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वो अकेला ही चला था

वो अकेला ही चला था

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


वो अकेला ही चला था
बदलने सारे हिंदुस्तान को।
एक नई सोच,एक नया विश्वास
सारे भारतीयों के
हृदय में बोकर।
वो निकल पड़ा था एक मिशन पर
सारे प्रणाली से भ्रष्टाचार मिटाने को।

सारी मानवता चल पड़ी थी
उसके पीछे
उसके नेक कदम पर
उसके कदम से कदम मिलाकर।
विकास की मंज़िल पाने को
अपने अधूरे सपनों को पूर्ण कर सँवारने को।

आज जब काले धन पर रोक लग चुका है
अपने प्रणाली में भी कुछ सुधार आ चुका है।
तो खाने वालों के पेट मे
एक चुभन सा लग रहा है।
और बौखलाहट में
वे कुछ भी बड़बड़ाने से लगे हैं।
और हमारे चौकीदार को चोर
वे बनाने में लगे हैं।

अगर चोर ही होते
फिर इनसे डरता कोई क्यों?
यहाँ अपने देश के भ्रष्ट लोगों को छोड़ो
अपने विरोधी देशों की नींद तक
इन्होंने उड़ा कर रखी है।
उनकी चैन और सुकून को भी चुरा कर रखी है।
पता नहीं ?
फिर भी क्यों कुछ मनचले हैं हमारे
जो चौकीदार को ही चोर बनाने में लगे हैं।

शायद इसलिए आज सारे विपक्षी दल
अपने मतभेदों को भूल।
एक साथ खड़े हो गए हैं
चौकीदार को हटाने के खातिर।
पर हम ये हरगिज़ होने नहीं देंगे
चौकीदार की कुर्सी
उससे छीनने नहीं देंगे।
क्योंकि चौकीदार अपना फ़र्ज़
अब अच्छे से निभा रहा है।
दोषियों को अब बख्शा नहीं जा रहा है।
चौकीदार अपना है बहुत ही सजग
और ईमानदारी से वह अपना काम निभाता चला रहा है।
Shayari

Written by Sushil kumar@kavitadilse.top

हमारा चौकीदार चोर है??

हमारा चौकीदार चोर है??

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हमारा चौकीदार चोर है
बाकी सारे ईमानदार हैं।
पाँच सालों में कोई घोटाला नहीं हुआ।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
विरोधी देशों की नींदें हराम हो गईं हैं।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज जब हम अपने दुश्मनों को
ईंट का जवाब पत्थर से दे रहे हैं।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज सारा विश्व भारत के साथ खड़ा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज अभिनंदन हमारा
सही सलामत देश वापस लौट आ रहा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज कालेधन पर चोट हुई है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज अपनी जी डी पी 7.7% पर है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज अपना देश आगे बढ़ रहा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज सभी वर्गों का विकास हो रहा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज सारे भ्रष्ट विरोधी दलों को
एक साथ खड़ा होना पड़ रहा है।
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
आज हम सारे देशवासी
अपने चौकीदार के साथ खड़े हैं
फिर भी हमारा चौकीदार चोर है।
Kavita

 written by sushil kumar @ kavitadilse.top

मेरे हर साँस में

मेरे हर साँस में

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मेरे हर साँस में
कुछ नया एहसास है।
कुछ नए जज़्बात हैं
तो कुछ दिल में खास है।
हर दिन की तरह
आज की सुबह में भी
कुछ बात है।
कुछ नए अवसर
और नई राहें
प्रोत्साहन कर रहें हैं हमें
कि तू आगाज़ कर।
समय ने भी पुकार कर
आज यही कहा है हमसे
बीते बिगड़े बातों को भूल
हौसला रख,आगे बढ़।
नए चुनौतियों से
आँखे मिला
दो दो हाथ करने को
रहें हमेशा तैयार हम।
written by Sushil Kumar @ kavitadilse.top

मैं एक सोच हूँ

मैं एक सोच हूँ

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मैं एक सोच हूँ
तुम्हें शायद पसन्द आऊँ
या ना भी आऊँ।
पर दिल में मेरे कोई दोष नहीं है।
मन में भी कोई आक्रोश नहीं है।
हृदय में है मेरे 
बहती है गंगा।
सभी को साथ लेकर
चलने की है दृढ़ इच्छा।
दोस्त क्या?
दुश्मन क्या?
सभी मेरे हैं भाई बन्धु।
बिन इनके 
हमारा कोई जहाँ भी 
है क्या संभव??

