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आँखो में क्रोध है

आँखो में क्रोध है

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आँखो में क्रोध है
दिल में भी आक्रोश है।
मानो आज सृष्टि का अंत करने को
उनकी तीसरी नेत्र व्याकुल है।

मानवता का नामोनिशान आज
किसी मानव में नहीं दिख रहा।
जिसे देखो स्वार्थवश हो
अपने हित की बस यूँ सोच रहा।
अपने प्रियजनों के खून बहाने में
उनमें कोई ना संकोच रहा।

क्या यही दिन देखने को ब्रह्मा ने
कभी मानव का सृजन किया।
मानवता का पाठ पढ़ाना था जिन्हें
सही मार्ग दिखाना था जग को।
राक्षस बन
अपने रचियता पर ही
आज क्रूर प्रहार किया।

कल्कि अवतार लेने को है इस युग में
करने को है पूरे जग का सर्वनाश।
आज पाप की गगरी भर चुकी है
अब तो लेना होगा बागडोर
ईश्वर को अपने हाथ में।



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हमें चैन की नींद कहाँ आएगा??

हमें चैन की नींद कहाँ आएगा??


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भूत फिर से जाग रहा है
करने को चाह रहा है
फिर से उपद्रव।
देश को खतरे में डाल
राजगद्दी हथियाने को
चाल चल रहा है 
फिर से मीर जाफर।

देश को अगर बचाना है
तो इन्हें सबक सिखाना होगा।
बहुत रंग बदल लिया है इन्होंने
गिरगिट भी इन्हें देख 
शर्माया होगा।

देश के आवाम को भटकाने के अलावा
इन्हें कुछ नहीं आता है।
अपनी शातिर अभिलाषा को
इन्हें छुपाने नहीं आता है।

बहुत सह लिया इनकी दोगले पंती को
अब और सहा नहीं जाता है।
जब तक इन्हें देश से बाहर न कर दें
हमें चैन की नींद कहाँ आएगा??

जय हिंद।
जय भारत।
वन्दे मातरम।।

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क्रांति की चिंगारी

क्रांति की चिंगारी

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क्रांति की चिंगारी
हर दिल में
आज फिर से यहाँ
धधक रही।

देश को लूटने से बचाने को भारत माँ
आज फिर से
लक्ष्मी बाई का आह्वान कर रही।

पर इस बार की परिस्थिति कुछ अलग ही है
मेरे प्यारे देशप्रेमियों।
अंग्रेज नहीं
आज अपनो में ही हैं
जो लूटने को आतुर हैं
अपनी भारत माता को।

कैसे बचा पाएगी मणिकर्णिका
अपने देश को
अपने ही लोगो से।




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हर पल में वो पल तलाश रहा हूँ मैं।।

हर पल में वो पल तलाश रहा हूँ मैं।।

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हर पल में वो पल तलाश रहा हूँ मैं।
बार बार लौट पुनः वहाँ जा रहा हूँ मैं।
बहुत दिन हो गए हैं
पर खुशियों से मुलाकात हो ना पाई है।
और खुशियों के खोज में
बार बार भूत में 
लौटे जा क्यों रहा हूँ मैं।

समय का पहिया 
लगातार आगे ही चलता जा रहा है।
पर क्यों 
समय को पीछे खिंचने का प्रयत्न कर रहा हूँ मैं।

खुशियों को क्यों ना वर्तमान में तलाशने का प्रयास करे हम।
हर पल,हर क्षण में
क्यों ना  
अपनी खुशियों के ओस को एकत्र करें हम।

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written by Sushil Kumar at kavitadilse.top





क्या बताएँ??

क्या बताएँ ??

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क्या बताएँ??
किस कदर तुमसे हम प्यार करते हैं।
हर घड़ी
हर पल
बस तेरी खैरियत की
रब से फरियाद करते हैं ।

कहीं भी जाऊँ
कहीं भी रहूँ
तेरी यादें मेरी परछाई बन
मेरा साथ निभाती है।

तेरी वो मीठी मीठी बातें
तेरा वो हमसे नज़रों का चुराना
तेरा वो पास आकर
मेरे को उकसाना।
कहाँ भूल पाया हूँ मैं
तेरा वो मुस्कुराना।।

तेरी हँसी देख
मैं सारा जग भूल सा जाता हूँ।
मानो सारा जहाँ थम सा गया हो
बस एक उस क्षण में।
मानो तुम्हें पाकर
जीवन मेरा सार्थक हो गया है।

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तुम्हे क्या लगा??

