Email subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

तुम लिखो कुछ ऐसा

तुम लिखो कुछ ऐसा



kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे शांत सरोवर की शिथिल लहरों में
एक उफान सा उठ जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे मृत ज्वालामुखी
पुनः जीवित हो
फिर से जाग जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे बैरागी मन में
क्रान्ति की एक ज्वाला फूट जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे लँगड़े घोड़े के टांग में
फिर से जान फूंक सा जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे सारे मैल मनुष्य के मन से
चुटकियों में धूल जाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे सारी धरतीवासी
अमन और चैन से जी पाए।

तुम लिखो कुछ ऐसा
जिससे मानव
मानवता के पथ पर चल पाए।


Written by sushil kumar



तुमने कोशिश पुरजोर करी थी


तुमने कोशिश पुरजोर करी थी


Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है

तुमने कोशिश पुरजोर करी थी
मेरी what लगाने को।
चाल तो बड़ी अच्छी चली थी
मुझे रास्ते से हटाने को।
पर एक पुरानी कहावत है
तुमने भी सुन रखी होगी।
जाको राखे साइयां
मार सके ना कोई।
बाल ना बाका कर सके
जो जग बैरी होई।

आज मैं हिमालय की चोटी पर पहुँच गया हूँ
तुम्हारे लाख अड़ंगों के बावजूद।
चले थे मुझे स्वर्गवासी करने को
खुद नरक पहुँच गए हो।

Written by sushil kumar

तू चला जाएगा

तू चला जाएगा।


kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



तू चला जाएगा
तो कल तेरी यादें ही रह जाएँगी
मेरा साथ निभाने के लिए।

जब कभी आँखों में नमी होंगी
दिल भी गमगीन होगा
तो तेरी शरारते भरी मीठी मीठी यादें ही
मुझे राहत पहुँचाने के लिए
यहाँ रह जाएँगी।

जब कभी कोई भयावह स्वप्न देखकर
रात में चौंक उठ जाऊँगा।
तो तेरी ही वो प्यारी प्यारी बातें
मेरे संग में रह जाएँगी
जो मुझे सदा साहस देती रहेंगी।

जो कभी कोई अपना
मेरे को तनहा छोड़ कहीं निकल जाएगा।
तो तेरा ही वो अटूट विश्वास
मुझे उस घनघोर अंधेरे से
बाहर खींच रोशनी में ले आएगा।

मैं इस जहाँ में रहूँ
या कहीं भी रहूँ।
सदा आपकी स्मृतियों के सितारों के
बीच में ही रहूँगा।
आप मेरे होने की वजह हो।
शायद ही मैं कभी
आपसे जुदा होकर
रह पाऊँगा।

Written by sushil kumar



मेरे तकलीफ का मुझसे बहुत ही प्यारा नाता है।

मेरे तकलीफ का मुझसे बहुत ही प्यारा  नाता है।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मेरे तकलीफ का मुझसे बहुत ही प्यारा  नाता है।
बहुत लोग साथ छोड़कर चले गए हैं।
जो बचे हैं वो भी धीरे धीरे जा रहे हैं।
पर तकलीफ!
तकलीफ का और मेरा
मानो जन्मों जन्मों का रिश्ता है।
वो कहाँ से मुझे छोड़ जाने वाला है।
जब तक साँस है
तब तक वो साथ निभाएगा।
अगले जन्म में वापस फिर आ जाएगा।
मेरे तकलीफ का मुझसे बहुत ही प्यारा  नाता है।

Written by sushil kumar

हम लाख करले जद्दोजहद

हम लाख करले जद्दोजहद।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


हम लाख करले जद्दोजहद
किस्मत अपनी बदल नही सकते।
पूर्व जन्म के किए गए
अच्छे बुरे कर्म के फल को भोगे बिना
हम तर नहीं सकते।
कष्ट ज्यादा है इस दुनिया में
क्योंकि लोगो का झुकाव
बुरे कर्मों के तरफ कुछ ज्यादा है।
जो तुम कांटा बोओगे तो
तो फल फूल कहाँ से पाओगे।
सदा एक चीज़ याद रखना इस जीवन में
जो तुम जी रहे हो
जैसा जी रहे हो।
उससे तुम्हारे आने वाले जीवनकाल में
प्रभाव पड़ने वाला है।
सो सदा सभी को साथ लेकर चलना।
किसी को भी हमसे कोई दुख तकलीफ ना हो।
वरना उसके फल में
हमें भी भविष्य में दुख ही मिलना है।

Written by sushil kumar

facebook पर हुई हमारी दोस्ती Whatsapp पर किया हमने चैट।

facebook पर हुई हमारी दोस्ती

Whatsapp पर किया हमने चैट।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



facebook पर हुई हमारी दोस्ती
Whatsapp पर किया हमने चैट।
लगे रहे हम दिन रात
बिना किसी रोक टोक के
हम थे साथ साथ।

Facebook और whatsapp से
हम पक रहे थे।
करना चाहते थे
एक दूसरे से
हम मुलाकात।

फिर क्या?
मैने सुझाया एक सुझाव
क्यों ना हम करे
Whatsapp और facebook पर
वीडियो चैट।

फिर क्या?
शुरू हुआ
हम दोनों के बीच वीडियो चैट का
दौर शुरू।
घण्टों तक हम बैठे रहते थे
Facebook और whatsapp के
वीडियो चैट पर।

ना खाने की फिक्र
ना सोने की फिक्र।
भूख और प्यास जाने
कहीं खो गया था।
बस whatsapp-Facebook
Facebook-Whatsapp।
बस यहीं पर
हमारी दुनिया सिमटकर रह गई थी।

जो कभी फोन डिस्चार्ज हो जाए
और facebook और whatsapp से
कनेक्शन जो कट जाए।
फिर क्या?
फिर तो दिल और दिमाग
और भी बेचैन हो उठता था।
फोन को चार्जिंग पर लगा
फिर से whatsapp और facebook पर
वीडियो चैट शुरू हो जाता था।
तब जाकर हमदोनो को शुकुन मिलता था।
हमारी दुनिया
हम दो और हमारे दो।
यानी हम दोनों और
Facebook और whatsapp पर
ही सिमट कर रह गई थी।


Written by Sushil kumar

ओहदा


ओहदा

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


ओहदा ऊँचा हो जाने से
तुम्हारे संस्कार नहीं बदल सकते हैं।
ओहदे के साथ जिम्मेदारियां भी आ जाती हैं
पर कुछ वैसे भी लोग हैं समाज में
जो जिम्मेदारियों से बच निकलने में
अपनी अक्लमंदी समझते हैं।

सही नेता वो नहीं
जो नेतृत्व करने के खातिर
और अपनी कुर्सी बचाने के खातिर
अपने अनुगामियों की बलि देने से
पीछे नहीं हटता है।
बल्कि वो है
जो सभी को साथ लेकर चलने में
विश्वास रखता है।

Written by sushil kumar

बहुत करली तुमने मनमानी

बहुत करली तुमने मनमानी

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




बहुत करली तुमने मनमानी
अब बारी मेरी आई है।
जितना सितम ढाने थे
तुमने ढा लिए।
उसे ब्याज सहित लौटाने का वक्त
मेरी आई है।

खून के आँसू मेरे
खूब बहाए तुमने।
जीना दुर्भर कर रख दिया था।
कभी कुछ
तो कभी कुछ
हर दिन नई धमकीयां
तुम्हारी सुन सुन कर
मैं सहम गया था।
पर तुम्हें कहाँ रुकना था।
तुम्हे तो मेरी साँस लेने पर भी
पाबंदी लगानी थी।

और आज मैं आज़ाद हो गया
तुम्हारी सारी चिकचिक से।
पर दिल में एक टिस रह गई थी
तुम्हें सबक सिखाने को।
मैं अब तुम्हारी जिंदगी
बेहाल कर रख दूँगा।
जीते जी जो तुम्हें
नर्क का दर्शन ना करवाया।
मेरा नाम बदल कर रख देना।
पर पछताने का मौका तुम्हें कभी नहीं दूँगा।

Written by sushil kumar

मैं चुप चाप बैठा था

मैं चुप चाप बैठा था

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं चुप चाप बैठा था
कहीं किसी कोने में।
यादों में खंगाल रहा था
किसी अपने चहिते चेहरे को।
तकलीफ़ मुझे जो हो रही थी
मुझे उसकी कोई परवाह नहीं।
पीड़ा उसे न हो
बस रब से यही फरियाद
बार बार दुहराए जा रहा था।

लोग मुझे देखे जा रहे थे
बड़े ही अचंभित से।
किस दुनिया में खोया है
ये कोई बन्दा नहीं
क्या कोई मूर्ति है।
एक बच्चे ने तो आकर
मेरे नाक को स्पर्श किया यूँ।
मानो उसे बहुत भाया था
चाह रहा था उसे खींचने को।
अवाक हो बेसुधी से जागा
जैसे सो रहा था मैं वर्षों से।


Written by sushil kumar

मैं हारकर हारा नहीं


मैं हारकर हारा नहीं

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

मैं हारकर हारा नहीं
तुम जीत कर भी क्या जीत गए।
इतना कत्लेआम कर
तुम कौन सा विश्वविजेता बन गए।
माना आज तुम्हारे नाम से
लोग ख़ौफ़ज़दा हैं।
पर किसी के भी दिल में
तुम्हारे प्रति
सम्मान नज़र नहीं आ रहा है।
हर दिल में घृणा है
तुम्हारे कारनामों को देखकर।
मैं तुम नहीं
जो स्वार्थवश आहुति चढ़ा दे
अपने लोगो की।

Written by sushil kumar


योद्धा

योद्धा

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों कल समर्पित है।


योद्धा बहुत आये और चले गए।
कुछ तो नाम अपना इतिहास में
स्वर्ण अक्षरों से जड़ गए।
तो कुछ गुमनामी के अंधेरे में
कहीं गुम होते चले गएँ।
अब सोचना हमें हैं
गुमनामी में खोना है
या स्वर्ण अक्षरों से जड़ना है।

मैं तो सोच लिया हूँ
अब और ना तुम्हारी सुनुगा।
जो भी हो देख लूँगा
अब और ना ज्यादा सहूँगा।
बहुत सुन लिया है तुम्हारी
अब सुनने की बारी तुम्हारी।
अब मैं बादल बन गरजूँगा
तुम्हारी पतलून हो जाएगी गीली।

Written by sushil kumar




कलयुगी जनक।


कलयुगी जनक।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


ये कैसी विडंबना है
हमारे कलयुगी जनक की।
देख बुरा हाल सतयुगी सीता का
उठाया कदम विदेह ने।
दिया ज्ञान सीता को
कैसे राम को रखे संयम में।
कैसे सास ससुर के झगड़े झंझट में
ना ही फँसे तो
रहे सुकून में।

बहुत सह लिया था सीता ने
अब राम की बारी आई है।
देना होगा अग्नि परीक्षा
जो सीता संग जीवन बितानी है।
राम को जो जाना पड़ा वनवास
सीता तैयार नहीं साथ चलने में।
उल्टा सीता ने फुट डालना शुरू किया
राम को अलग करने को दशरथ-कौशिल्या से।


