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हमें चैन की नींद कहाँ आएगा??

हमें चैन की नींद कहाँ आएगा??


Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

भूत फिर से जाग रहा है
करने को चाह रहा है
फिर से उपद्रव।
देश को खतरे में डाल
राजगद्दी हथियाने को
चाल चल रहा है 
फिर से मीर जाफर।

देश को अगर बचाना है
तो इन्हें सबक सिखाना होगा।
बहुत रंग बदल लिया है इन्होंने
गिरगिट भी इन्हें देख 
शर्माया होगा।

देश के आवाम को भटकाने के अलावा
इन्हें कुछ नहीं आता है।
अपनी शातिर अभिलाषा को
इन्हें छुपाने नहीं आता है।

बहुत सह लिया इनकी दोगले पंती को
अब और सहा नहीं जाता है।
जब तक इन्हें देश से बाहर न कर दें
हमें चैन की नींद कहाँ आएगा??

जय हिंद।
जय भारत।
वन्दे मातरम।।

written by Sushil Kumar at kavitadilse.top

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