तुम्हे क्या लगा??

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तुम्हे क्या लगा??
मैं भाग गया!
पर तुम्हें नहीं पता
मैं हूँ नहीं
कोई भगोड़ा।

हौसला है कायम।
जुनून है ज्वलन।
मुसीबतों की खाई में गिरकर
उठना है मुमकिन।।

सांस की आखिरी कश लेने तक
मैं लड़ता रहूँगा मरते दम तक।
माना मुसीबतों का पहाड़ खड़ा है
मेरे सामने।
लहूलुहान कर मुझे
मेरे हौसले को झकझोरने।
पर मैं भी कहाँ पीछे हटने वाला।
बन समुंदर की लहरें
करने लगा चोट लगातार
उन पत्थरों पर।

आज भी मैं
बिल्कुल वहीं हूँ खड़ा।
दे रहा हूँ चोट
लगातार उन मुसीबतों की दीवार पर।
टूटेगी
और ज़रूर टूटेगी वो दीवार।।
हासिल कर ही लूँगा अपनी मंज़िल
आज नहीं तो कल।।
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हमारी यादें नई पुरानी

हमारी यादें नई पुरानी

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हमारी यादें नई पुरानी
आते जाते बयां कर जाती है
कोई कहानी।।

कभी नम कर जाती है अँखियों को
तो कभी मुस्कान दे जाती है
चेहरों पर।।

कभी डराती हैं
तो कभी हँसाती हैं।
बिन सावन मेघ बरसा जाती हैं।

हर घड़ी संग रहकर
हमें जीने के लिए सही मार्ग दर्शाती हैं।

सही गलत का पहचान करवा कर
पिछले गलतियों में सुधार करवाती हैं।

अगर यादें ना हो
हम मनुष्यों के जीवन में।
हम गलती कर करके थक जाएँगे।

गलती की
भूल गए।

गलती की
भूल गए।

जो याद रहती  है हमें
इसलिए सुधार लाते हैं।

और हम मनुष्य
मनुष्य कहलाते हैं।


written by Sushil Kumar at kavitadilse.top


हर पल हर लम्हा ।।

हर पल हर लम्हा ।।

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हर पल हर लम्हा
बस तेरे ख्यालों में डूबा रहता हूँ।।
कहीं भी जाऊँ
कहीं भी रहूँ
बस तेरे सोच में उलझा रहता हूँ।।

ना खाने की फिक्र
ना पीने की फिक्र
बस तुम्हारी मखमली यादों में
डूबे रहता हुँ।।

अगर जो कोई टोके
तो मैं ज़रा भौचक्का सा रह जाता हूँ।
मुझे लगा
तुमने आवाज़ दिया।
पर तुम्हें पास ना पाकर
बड़ा बेचैन सा हो जाता हूँ।।
तुम्हें फोन कर
तूम्हारे हाल चाल पूछ।
मैं अपने दिल में चैन पाता हूँ।।

ईश्वर से हर वक़्त 
बस एक ही दुआ करता हूँ।
मेरे हर खुशी और
मेरे हर सुख से
उसकी जिन्दगानी रंगीन बना दे।
उसके सारे गम और दुख
मेरे नसीब में तू डाल दे।
मेरी साँस चले ना चले
उसकी नब्ज़ हमेशा चलती रहे।
उसकी खुशी देख मैं रहूँगा
सदा उसके संग।

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वचन देत सब ना थके।।

वचन देत सब ना थके।।

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वचन देत सब ना थके
पर अमल करे ना कोई।।
जग हमारा सुंदर हो जाए।
जो एको वचन पालन करे होत कोई।।

गुरु वाचाल
नेतो वाचाल
सब जन यहाँ वाचाले होई।।
सीख देत देत 
दिल भरे नहीं।
पर जब करनी करे के 
जो बारी आय
तो सब फुस्स होय।।

वचन करै के पहले
तनिक अपन अंदर झाँकन लेई।
जो स्वयं पालन कर सके
तभीहे सब के प्रवचन फरमावे चाही।।