Written by sushil kumar




मैं तो हार चुका था।

मैं तो हार चुका था।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं तो हार चुका था
ये आखिरी चाल औपचारिकता मात्र थी।
ये हार
केवल एक हार नहीं।
बल्कि कुछ सबक सिखाने वाली थी।
कुछ चाले समझी थी
पर अभी भी
बहुत कुछ समझना बाकि था।
और बहुत कुछ परखना भी बाकि था।

पर जीत की तलब मेरे दिल में
बहुत जोर पकड़ रखी थी।
मंजिल को पाने की ललक में
प्रयासों को मैने और भी तेज कर दी।
भूख प्यास
दिन रात का कुछ भी ख्याल ना रहा।
बस कुछ ध्यान था
तो वो बस मेरे लक्ष्य का।
ऐसी स्थिति जो हो जाए
तो समझ लेना कि
तुम्हारी मंजिल तुम्हें मिलनी वाली है।



Written by sushil kumar


लोग आज बदल गए हैं।

लोग आज बदल गए हैं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


लोग आज बदल गए हैं।
अपनी सफलता को भूल
दूसरे की असफलता पर जश्न मनाने से
कहाँ चूक रहे हैं लोग।
दुसरो के दुख को देख
आनन्द से गद गद हुए जा रहे हैं ये लोग।

वाकई में
लोग आज बदल गए हैं।

अपनी स्त्री की सुंदरता पर
कभी मोहित हो जाने वाला पति।
उसकी सुंदरता का बखान करते
ना थकने वाला पति।
आज चुप है।
क्यों?
क्योंकि उसे आज दुसरो की स्त्री
ज्यादा आकर्षित करने लगी हैं।
वो सात जन्मों का साथ निभाने का
कभी वादा किया था।
एक जन्म में ही ऊबते दिख रहे हैं लोग।

लोग आज बदल गए हैं।

दूसरों की छोटी सी कुटिया को भी देखकर
उसे उसके महल को टक्कर दे रहे हों
ऐसा सोचकर जल भून जाते हैं।
उसे उस कुटिया में रहने वाले लोग
ज्यादा खुश और सन्तुष्ट नज़र आते हैं।
और उसे ये बर्दास्त से बाहर हो जाता है
और उस कुटिया को बर्बाद करने को
आतुर से दिखते हैं लोग।

सच में।
लोग आज बदल गए हैं।

अपने बच्चे की भूल को छिपाने को
लोग आज कत्ल करने में भी
कहाँ हिचकिचा रहे हैं?
खून तो लोग ऐसे बहा रहे हैं।
मानो पानी से भी सस्ती हो चुकी हो आज।

लोग आज बदल गए हैं।

अपना हिस्सा पाने को
बेटा बाप का
भाई भाई का
रक्त से नहाने में संकोच नहीं कर रहा है।
मानवता का निशान
दुनिया से आज मिटता हुआ
आभास हो रहा है।

सही में।
लोग आज सही में बदल गए हैं।


Written by sushil kumar

उठ खड़ा हो।

उठ खड़ा हो।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरे तुम्हारे जेहन में
बहुत हैं ऐसे सवाल?
क्यों उपनाम अम्बानी का हुआ इतना विशाल??
क्यों टाटा परिवार को जानते हैं हम सभी आज??

ये कोई एक दो दिन की नहीं है छोटी बात।
बरसों की तपस्या से मिली है उन्हें प्रसाद।
बहुत फर्क पड़ता है
क्या है तुम्हारी सोच?
अम्बर स्पर्श करना हो
तो धरती से ऊपर तो उठ।

झुंड में जो चलने की आदत है
 तो नही है तेरी औकात।
किनारे खड़े रहकर केवल तू
अपने भाग्य पर कर सन्ताप।

बहुत रो लिया
कर लिया अपने किस्मत पर रोष।
उठ खड़ा हो।
जो पाना है
हिमालय की ऊँची चोटी को।

इतना डरा क्यों है?
तरंगों की वेग तेज देखकर।
मोती मिलेगी
तू गोता मार।
मन में दृढ़ विश्वास
रखकर।

असफलताओं से घबड़ा कर कहीं
मंजिल से भटक ना जाना तुम।
सभी को छोड़ते देख तुम
उनके संग ना निकल जाना तुम।
हर हार से एक नई ऊर्जा
तुम अपने अंदर जगा लो यूँ।
अगले कदम पर मंजिल खड़ी हो
तुम्हारी जीत की तुम्हें बधाई देने को।


Written by sushil kumar

सामना करना सीखो।


सामना करना सीखो।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं स्वयं के सवालों में कुछ ऐसा जा घिरा।
मानो अभिमन्यु कौरवों के चक्रव्यूह में जा फँसा।
हर सवाल मेरे अस्तित्व को था झकझोर रहा।
मेरी परछाई भी मेरा साथ मानो था छोड़ रहा।
पर मैं भी अपने जिद्द पर अडिग खड़ा रहा।
हर चुनौती को मैने सहज स्वीकार किया।
आज जो मैं डरकर कहीं छुप भी गया।
कल मैं स्वयं से नज़र कैसे मिला पाऊँगा??


Written by sushil kumar




माँ का विश्वास।।

माँ का विश्वास।


kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



सारी दुनिया चाहे इधर से उधर हो जाए
चाँद दिन में निकल आए
और सूरज सुबह में डूब जाए।
पर एक इंसान है इस जग में
जो अभी भी एक दृढ़ उम्मीद की लौ  है
मन में जगाए।
कि मेरा लाल!
मेरा बेटा!
एक दिन सफलता की ऊँचाइयों को जरूर छूएगा।
वो कोई और नहीं।
तुम्हारी माँ है।

चाहे लाख जग वाले
उसे ये विश्वास है दिलाए।
तेरा बेटा नालायक है।
किसी काम का नहीं है माँए।
पर उसके आस्था को
कहाँ से कोई हिला पाए।
क्योंकि उसे पता है।
उसका छोरा लाखों में एक है।
वो कोई और नहीं
तुम्हारी माँ है।

तू कोशिश कर कर के
परेशान हुए जाए।
सफलता के किनारे को छूते छूते
छूट जाए।
और तू डगमगाते हुए जो
घर पहुँच जाए।
पर तेरी माँ का
तेरे पर यकीन देख
तेरा हौसला के पंख
फिर से फड़फड़ाए।
और फिर क्या?
तेरे लगन और मेहनत के संग
तेरी माँ के दुआ का मेल हो जाए।
कामयाबी तेरे कदम चूमने को
अधीर हो छटपटाए।

ये कुछ और नहीं।
तेरी माँ का ही जादू है।



Written by sushil kumar

मैं हिन्दू नहीं।

मैं हिन्दू नहीं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं हिन्दू नहीं
ना मैं मुसलमान हूँ।
मैं सिख नहीं
ना मैं क्रिस्चियन हूँ।
मैं लावारिस पड़ा एक हाथ हूँ।
मैं लावारिस पड़ा एक हाथ हूँ।

मैं तो मस्त अपनी धुन में
चला जा रहा था कहीं।
वोट की स्याही भी
कहाँ मिटी थी मेरे नाखून से।
पता नहीं कहाँ से कोई 
गीदड़ों की भीड़ उमड़ पड़ी।
पूछा मेरा नाम
और फिर शेर बनकर 
मुझ पर ही टूट पड़ी।
मैं लाख चिल्लाता रहा 
और गिड़गिड़ाता रहा उन शैतानो से।
मैने क्या गुनाह किया?
ये नाम को मैने चुनके।

पर सुना नहीं किसी ने भी
किसी ने मुझ पर न रहम की।
जिसे जो मिला
उससे वार किया मेरे शरीर पर।
धारदार हथियारों को घुसेड़ दिया
मेरे जिस्म में।
और फिर क्या लगे हमें
लातों से कूटने।
मेरे खून के फव्वारों से
खेला था उन्होंने होलिका दहन।
मेरे अधमरे शरीर को
क्या खूब रौंदा था उन हैवानो ने।
इससे भी जब उनके दिलोदिमाग में 
शुकुन ना आन पड़ा।
एक हाथ को ही काट कर
धड़ से अलग कर 
कहीं दूर उड़ाया।

लोग वहाँ तमाशबीन बन
खड़े हो फ़िल्म देख रहे।
मानो हकीकत की दृश्य देख कर 
उन्हें रोमांच आ रहा हो और बड़ी।

आज का जनतंत्र देख कर
मैं सिर्फ इतना ही केवल पूछ रहा।
क्या इसी दिन देखने को
मोहन ने रचा था 
लोकतंत्र का महान किस्सा।
कुछ दिनों तक न्यूज़ पैनलों में होंगे 
खूब गरमा गरम बहस और जोरदार चर्चा।
कुछ लोग उतर जाएँगे सड़क पर
लेकर हाथ में कैंडल और बैनर पोस्टर।
पर फिर क्या????
फिर से लोग भूल जाएँगे
कुम्भकर्ण की नींद सो जाएँगे।
जब तक फिर से ना घटेगी
हिला देनेवाली कोई नहीं घटना।




Written by sushil kumar


ए दोस्त।

ए दोस्त।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




ए दोस्त
कभी भी किसी से
दिलोजान से प्यार ना करना।
जो प्यार जो करना
तो रब से ये फरियाद जरूर करना।

कि जो ऐसा प्यार
तूने मेरे झोली में जो डाली है।
लख लख शुक्र है तेरा
जो तेरी छवि
मेरे महबूब में नज़र आई है।

बस एक आखिरी दुआ
मेरा कबूल करले मेरे मौला तू।
कभी भी मुझे उससे
जुदा करने की ना सोचना तुम।
वरना वो पल
आखिरी क्षण होगी मेरे जीवन की।
जिस दिन रुख्सत होगी
मेरे दिल से जान मेरी।


Written by sushil kumar

मैं किसी का गुलाम नहीं।

मैं किसी का गुलाम नहीं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



ये गलतफहमी दिल में ना पालना कभी
कि तुम्हारा गुलाम हूँ मैं।
मेरी सोच में क्रांति की ज्वाला है
नहीं डरता हूँ किसी तूफान से मैं।
मेरी ताकत मेरे बाहों में नहीं
मेरी हौसलों में छिपी हुई है।
चाहे लाख जख्म दे दो मेरे जिस्म को
पर हिला नहीं सकोगे कभी मेरे जज्बे को।
मुझे अकेला समझकर हुँकार मत भरना कभी
मैं डरता नहीं तुम्हारे गीदड़ धमकी से।
झुंड में शिकार करने की आदत होगी तुम्हारी
मैं तो अकेला ही चल पड़ता हूँ
बब्बर शेर की आखेट करने के लिए।

Written by sushil kumar

एक छोटा आनन्द गृह।🏠

एक छोटा आनन्द गृह।🏠

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




माँ पापा आपका कर्ज़ मैं
कभी ना उतार पाऊँगा।
आपके निस्वार्थ प्रेम का भाव
मैं ना लगा पाऊँगा।
चाहता था कुछ ऐसा करना
जहाँ आपका साथ मुकम्मल बना रहता सदा।
सुबह होती आपके चरण स्पर्श कर
दिन अपना कामयाब बनाता जाता सदा।
आपकी खुशी देख मैं हर्षित होता
कोई गम आपके समीप ना आने देता सदा।

