार को ही चोर बनाने में लगे हैं।

शायद इसलिए आज सारे विपक्षी दल
अपने मतभेदों को भूल।
एक साथ खड़े हो गए हैं
चौकीदार को हटाने के खातिर।
पर हम ये हरगिज़ होने नहीं देंगे
चौकीदार की कुर्सी
उससे छीनने नहीं देंगे।
क्योंकि चौकीदार अपना फ़र्ज़
अब अच्छे से निभा रहा है।
दोषियों को अब बख्शा नहीं जा रहा है।
चौकीदार अपना है बहुत ही सजग
और ईमानदारी से वह अपना काम निभाता चला रहा है।
Shayari

Written by Sushil kumar@kavitadilse.top

हमारा चौकीदार चोर है??

हमारा चौकीदार चोर है??

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हमारा चौकीदार चोर है
बाकी सारे ईमानदार हैं।
पाँच सालों में कोई घोटाला नहीं हुआ।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
विरोधी देशों की नींदें हराम हो गईं हैं।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज जब हम अपने दुश्मनों को
ईंट का जवाब पत्थर से दे रहे हैं।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज सारा विश्व भारत के साथ खड़ा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज अभिनंदन हमारा
सही सलामत देश वापस लौट आ रहा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज कालेधन पर चोट हुई है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज अपनी जी डी पी 7.7% पर है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज अपना देश आगे बढ़ रहा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज सभी वर्गों का विकास हो रहा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज सारे भ्रष्ट विरोधी दलों को
एक साथ खड़ा होना पड़ रहा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज हम सारे देशवासी
अपने चौकीदार के साथ खड़े हैं
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
Kavita

 written by sushil kumar @ kavitadilse.top

मेरे हर साँस में

मेरे हर साँस में

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मेरे हर साँस में
कुछ नया एहसास है।
कुछ नए जज़्बात हैं
तो कुछ दिल में खास है।
हर दिन की तरह
आज की सुबह में भी
कुछ बात है।
कुछ नए अवसर
और नई राहें
प्रोत्साहन कर रहें हैं हमें
कि तू आगाज़ कर।
समय ने भी पुकार कर
आज यही कहा है हमसे
बीते बिगड़े बातों को भूल
हौसला रख,आगे बढ़।
नए चुनौतियों से
आँखे मिला
दो दो हाथ करने को
रहें हमेशा तैयार हम।
written by Sushil Kumar @ kavitadilse.top

मैं एक सोच हूँ

मैं एक सोच हूँ

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मैं एक सोच हूँ
तुम्हें शायद पसन्द आऊँ
या ना भी आऊँ।
पर दिल में मेरे कोई दोष नहीं है।
मन में भी कोई आक्रोश नहीं है।
हृदय में है मेरे 
बहती है गंगा।
सभी को साथ लेकर
चलने की है दृढ़ इच्छा।
दोस्त क्या?
दुश्मन क्या?
सभी मेरे हैं भाई बन्धु।
बिन इनके 
हमारा कोई जहाँ भी 
है क्या संभव??

भले तुमने कल 
मुझपे चोट किया हो।
मेरे बदन को तुमने 
लहू लुहान किया हो।
पर समय ने मेरा 
पूरा साथ दिया है।
और जख्म मेरे भरकर
 आज पुनर्जीवित किया है।
और आज मैं पुनः
सब कुछ पुराना भूलकर।
नए मिलन की संगीत के 
तराने को 
प्यार से बुनकर।
लाया हूँ ख़ास तुम्हारे खातिर
ताकि तू उसे अनुभव कर।
तुम्हें साथ लेकर 
चलने को 
मैं आगे बढ़ा हूँ।
अपने मन में नहीं रखा है
तुम्हारे लिए कोई घृणा।
क्योंकि प्यार से बढ़कर इस जग में
और कोई धर्म नहीं है।



Written by sushil kumar@ kavitadilse.top

छोटी सी पंक्ति आज के हिंदुस्तानी नारियों पर।

छोटी सी पंक्ति आज के हिंदुस्तानी नारियों पर।

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नारी तू है नारायणी
सारे संसार में है
बस तेरी ही हुकूमत।

चाहे जिस घर में भी झाँक लो आप
पति बेचारा नाचता रहता है जिंदगी भर बस पत्नी के इशारे पर।

अम्बानी हो
चाहे हो टाटा
पत्नी के सामने
वह बन जाता है बेबस।

हर दिन उनके नए नए अरमान दिल में अंकुरित हो उठते हैं।
जिसे पूरा ना करो तो
सारे घर को सिर पर उठा लेती हैं।
पति बेचारा
करे तो क्या करे??
उसका जन्म हुआ ही है
उनके सारे फरमाइशें पूरा करने को।
पर जो भी हो
वो हमसे प्यार भी उतना ही करती हैं।
इतनी चोट देने के बाद
कहीं कुछ गलत ना हो जाए
हमारी लम्बी उम्र के लिए करवा चौथ और तीज रखती हैं।
और उस दिन
हम भी भाव भिवोर हो
उन्हें सदा सुहागन होने का आशिर्वाद दे देते हैं।

पर कभी आपने अनुभव किया है
जब वो मायके चली जाती हैं।
हमारा जीवन कितना नीरस सा हो जाता है।
हर पल
सौ सौ साल के बराबर प्रतीत होने लगते हैं।
क्यों??
क्योंकि हम भी उनसे उतना ही प्यार करते हैं।

