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अरे दरिंदो!

अरे दरिंदो! 

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित।।

Deshbhakti shayari,hindi shayari


अरे दरिंदो!
मानवता का तुम्हारे अंदर नामोनिशान नहीं।
बेगुनाहों का खून बहाकर तुम्हें आता है आनंद बड़ा।

पीठ पर हमला करके समझते हो
खुद को तुर्रम खान बड़े।
हमारी धरती माँ का खाते हो
और उनपर ही रखते हो बुरी नज़र।

दिल फट सा जाता है
जब सुनता हूँ ऐसी बुरी खबर।
देश के पहरेदार शहीद हुए हैं
कुछ कायर बुजदिल आतंकियों की साज़िश से।

अब और कितना सहेंगे हम
कब तक आँखे होएंगी नम।
देश में भावनाओं का सैलाब उठ चुका है
जो गद्दारों को बहा ले जाने को है व्याकुल।

आ गया है समय नमो
गद्दारों को ठिकाने लगाने का।
अब जो उन्हें सबक ना सिखाया
तो चढ़ बैठेंगे हमारे सर पर वो।
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जय हिंद।।
जय भारत।।

Written by sushil kumar @ kavitadilse.top

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