पर ऐसा हो ना पाया
मेरे कर्म ने आपसे दूर कराया।
नौकरी करने के खातिर मैं
अपना घर छोड़,परदेस में कदम जमाया।
मेरे दिल तो एक क्षण चाहा था
नहीं जाऊँ आपको छोड़ के।
माँ बाबूजी अगर आप 
एक बार जो बोल दिए होते,
नहीं जाता कहीं ये आपका साया।
पर आप भी बहुत चालाक निकले
यहाँ भी बाजी मार ली आपने।
अपने दिल पर पत्थर रख कर
नहीं छलकने दिया आंसू अपने नयन से।
अपने दिल के टुकड़े को 
किया खुद से आपने यूँ अलग।
रो रोकर बेहाल हुए तब
जब आपको हुई मेरी फिकर।
मुझे आपकी याद ना आए
ऐसा दिन कोई नहीं आया है।
हर सुबह आपकी खैरियत की रब से
दिल से दुआ फरमाया है।

मेरे जीवन को सरस करने को
आपने शादी मेरी रचवा डाली।
मेरा ख्याल हमेशा रखने को
एक अर्धांगिनी मेरी बना डाली।
आप चाहते थे,कि मैं आगे बढ़ूँ
करूँ मैं आपका नाम रोशन।
आपके संस्कार का करिश्मा था ये
जो आज पहुँचा हूँ इतने ऊपर।
आज मेरे पास सबकुछ है माँ बाबूजी
पर आपका साथ नहीं है मेरे जीवन में।
बीबी है जो जान छिड़कती है मुझपर
पर कान उमेठने वाले नहीं है आपलोग।
आजाओ भी ना साथ में  आपलोग
छोड़कर दुनियादारी सारी।
पापा,माँ,मैं और मेरी अर्धांगिनी
मिलकर बसाएँगे हम 
एक छोटा आनन्द गृह।


Written by sushil kumar

वतना मेरे वतना वे।

वतना मेरे वतना वे

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


वतना मेरे वतना वे
तेरा इश्क़ मेरे सर चढ़ चढ़कर बोल रहा है।
एक जन्म क्या है
मेरे वतना
मैं लाखो जन्म तेरे उल्फ़त में कुर्बान कर दूँ।
ये कैसा पागलपन है?
ये कैसा दीवानापन है?
मुझे नहीं पता।
अपने लहू से तिलक करने को
तेरे तिरंगे में लिपट जाने को
तेरी मिट्टी में समा जाने को
तेरे हवाओं में घुल जाने को
पुनः तेरे मिट्टी रूपी गोद में जन्म लेकर
तेरे चरणों में पुनः बलिदान होने को
मैं आतुर हूँ माँ।
मैं आतुर हूँ।

जब एक माँ को छोड़
दूसरे माँ के पास गाँव जाता हूँ।
दिल तड़प उठता है
उस बिछड़न के सोच मात्र से।
मैं काँप उठता हूँ।
कि माँ तेरी रक्षा में
तेरा ये सपूत नहीं रहेगा
सरहद पर।
कहीं मेरा सपना व्यर्थ ना चला जाए।
कहीं मैं वो अवसर खो ना दूँ।
कहीं मेरे अरमान धूल में ना मिल जाए।
मैं तेरी रक्षा करते करते
अपने खून के कतरे कतरे से
तेरा स्नान कराना चाहता हूँ माँ।
दुश्मनो के दिलो में अपनी वीरता का
खौफ पैदा कर जाना चाहता हूँ माँ।
कि उनके कदम थर थर्रा जाए
जो उनके नापाक कदम
कभी हमारी धरती पर पड़े
जो माँ।
वन्दे मातरम।।
जय हिंद।।
जय भारत।।

Written by sushil kumar


३७० धारा से आज़ादी।सम्पूर्ण भारत की पूर्ण आज़ादी।

३७० धारा से आज़ादी।सम्पूर्ण भारत की पूर्ण आज़ादी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

370


क्या बताएँ !
आज एक बार फिर से
देश की जय जयकार करने को
दिल कर रहा है।

क्या बताएँ !
आज एक बार फिर से
देश के लिए अभिमान करने को
दिल कर रहा है।

जय हिंद तो बस एक अभिव्यक्ति है
पर अनगिनत सलामी
और अनगिनत नमन
एक सैलाब बन
आज भारत माँ के चरण को अनगिनत बार स्पर्श करने
दिल मचल रहा है।

ऐसा लग रहा है
कि आज इस मिट्टी के गुलाल में रंग कर
एक हो जाऊँ।
उस मिट्टी में समा जाऊँ।

आज लाखों शहीदों की कुर्बानी की
जीत का दिन है।
उनकी फतह के जश्न का दिन है।
आज भारत माँ का
अपने सपूतो पर गर्व करने का दिन है।

भले देश आजाद हो गया था हमारा
उन्नीस सौ सैंतालीस में।
पर भारत माँ के शीश पर पर ३७० धारा लगा
एक घिनौनी राजनीति रचाई थी
कुछ गद्दारों ने।

कितने सपूतो की कुर्बानियों की वजह से
आज ये दिन हम देख पाए हैं।
हमारे वीर मोदी और शाह ने
ये करिश्माई कारनामा कर दिखाए हैं।
यही अच्छे दिन देखने को इन्हें हम
सत्ता में लेकर आए हैं।

बहुत जगह कुछ गद्दारो ने
अपने फन भी उठाए हैं।
पर कोई बात नहीं
आज भोंक लो
जितना भोंकना है।
आने वाले दिनो में
तुम्हारी तेरहवी की तैयारी है।


Written by sushil kumar

आप क्या हो????

आप क्या हो???

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


तुम मुझे मारते रहो
मुझे कुछ परवाह नहीं।
मुझे तबाह करते रहो
मेरे अस्तित्व को नेस्तनाबूद कर दो
पर मैं उफ़ तक नहीं करूँगा।
मैं सहता रहूँगा।
मैं देखना चाहूँगा तुम्हारी हद
कि किस हद तक तुम मुझे बर्बाद कर सकते हो।
जब तुम थक जाओगे
तब तुम खुद ही रुक जाओगे।
पर मैं तुमपर पलटवार कभी नहीं करने वाला।
क्योंकि मैं गांधी हूँ।😡

तुम्हारे हर हमले का जवाब दूँगा
मेरा अगर लहू का एक बूंद गिरा
मैं तुम्हें लहू लुहान कर दूँगा।
तुम्हें बर्बाद करके रख दूँगा।
कि अगली बार
कोई हमपर हमले करने की सोच से भी डर जाए।
क्योंकि मैं सुभाषचंद्र बोस हुँ।😳

मैं तो सुभाष हूँ।
मैं गांधी नहीं
जिसकी अहिंसा वाली सोच के चलते
हम इतने कायर ना हो जाएँ
कि हम अपने अस्तित्व को खंगालने को मजबूर हो जाएँ।
ईंट का जवाब पत्थर से देना हमें पसन्द है।
और हम चुप रहकर सहने वालो में से नहीं।
बल्कि अपनी गर्जना से संसार को हिलाने वालो में से हैं।
मैं सुभाष हूँ, मैं चन्द्रशेखर आज़ाद हूँ, मैं बिस्मिल हूँ।
पर गांधी कभी नहीं।

आप क्या हो???

Written by sushil kumar

राष्ट्रपिता या ?????

राष्ट्रपिता या ?????


kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



वो क्रांति की ज्वाला जगा गया था
पर कुछ देशद्रोहियों ने उसे बुझा डाला।
अपनी राजगद्दी बचाने के खातिर
फिर कुछ मीर जाफर ने खेल रचा डाला।

बना डाला उसे राष्ट्रपिता
जो मुसलमानों के खैरियत की सदा सोचता रहा।
बना डाला पाकिस्तान
और हमारे मातृभूमि के विभाजन का एक मात्र कारण बना।
गणेश विद्यार्थी को मारने वाले मुसलमानों को
कभी अहिंसा का पाठ पढ़ाया था नहीं उसने।
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत को
रोकने के लिए हाथ कभी बढ़ाया नहीं था उसने।
स्वयं को निष्पक्ष, अहिंसावादी मानने वाला
क्या उसने कभी हिंदुओ के दर्द को समझा था कभी।
लाखों हिंदुओं का कत्लेआम हुआ था पाकिस्तान में
माँ बहिनों की इज़्ज़त सरेआम नीलाम हुआ था कभी।
पर शिकन उसके चेहरे पर एक तनिक भी नहीं दिखी थी ।
क्योंकि शायद ये अहिंसा का खुलेआम प्रचार जो हुआ था।
अहिंसा का पाठ केवल हिंदुओ के लिए था
मुसलमान तो सदा अहिंसावादी ही रहे थे।
राष्ट्रपिता शब्द का अपमान हुआ था उसदिन
जिसदिन ये उपनाम उसके नाम के आगे लगा था।


Written by sushil kumar

सुबह की नींद।।

सुबह की नींद।।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


रात को भले जल्दी सो जाऊँ
पर सुबह की नींद गजब की प्रिय होती है।
चाह कर भी आँखे नही खोल पाता हूँ।
आलस मानो मुझे अपनी बाहों में जकड़
उठने का मौका ही नही देना चाहती है।
और मैं नींद के आगोश में
सारी दुनियादारी भूल
मीठे मीठे सपनो का आनन्द ले रहा हूँ।


Written by sushil kumar

मैं कुछ बोलना चाह रहा हूँ।




मैं कुछ बोलना चाह रहा हूँ।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं कुछ बोलना चाह रहा हूँ।
पर क्या तुम सुनना पसंद करोगे???
अगर नहीं।
तो कोई बात नहीं।
पर अगर सुनना चाहते हो तो
क्यों नहीं तुम स्वयं को
एक पल के लिए
खुद से अलग कर लेते हो।

जो मैं बोल रहा हूँ
हो सकता है
तुम्हें भाय नहीं।
पर जो भाय तो
क्यों नहीं उस पथ पर
अग्रसर हो चले हम तुम।

समय कम है
पर बोलना बहुत अधिक है।
आओ मेरे तरफ
तुम अपने
अहम को त्याग करके
मेरे पास।
आज भले तुम इस शरीर में
मनुष्य जीवन का सुख प्राप्त कर रहे हो।
अपनो की खुशी देख
तुम खुश हो रहे हो।
प्रियजनों के दुख देख
तुम दुखी हो रहे हो।

पर एक बात मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ
दिल पर हाथ रख कर कहना।
सच कहना!
जिन परिजनों के संग
तुम्हारी डोर बंधी हुई है।
तुम्हारे मरने के बाद
क्या तुम उन्हें याद आओगे।
माना वो रोएँगे
एक दिन नही
दस दिनों तक रोएँगे।
पर उसके बाद वो भी तुम्हें भूल
अपनी दुनिया सँवारने में जुट जाएँगे।