माँ बाप से कटु व्यवहार करे
जग में प्रेम फैलावे चाही।
घर सुंदर बनत नहीं इनसे
कैसे जग खूबसूरत बन पाय।।


वचन देत सब ना थके
पर अमल करे ना कोई।।
जग हमारा सुंदर हो जाए।
जो एको वचन पालन करे होत कोई




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प्यार प्यार प्यार और केवल प्यार।

प्यार प्यार प्यार और केवल प्यार।

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सुबह क्या
शाम क्या
दिन क्या
रात क्या
हर घड़ी
तेरी खैरियत की
फ़रयाद करता हूँ
अपने रब से।

नैन झपकना भूल भी जाऊँ
पर सुमिरन तेरी सलामती की
अपने ईश्वर से
हमेशा करता ही रहता हूँ।

दुख और तकलीफ़ तेरे
सारे मेरे नसीब में हो जाएँ।
अपने खुशियों के बना गुलदस्ते
तुझे भेंट में देदूँ।

दिल करता है
तुझे कभी भी
अपने नजरों से ओझल ना होने दूँ।
बस तुम्हें निहारता रहूँ।
और अपने हृदय में
सदा सदा के लिए
तुम्हे बसा लूँ।

आई लव यू।।


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जीवन एक संगीत है तुम उसे गुनगुनाते जाओ।

जीवन एक संगीत है

तुम उसे गुनगुनाते जाओ।

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मैं चला
तुम चले
हम सब चलें
अपनी मंजिल की ओर।
कोई तेज़
कोई मध्यम
तो कोई धीमी गति से चला।
जिसे जितनी तीव्र चाह
वह उसी गति से चला।

रस्ते मिले
उबड़े खाबड़े
तो कभी मिला
एकदम समतल।
जीवन कभी भी एकरस नहीं।
कहीं धूप
तो कहीं है छाव।
मिला जो है
हमें किरदार
बस उसे निभाते जाओ।
जीवन एक संगीत है
तुम उसे गुनगुनाते जाओ।



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उसकी यादों में खोया रहता हूँ।

उसकी यादों में खोया रहता हूँ।

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USKI YAADON ME KHOYA RAHTA HUN,hindi poem and hindi shayari,love poems

लोगों को एहसास हुआ
कि हम है
अलग क्यों बैठे।
भरी महफ़िल में
क्यों अपनी तन्हाई संग
 गुफ्तगू हैं करते।
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अरे जनाब
आप जरा हमारे साथ आइए
एक दो जाम अपने लबों से लगाकर
सारे गम को मिटाइए।
क्यों इतने उखड़े उखड़े से
लग रहे हो आप यहाँ।
सारे दुखड़ों को भुलाकर
हमारे कदम के साथ
कदम मिलाइए।
USKI YAADON ME KHOYA RAHTA HUN,LOVE POEMS,HINDI SHAYRI

मैं क्या बताऊँ इन्हें
कि मैं क्यों हूँ उदास।
भरी महफ़िल में भी है
मुझे अपनी महबूबा कि तलाश।
कहाँ एक पल भी
उसे भूल भी मैं पाता हूँ।
बिन उसके एक पल भी
कहीं चैन नहीं पाता हूँ।
भरी महफ़िल हो
या हो तन्हाई
बस उसकी यादों में
खोया रहता हूँ।
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एक बात तो बता दे तू मुझे

एक बात तो बता दे तू मुझे

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एक बात तो बता दे तू मुझे
सोचने में पीएचडी की है तूने??
सुबह से शाम धलने को चली
पक्षियों ने भी पंख फैला
अपने घोंसले की ओर उड़ी।
पर तू तो अभी तक
खड़ा है वहीं।
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सोच सोच कर तू थक चुका।
निष्कर्ष पर तब भी नहीं पहुँचा।
इतना भी फिर क्या सोचना
समय के साथ कदम उठाते चल।
कर्म पर अपने विश्वास रख
सोच को किसी दरिये में फेंक।
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जीयो हमेशा वर्तमान में।
कर परिश्रम तू आज में।।
भविष्य सुनहरा है खड़ा।
देख तेरे
कल इंतजार में।
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written by sushil kumar @ kavitadilse.top



वतना मेरे वतना वे।

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