नारी के बिना नर कभी भी सम्पूर्ण नहीं हो सकता।
और बिना उनके
हमारी सृस्टि भी कभी सफल नहीं हो सकती।
माँ, बहन,भाभी,पत्नी बन
वो जिंदगी में हमारे दस्तक देती हैं।
और अपनी लीलाएँ कर
हमारे जीवन को प्रकाशमय कर
सही राह दिखाती हैं।
और हमें
हमारे मन्ज़िल तक पहुँचाती हैं।


🙏🙏नारी की जय हो।🙏🙏
Written by sushil kumar

प्यार करने वालों के लिए 💐💐💐

प्यार करने वालों के लिए 💐💐💐

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Love


इशारों ही इशारों में गुफ्तगू क्या चली
मन भँवरा पंख फैला पहुँचा
एक कली की गली।
कली ने भी खिल
उसके स्वागत में बढ़ी।
फिर चल पड़ा प्यार भरे
पलों का वो दौर।
सदियों तक बहती रही
वो प्यार भरी तरंगिनी।
आज भी ठीक वैसी है प्यास
जैसी प्रारंभिक दौर में थी।
समय बदला
प्रकृति बदली
पर उनका प्यार रहा स्थिर।
Love


Written by Sushil Kumar

मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो

मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो

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Jai hind

मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो
मुझे कोई परवाह नहीं।
भारत देश अपना रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।
Jai hind
कोई भी दुश्मन आजमा कर देख ले
भारत के फौलाद हैं हम।
हिमालय सा जज्बा है हमारा
टकराकर हमसे
सभी हो जाएँगे ध्वस्त।
Jai hind

1971 या 1999 का हो युद्ध
मुँह की खाई थी किसने!
सभी को है खबर।
आज भी हम सीमा पर
सीने तान खड़े हैं
खुद पर गर्व कर।
Jai hind

अभिमान है हमें उस देश पर
जिसकी मिट्टी पर हमने जन्म लिया।
संस्कारो की माला जो हमने
अपने पूर्वजों से ग्रहण किया।
Jai hind
आज भी अपने दुश्मनों को
सुधरने का
हर मौका हम देते हैं।
पर जो ना बदली उनकी चाल
तो बिजली बन
हम उनपर बरसते हैं।
जीते हैं अपनी माँ के लिए
मरते हैं अपनी माँ के लिए।
हमारे साँस के हर कश कश पर लिखा है
वन्दे मातरम! वन्दे मातरम!
वन्दे मातरम!वन्दे मातरम!
जय हिंद।।
Jai hind

Written by Sushil Kumar@kavitadilse.top

रोम रोम और रग रग मेरा

रोम रोम और  रग रग मेरा

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Shayari,kavita

रोम रोम और  रग रग मेरा
हर लम्हा
बस यही करे पुकार।
भारत माँ की गरिमा हेतु
आहुति में देदूँ अपना प्राण।

बाहरी दुश्मनों को सबक सीखाने को
सीमा पर खड़े हैं हमारे वीर जवान।
उनके पराक्रम पर हमें संदेह नहीं
वे काफी हैं दुश्मनों के
खट्टे करने को दाँत।
पर रोज के छिटपुट घटनाओं में
शहीद होते रहते हैं
अपने वीर चौकीदार।
कुछ नमकहराम हैं
छिपे देश के भीतर
जो करवाते रहते हैं
देश में नरसंहार।
सो डरना ही है तो डरो उन गद्दारों से
जो मौकापरस्त बन चलते हैं अपनी चाल।
आ गया है उचित समय प्रहार करने का
चुन चुन कर देश द्रोहियों को
उतारने को मौत का घाट।
अब जो कदम ना उठाया हमने तो
देश को खोखला कर बेच देंगे ये हैवान।
Shayari,kavita

Written by Sushil Kumar

मैं रहूँ !ना रहूँ !

मैं रहूँ !ना रहूँ !

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Hindi shayari,patriotic poems

मैं रहूँ !ना रहूँ !
मुझे इसकी कोई परवाह नहीं।
देश मेरा रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।
Hindi shayari,patriotic poems
चिड़ियों की चहचहाट से 
हर सुबह
गूंज उठता है मेरा देश सारा।
मानो धरती माँ की कर रहे हो वन्दना
मिलकर एक स्वर में हम सारे।
किसान उठ चल पड़ते हैं खलिहान
लेकर अपने कन्धे पर हल।
धरती की सुन्दरता को सींचने को
हरित करने को सारा थल।
Hindi shayari,patriotic poems
वही सीमा पर सीने तान खड़े हैं
हमारे वीर भारतीय पराक्रमी बल।
भारत माँ की रक्षा करने को
लेकर सारे मन में दृढ़ प्रण।
हर दिन यहाँ होली होती है
मनती है दीवाली हर दिन।
अपने रक्त के हर कतरे कतरे से
भारत माँ को तिलक लगाने को 
है सभी में होड़।
मेंरे देश की मिट्टी की 
इस संसार में कोई दाम नहीं।
सोंधी सोंधी सुगंध में रहती है
मेरी भारत माँ 
सदा साथ हमारे।
अन्नपूर्णा कहलाती है
भरती है पेट हर हाल में ये।
कोई भूखा नहीं सोता है इस जहाँ
देश मेरा महान है ये।
ऐसे देश के लिए मर मिटने को
हम सदा रहते हैं तैयार यहाँ।
भारतीय सेना कहलाते हैं हम
दुश्मनों के नींद उड़ाने को 
तैयार हैं यहाँ।
हम रहें !ना रहें !
हमें इसकी कोई परवाह नहीं।
देश मेरा रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।

जय हिंद।
जय भारत।
Hindi shayari,patriotic poems

Written by Sushil kumar





मैं हिन्दू नहीं।

मैं हिन्दू नहीं। kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। मैं हिन्दू नहीं ना मैं मुसलमान हूँ। मैं सिख नहीं ना मैं क...