ऐसी स्थिति में
तुम्हें क्या करना चाहिए।
जब पता है
तुम्हारी पहचान उनसे
तुम्हारे शरीर के बदौलत ही है।
और शरीर के नष्ट होते ही
सारे लोग तुम्हें भूल जाएँगे।
फिर क्यों नहीं उस सम्बन्ध को मजबूत करे हम
जो जन्मों जन्मों से हमारा साथ निभाए जा रहे हैं।

माना ये शरीर नष्ट हो जाएगा
पर ये आत्मा शाश्वत है।
जो शरीर बदलता ही रहेगा।
आज मनुष्य है
तो कल घोड़ा है
और फिर पता नहीं क्या क्या?
और ऐसे ही
चौरासी लाख योनियों में भटकता रहेगा।

पर आत्मा का परमात्मा से मिलन
केवल और केवल मनुष्य योनि में सम्भव है।
तो क्यों नहीं अपने इस शरीर को
भगवन की खोज में लगा डालें।
उस मालिक की खोज में लगा डाले
जो इस चौरासी लाख योनियों से हमे
सदा सदा के लिए छुटकारा दिला
अपने चरणों में जगह दे दे।

 Written by sushil kumar


हम अभी हैं।

हम अभी हैं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


वो हमारा प्रिय है
उसे और न परेशान करे।
खुश रहे हम सदा
उसकी भी खुशहाली का सदा ध्यान रखें।
दिन भर की थकान ले
घर पर जब वो वापस आए।
प्यार से उससे बर्ताव करे
उसके काम काज के तनाव का निदान करे।

हम अभी हैं
अगले क्षण हो ना हो।
जीवन की डोर कहीं हमसे छूट ना जाए।
और अगले क्षण हमारे प्रियजन
अंधेरे में जीने को बेबस ना हो पाएँ।

क्योंकि
हर कोई जी रहा है
तनाव को पी रहा है।
जूझ रही है जिंदगी हमारी
लड़ रही है हर साँस लेने को।
खुशी की तलाश में
भटक रहे हैं इधर उधर।
पर हर जगह तनाव ही तनाव
चैन की साँस कोई ले तो ले कहाँ??

इसलिए
हमारी जिम्मेवारी
और भी बढ़ जाती है यहाँ।
कहीं हमसे हमारे प्रियजन कोई
तनाव में  हमसे दूर ना हो जाए।
सो खुश रहता हूँ मैं सदा
और प्रियजनों को भी खुश रखने की चेष्टा
करता हूँ यहाँ।

Written by sushil kumar

हार जीत तो लगी रहती है।

हार जीत तो लगी रहती है।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


लोगों ने मुझे लताड़ा
बात बात पर फटकारा।
पर मैं चुप रहा।

कभी किसी ने गाली दी
तो कभी किसी ने हाथ उठाया।
पर मैं चुप रहा।

सहने की आदत
बचपन से जो लगी थी।
शराब पीकर बाप
मुझे रोज पीटता था।
माँ अक्सर मुझे समझाया करती थी
जो तू सह लिया
तो समझ तू ये जीवन का जंग जीत लिया।

जीवन है दुख और क्लेशो की छाया
अगर बड़ा कुछ पाना है तो
कर्म पर ध्यान दो मेरे भ्राता।

हार जीत तो लगी रहती है।

Written by sushil kumar

धोनी :-एक आखिरी उम्मीद।।

धोनी :-एक आखिरी उम्मीद।।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं ही एक आखिरी उम्मीद था
मैं ही उन सबका पीर था।
मैने भी कसम खाई थी उसदिन
नहीं झुकने दूँगा सर अपने वतन का।
कोशिश तो मैने पुरजोर किया था
दुश्मनो के खेमे को झकझोर दिया था।
जीत अपने झोली में गिरने ही वाली थी
पर तब जो घटा वो सब हमारे हाथ में नहीं था।
अनहोनी को होनी करने फिर चल पड़ा था मैं धोनी
पर ऐसा लगा किसी ने मुँह से मेरे निवाला छीन लिया था।
मैं हैरान था,परेशान था।
था मैं खुद पर गुस्सा।
शीशे की भाँति टूट चुका था
बिखरा पड़ा था मेरा हिस्सा।
एक एक पग बढ़ाना भारी पड़ रहा था
आँखों से अश्रुओं को थामना मुश्किल पड़ रहा था।
ऐसा आभास मुझे हो रहा था
क्यों नहीं निगल जाती है
मुझे ये वसुंधरा।

Written by sushil kumar

मैं टूट जाता हूँ भीतर से

मैं टूट जाता हूँ भीतर से

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठको को समर्पित है।



मैं टूट जाता हूँ भीतर से
जब अपने अतीत में
झाँकने को चला जाता हूँ कभी।
क्या सोचा रखा था मैने
और क्या हो रहा है
आज मेरे संग में।

जिस माँ ने ये संस्कार दिया था
मुझे बचपन से।
किसी का दिल ना दुखे
ऐसे कर्म करो
अपने जीवन में।

आज कोई उनके कर्म पर सवाल उठाए जा रहा है
भरे महफ़िल में।
मैं कैसे विश्वास कर लूँ
क्योंकि मुझे पता है
मेरे माँ का हृदय सच्चा है।

हर कथनी के होते हैं सदा दो अर्थ
जो सकारात्मक होते हैं
वो सदा आगे बढ़ते रहते हैं
बिना अतीत के रोक टोक के।

Written by sushil kumar

मैं इतना अभागा क्यों हूँ

मैं इतना अभागा क्यों हूँ

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं इतना अभागा क्यों हूँ
मेरे ईश्वर।
जिन्हें चाहा
उन्होंने ही किए हैं
मेरे दो हिस्से।

एक छोटा सा परिवार था
बस एक छोटी सी तो आशा रखी थी
मेरे दिल में।
मिलकर रहेंगे
एक दूसरे के गम को सहेंगे।

पर पता नहीं
तुझे मेरे खुशियों से जलन क्यों हो गई।
जिंदा रहते
तूने मुझे नर्क में क्यों धकेल दिया
मेरे परमेश्वर।

Written by sushil kumar

डर के आगे जीत है।

डर के आगे जीत है।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं डरा सहमा सा यहाँ बैठा हूँ
कि कहीं कोई अनहोनी ना घट जाए
जिससे मैं खौफजदा हूँ।

कब किस दिशा से
कोई तूफान ना आ जाए।
कहीं धरती ना फ़टे
और हमें निगल जाए।

बहुत सह लिया हूँ
और बहुत सह रहा हूँ।
पर चाह कर भी
उसे अपने वश ना कर पा रहा हूँ।

जितना दम मैं लगा रहा हूँ
वो उतना ही उछल रहा है।
रह रह कर वो मुझपर
चोट किए जा रहा है।

कितना सहूँगा
ये मुझे नही पता है।
पर अब बहुत हो गया है
सब को समय पर छोड़ा है।

समय से बड़ा ताकतवर
आज तक कोई ना हुआ है।
फिर डर की क्या औकात
जो वो समय से
कभी भिड़ा है।

समय से दोस्ती कर
मैने अपने कर्म पर ध्यान दिया है।
बहुत दिनों के बाद
आज मैने चैन की नींद सोया है।


Written by sushil kumar

किसी अपने के साथ अगर जो हो,तो सारा तनाव,सारा दुख कोई भी झेल जाएगा।

किसी अपने के साथ अगर जो हो,तो सारा तनाव,सारा दुख कोई भी झेल जाएगा।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




ऐसा क्यों अभास हो रहा है
कि मैं खुद को खोता सा जा रहा हूँ।
जिम्मेदारियों के बोझ तले मेरा भविष्य
मानो सिकुड़ता सा जा रहा है।
बहुत दबाव झेला हूँ मैं
और आज भी झेलता सा जा रहा हूँ।
दुख के पहाड़ को हृदय में छुपाए
चेहरे पर तनाव ना आने दे रहा हूँ।
किसको सुनाऊँ मैं अपनी व्यथा
और किसके दुख को मैं बढ़ाऊँ।
सभी पहले से ही परेशान दिख रहे हैं
और किसे अपना बोझ दे,चैन की सांस पाऊँ।
मेरा बोझ मुझे ही ढोना होगा
किसी और के पास मैं क्या जाऊँ।
कल भी झेला था
आज भी झेल लूँगा
जो किसी अपने का प्यार और ढाढस पाऊँ।

Written by sushil kumar


मानवता एक अनमोल रत्न है।इसे खोना यानी ईश्वर को खोना है।

मानवता एक अनमोल रत्न है।इसे खोना यानी ईश्वर को खोना है।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठको को समर्पित है।

मेरी औकात से मुझे कोई वाकिफ करवा सकता नहीं।
मेरे जीने की हाल से मेरी हैसियत का पता कोई लगा सकता नही।
भले आज मेरे पास खाने को अच्छे खाने नहीं
और पहनने को महंगे कपड़े नहीं है।
पर कोई भी मेरे जज्बे और सोच पर
ताला लगा सकता नहीं।
मैने आज शुरू की है चलना अपने ज़मीन से
तो किसी को मेरी तवज्जो नहीं।
कल जब मैं छू लूँगा आसमान की बुलंदियों को
तो अनजानों को भी मेरी अच्छे सेहत को लेकर होगी फिक्र मेरी।
ऐसा नहीं कि आज मैं अपने फ़टे चिते हालात देख बहुत खुश नहीं हूँ।
पर चोट तब लगती है जब किसी जरूरतमंद को नहीं मिलती है कोई अहमियत कहीं।
इंसान ने यहाँ इंसान को तौला है उसकी हैसियत देखकर।
क्या मौला तुम्हें कभी बख्शेगा जन्नत
तुम्हारी ये हरकत देखकर।
इंसानियत की चोला से बड़ा आज कोई चोला नहीं
सभी की भलाई हो जिससे, वैसे ही कदम बढ़ाने को है हमें।

Written by sushil kumar

सत्य की खोज में।

सत्य की खोज में।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरी हैसियत नहीं
कि सभी के दिलों तक
अपनी बातों को पहुँचा पाऊँ।
जो किसी भी एक व्यक्ति के
हृदय की गहराई को जो छू पाऊँ।
तो मैं इस संसार में आने का
अपने मकसद को पूर्ण पाऊँ।

आना जाना इस मिथ्या संसार में
सभी का लगा रहता है।
कुछ बहुत कम मेहनत कर
बहुत कुछ पा लेते हैं।
तो कुछ के ऐड़ी घिस जाते है
फिर भी मंजिल तक पहुँच नहीं पाते हैं।

ऐसा अगर है
फिर तो कोई मेहनत ही करना छोड़ देगा।
पर अगर असली सत्य की खोज में जाओगे
फिर बात कुछ और ही निकलेगी।
पिछले जन्म में अच्छे कर्म और
कड़ी मेहनत जिसने की है।
जो मंजिल के पहुँचते पहुँचते
देह अपना वो त्याग गया था।
इस जन्म में थोड़ी मेहनत में ही
अपना मंजिल वो हासिल कर लेगा।

इसलिए किसी ज्ञानी ने
बहुत सत्य ही कहा है।
बन्दे फल की चिंता छोड़
बस तू अपना कर्म किए जा।