भले तुमने कल 
मुझपे चोट किया हो।
मेरे बदन को तुमने 
लहू लुहान किया हो।
पर समय ने मेरा 
पूरा साथ दिया है।
और जख्म मेरे भरकर
 आज पुनर्जीवित किया है।
और आज मैं पुनः
सब कुछ पुराना भूलकर।
नए मिलन की संगीत के 
तराने को 
प्यार से बुनकर।
लाया हूँ ख़ास तुम्हारे खातिर
ताकि तू उसे अनुभव कर।
तुम्हें साथ लेकर 
चलने को 
मैं आगे बढ़ा हूँ।
अपने मन में नहीं रखा है
तुम्हारे लिए कोई घृणा।
क्योंकि प्यार से बढ़कर इस जग में
और कोई धर्म नहीं है।



Written by sushil kumar@ kavitadilse.top

छोटी सी पंक्ति आज के हिंदुस्तानी नारियों पर।

छोटी सी पंक्ति आज के हिंदुस्तानी नारियों पर।

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नारी तू है नारायणी
सारे संसार में है
बस तेरी ही हुकूमत।

चाहे जिस घर में भी झाँक लो आप
पति बेचारा नाचता रहता है जिंदगी भर बस पत्नी के इशारे पर।

अम्बानी हो
चाहे हो टाटा
पत्नी के सामने
वह बन जाता है बेबस।

हर दिन उनके नए नए अरमान दिल में अंकुरित हो उठते हैं।
जिसे पूरा ना करो तो
सारे घर को सिर पर उठा लेती हैं।
पति बेचारा
करे तो क्या करे??
उसका जन्म हुआ ही है
उनके सारे फरमाइशें पूरा करने को।
पर जो भी हो
वो हमसे प्यार भी उतना ही करती हैं।
इतनी चोट देने के बाद
कहीं कुछ गलत ना हो जाए
हमारी लम्बी उम्र के लिए करवा चौथ और तीज रखती हैं।
और उस दिन
हम भी भाव भिवोर हो
उन्हें सदा सुहागन होने का आशिर्वाद दे देते हैं।

पर कभी आपने अनुभव किया है
जब वो मायके चली जाती हैं।
हमारा जीवन कितना नीरस सा हो जाता है।
हर पल
सौ सौ साल के बराबर प्रतीत होने लगते हैं।
क्यों??
क्योंकि हम भी उनसे उतना ही प्यार करते हैं।

नारी के बिना नर कभी भी सम्पूर्ण नहीं हो सकता।
और बिना उनके
हमारी सृस्टि भी कभी सफल नहीं हो सकती।
माँ, बहन,भाभी,पत्नी बन
वो जिंदगी में हमारे दस्तक देती हैं।
और अपनी लीलाएँ कर
हमारे जीवन को प्रकाशमय कर
सही राह दिखाती हैं।
और हमें
हमारे मन्ज़िल तक पहुँचाती हैं।


🙏🙏नारी की जय हो।🙏🙏
Written by sushil kumar

प्यार करने वालों के लिए 💐💐💐

प्यार करने वालों के लिए 💐💐💐

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Love


इशारों ही इशारों में गुफ्तगू क्या चली
मन भँवरा पंख फैला पहुँचा
एक कली की गली।
कली ने भी खिल
उसके स्वागत में बढ़ी।
फिर चल पड़ा प्यार भरे
पलों का वो दौर।
सदियों तक बहती रही
वो प्यार भरी तरंगिनी।
आज भी ठीक वैसी है प्यास
जैसी प्रारंभिक दौर में थी।
समय बदला
प्रकृति बदली
पर उनका प्यार रहा स्थिर।
Love


Written by Sushil Kumar

मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो

मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो

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Jai hind

मैं कल का सूरज ना भी देख सकूँ तो
मुझे कोई परवाह नहीं।
भारत देश अपना रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।
Jai hind
कोई भी दुश्मन आजमा कर देख ले
भारत के फौलाद हैं हम।
हिमालय सा जज्बा है हमारा
टकराकर हमसे
सभी हो जाएँगे ध्वस्त।
Jai hind

