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प्यार प्यार प्यार और केवल प्यार।

प्यार प्यार प्यार और केवल प्यार।

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सुबह क्या
शाम क्या
दिन क्या
रात क्या
हर घड़ी
तेरी खैरियत की
फ़रयाद करता हूँ
अपने रब से।

नैन झपकना भूल भी जाऊँ
पर सुमिरन तेरी सलामती की
अपने ईश्वर से
हमेशा करता ही रहता हूँ।

दुख और तकलीफ़ तेरे
सारे मेरे नसीब में हो जाएँ।
अपने खुशियों के बना गुलदस्ते
तुझे भेंट में देदूँ।

दिल करता है
तुझे कभी भी
अपने नजरों से ओझल ना होने दूँ।
बस तुम्हें निहारता रहूँ।
और अपने हृदय में
सदा सदा के लिए
तुम्हे बसा लूँ।

आई लव यू।।


written by Sushil Kumar at kavitadilse.top



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