Written by sushil kumar

कटु सत्य।

कटु सत्य।

Kavitadilse.top द्वारा आलस भी पाठको को समर्पित है।


मैं जन्म लिया जब
अपनी माँ के कोख से।
कोई नाम लिखवाकर ना आया था संग में।
कह दिया जो प्यार से मेरी माँ ने
वही नाम पड़ गया मेरा जीवन भर।
असल में देखा जाए तो 
हम सब हैं मानव।
नाम से कुछ फर्क नहीं पड़ता है।
अपनी आयु साथ लेकर आए हैं हम सभी।
बस अपना किरदार निभाना बाकी है।
कोई हमारा मित्र बनेगा
कोई शत्रु बनेगा यहाँ हमारा।
सभी अपने किरदार में रहेंगे
मालिक ही हमारा भाग्यविधाता है।
उसके आदर्शों पर जो हम चलेंगे।
ज्यादा सुकून से कट जाएगी जिंदगी।
वरना रोना धोना लगा ही रहेगा।
चाहे जितने जन्म लेलो मानव की।

Written by sushil kumar

कार्यप्रणाली से हैरान परेशान हूँ।

कार्यप्रणाली से हैरान परेशान हूँ।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरी भी पत्नी है
मैं भी उससे प्यार करता हूँ।
पर शायद मेरी पैरवी उतनी जबरदस्त नहीं होगी
इसलिए मुझे मेरी जीवनसंगिनी से इतनी दूर फेंक दिया गया है।
या शायद मेरी वजह उतनी दमदार नहीं होगी
वरना अनुकंपा पे भी मेरी बात सुनी नहीं जा रही है।

हर कोई अपनी संस्था से प्यार बहुत करता है
पर कोई सन्तुष्ट रहता है
कोई असन्तुष्ट दिखता है।
आज जिस बेहाली से मैं गुज़र रहा हूँ
शायद बर्दास्त करने की सारी सीमाओं को लाँघ चुका हूँ।

पता नहीं मन में एक पल के लिए भी शांति नहीं रहती है।
और भाग भाग कर मेरी अर्धांगिनी के पास चला जाता है।
पता नहीं मेरी अर्धांगिनी कैसे जीवन वहाँ व्यतीत करती होगी।
कितना दर्द उसे सहना पड़ रहा होगा।
कितनी तकलीफ में होगी।
वगैरह वगैरह।

अब और सहा नहीं जा रहा है मेरे पल।
बस कर
बस भी कर
मत ले परीक्षा मेरी और।

Written by sushil kumar

मैं हारा नहीं,हराया गया था।

मैं हारा नहीं,हराया गया था।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं हारा नहीं
हराया गया था।
मैं जिंदा ही कब्र में
दफनाया गया था।
नही थी अब मुझे
जीने की इच्छा।
मृत सय्या से उठने की
अब नही थी मेरी ईप्सा।
बेगानो से नहीं
हमे अपनो से थी शिकवा।
जो बिच महफ़िल में
हमें पराया बनाए हुए थे।
मैं हारा नहीं
हराया गया था।
Written by sushil kumar

मैं अकेला रह गया हूँ।

मैं अकेला रह गया हूँ।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं अकेला रह गया हूँ
बिल्कुल अकेला।
ना ही किसी को मेरी फिक्र है
ना ही किसी को मेरी खबर।
बस हर कोई अपनी ही दुनिया में
मशगूल हो गया है।
किसी को भी इतनी फुरसत नहीं
कि कोई मेरी खैरियत तक ले सके।
यहाँ तक कि मेरे अपने भी
मुझे अपनी दायरे से हटा दिए हैं।

कभी कभी तो खुद को मिटा देने का
मन करता है।
आखिर साँस लें भी तो
किसके लिए।
मेरी दुनिया जो है
मुझसे ही शुरू और
मुझपर ही
खत्म भी तो हो जाती है।
जिंदगी अगर जिए भी तो
किसके लिए।

बहुत अकेला हो गया हूँ
कोई बचालो
मुझे आकर।

Written by sushil kumar

मेहनत कभी बेकार नही जाती है।

मेहनत कभी बेकार नही जाती है।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


भले तुम मुझे करो पराजित
भले चारो खानों करो चित मुझे।
मेरी ताकत मेरी सोच में है
उसे कैसे तुम करोगे परिवर्तित।

मैंने कभी भी हार नही मानी
मन में रखी है एक अटल विश्वास।
आज के दिन तुम्हारी मेहनत रंग लाई है
कल के दिन चमकेगा मेरा अकाश।

Written by sushil kumar

जानलेवा इश्क़।

जानलेवा इश्क़।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


मैं चाहता हूँ
तेरे पास आना
तेरे करीब आकर
अपना प्यार जताना।
पर अक्सर गलत पाता हूँ खुद को
चाहकर भी प्यार ना जता पाता हूँ तुझको।

क्योंकि जब भी नजदीक तेरे आने की
कोशिश करता हूँ
लहू लुहान सा हो जाता हूँ।
तेरे वचन प्रचंड अंगारों की भाँति
मुझे जलाने को
आतुर सी दिखती है हमेशा।
चाहती है मुझे भस्म करने को
मेरे अस्तित्व को मिटता देखना
शायद मकसद है उसका।

Written by sushil kumar


माँ बाप के साथ में ही खुशी है।

माँ बाप के साथ में ही खुशी है।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं नहीं जानता
मेरे आने वाले पल में क्या लिखा है??
मैं नहीं जानता
कितने खुशी के पल हैं
और कितने दुख के हैं।
पर हाँ 
मैं आज में जीने वाला हूँ
मुझे आज की फिक्र है।
पर ये दिल कहाँ मानता है
मुझे लिए जाता है
मेरे मात पिता के पास।
जो अभी भी बैठे हैं
दो हज़ार की.मि.दूर 
अपने घर में।
क्या उनके बुढ़ापे में
मैं सहारा उनका बन पाऊँगा??

बड़ा सोचा करता था
माँ बाप को साथ रखूँगा।
जैसा भी जॉब करूँगा
पर उन्हें अपने पास रखूँगा।
पर देखो!
आज जॉब है,
पत्नी भी है
पर माँ बाप हमसे 
दो हज़ार की.मि. दूर बैठे हुए हैं।
आखिर क्या फायदा इतना सोच कर
जब वह पूरा ना हो पाएगा।
पर जो उनके बुढ़ापे में
उनका सहारा ना बन पाया।
तो मैं जिंदगी भर खुद के नज़र में
सदा के लिए गिर जाऊँगा।
मेरी जीने का क्या फ़ायदा
जब अपने जन्मदाता की 
सेवा नहीं कर पाऊँगा।
ऐसा जीवन श्राप सा लगेगा
जो मेरी मृत्यु से ही धुल पाएगा।

मैं आऊँगा
जरूर आऊँगा।
आपलोगों को साथ लेने को।
रखूँगा साथ मैं खुद के
मैं तभी खुश रह पाऊँगा
रूह से।
आपके प्यार और आपके संस्कार
सदा मुझे आपकी ओर खींच लाती है।
जो आप साथ हमारे रहोगे
तो जी भर के प्यार 
आप पर लुटाऊंगा।

बड़े शौक से आपने मेरी ब्याह रचाई थी
लाखों में एक लड़की को 
मेरे लिए चुन कर लाई थी।
बहु नहीं
बेटी से बढ़कर उससे
आपने प्यार दुलार किया था।
पर उसे शायद 
आपका प्यार ना सुहाया था
उसे खुश रखने को
आपने हमसे मामा के बीमार होने का 
ढोंग भी रचाया था।

मैं भी कितना पागल था
इतनई सी बात समझ ना पाया था।
जो आज मामा से बात ना होती
तो ये राज खुल ना पाया था।
मुझे अपनी स्त्री पर
बड़ा गुस्सा तब आया था।
पर माँ की कसम थी
जो मेरे गुस्से को रोक 
आज पाया था।

मैं आज बहुत ही ज्यादा 
खुद से नाराज़ हुआ जा रहा था।
क्यों नही मैं अपने माँ बाप के
व्यथा को समझ ना पाया था।
मैंने उन्हें फोन किया
अपनी तबीयत खराब होने की बात बताई उनसे।
चले आइए आप फ्लाइट से
मुझे आपकी बहुत याद आ रही
रह रह के।
फ्लाइट की टिकट भेजी उन्हें
गया लाने एयरपोर्ट से उन्हें।
जब देखा उन्होंने मुझे एयरपोर्ट पर
खुश होकर लग गए गले हमसे
सब कुछ भूलकर।
मेरी पत्नी को भी आशीर्वाद दिया
और फिर पूछा मेरा हाल मुझसे।
मैने भी बता दी उनसे
मामा से बात हो गई है हमसे।

Written by sushil kumar



क्योंकि मैं माँ हूँ ना।सब समझती हूँ।।

क्योंकि मैं माँ हूँ ना।सब समझती हूँ।।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



तुम यूँ क्यूँ गुम होकर बैठी हो
हमसे अलग होकर।
कोई अगर गलती हुई है
कोई बात अगर बुरी लगी है
तो माफ करदो मुझे
अपनी माँ समझ करके।

माना!
माना मैं तुम्हारी अपनी माँ तो नहीं हूँ
पर तुम्हें अपनी बेटी से कम
कभी नहीं माना है
ये पता है रब को।
मैं नहीं चाहती हूँ
कभी तुम्हें मुझसे कोई तकलीफ हो
कोई दुख हो।
आखिर तुम्हारी खुशी में ही तो
मेरे बेटे की खुशी की परवान चढ़ती है।

मैं ही शायद बहुत बड़ी अभागन हूँ
जो चाह कर भी
सास और बहू के रिश्ते को समझ ना पाई।
चली थी बहु को बेटी बनाने
पर मेरी करनी ही तुम्हें सदा
दुख पहुँचाती रही।
मैं चाहती थी तुम्हें मदद करना
तुम्हारे साथ रहना।
तुम्हें प्यार करना और
कुछ तुमसे प्यार पाना।
पर तुम्हें शायद मेरा साथ ही
पसन्द नहीं आ पाया।

मैं अपने बेटे से कहूँगी
कोई बहाना बनाऊँगी
तेरे मामा की तबीयत ठीक नहीं है
मुझे गाँव छोड़ आने की हिदायत दूँगी।
और फिर कभी तुम्हारी खुशियों के बिच
मैं कभी नहीं आऊँगी।

क्योंकि मैं माँ हूँ ना।
सब समझती हूँ।।
Maa

Written by sushil kumar

माँ मेरी।।

माँ मेरी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Maa meri


मैं रहूँ कहीं भी इस जहाँ में
रहूँगा तो तेरा ही अक्स बनकर।
मेरे खुद का क्या वजूद था
इस जहाँ में?
मेरे को सँवारा था तुमने ही
सुसंस्कारों से।
तेरे दिए संस्कार के वर्चस्व पर
अगर कुछ पाऊँगा भी तो
तेरे ही चरणों में वो अर्पित होगा।
भले कामयाबी की बुलन्दी को भी छू लूँगा
इस जहाँ में।
भले महफ़िल में मेरे नाम की चर्चा रहेगी
हर जुबान पे।
पर आखिर में जीत किसी की हुई
तो वो तेरी है
माँ मेरी।

Written by sushil kumar

कभी चले थे साथ साथ

कभी चले थे साथ साथ।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।




कभी चले थे साथ साथ
आज राह बदल गए हैं।
मंजिल बदल गई है
अपना पड़ाव बदल गया है।

कुछ लम्हें वो मीठे पलों के
जो उनके साथ में बिताए थे।
कुछ गुदगुदाने वाले
तो कुछ रुलाने वाले
मैं अपने संग ले आया हूँ।
उन खट्टे मीठे एहसास के क्षणों को
अपने कांख में दबा लाया हूँ।

जो याद आएगी कभी उनकी
कभी अश्रु की धारा जो नहीं रुकेगी।
खोल लूँगा अपनी यादों के पटों को
कुछ देर तो उनकी आघोष में जी लूँगा।
कुछ देर ही सही
पर अपने जीवन के कुछ पल
तो जी लूँगा।

जी लूँगा!
जी लूँगा!
अकेला जी लूँगा!