1971 या 1999 का हो युद्ध
मुँह की खाई थी किसने!
सभी को है खबर।
आज भी हम सीमा पर
सीने तान खड़े हैं
खुद पर गर्व कर।
Jai hind

अभिमान है हमें उस देश पर
जिसकी मिट्टी पर हमने जन्म लिया।
संस्कारो की माला जो हमने
अपने पूर्वजों से ग्रहण किया।
Jai hind
आज भी अपने दुश्मनों को
सुधरने का
हर मौका हम देते हैं।
पर जो ना बदली उनकी चाल
तो बिजली बन
हम उनपर बरसते हैं।
जीते हैं अपनी माँ के लिए
मरते हैं अपनी माँ के लिए।
हमारे साँस के हर कश कश पर लिखा है
वन्दे मातरम! वन्दे मातरम!
वन्दे मातरम!वन्दे मातरम!
जय हिंद।।
Jai hind

Written by Sushil Kumar@kavitadilse.top

रोम रोम और रग रग मेरा

रोम रोम और  रग रग मेरा

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Shayari,kavita

रोम रोम और  रग रग मेरा
हर लम्हा
बस यही करे पुकार।
भारत माँ की गरिमा हेतु
आहुति में देदूँ अपना प्राण।

बाहरी दुश्मनों को सबक सीखाने को
सीमा पर खड़े हैं हमारे वीर जवान।
उनके पराक्रम पर हमें संदेह नहीं
वे काफी हैं दुश्मनों के
खट्टे करने को दाँत।
पर रोज के छिटपुट घटनाओं में
शहीद होते रहते हैं
अपने वीर चौकीदार।
कुछ नमकहराम हैं
छिपे देश के भीतर
जो करवाते रहते हैं
देश में नरसंहार।
सो डरना ही है तो डरो उन गद्दारों से
जो मौकापरस्त बन चलते हैं अपनी चाल।
आ गया है उचित समय प्रहार करने का
चुन चुन कर देश द्रोहियों को
उतारने को मौत का घाट।
अब जो कदम ना उठाया हमने तो
देश को खोखला कर बेच देंगे ये हैवान।
Shayari,kavita

Written by Sushil Kumar

मैं रहूँ !ना रहूँ !

मैं रहूँ !ना रहूँ !

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Hindi shayari,patriotic poems

मैं रहूँ !ना रहूँ !
मुझे इसकी कोई परवाह नहीं।
देश मेरा रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।
Hindi shayari,patriotic poems
चिड़ियों की चहचहाट से 
हर सुबह
गूंज उठता है मेरा देश सारा।
मानो धरती माँ की कर रहे हो वन्दना
मिलकर एक स्वर में हम सारे।
किसान उठ चल पड़ते हैं खलिहान
लेकर अपने कन्धे पर हल।
धरती की सुन्दरता को सींचने को
हरित करने को सारा थल।
Hindi shayari,patriotic poems
वही सीमा पर सीने तान खड़े हैं
हमारे वीर भारतीय पराक्रमी बल।
भारत माँ की रक्षा करने को
लेकर सारे मन में दृढ़ प्रण।
हर दिन यहाँ होली होती है
मनती है दीवाली हर दिन।
अपने रक्त के हर कतरे कतरे से
भारत माँ को तिलक लगाने को 
है सभी में होड़।
मेंरे देश की मिट्टी की 
इस संसार में कोई दाम नहीं।
सोंधी सोंधी सुगंध में रहती है
मेरी भारत माँ 
सदा साथ हमारे।
अन्नपूर्णा कहलाती है
भरती है पेट हर हाल में ये।
कोई भूखा नहीं सोता है इस जहाँ
देश मेरा महान है ये।
ऐसे देश के लिए मर मिटने को
हम सदा रहते हैं तैयार यहाँ।
भारतीय सेना कहलाते हैं हम
दुश्मनों के नींद उड़ाने को 
तैयार हैं यहाँ।
हम रहें !ना रहें !
हमें इसकी कोई परवाह नहीं।
देश मेरा रहे सलामत
उसी में छिपी है जान मेरी।

जय हिंद।
जय भारत।
Hindi shayari,patriotic poems

Written by Sushil kumar





वो अकेला ही चला था

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