Written by sushil kumar

रब का बन्दा।

रब का बन्दा।


Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


जीवन के सफर में
लोग आते हैं।
कुछ देर साथ निभाते हैं
और निकल जाते हैं
अपनी अपनी सफर के
नए पड़ाव पर।

ये आना जाना तो लगा रहता है
जीवन के अंतिम छोर तक।
पर जो दूसरों के जीवन को
सतरंगी खुशियों से रंग दिया हो।
जिसकी अच्छाई ने दूसरों के दिलों में
घर कर गया हो।

जो जाते जाते भी दुनिया से
साथ वालो को गुदगुदा गया हो।
वही है रब का सच्चा बन्दा
जिसे लेने खुद मौला यहाँ आया हो।

Written by sushil kumar

स्वार्थ

स्वार्थ

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरे आवाज़ को दबाने वाले मिले बहुत
पर कोई ना मिला जो दे सके मेरा साथ यहाँ।
बहुत घुटन सी रहती है मेरे जेहन में
मैने बहुतों की मदद की थी उनके बुरे वक्त में।
जिनके साथ खड़ा रहता था हर मुसीबत में
नहीं कहीं दिख रहे हैं आज वो मेरे नज़र में।
आज हर कोई बस अपनी ही बनाने में लगा है
जिसे देखो उसे अपनो के मलबे से
अपने आशियाने को सजाने में लगा है।
नहीं है फिकर आज किसी को किसी की यहाँ पर
बेटा भी आज वसीयत देख
बाप को कन्धे पर अर्थी देने को
आगे बढ़ रहा है।

Written by sushil kumar

रिश्तों की महफिले क्या सजी

रिश्तों की महफिले क्या सजी

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठको को समर्पित है।


रिश्तों की महफिले क्या सजी
हमारे मन में गुदगुदी सी हो उठी।
कुछ लफ्ज़ यूँही अपनी बेड़ियाँ तोड़
रिश्तों के बीच में और भी
गरमाहट पैदा करने को निकल पड़ी।
तो कुछ मस्त ठंडी पवन सा झोंका बन
हमारे दिल को ठंडक पहुँचा
एक सुकून पैदा करने लगी।
रिश्ते सदा ऐसे ही होते हैं
भले कितनी भी परेशानी हो
कितनी भी तकलीफ हो
पर वे सदा आपके मन से
आपके दिल से
सारी तकलीफ को छू मंतर कर
आपके अन्दर एक नई स्फूर्ति पैदा करने वाली
और एक नया जान डाल देने वाली होती है।

इसलिए रिश्तों को सदा संजोकर रखे आपलोग।

Written by sushil kumar

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

तेरी किस्मत तेरे हाथ में है।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मैं चला जा रहा था अकेले,झुंझलाते हुए खुद से।
कभी खुद को समझाते हुए,तो कभी खुद को कोसते हुए।
कुछ कदम जो उठाए थे हमने
सटीक निशाने पर नहीं पड़े थे।
जिंदगी यही तो है
कभी उतार है तो
कभी चढ़ाव है।

अब बीते हुए समय में
कुछ ना पा पाने की झुँझलाहट से
वर्तमान को बर्बाद कर देना
कहाँ तक सही है।
भले पिछली कोशिश नाकामयाब रही हो
पर प्रयास तो भरपूर करी थी हमने।
और आने वाले समय में भी
मैं पूरा दम खम लगाकर देखूँगा
कि कब तक मेरी किस्मत
मुझसे मुँह फेरकर रह सकेगी।

हर परिणाम को जो सहज स्वीकार करना सीख लेता है
वही जीवन में उच्चतम से उच्चतम स्थान पर पहुँच पाता है।
क्योंकि उसे पता है कि
अगली बार वो अपने लक्ष्य को पा ही लेगा।
और अपने समय को बदल लेगा।
और वैसे ही लोग हर परिस्थिति में खुश रह पाते हैं।

Written by sushil kumar


राम हमारे संस्कार में हैं।

राम हमारे संस्कार में हैं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Ram rajya
राम हमारे संस्कार में हैं।
राम हमारे विचार में हैं।
राम हमारे रग रग में हैं।
राम विश्व के कण कण में हैं।
फिर कैसे कोई राम का नाम लेने से
हमें कोई वंचित रख सकता है।
Ram rajya

आज जब सारा विश्व
राम के नाम का जाप कर रहा है।
राम के पथ पर चल रहा है।
कोई कैसे मात्र राजनीतिक फायदा के लिए
जय श्री राम उद्घोष करने पर
भारत में चमड़ी उधेड़ने की बात कर रहीं हैं।
मानो हम पाकिस्तान पहुँच गए हों।

Rajniti

लेकिन बहुत हो गया
बहुत सह लिया
राजनीति का
ये गंदा खेल।
अब करेंगे कलयुगी रावण का
फिरसे लंका दहन।
क्योंकि आ गया है
रामराज्य का नीव रखने का
उचित समय।
Ram rajya


स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।

स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।

kavitdilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



स्वयं को यूँ ना हल्का समझ।
अपने अंदर तू आत्मविश्वास रख।
तेरे पास अदम्य शक्ति का है भंडार।
योग कर अपने कुंडली को जगा।
अपने कर्मों से सबका दिल जीत।
कुछ ऐसा कर्म कर कि
सब हो तेरे मीत।

लोग आते हैं
चले जाते हैं।
पर उनमें से
कोई कोई ही याद आते हैं।
सब का हो जिसमे भला।
जिससे किसी का दिल ना हो दुखा।
और जब कोई याद करे
तेरे मरने के बाद।
चेहरे पर दे जाए उसे
छोटी सी मुस्कान।
क्यों ना ऐसा कर्म करें हम इस जहां।
लोगों के दिलों से ना मिटे कभी
इस संसार से हटने के बाद।


Written by sushil kabira



मैं अभी थका नहीं।

मैं अभी थका नहीं।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Manzil

मैं अभी थका नहीं।
रूह भी हार माना नहीं।।
माना मंज़िल अभी कहीं बहुत दूर है।
पर हमारा हौसला भी भरपूर है।।
कदम भले लड़खड़ा रहे हो।
साथ वाले कहीं पीछे छूट रहे हों।।
पर मैं अपने लक्ष्य पर डटा रहा।
सदा अडिग रहा वहीं।।
Manzil

धूप क्या!
बारिश क्या!
तूफान ने भी कड़ी चुनौती दी।।
पर कहाँ हटा मैं अभिमन्यु।
मेरी मंज़िल जो मेरे करीब थी।।
लहू लुहान हो चुका था।
शरीर भी छलनी छलनी हो गएँ थे।।
हिम्मत भी साथ छोड़ रही थी।
पर जज़्बा वही सलामत थी।।
Manzil

आँखों में चमक उठी।
जो मंजिल समीप मुझे दिखी।
क्या दर्द?
क्या जख्म?
सारे दुख तकलीफ फिर कहीं खो गएँ।।
मंजिल को पाने के प्रयास में।
मैं अपने ईश्वर को कभी भूला नहीं।।
जिसकी मदद के बिना
कर पाते फतह ये किला नहीं।
Manzil

Written by sushil kumar


जिस देश की धरती पर जन्म लिया।

जिस देश की धरती पर जन्म लिया।

Kavitadilse.top  द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

India
India


जिस देश की धरती पर जन्म लिया।
जिस देश की मिट्टी में लोट-पोट खेला।।
जहाँ पहला पग उठा चलना सीखा।
जहाँ दौड़ लगा जीतना सीखा।।
जहाँ की संस्कृति से संस्कार को जीना सीखा।
जहाँ की नदियों और गायों को भी माँ कहना सीखा।।
जहाँ प्रेम से रिश्तों को सींचा।
जहाँ यार की यारी पर मरना सीखा।।
जहाँ जाति धर्म की राजनीति को नकारना सीखा।
जहाँ भारतीय होने पर गर्वान्वित होना सीखा।।
जहाँ देश की गरिमा के खातिर मरना सीखा।
जहाँ देश के दुश्मनों को चुन चुन कर कूटना सीखा।।
ऐसी पावन धरती को
आज दिल से सलाम हम करते हैं।
जहाँ हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई
स्वयं को भारतीय कहलाने पर अभिमान करते हैं।।
India

जिस देश की गरिमा के खातिर
हमारे वीर जवानों ने अपने लहू से रंग खेला।
क्या हिन्दू
क्या मुस्लिम
क्या सिख
क्या ईसाई
जो खून गिरा था धरती पर
वो एक हिंदुस्तानी का था मेरे भाई।।
बड़ा जोश भर आता था दिल में उस वक़्त।
रग रग में दौड़ जाती थी आक्रोश की तरंग।।
जब कोई वीर हमारा शहीद हो आता था।
लिपट तिरंगे में अपना सदन।।
और स्वयं ही एक हुँकार उठ उठती थी
सभी की दिल से।
जय हिंद कहकर
एक आखिरी सलाम कर जाती थी
उस महावीर योद्धा को।।
जो आज भले ही नहीं हैं हमारे संग में।
पर उनकी सोच और उनका जज़्बा
आज भी हमें राष्ट्रवाद से ओतप्रोत कर जाता है।।
और हमें सही कदम उठाने को
प्रेरित कर जाता है।
और ऐसे ही फिर से मोदी सरकार को बहुमत देकर
हम लाए हैं।।
क्योंकि राष्ट्रप्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं है।
राष्ट्र है,तभी हम हैं!आप हैं!
India

जय हिंद।।
जय भारत।।


आँखे बंद थी।

आँखे बंद थी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Army



आँखे बंद थी
पर चेहरे पर सुकून साफ झलक रहा था।
मेरा भाई जैसा दोस्त
लिपट तिरंगे में
बेखौफ अपने माँ के आँचल में
सो रहा था।
मानो जैसे मुझे वो
चिढ़ा रहा हो
खुद पर बहुत
इतरा रहा हो।
देख जीत ली भाई
बाज़ी फिर से मैंने ना
ऐसा कह कर मुझे
नीचा दिखा रहा हो।

याद है मुझे उसकी
पिछली मुलाकात।
जब घर पर आया था मिलने को
मेरा जिगरी यार।
बहुत ही खुश था वह
फ़ौज में भर्ती पाकर।
खूब सुनाई वीर सैनिकों की गथाएं
जो उसने सुन रखी थी
वहाँ पर।
कहते कहते सभी की कहानियां
आक्रोषित हो उठा था वह।
दुश्मनों से अपना लोहा मनवाने को
उसने जिद्द जो अपनी
ठान रखी थी।
Army

आखिरकार उस हठी ने
अपना हठ पूरा कर ही गया।
और कूद गया दुश्मनों के बीच में
दाँत खट्टा करने को उनके।
सुना है
उसने अपनो की जान बचाने को
अभिमन्यु बन कूद पड़ा था
बीच मैदान में।
गोलियों से जिस्म छलनी होती रही
पर कहाँ थमा था वह।
शेर सा दहाड़ता हुआ
सारे दुश्मनों पर
वह भारी पड़ रहा था
अकेला ही।
आखिरी साँस तक उसने
अपना हथियार नहीं गिराया था।
दुश्मनों को अकेला ही
वह खदेड़ कर भगाया था।
खूब लड़ा मर्दाना वह तो
भारत माँ का लल्ला था।
Army

आज हर हिंदुस्तानी
उस नादान परिंदे के जिद्द के आगे नतमस्तक है।
और सभी उसकी बहादुरी और कुर्बानी पर
दिल से सलाम कर रहे हैं।

जय हिंद।
जय भारत।













दिल से मोदी।

दिल से मोदी।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Modi

दिल से मोदी।
मन से मोदी।
सोच से मोदी।
कर्म से मोदी।
विचार से मोदी।
स्वाभिमान से मोदी।
जहाँ देखा
वहाँ बस मोदी ही मोदी।

आज देश का हर कण कण
उसके गुणगान किए बिना
रुक नहीं पा रहा है।
भारत माँ भी
ऐसे वीर को जन्म देकर
खुद पर गौरवान्वित हो
हर्षा रही हैं।

बच्चे बूढ़े और जवान
मोदी की सोच के धारा में समाहित हो
देशहित में
राष्ट्रवाद के महासागर में
मिलती जा रही हैं।
आज हर एक की सोच
राष्ट्रवाद के पथ से हो गुज़रती है।
देश के लिए प्रेम
और देश के लिए कुछ कर गुज़रने का जज़्बा
आज हर दिल में धड़कती है।


भारत माता की जय।
वन्दे मातरम।
जय हिंद।।
जय भारत।।
Modi

Written by sushil kumar

आप जो कभी हमसे रूठ जाती हो

आप जो कभी हमसे रूठ जाती हो

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Angry birds


आप जो कभी हमसे रूठ जाती हो
दिल हमारा टूट सा जाता है
शीशे की भाँति चूर चूर सा हो जाता है।
Angry birds

अश्रु!
अश्रु तो मानो सैलाब बन
आँखों से बह पड़ते हैं।
ऐसा आभास होता है
मानो कि किसी ने मेरे दिल को ही
मेरे शरीर से अलग थलग कर दिया हो।
Angry birds

ऐसा आभास होता है
जीतेजी नरक के आग में
किसी ने धकेल दिया हो।
 ना कुछ होशोहवास रहता है
हमारा दिलोदिमाग शिथिल सा पड़ जाता है।
Angry birds

बस लगता है
आपकी यादों में
आपके ख्यालों में खोया रहूँ।
जो नींद जो आ जाती है
ख्वाबों में आपसे रूबरू हो जाता हूँ।
आपसे माफी माँगता हूँ।
और आप हमे माफ़ भी कर देती हो।
Angry birds


खुशी खुशी नींद जब खुलती है
हम टूट से जाते हैं
जब आपको अपने समीप नहीं पाते हैं।
आपको तलाशती हुई
हमारी बेचैन नज़रें
हमें आपके करीब पहुँचा देती है।
हम आपसे रोकर माफी माँगने लगते है।
और आप हमें गले लगा
हमे माफ भी कर देती हैं।
तब जाकर हमारे दिल को शुकुन आता है।
Angry birds

Written by sushil kumar

मैं फिर आऊँगा।

मैं फिर आऊँगा।

kavitadilse.top  द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Love


मैं आया था तुमसे मिलने को
मिलकर फिर से बिछुड़ने को।
ताकि फिर से हम मिल सके
वो प्यार भरे क्षण को पुनः
जी सके।

कुछ तुम्हे गुदगुदाने को
तुम्हें छेड़ जाने को
तेरे दबे मुस्कान को चेहरे पर लाने को।
तेरे जेहन से दुख भरे बादल को मिटाने को।
मैं फिर आऊँगा।
मैं फिर आऊँगा।


तेरे शख्स में
मेरे अक्स को मिलाने को।
तेरे आगोश में
खुद को भुलाने को।
तेरे संग में प्यार भरे पल
जी जाने को।
मैं फिर आऊँगा।
मैं फिर आऊँगा।
मैं फिर आऊँगा।
Love


Written by sushil kumar

अपना किरदार निभाओ।

अपना किरदार निभाओ।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


जीवन नहीं
जीवन का किरदार बड़ा होना चाहिए।
जिससे सब का भला हो
वैसे कर्म का आगाज़ बड़ा होना चाहिए।

कीड़े मकौडों की भाँति सभी जी रहे हैं यहाँ।
खाने की पूर्ति को
ना जाने कहाँ कहाँ भटक रहे यहाँ।
जहाँ खाना सुविधापूर्वक मिल जाए।
सारा जीवन उनका
बस वहीं कट गया।

ऐसे कीड़ों जैसे जीना भी क्या है जीना।
मानव योनी पाकर
उसे व्यर्थ में क्यों है खोना।
जीवन छोटा है या बड़ा
ये उम्र की लंबाई से
नहीं नापा जा सकता।
पर जो छोटे जीवन में ही
कोई बड़ा काम कर जाए।
तो उसका जीवन स्वयं ही स्वयं
बड़ा हो जाया करता है।

याद तो होगा ११अगस्त १९०८ का वो दिन
जब हँसते हँसते चढ़ गया था
कोई बालक किसी शूली पर।
उसकी उम्र कुछ  ज्यादा नहीं
बस उन्नीस को छूने को थी।
पर उस नादान परिंदे ने जिद्द पकड़ रखी थी
खुले आसमान में पँख फैला उड़ने की।
भारत की आज़ादी के खातिर
जिसने इतनी बड़ी आहुति दे दी।
आज सारा देश उन्हें नमन कर रहा है
वो कोई और नहीं
हमारे बोस खुदीराम थे।

जाते जाते एक चिंगारी जो
इस क्रांतिकारी ने
दिल में सभी के
जगा गया।
आज़ादी की लौ प्रचंड रूप ले अग्नि का
ज्वाला बन
सभी के हृदय में भभक रहा।
बारूद बन विस्फोट हुआ जो देश में
काँप उठा था दुश्मनो का सीना।
दुम दबा भागे थे अंग्रेज गीदड़ सा
मानो जाग गया हो बब्बर शेर भारत का।

आओ हम सब मिलकर एक प्रण लें आज से
अपने जीवन को अब बड़ा बनाएँगे
उम्र भले
लम्बी रहे ना रहे
पर जब तक जीएँगे
मानवता का उत्थान कराएँगे
Role


Written by sushil kumar

बहुत हो गया भाई

बहुत हो गया भाई

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठको को समर्पित है।

बहुत हो गया भाई!
जिसे देखो दबाने को लगा है।
हर किसी को बस
अपना गुस्सा हमपर निकालने को लगा है।
कमज़ोर हूँ,
इसका मतलब ये तो नहीं
जिसे देखो अपना तैश हम पर थोपे जा रहा है।
मैं भी इंसान हूँ
मुझे भी गुस्सा होने का हक़ है
मैं किस पर गुस्सा होऊं।
पर क्या कोई है नहीं इस दुनिया में
मेरे गुस्से को झेलने को।
ऐसे में तो
मै अंदर के तनाव से टूटता सा चला जा रहा हूँ।
शीशे सा चकनाचूर अंदर ही अंदर होता सा जा रहा हूँ।
कोई बचाले मुझे इस तनाव से
वरना मैं कहीं डूबता सा जा रहा हूँ।
और कितनी देर झेल पाऊँगा
मुझे नहीं है पता।
अगर ऐसे ही चलता रहा तो
अस्तित्व अपना
खोता सा जा रहा हूँ।


Written by sushil kumar

हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है।

हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है।

kavitadilse. top द्वारा आप सभी दोस्तों को समर्पित है।


मैं बवंडर रोक खड़ा था मन में
भावों के सैलाब लिए।
जिसे मैंने चाहा था
छोड़ गई थी मुझे
किसी ओर के लिए।
दिल टूटा
सब छूटा।
चाहा जग छोड़ दूँ उसके लिए।
अब जी के भी क्या फायदा
जब वो ही नहीं है
जिसके संग सोचा था
जीने के लिए।

तभी किसी ने रखा हाथ मेरे कन्धे पर
लगा कोई अपना
उसके स्पर्श से।
जो मुड़ा तो पाया अपने दोस्त को
जिसने साथ दिया था
मेरे हर मंजिल
हर मोड़ पर।
मैं रोक ना पाया अपने भावों के बवंडर को
और रखा अपना सर उसके कन्धे पर।
बह निकले थे
मेरे अश्रु बांध तोड़कर
ठहराव मिली थी
मेरे मन को तब जाकर।

Written by sushil kumar


संस्कार-दुनिया का सबसे अनमोल रतन है।

संस्कार-दुनिया का सबसे अनमोल रतन है।

kavitadilse.top द्वारा मेरे व आपके,हम सभी के माँ पापा को समर्पित है।

Maa baap

पैसे की किल्लत भले ही थी
पर माँ बाबू जी आपने कभी भी
मेरे सपनों के पतंग को
आसमान की ऊंचाइयों को छूने से
कभी नहीं रोका।

गिरा मैं
चोट आपको लगी।
आँसू मेरे बहे
दिल आपका रोया।
माँ आपका मेरे सर पर
तेल से चम्पी करना।
नहीं भूला हूँ मैं।
और पापा आपका वो ठंड के मौसम में
मेरे छाती पर तेल से मालिश करना
ताकि मुझे सर्दी ना लगे।
नहीं भुला हूँ मैं।
आज भी सर मेरा भारी भारी रहता है
पर कोई तेल से चम्पी करने वाला नही है माँ।
आज मुझे ठंड में सर्दी लग ही जाती है
क्योंकि कोई तेल से छाती मालिश करने वाला नही है पापा।
मुझे आप पापा मम्मी बहुत याद आते हैं।
आप क्यों नही हमारे साथ आकर रहते हैं।
क्या आपको मैं याद नही आता हूँ??


Maa baap

माना!
माना मैंने की
महंगे खिलौने मुझे नहीं मिले
ना ही आपलोगों ने मुझे भारत दर्शन कराया।
पर फिर भी मुझे आज तक कभी अफसोस नही हुआ।
और मैं आपका सदा सदा के लिए आभारी रहूँगा
क्योंकि संस्कार के जो अनमोल रत्न आपने मुझे दिए
वो अत्यधिक अनमोल थे।
जो जीवन भर मेरा साथ निभाएँगे।
इनके सामने सारे खिलौने और भारत दर्शन व्यर्थ से थे।

आज मैं जो भी हूँ
जैसा भी हूँ
ये आपके संस्कार के कारण ही हूँ।
और मुझे आप दोनों पर सदा सदा के लिए अभिमान है
और सदा अभिमान रहेगा।
मैं कहीं भी रहूँ
कोई भी दिन ऐसा नहीं
जिस दिन आपके सेहत के लिए
मालिक से दुआ और प्रार्थना नहीं की होगी।

मुझे ऐसे जीवन के बारे मे सोच कर भी डर लगता है
जहाँ आपका साथ ना हो।
मैं जब भी जन्म लूँ
मेरा बस एक ही प्रार्थना है मालिक जी आपसे
मुझे मेरे पापा मम्मी ही मुझे मिले
मेरे माँ बाप के रूप में सदा।

Written by sushil kumar

आज आप नाराज़ हो हमसे🙄

आज आप नाराज़ हो हमसे

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Dil

आज आप नाराज़ हो हमसे
ये हक है आपका।
मैं मानता हूँ
कि कोई गलती हुई होगी हमसे।
शायद आपके दिल को
बड़ी ठेस लगी होगी।

पर एक बात हम भी कह देते हैं आपसे
आपके बर्ताव से दिल हमारा
टूट सा गया है।
इसलिए आगे कभी मेरे करीब
मत आना।
क्योंकि मैं रहूँ ना रहूँ
तुम्हारे आँसू पोंछने को उस लम्हा।

Written by sushil kumar

मैं डरा सहमा सा

मैं डरा सहमा सा

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Love

Love


मैं डरा सहमा सा
आया था तेरे पास में।
मन में लेकर बवंडर भावों का
कर रहा था मेरे दिल को विचलित।
किसी जिगरी दोस्त को खोने का सदमा था
जो मेरे दिल का बहुत बड़ा रहनुमा था।
पहली बार किसी करीबी को
मृत्यु के गोद में सोते देखा था।
तेरे बिन जीवन की सोच में
दिल मेरा व्यथा में रोया था।
चाहता था मन हल्का करने को
तेरे कन्धे पर सर रख कर
फूटफूटकर रोने को।
मैं अंदर ही अंदर टूटता सा चला जा रहा था।
शीशे की भाँती चकनाचूर होता सा जा रहा था।
वो पल को महसूस कर ही
मैं काँप सा जा रहा था।
मेरे अंदर एक डर बैठा सा जा रहा था ।
क्या बयान करूँ
मेरी हालत कैसी थी नाजुक।
पर जो तूने मुझे
अपने गले से लगाया था
मैं रो पड़ा भाव भिवोर हो
भभक भभक कर।
मेरी हालत देख
जो तूने मुझसे रोने का कारण पूछा था।
मैं सिसक सिसक कर बोल पड़ा
मैं तेरे बिन जीने के बारे में कभी नहीं सोचा था।




I love you.

Written by sushil kumar

मुझे खेद है

मुझे खेद है

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Rastrawad

मुझे खेद है
आज भी कुछ भारतीय
जातिवाद और धर्मवाद पर वोट देते हैं।
उस मन्दबुद्धि और उसके पूर्वजों के द्वारा
रचाए सारी ढकोसले हैं।
हिंदुस्तान के टुकड़े नहीं होते
अगर राज करने की चाह
इनके दिल में ना होती।
साले अंग्रेजों ने धर्मवाद का जहर घोल
हिन्दुस्तानियो को हिन्दुस्तानियो से लड़वाया था।
और इन जैसे ठेकेदारों की मदद ले
देश का बंटवारा करवाया था।

हम गुलामों को फिर से
इन गद्दारों ने
धर्मवाद और जातिवाद के जंजीरो में
कैद करवाया है।
अंग्रेज चले गए
पर  अपनी सोच छोड़ गए।
हमारे देश को अभिशापित सदा के लिए कर गए।

अगर देश को आगे ले जाना है
इन जंजीरो को तोड़
हमारी सोच को आज़ाद कराना होगा।
जातिवाद और धर्मवाद के ढकोसलों को
अपने जेहन से मिटाना होगा।
राष्ट्रवाद के ज्वाले को फिर से
सारे देशवासियों के दिल में जगाना होगा।
फिर हम सभी सही मायने में
पूर्ण स्वतंत्र कहलाएँगे।
अपने भारत को फिर सही मायने में
उसे बुलन्दियों तक पहुँचाएँगे।

अगर कोई आपसे धर्म और जाति पूछो
गर्व से हुँकारो
हम भारतीय हैं।
Indian

जय हिंद।
जय भारत।

Written by sushil kumar

कुछ याद है भाइयो और बहनों

कुछ याद है भाइयो और बहनों

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।


Modi

कुछ याद है भाइयो और बहनों
वो पुराने दिन कांग्रेस के।
देश में घुसपैठ जारी था।
पत्थरबाजी सेना पर कायम थी।
आतंकवादी हमला भी चालू था।
पर सरकार मौन बन बैठी थी
बस उनकी निंदा क्रिया जारी थी।
Modi



हम भी थक गए थे
उनकी निंदा सुनते सुनते।
पर वे कहाँ थके थे
निंदा करते करते।

सरकार बदली
समय बदला।
चूड़ियां निकाल
भारत ने अपना चरित्र बदला।
अब ईंट का जवाब पत्थर से देते
अपने शहीद भाइयों का बदला
हम उनके घर घुस कर लेते।

बहुत हो गया निंदा क्रिया
अब जवाब देने का वक़्त आ गया है।
हमारे जवान का लहू बहा जो
खून की नदियां बहा देंगे हम।

आज हमारे देश का सम्मान बढ़ा है
रूस,इजराइल,जापान व अन्य
साथ खड़ा है।
आज घर घर बिजली पहुँची है
अंधकार का राक्षस भाग खड़ा हुआ है।
आज गाँव को शहर से जोड़ने को
रोड और हाईवे पर काम हुआ है।
माँ बहनों को कोयले और लकड़ी के धुएं से
आज उन्हें निजात मिला है।
काले धन और बिचौलियों पर
आज जबरदस्त नकेल कसी है।
किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना दे
उनमे एक नई उम्मीद की किरण जगाई है।
आयकर के स्लैब में बदलाव कर
मध्यम वर्गो की रीढ़ की हड्डी मजबूत की है।
आज हर भारतीय संतुष्ट है
क्योंकि अपने देश की बागडोर सही कर में है।

फिर भी कुछ सज्जन बोलते हैं
हम मोदी को फिर से क्यों लाए भारत में।
शायद उन्हें घोटालो का दौर याद नहीं है।
या फिर इनकी कमीशन खोरी पर रोक लग गई है।
वरना सच्चा देशभक्त आज परेशान नहीं
बल्कि खुशहाल है।
और मोदी को दुबारा लाने का प्रण
आज हर देशभक्त ने दिल से लिया है।
Modi

जय हिंद।।
जय भारत।।


Written by sushil kumar



कुछ तो शर्म करो

कुछ तो शर्म करो

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Vote

Vote

कुछ तो शर्म करो
अपने कर्मों पर जेहन करो।
बहुत सुन लिया बाहरी लोगों की बातों को
अब अपनी आत्मा की सुन
फिर तय करो।

लोग तो लालच देंगे तुम्हें
अपनी ओर खीचेंगे तुम्हें।
अपने ज़मीर को पक्का कर
उनके इरादों पर थप्पड़ जड़।

जिस देश में तुम रहते हो
उससे गद्दारी तू मत निभा।
कुछ भ्रस्टाचारी नेताओं की गलती की सज़ा
अपने देश की आज़ादी की कीमत से ना चुका।

स्वयंहित से बड़ा राष्ट्रहित है
राष्ट्रवाद से बड़ा कोई धर्म नही।
लोकतंत्र का त्योहार मनाने को
आओ हम तुम चले
मतदान करने को।

Written by sushil kumar

निस्वार्थ मन

निस्वार्थ मन।

Kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।



मेरे चरित्र के शब्दकोष में
कुछ शब्दों से कभी भेंट ना हो पाई है।
आज तक समझ नहीं पाया
कुकर्म करने की
इंसान को नौबत क्यों आई है।
ईश्वर के दिए गए अनमोल जीवन में
मैने सदा उनकी मेहर और कृपा पाई।
जितना भी दिया भगवन ने
मैने सदा उसमे ही संतुष्टी पाई।

बेशर्त और  निस्वार्थ प्रेम मेरे नस नस में
आज लहू बन बहा है।
अपने क्या परायो की भी सेवा कर
कभी उम्मीद कुछ दिल में ना जगाई है।

हर लम्हा ईश्वर से बस एक ही फरियाद
हमने की है।
दुख क्लेश का नामोनिशान मिटे जग से
खुशिओं की बारिश में भींग सब हर्षित हो।

आमीन।

Written by sushil kumar

लोकतंत्र का त्योहार।

लोकतंत्र का त्योहार।

kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है।

Vote


मन में सैलाब उमड़ पड़ता है
जब किसी देशद्रोही की जयजयकार सुनता हूँ
दिल में क्रोध की ज्वाला धधक उठती है
जब आज अपनी जमीर बेच
लोग देशद्रोहियों के बचाव करते नज़र आते हैं।
आँखे भाव भिवोर हो
अपनी अश्रु रोक नहीं पाते हैं
जब अपने देश में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर
केवल एक ही धर्म के लोगों को न्याय मिल पाता है।
कहने को हम इक्कीसवी सदी में कदम रख चुके हैं
पर सोच
सोच तो हमारी अभी भी वही कचड़े वाली ही रह गई है।
आज भले ही लोगों में क्रोध है या विश्वास है अपनी सरकार के लिए।
पर जब मतदान का दिन आता है
सारी राष्ट्रवाद धरी की धरी रह जाती है।
और लोकतंत्र के त्योहार को
लोग सो कर या सिनेमा देख कर बिताते हैं।
और देश की बागडोर को गलत हाथ मे थमा देते हैं।
ऐसे ढकोसले राष्ट्रवादियों से मुझे सख्त घृणा आती है
जो केवल लोक प्रसिद्धि पाने को राष्ट्रवाद के बुलबुले बन प्रकाश में आते हैं।
अगर सच्चे राष्ट्रवादी हो तो उठो
और लोकतंत्र के त्योहार में
अपने मतदान का प्रयोग कर
देश के बागडोर को
एक सच्चे राष्ट्रवादी नेता के हाथ में सौंपो।
Vote

जय हिंद।।
जय भारत।।

तुम लिखो कुछ ऐसा

तुम लिखो कुछ ऐसा kavitadilse.top द्वारा आप सभी पाठकों को समर्पित है। तुम लिखो कुछ ऐसा जिससे शांत सरोवर की शिथिल लहरों में एक उफान ...